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टाईम्स ग्रुप के ऑल इण्डिया फर्टिलिटी एण्ड आईवीएफ रेंकिंग सर्वे में इन्दिरा आईवीएफ पहले स्थान पर

भारत में बांझपन की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है । समय पर समस्या का पता नहीं चलने के कारण निःसंतानता का उपचार नहीं मिल पाता है। इन्दिरा आईवीएफ रांची सेंटर की आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. पूजा रानी बताती हैं कि  देश में निःसंतानता 10 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत तक पहुंच गयी है और उपचार केन्द्र दूरी पर स्थित होने के कारण दम्पती  इसका लाभ नहीं ले पाते हैं। निःसंतानता जैसी बड़ी समस्या और इसके उपचार के  प्रति देश भर में जागरूकता लाने का काम शुरू किया इन्दिरा आईवीएफ ने । अपनी सफलता दर, अनुभवी टीम और अन्य कई अन्तरराष्ट्रीय मापदण्डों के अनुरूप सुविधाएं मुहैया करवाने के कारण इन्दिरा आईवीएफ ग्रुप टाईम्स ऑफ इन्डिया द्वारा करवाये गये सर्वे में देशभर में अग्रणी रहा।

भारत में संचालित आईवीएफ सेंटर्स को लेकर टाईम्स ग्रुप की ओर से हेल्थ केयर पर राष्ट्रव्यापी सर्वे करवाया गया, जिसमें इन्दिरा आईवीएफ ग्रुप के सेंटर्स ने विभिन्न श्रेणियों में अपनी वरीयता दर्ज करवायी है। सर्वे आईवीएफ केन्द्रों में सफलता दर, सुविधाओं, कार्यकुशलता और स्टॉफ का व्यवहार आदि पहलुओं को ध्यान में रखकर किया गया ।

विभिन्न श्रेणियों में मिली वरीयता – 

ऑल इण्डिया फर्टिलिटी एण्ड आईवीएफ रेंकिंग सर्वे में सिंगल स्पेशलिटी हॉस्पीटल एंड क्लिनिक श्रेणी नोर्थ जोन में इन्दिरा आईवीएफ हॉस्पीटल प्रा. लि. उदयपुर को  पहला स्थान मिला है। इन्दिरा आईवीएफ ग्रुप के चैयरमेन डॉ.अजय मुर्डिया कहते हैं कि आईवीएफ सेंटर के चयन में दम्पती को विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। दम्पती संतान सुख से वंचित होने के कारण वैसे ही तनाव में रहते हैं ऐसे में गलत सेंटर का चुनाव में उन्हें परेशानी में डाल सकता है। निःसंतान दम्पती लेटेस्ट तकनीकों और अनुभवी चिकित्सकों की टीम के साथ अधिकतम सफलता दर वाले सेंटर में ही आईवीएफ करवाएं।

ऑल इण्डिया फर्टिलिटी एण्ड आईवीएफ रेंकिंग सर्वे में सिंगल स्पेशलिटी हॉस्पीटल एंड क्लिनिक श्रेणी दिल्ली-एनसीआर में पहला स्थान तथा नोर्थ जोन में इन्दिरा आईवीएफ हॉस्पीटल प्रा. लि. दिल्ली ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है, दिल्ली सेंटर के आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. अरविन्द वेद का कहना है कि निःसंतानता के जितने भी केस सामने आते हैं उनमें सभी में अलग-अलग समस्याएं होती हैं इसलिए दम्पती की जांचे करने के बाद उपचार प्रारम्भ करना चाहिए ताकि सफलता मिलने की संभावनाएं अधिक रहें।

आईवीएफ रेंकिंग सर्वे में पूणे में इन्दिरा आईवीएफ को पहला स्थान मिला है। वेस्ट जोन में अहमदाबाद सेंटर को छठा स्थान, पूणे को आठवाँ स्थान, अहमदाबाद में चौथा स्थान, कोलकाता में इन्दिरा आईवीएफ सेंटर को नौवा स्थान प्राप्त हुआ है। पूणे सेंटर के आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. अमोल लुण्कड का कहना है कि आईवीएफ में नवीन तकनीकों ने सफलता दर को काफी बढ़ा दिया है और जिन दम्पतियों के पहले असामान्य संतान हुई हैं वे भी आईवीएफ तकनीक से स्वस्थ संतान की प्राप्ति कर सकते हैं।

सर्वे में लखनऊ में इन्दिरा आईवीएफ के लखनऊ सेंटर को पहला स्थान मिला है। सेंटर के आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. पवन का कहना है कि चूंकि उत्तरप्रदेश जनसंख्या में देश में सबसे उपर है ऐसे में यहां निःसंतान दम्पतियों की संख्या भी अधिक है। दम्पतियों की काउन्सलिंग कर उनकी समस्या समझना और पुरानी रिपोर्ट्स देखना ईलाज शुरू करने से पहले महत्वपूर्ण घटक है। आजकल दौड़भाग भरी आधुनिक जीवन शैली निःसंतानता का बढ़ावा दे रही है।

इन्दिरा आईवीएफ के देश भर में 53 अत्याधुनिक सेंटर संचालित हैं जिसमें 150 से अधिक अनुभवी चिकित्सक, 100 से अधिक भ्रूण वैज्ञानिक, 2000 से अधिक कार्यकुशल स्टॉफ अपनी सेवाएं दे रहा है।  निःसंतानता भारत छोड़ो अभियान आरम्भ कर निःसंतान दम्पतियों को निःशुल्क निःसंतानता परामर्श शिविरों का आयोजन कर जागरूक किया और उन्हें संतान प्राप्ति की ओर अग्रसर किया । निःसंतानता और इसके उपचार में क्षेत्र में इन्दिरा आईवीएफ ने क्रान्ति का कार्य किया है देश में सबसे ज्यादा जागरूकता शिविरों का आयोजन भी इन्दिरा आईवीएफ की ओर से ही किया गया है।

क्या होती है निःसंतानता – इन्दिरा आईवीएफ पटना सेंटर की आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. अनूजा सिंह कहती हैं कि एक साल तक बिना किसी गर्भनिरोधक के इस्तेमाल से दम्पती संतान प्राप्ति की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल रही है यह निःसंतानता के लक्षण है। बांझपन का कारण पति-पत्नी दोनों में से कोई भी हो सकता है। काफी प्रयासों के बाद भी कंसिव नहीं होने की स्थिति में सामान्य उपचार नहीं अपना कर फर्टिलिटी एक्सपर्ट को दिखाना चाहिए। दम्पती की जांचो के बाद आईवीएफ ईलाज शुरू किया जा सकता है।

आईवीएफ किन परिस्थितियों में लाभकारी – इन्दिरा आईवीएफ जयपुर सेंटर की डॉ.तनु बत्रा बताती हैं कि महिला की ट्यूब ब्लॉक हो, माहवारी बंद हो गयी हो या अनियमित हो, पीसीओडी, पहले टीबी की बीमारी रही हो, बच्चेदानी में विकार, अंडाशय में समस्या, अधिक उम्र, एक बार संतान होने या गर्भधारण के बाद दूसरी बार गर्भधारण नहीं होना, बार-बार गर्भपात, पहले असामान्य संतान आदि समस्याआेंं में आईवीएफ तकनीक संतान प्राप्ति का लाभकारी माध्यम बन रही है।

महिलाओं की विभिन्न समस्याओं के साथ पुरूषों में कम शुक्राणु, निल शुक्राणु, कम गतिशील, बनावट में विकार, मृत शुक्राणुओं जैसी बांझपन की समस्याओं में आईवीएफ तकनीक फायदेमंद है।

 

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