इस बीमारी से निपटना एक अप्रिय अनुभव हो सकता है लेकिन संतुलित प्रबंधन से आप गर्भधारण कर सकते हैं। इस बारे में कई महिलाओं ने अपने अनुभव इंदिरा आईवीएफ की मेडिकल टीम से साझा किए और बताया कि कैसे उन्होंने इस तनावपूर्ण यात्रा को पूरा कर अपना परिवार बनाया भारत में, महिलाओं में पॉलीसिस्टिक अंडाशय सिंड्रोम (पीसीओएस) और पॉलीसिस्टिक अंडाशय रोग (पीसीओडी) सबसे आम हार्मोनल विकार हैं।

अध्ययनों के अनुसार भारत में करीब 10 फीसदी महिलाएं पीसीओएस व पीसीओडी से पीड़ित हैं। एक अध्ययन के मुताबिक महाराष्ट में 22.5 फीसदी महिलाएं इस तरह की बीमारी के लक्षण दिखे हैं। मोटे अनुमान के अनुसार बच्चे पैदा करने वाली उम्र [18 से 45 वर्ष ] की लगभग प्रत्येक 10 महिलाओं में से एक इससे पीड़ित है।

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पीसीओएस व पीसीओडी बीमारी के आगे बढ़ने की बड़ी वजह बहुत सी महिलाएं शुरूआती संकेतों को अनदेखा करती हैं। इससे प्रारंभिक स्तर पर बीमारी का निदान करने की संभावनाएं खत्म हो जाती है। पीसीओएस के साथ एक सामाजिक कलंक भी जुड़ा है।
लोग मानते हैं कि यदि महिला इससे पीड़ित हैं, तो महिला बांझपन भी होगा – एक ऐसी स्थिति जो एक महिला के भीतर बहुत सारे डर पैदा कर सकती है।

पीसीओडी और पीसीओएस पर बातचीत शुरू करने के लिए 4 महिलाओं से बात की गई, जो वर्षों से इस बीमारी के साथ
हैं। उन्हें इस बीमारी की कितनी जानकारी है और इस बीमारी के बावजूद उन्होंने कैसे जीवन प्रबंधन किया और इससे उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा है?

पीसीओएस के लक्षण

इस बारे में महिलाओं ने खुलकर बताया जिसे अन्य प्रभावितों से हम साझा कर रहे हैं।

जानकारी का अभाव – बूटिक संचालन करने वाली 32 वर्षीय सलोनी अग्रवाल ने बताया कि मुझे अब भी इस बीमारी के बारे में
पर्याप्त जानकारी नहीं है। मुझे अपने स्नातक के अंतिम वर्ष में पता चला कि मेरे भीतर पीसीओडी हो गया है।

इस दौरान लगभग छह माह तक मेरे पीरियड अनियमित रहे। मुझे नहीं पता था कि उस समय पीसीओडी क्या होता है, क्योंकि मेरे परिवार में कहंी भी यह फैमिली हिस्ट्री नहीं थी। उस दौरान सबसे महत्वपूर्ण शारीरिक परिवर्तन यह हुआ कि मेरा वजन बढ़ गया और वजन कम करने के लिए जिम जाने पर भी लगातार वजन बना रहा।

दूसरे बदलाव के रूप में ठोड़ी क्षेत्र के आसपास और ऊपरी होंठ पर असामान्य रूप से काले बाल आ गए। लेकिन गत कुछ वर्षों में, मैं किसी भी शारीरिक परिवर्तन से ज्यादा परेशान नहीं हुई। अपने वजन के साथ जितना हो सकता है, मै सहज रहती हूं। चेहरे के बालों के लिए, मैं परेशान नहीं हूं। इसे कॉस्मैटिक मानती हूं, जिस तरह से एक महिला अपनी भौंहों को थ्रेड करती है, वैसे ही मैं अनचाहे बालों को हटवा सकती हूं।

मानसिक रूप से थकाने वाली है बीमारी

रेडिया एंकर 26 वर्षीय नेहा शर्मा ने कहा कि इतने सारे शारीरिक बदलावों से निपटना निराशाजनक है। मुझे हर महीने अपने पेट में एक तीव्र दर्द होता था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि यह क्या है? इसी दर्द की वजह से मैं एक बार बीच रास्ते में गिर गई। मैंने फिर अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाया, जिसने मुझे बताया कि मेरे दोनों अंडाशय में सिस्ट हैं। तब मुझे पहली बार पता चला कि पीसीओएस क्या है?

इस बीमारी के बाद मुझे सबसे महत्वपूर्ण जीवनशैली में बदलाव करना है। मुझे वजन घटाने के लिए शुगर छोड़नी पड़ी। लंबे समय तक मैं मिठाइयों से दूर हूं। पीसीओएस के कारण वजन बढते देखा। इस तरह के शारीरिक परिवर्तनों से निपटना कई बार मन में निराशा ला देता है। आप अपना आत्मविश्वास खो देते हैं। लेकिन इससे निपटने का एकमात्र तरीका स्वस्थ आहार है, जो कम वसा और कम कैलोरी वाली डाइट है। मुँहासे व दाने का अटैक एमएनसी में कार्यरत शिखा ने कहा कि इस बीमारी से मुझे गंभीर मुँहासे और दानों से निपटना था।

जब मुझे पीसीओएस का पता चला, तो मुझे तुरंत वजन घटाने की सिफारिश की गई थी। स्वास्थ्यवर्धक खाने के लिए भी कहा गया, प्राकृतिक प्रोबायोटिक्स के लिए दही को अपने आहार में शामिल करें, और बहुत सारी सब्जियाँ खाएं।

पीसीओएस के कारण

चेहरे पर मुँहासे, दानें आए और त्वचा पर छाया पड़ने लगी। बालों के झड़ने की समस्या शुरू हुई। शरीर पर बाल बहुत घने आ गए। लोग मानते हैं कि मेरे द्वारा खाए जाने वाले फास्ट फूड या ‘अस्वास्थ्यकर’ जीवनशैली के कारण मेरी त्वचा खराब है जबकि यह सभी हार्मोनल है। अगर लोगों को इस बीमारी के बारे में ज्यादा पता हो तो वह ऐसी बातें ही नहीं करेंगे।

एक बेबसी का अहसास 36 वर्षीय, टीवी पत्रकार शिनॉय राय ने कहा कॉलेज तक, मेरे पीरियड्स ठीक थे लेकिन काम शुरू करने के तुरंत बाद वह अनियमित हो गए। मैैंने इसके बारे में ज्यादा सोचने की जहमत नहीं उठाई और यह सोचा कि पीरियड्स में देरी होना ठीक है, लेकिन तभी मुझे महसूस हुआ कि मेरा वजन बढ़ रहा है।

इस पर एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लिया। उसने मुझे छह महीने के लिए इन छोटी-छोटी 21 दिनों की गोलियों पर डाल दिया, और मुझे अपने पीरियड्स समय पर होने लगे। हालांकि, हर बार जब मैंने गोलियां लेना बंद किया तो पीरियड अनियमित हो गया।

ईमानदारी से, मैंने काम किया, सही खाया और अपनी शक्ति से हर संभव प्रयास किए कि मुझे इस स्थिति से छुटकारा मिले। इस दौरान मैं उन लड़कियों से भी मिली जो बेहद फिट हैं और अभी भी पीसीओडी – पीसीओएस है। इसलिए, कहीं न कहीं मुझे लगता है कि यह तनाव, निराशा तभी आती है जब आपकी जीवनशैली व्यवस्थित नहीं होती है।

संतुलित आहार और खुशनुमा रह कर आप इस लंबी और कष्टप्रद बीमारी की यात्रा को पार कर सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि खुल कर बीमारी पर बात की जाए। जीवन के प्रति अधिक सकारात्मक बन जाएं और इसे दूर करने के लिए जो कुछ भी कर सकते हैं, उसे करने के लिए दृढप्रतिज्ञ हो जाएं

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