Recurrent miscarriage: Causes, tests and treatment
March 6, 2019
Is IVF Painful Process
March 26, 2019
11
March
2019

अंडो के बढ़ने व समय पर फूटने की समस्या से निःसंतानता ? पीसीओडी | पीसीओएस मरीजों में आईवीएफ तकनीक कारगर

इंसानी जिन्दगी और जीने के तौर तरीकों में हुए बदलाव हम सभी देख पा रहे है। कैरियर की अंधी दौड़ व कारोबार की चिंता के चलते तनाव, डिप्रेशन, मोटापा, डायबिटीज आदि कई बीमारियां हमें घेर रही हैं। ऐसी ही एक बीमारी है जो हमारी बदली हुई जीवनशैली का ही परिणाम है वो है पीसीओडी या पीसीओएस यानि पोलीसिस्टिक ओवेरी डिजीज या सिंड्रोम। इसमें ओवरीज पर असर पड़ता है, जिसकी वजह से महिलाओं में प्रजनन क्षमता कम हो जाती है इसमें हार्मोन के असंतुलन की वजह से अंडाशय में गांठे हो जाती है और समय पर इलाज नहीं करवाने पर गंभीर समस्या का सामना करना पड सकता है।

इन्दिरा आईवीएफ वाराणसी की आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. दीपिका मिश्रा का कहना है कि पीसीओडी यानी यह डिसआर्डर महिलाओं को होता है और इसके कई कारण भी हैं। कोई कहता है कि यह जेनेटिक डिजीज है, तो किसी ने इसे मेटाबॉलिक डिसफंक्शन का नाम दिया है। इसके कई लक्षण हैं इसकी वजह से महिलाओं को इन्फर्टिलिटी की समस्या भी हो सकती है। इससे पीड़ित लगभग 40.60 प्रतिशत महिलाओं को ओबेसिटी, डायबिटीज, कैंसर और कोलेस्ट्रॉल के भी चांसेस होते हैं। मेडिकल रिसर्च के मुताबिक 4 से 11 प्रतिशत महिलाएं पीसीओडी से पीड़ित हैं।

पीसीओडी के लक्षण बताते हुए इन्दिरा आईवीएफ द्वारका दिल्ली की आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. रेखा ब्रार कहती हैं कि
. माहवारी अनियमित होना या माहवारी नहीं आना
.बहुत अधिक मुंहासे होना
.गर्भधारण नहीं हो पाना या बाँझपन की समस्या
.मोटापा बढ़ना और स्वाभाव में बदलाव होना और कभी कभी नींद में साँस लेने में समस्या होना

पीसीओडी के कुप्रभाव
. एक मेडिकल पत्रिका में छपे लेख के मुताबिक जो महिलाएं पीसीओडी की समस्या से ग्रस्त होती है उनमे डायबिटीज के अलावा कई तरह की अन्य बीमारियाँ होने का खतरा बाकि लोगों से अधिक होता है इसके साथ ही पीरियड्स में होने वाली अनियमितता और मेटाबोलिज्म में भी असंतुलन हो जाता है। एंड्रोजन हार्मोन का उत्पादन जरुरत से अधिक होता है।

पीसीओडी से निःसंतानता में उपचार के बारे में इन्दिरा आईवीएफ कोटा की आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ शिल्पा बताती हैं कि
.पीसीओडी से निःसंतानता की समस्या अधिक देखने को मिलती है और इसका इलाज आज के मेडिकल साइन्स में कोई मुश्किल नहीं है। पीसीओडी से ग्रसित महिला आईवीएफ तकनीक (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) के जरिये संतान प्राप्ति कर सकती है। आईवीएफ तकनीक (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) में अंडों को पतले इंजेक्शन के माध्यम से महिला के शरीर से बाहर निकाल लिया जाता है और इसके बाद प्रयोगशाला में इसे पुरुष के शुक्राणुओं के साथ निषेचन करवाकर पुनः महिला के गर्भाशय में रख दिया जाता है जिसके बाद वो प्राकृतिक तरीके से महिला के गर्भ में विकसित होता है। पीसीओडी से ग्रसित महिला में आईवीएफ तकनीक से संतान प्राप्ति में पूर्व में मल्टीपल प्रेग्नेंसी की शिकायत थी लेकिन लेटेस्ट टेक्नीक से मल्टीपल प्रेग्नेंसी रिस्क कम हुई है। पीसीओडी के मामलों में आईवीएफ की सफलता दर काफी अच्छी है।
पीसीओडी व महिलाओं की अन्य समस्याओं में आईवीएफ सफल तकनीक बनकर उभरी है।

You may also link with us on Facebook, Instagram, Twitter, Linkedin, Youtube & Pinterest

Talk to the best team of fertility experts in the country today for all your pregnancy and fertility-related queries.

Call now +91-7665009014

Comments are closed.

Request Call Back
Call Back