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नि:संतानता सिर्फ महिला में ही नहीं, सामान्य है पुरुषों में भी

एक दम्पत्ति अगर प्राकृतिक तरीके से गर्भ धारण करने में असमर्थ है तो यह नि:संतानता पुरुषों और महिलाओं में होने वाले हार्मोनल विकारों में से एक है। यदि कोई दंपत्ति लगातार एक साल से अधिक समय तक गर्भधारण करने की कोशिश कर रहा है और फिर भी वह संतान की प्राप्ति नहीं कर पा रहा है तो संबंधित दंपति को बगैर किसी देरी के चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए।

यदि कोई दंपत्ति गर्भ धारण करने में असमर्थ है, तो इसका कारण हर समय महिला के अंडों की गुणवत्ता कम होना नहीं है बल्कि यह पुरुष प्रजनन क्षमता का कारण भी हो सकता है। यह पुरानी बात हो गई है जब बच्चे के लिए संघर्ष करने वाली महिला को बांझ माना जाता था।

बांझपन, हालांकि यह कुछ दशक पहले महिलाओं की समस्या थी। अगर आज की बात की जाए, तो 55 से 57 फीसदी दंपति की गर्भावस्था का कारक पुरुष बांझपन शामिल है। आमतौर पर, 40 से 45 फीसदी सभी पुरुषों में कहीं न कहीं बांझपन की भागीदार रहती है। ऐसे में जब एक दम्पत्ति को गर्भधारण करने में परेशानी हो रही है, तो पुरुष और महिला दोनों की जांच की जानी चाहिए।

कई मामलों में बांझपन के कुछ कारण अस्पष्ट है। या अज्ञात बांझपन कारण तब होता है जब जांच में पुरुष की सभी रिपोर्ट नार्मल होती है फिर भी अपने साथी को वह गर्भवती नहीं कर पा रहा है।

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चिकित्सक से परामर्श कब लें?

-नियमित रूप से बिना किसी गर्भधारक दवाइयों के उपयोग के बाद भी यदि एक वर्ष में गर्भधारण नहीं हो पता है तो चिकित्सक के मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है !

जैसे-

-स्खलन होता हो

-बहुत कम सेक्स इच्छा होना

-यौन क्रिया के दौरान समस्याएं

-अंडकोष क्षेत्र में सूजन

-टेस्टीक्यूलर [वृषण क्षेत्र] में दर्द या असुविधा

-प्रोस्टेट संबंधी समस्या

-बड़ी सर्जरी होना

-लिंग, वृषण या अंडकोष की सर्जरी

पुरुष बांझपन का निदान कैसे किया जाता है?

-बांझपन से जूझ रहे एक पुरुष की प्रजनन समस्या को जानना जरूरी है। बांझपन के कारणों को जांचने के लिए  एक आदमी को पूरी तरह से शारीरिक जांच, मेडिकल हिस्ट्री आदि से गुजरता पड़ता है। इसमें अगला कदम शुक्राणु मूल्यांकन है, जिसे वीर्य विश्लेषण परीक्षण भी कहा जाता है। यह परीक्षण लैब के अंदर प्रजनन टीम के मार्गदर्शन में किया जाता है।

वीर्य विश्लेषण परीक्षण के लिए एक पुरुष केंद्र को अपना वीर्य का नमूना देता है। विशेषज्ञ प्रयोगशाला में सीमन [वीर्य द्रव] में शुक्राणु की गणना  करते हैं, शुक्राणु की संरचना,शुक्राणु की गति (क्या शुक्राणु एक गति से आगे बढ़ रहे हैं या नहीं) जांच की जाती है। ये परीक्षण शुक्राणु की गुणवत्ता को निर्धारित करने के लिए किए जाते हैं।

पुरुष बांझपन को कम करने के उपचार 

-पुरुष बांझपन कारणों के इलाज के कई तरीके हैं। कुछ पुरुष बांझपन उपचार इस तरह हैं…

आईयूआई तकनीक –

-यह पुरुष इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट में से एक है, जहां धुले हुए शुक्राणु को सीधे गर्भाशय में रखा जाता है।

आईयूआई की प्रक्रिया में, पुरुष साथी द्वारा प्राप्त वीर्य का नमूना एक अलग तकनीक द्वारा साफ किया जाता है। शुक्राणु धोने के बाद वह किसी भी अशुद्धता और गंदगी से बाहर होते हैं। ऐसा स्वच्छ शुक्राणु दंपति को गर्भ धारण करने में मदद करता है।  आईयूआई प्रक्रिया उत्तेजना पैदा करने वाली दवा के साथ या उसके बिना भी की जा सकती है। यदि दवा का उपयोग नहीं किया जाता है, तो साफ किये गए शुक्राणु को ओव्यूलेशन के समय महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। आईयूआई की सिफारिश तब की जाती है जब पुरुष में अंतर्निहित प्रजनन संबंधी समस्याएं होती हैं।

इक्सी के साथ आईवीएफ उपचार

-आईवीएफ असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) के उन्नत उपचारों में से एक है आईवीएफ तकनीक के दौरान, अंडे महिला साथी से प्राप्त किए जाते हैं और शुक्राणुओं के साथ निषेचित होते हैं। यदि पुरुष के वीर्य या शुक्राणु की गुणवत्ता में कोई समस्या है, तो विशेषज्ञ इक्सी तकनीक को आईवीएफ के साथ लागू करेंगे।

इक्सी के दौरान, एक शुक्राणु को सीधे प्रत्येक अंडे  में इंजेक्ट किया जाता है। इक्सी  वह प्रक्रिया है जहां विशेषज्ञ सीधे अंडे में इंजेक्ट करने के लिए सबसे अधिक कम सक्रिय शुक्राणु चुनते हैं। इक्सी उन पुरुषों के लिए सबसे अच्छी तकनीक है जिनके पास शुक्राणु  की संख्या कम या गतिशीलता है।

आईवीएफ-इक्सी सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल तरीके से –

एसएसआर या सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल प्रक्रिया एक प्रक्रिया है, जिसमें शुक्राणुओं को पुरुष के प्रजनन भागों (जैसे वृषण, एपिडायमिस) से शल्य चिकित्सा द्वारा एकत्र किया जाता है। यह प्रक्रिया आईवीएफ-इक्सी की तकनीक से पूरी की जाती है।

एसएसआर की प्रक्रिया तब की जाती है जब पुरुष के अपने वीर्य स्खलन में कोई शुक्राणु नहीं होता है। परंतु वृषण में शुक्राणु बन रहे हो !

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