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बार बार आइवीएफ का फैल होना

Author Name: Dr. TarunaJhamb Mentor Name: on April 08, 2020

जब भी कोइ मरिज निसंतंता की समस्यासे लड रहा होता है तो आइवीएफ कॉ आखरी उपाय समजता है. जीससे उन्हे काफि उम्मीद होती हे की यह प्रक्रिया उनको निसंतंतासे निज़ाद दिलायेगी और यदी एसे मे आइवीएफ मे भी उनको रिज़ल्ट नही मील पाता हैं तो वे काफी निराश हो जाते हैं एवम आगे कीस राह को अपनाये वो उनको समज नही आता हैं .आज हम बात करेंगे कि जीन मरीजो मे आइवीएफ बार बार फेल हो जाता हैं उस्के क्या कारण हैं एवम उसका कैसे इलाज किया जाये .

सबसे पहले इस्स बात को समजना जरुरी हैं की आइवीएफ मे सफलता देने मी सबसे बडा योगदान एक अच्छे आइवीएफ सेंटर का होता हे इसलिये अपने आइवीएफ सेंटर का चुनाव सोच समजके करे क्योकी यही आपकी सफलता की सीडी हैं

यदि अच्छे आइवीएफ सेंटर से आइवीएफ करवाने के बादभी सफलता आपके हाथ नही लग पा रही हैं तो कुछ बाते हैं जिन्हे जांचना आपके डोकटर के लिये आवश्यक हे . बार बार आइवीएफ फैल होने के प्रमुख कारणो मे टयुब मे पानी होना, बच्चेदानी मे सुजन होना, एंडॉमेट्रीयम यानी की बच्चेदानी की परत का कमजोर होना हे जो हो सकता हैं की आपके डोक्टर पेह्चान नहि पा रहे हो अत: पहले चरणमे इन समस्याओ को पेह्चानना एव्म उनका इलाज करने के बाद ही आइवीएफ की प्रक्रिया के लिये आगे बडना जरुरी हे और उनको पहचानकर एव्म उसका इलाज करने के बाद ही आइवीएफ की प्रक्रीया के लीये आगे बड्ना जरुरी ही और उनको पहचान कर आगे बडने के लिये एक डोक्टर के अनुभवी होनेकी बहुत आवश्यकता होती हैं.

यदि इन सब मे कोइ भी कारण पह्चान नही आ पा रहे हैं तो इस तरह के केस को हम रिकरंट इम्पलांटेशन फेल्यार की श्रेणी में डालते हैं मतलबकी सब कुछ ठीक नजर आने के बाद भी भ्रुण बच्चेदानी मे चिपक नही पा रहा हे इसके कारणो मे से एक कारण हैं ट्युब्स मे इंफेक्शन होना हे जो कि दिखाइ नही दे रहा हैं अत: सब कुछ ठीक होते हुए भी यदि आइवीएफ फैल हो रहा हैं तो दुरबिन की जांच करके टयुब को चेक करना एव्म हिस्टेरोस्कोपि करके बच्चेदानी को चेक करना आवश्यक हैं एवम यदि कीसी प्रकार का इंफेक्शन पायाजाये तो उसका इलाज करना आवश्यक हैं .

सब कुछ ठिक होते हुए बार बार बच्चा ना लगनेकी स्थिति मे RPR एक प्रक्रिया हैं जो बच्चेदानी मे बच्चा चिपकाने की क्षमता को बढाती हैं । एवं इस प्रक्रिया से IVF में सफलता की सम्भावना बढ़ती हे,

बार बार IVF फेलियर के केस में यह भी देखा गया हैं की यदि भ्रूणों को जेनेटिक जाँच करने के बाद उन्हें बच्चेदानी में प्रत्यारोपित किया जाये तो सफलता की सम्भावना बढ़ जाती हे क्युकी जो भ्रूण जेनेटिकली नार्मल होते हे उनमे बच्चेदानी में चिपकने में एवं चिपक कर आगे बढ़ने की क्षमता अधिक होती हे । अत बार बार IVF फेल होने की स्थिति में PGTA प्रक्रिया की मदद लेने से लाभ मिलता हे । यहाँ में एक बार फिर कहना चाहूंगी की PGTA प्रक्रिया एक जटिल प्रक्रिया जे एवं ये करने लिए आपके भ्रूण वैग्नानिक का अनुभवी होना अत्यंत आवश्यक हे.
सबकुछ करने के बाद भीं यदि सफलता नहीं मिल पा रही हे तो ऐसा समजा जाता हे की महिला के शरीर में कुछ ऑटो इम्युनिटी हो सकती हे जो भ्रूण को अंदर चिपकने नहीं देती हे । उस स्थिति में खून की जाँच करने के बाद उसका इलाज किया जाना चाहिए फिर IVF की प्रक्रिया के लिए आगे बढ़ना चाहिए ।

इसलिए यदि आप बार बार IVF फेल होने की सम्भावना का सामना कर रहे हे तो आप एकदम निराश ना हो । धैर्य रखे । ये वक्त आपके इम्तिहान का हे । सही निर्णय ले , सही IVF सेंटर का चुनाव करे अपने डॉक्टर से चर्चा करे एवं सफलता प्राप्त करने के प्रयास रत रहे एक दिन सफलता जरूर आपके हाथ लगेगी ।

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