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Synopsis

आईवीएफ ट्रीटमेंट से पहले करायें ये जांचे, उपचार से पहले कारण जानना जरूरी, आईवीएफ से पहले महिलाओं के टेस्ट, आईवीएफ से पहले पुरूषों के टेस्ट, फैलोपियन ट्यूब की जांच, अण्डाशय में अण्डों की जांच, गर्भाशय की जांच, आईवीएफ परीक्षण

नये जीवन की उम्मीद किसी भी दम्पती के जीवन का सबसे सुनहरा दौर होता है। अपनी गोद में खुद की संतान होना उन्हें पूर्णता की ओर ले जाता है लेकिन कई दम्पती सामान्य तरीके से गर्भधारण नहीं कर पाते हैं । ईलाज के बारे में जानकारी नहीं होने पर पहले तो वे सामान्य ईलाज करवाते हैं और सफलता नहीं मिलने पर इधर-उधर भटकते रहते हैं । भारत में निःसंतान तेजी से पैर पसार रही है लेकिन सुकून वाली बात यह है कि इसका उपचार आईवीएफ ट्रीटमेंट के रूप में उपलब्ध है।  दम्पती किसी भी आईवीएफ ट्रीटमेंट सेंटर में ईलाज शुरू करवाएं इससे पहले यह जानना जरूरी है कि निःसंतानता का कारण क्या है  और दोनों में से जिम्मेदार कौन है। फर्टिलिटी एक्सपर्ट द्वारा पति-पत्नी दोनों के कुछ टेस्ट किये जाते हैं।

आईये जानते हैं बांझपन के कारण जानने के लिए दम्पती की कौनसी जांचे की जाती है।

आईवीएफ से पहले महिलाओं के टेस्ट

निःसंतानता का कारण जानने के लिए महिलाओं के निम्न जाचों से गुजरना होता है।

  1. फैलोपियन ट्यूब की जांच – प्राकृतिक गर्भधारण में फैलोपियन ट्यूब की सबसे अहम् भूमिका होती है। भ्रूण बनने की प्रक्रिया फैलोपियन ट्यूब में होती है इसलिए ट्यूब का सही स्थिति में और सुचारू होना आवश्यक होता है। ट्यूब में संक्रमण होने या किसी तरह का ब्लाॅकेज होने पर गर्भधारण नहीं हो पाता है। महिलाओं में निःसंतानता के जितने भी मामले सामने आते हैं ज्यादातर में ट्यूब में ब्लाॅकेज या विकार की समस्या होती है। आईवीएफ उपचार शुरू करने से पहले महिला की ट्यूब की जांच की जाती है।
  2. अण्डाशय में अण्डों की जांच – अण्डाशय की स्थिति जानने के लिए अण्डाशय का अल्ट्रासाउण्ड किया जाता है। अंडों की संख्या और गुणवत्ता को जानने के लिए माहवारी के पहले कुछ दिनों के दौरान रक्त में कुछ हाॅर्मोन की मात्रा की जांच की जाती है जिसमें फाॅलीकल स्टिमुलेटिंग हाॅर्मोन, एन्ट्रल फाॅलीकल काउण्ट और एंटीमुलेरियन हाॅर्मोन शामिल हैं।
  3. गर्भाशय की जांच – आईवीएफ शुरू करने से पहले डाॅक्टर गर्भाशय सही तरीके कार्य कर रहा है या नहीं ये जांचते हैं। गर्भाशय की सोनोग्राफी की जाती है क्योंकि भ्रूण बनने के बाद उसे गर्भाशय में ही विकसित होकर जन्म लेना होता है।
  4. खून की जांच – महिला में फर्टिलिटी की अन्य जांचों के साथ रक्त की कुछ जांचे की जाती है जैसे जिसमें एचआईवी और अन्य संक्रमण, प्रोलेक्टिन, थाईरोइड आदि देखा जाता है।

 

इन सभी जांचों अलावा अगर महिला की कोई मेडिकल हिस्ट्री रही हो तो उसे भी देखा जाता है।

आईवीएफ से पहले पुरूषों के टेस्ट

पुरूषों के लिए केवल वीर्य विश्लेषण (सीमेन की जांच) किया जाता है, जिसमें शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और आकार की जांच की जा सके।

पुरूषों की तुलना में महिला के अधिक टेस्ट किये जाते हैं क्योंकि गर्भधारण के लिए महिला में बहुत सारे अन्य कारक भी मायने रखते हैं।

मरीज की स्थिति के अनुसार आईवीएफ के द्वारा गर्भधारण कराने के लिए उपर लिखे टेस्ट के अतिरिक्त भी टेस्ट करवाये जा सकते हैं।

निःसंतानता के उपचार से पूर्व सिर्फ इतनी ही जांचे आवश्यक हैं । सामान्यतया इन जांचों से मरीज की निःसंतानता का कारण सामने आ जाता है और ईलाज शुरू किया जा सकता है।

 

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