2 महीने की प्रेगनेंसी के लक्षण, विकास और सावधानियाँ

Last updated: December 26, 2025

Overview

गर्भावस्था का दूसरा महीना मां और होने वाली संतान दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण समय होता है।क्योंकि इस दौरान 5वें से 8वें हफ्ते में एम्ब्रीओ का विकास तेजी से होता है और अंग बनने शुरू हो जाते हैं। जैसे-जैसे शिशु बढ़ता है, मां को भी अपने शरीर में कई तरह के बदलाव दिखाई देने लगते हैं। इसलिए इस दौरान सही खान-पान, पर्याप्त आराम और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी होता है। इस लेख में आप जानेंगी कि 2 mahine ki pregnancy में बच्चे का विकास कैसा होता है, कौन-कौन से लक्षण दिखते हैं, क्या खाना चाहिए और किन सावधानियों को अपनाना जरूरी है।

2 महीने की प्रेगनेंसी के लक्षण (2 mahine ki pregnancy ke Symptoms)

प्रेगनेंसी का दूसरा महीना वह समय होता है जब शरीर धीरे धीरे गर्भावस्था के अनुसार खुद को ढालने लगता है। इस समय हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं और इसी वजह से कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। हर महिला में 2 mahine ki pregnancy के लक्षण अलग तरह से महसूस हो सकते हैं, लेकिन कुछ सामान्य संकेत अक्सर ज्यादातर महिलाओं में एक जैसे दिखते हैं।

  • उल्टी और मतली (Morning Sickness) दूसरे महीने में ज्यादातर महिलाओं को मितली या उल्टी होती है, जिसे मॉर्निंग सिकनेस कहते हैं।
  • खाने की बदलती इच्छा (Food Cravings And Aversions) इस समय स्वाद में बदलाव होना सामान्य है। कुछ चीजें बहुत पसंद आने लगती हैं, जबकि कुछ खाने का मन बिल्कुल नहीं करता।
  • जल्दी थक जाना (Fatigue) दूसरे महीने में शरीर बच्चे की ग्रोथ के लिए ज्यादा ऊर्जा खर्च करता है, इसलिए सामान्य से अधिक थकान होती है। प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का बढ़ना भी इसका कारण होता है।
  • स्तनों में बदलाव (Breast Changes) अक्सर स्तनों में हल्का दर्द, भारीपन या कोमलता महसूस होती है। कभी आकार बढ़ जाता है और निप्पल का रंग गहरा दिखने लगता है। यह सभी बदलाव सामान्य हैं।
  • पेशाब बार बार आना (Frequent Urination) इस दौरान गर्भाशय थोड़ा बढ़ने लगता है, जिससे मूत्राशय पर दबाव पड़ता है और बार-बार पेशाब आने लगता है। यह दूसरे महीने का आम लक्षण है।
  • मूड बदलना (Mood Swings) हार्मोनल बदलाव का असर भावनाओं पर भी पड़ता है। कभी खुशी, अचानक चिड़चिड़ापन या भावुक होना इस समय सामान्य है।
  • कब्ज की परेशानी (Constipation) इस समय कई महिलाओं को पेट साफ न होना, गैस या कब्ज की समस्या हो सकती है। यह हार्मोनल बदलाव के कारण होता है।

दूसरे महीने में हर हफ्ते होने वाला विकास (Weekly Growth in Second Month)

  • पांचवां हफ्ता: इस हफ्ते में एम्ब्रीओ तिल के दाने जितना छोटा होता है। दिल की धड़कन शुरू हो जाती है और न्यूरल ट्यूब (Neural Tube) बनती है, जिससे दिमाग और रीढ़ की हड्डी का विकास होता है।
  • छठा हफ्ता: छठे हफ्ते तक एम्ब्रीओ मसूर के दाने के बराबर हो जाता है। इस समय बच्चे के मुख्य अंग बनना शुरू होते हैं और आंख और कान की शुरुआती संरचना दिखाई देने लगती है। शरीर का आकार भी थोड़ा बढ़ जाता है।
  • सातवां हफ्ता: सातवें हफ्ते में एम्ब्रीओ का आकार लगभग ब्लूबेरी जितना होता है। चेहरे के अंग जैसे आंख, नाक और मुंह की आकृति साफ दिखने लगती है और दिमाग के हिस्से तेजी से विकसित होते हैं।
  • आठवां हफ्ता: आठवें हफ्ते तक बच्चा राजमा के दाने के आकार का हो जाता है। इस समय उसके लंग्स, किडनी, लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंग आकार लेने लगते हैं और हाथ-पांव की बनावट भी विकसित होती रहती है।

दूसरे महीने में बच्चे के विकास के महत्वपूर्ण संकेत

  • दिल की धड़कन (Heart Development) छठे हफ्ते तक बच्चे का दिल तेजी से धड़कने लगता है, जिसकी गति लगभग 110 से 160 धड़कन प्रति मिनट होती है।
  • शुरुआती जननांग (External Genitals) इस समय बाहरी जननांग में हल्का अंतर बनने लगता है, लेकिन यह अल्ट्रासाउंड में कुछ समय बाद ही दिखाई देता है।
  • चेहरे का आकार (Face Formation) दूसरे महीने में बच्चे का चेहरा साफ दिखने लगता है और आंख, कान और नाक का शुरुआती रूप बनना शुरू हो जाता है।
  • न्यूरल ट्यूब का पूरा होना (Neural Tube Closure) छठे हफ्ते में न्यूरल ट्यूब बंद हो जाती है, जिससे दिमाग और रीढ़ की हड्डी की नींव मजबूत होती है। इस समय मां के लिए फोलिक एसिड (Folic Acid) का सेवन बहुत जरूरी होता है।
  • हाथ और पैर का बनना (Limbs Development) इस समय बच्चे के हाथ और पैर विकसित होते हैं। छोटी उंगलियां बनना शुरू होती हैं, हड्डियां मजबूत होती हैं और मांसपेशियां (Muscles) भी बनना शुरू हो जाती हैं।
  • गर्भावस्था में देखभाल (Pregnancy Care) दूसरे महीने में बच्चा तेजी से विकसित होता है, इसलिए नियमित जांच, सही खान-पान और डॉक्टर की सलाह का पालन करना मां और बच्चे दोनों के लिए जरूरी है।

2 महीने की प्रेगनेंसी में क्या खाना चाहिए

2 mahine ki pregnancy में पौष्टिक और संतुलित आहार बेहद जरूरी है। सही भोजन बच्चे के दिमाग, हड्डियों, आंखों और दिल के विकास को मजबूत करता है। आइए जानते हैं कि दूसरे महीने में कौन-कौन से पोषक तत्व जरूरी हैं और उन्हें किन चीज़ों से लिया जा सकता है।

प्रोटीन (Protein)

प्रोटीन बच्चे की मांसपेशियों, त्वचा और अंग बनाने में मदद करता है और मां को ऊर्जा देता है। अंडा, मछली, चिकन, टोफू, मूंग दाल, मसूर और राजमा इसके अच्छे स्रोत हैं। रोजाना आहार में किसी एक को शामिल करना पर्याप्त होता है।

फोलिक एसिड (Folic Acid)

दूसरे महीने में फोलिक एसिड बहुत जरूरी होता है। यह बच्चे की रीढ़ और दिमाग के सुरक्षित विकास में मदद करता है। रोजाना 400-600 माइक्रोग्राम लेना चाहिए। पालक, अनाज, संतरा, ब्रोकली और दाल से इसे आसानी से लिया जा सकता है।

कैल्शियम (Calcium)

कैल्शियम बच्चे की हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है। दूध, दही, पनीर, ब्रोकोली और रागी इसके अच्छे स्रोत हैं। एक गिलास दूध और दही रोजाना लेने से कैल्शियम का संतुलन बना रहता है।

आयरन (Iron)

गर्भावस्था में आयरन की जरूरत बढ़ जाती है। यह बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाने और मां को एनीमिया से बचाने में मदद करता है। पालक, चना, राजमा, गुड़, सूखे मेवे और रेड मीट आयरन के अच्छे स्रोत हैं। विटामिन सी वाले फल के साथ लेने से शरीर इसे बेहतर तरीके से अवशोषित करता है।

ओमेगा थ्री फैटी एसिड (Omega Three Fatty Acid)

ओमेगा थ्री बच्चे के दिमाग, आंखों और नर्व सिस्टम के विकास में मदद करता है। अलसी के बीज, अखरोट, सैलमन मछली और चिया सीड इसके अच्छे स्रोत हैं। रोजाना एक मुट्ठी अखरोट या एक चम्मच अलसी के बीज लेना पर्याप्त होता है।

पानी (Hydration)

गर्भावस्था में पर्याप्त पानी पीना बहुत जरूरी है। यह मां की पाचन प्रक्रिया को सही रखता है और एम्नियोटिक द्रव को संतुलित करता है, जो बच्चे की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

2 महीने की प्रेगनेंसी में क्या नहीं खाना चाहिए

सिर्फ क्या खाना चाहिए ही नहीं, 2 mahine ki pregnancy में यह भी पता होना चाहिए कि क्या नहीं खाना है। इस समय मां का शरीर संवेदनशील होता है और बच्चा तेजी से बढ़ रहा होता है। गलत भोजन संक्रमण, फूड प्वाइजनिंग, हार्मोनल गड़बड़ी और बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकता है।

ज्यादा पारा वाली मछलियां

कुछ बड़ी मछलियां जैसे स्वोर्डफिश, किंग मैकेरल और टाइलफिश जैसी मछलियों को खाने से बचना चाहिए क्योंकि इनमें पारा ज्यादा होता है, जो बच्चे के दिमाग और नर्वस सिस्टम के विकास पर बुरा असर डाल सकता है। इसकी जगह सैलमन, रोहू या छोटी मछलियां खाना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।

बिना पाश्चराइज किए फूड आइटम

जो फूड आइटम पाश्चराइज नहीं होते, उनमें लिस्टीरिया जैसे खतरनाक बैक्टीरिया हो सकते हैं, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कच्चा दूध, बिना पाश्चराइज जूस और खुले डेयरी प्रोडक्ट इन दिनों में खाने या पीने से बचना चाहिए।

कच्चा या अधपका भोजन

कच्चा या अधपका भोजन कीड़े, बैक्टीरिया और वायरस का खतरा बढ़ाता है। कच्चा अंडा, आधा पका अंडा, सुशी, कच्चा मांस, कच्चा फिश और अधपकी चिकन से बचें।

ज्यादा कैफीन

कैफीन दिल की धड़कन बढ़ा सकता है और अधिक मात्रा में लेने से बच्चे के विकास पर असर पड़ सकता है। इसीलिए चाय -कॉफ़ी कम पिनी चाहिए।

शराब

शराब बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकती है और जन्म के बाद स्वास्थ्य जटिलताओं का कारण बन सकती है। गर्भावस्था में शराब पूरी तरह से न लें।

धूम्रपान यानी स्मोकिंग

धूम्रपान बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचने में बाधा डालता है और प्रीमैच्योर डिलीवरी, कम वजन और सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ाता है।

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने में सावधानी

यह समय मां और बच्चे दोनों के लिए अहम होता है। 2 mahine ki pregnancy में भले ही बेबी बंप दिखना शुरू न हुआ हो, लेकिन शरीर में बदलाव और बच्चे का विकास तेज़ हो जाता है। इसलिए इस दौरान सावधानी बरतना जरूरी है।

  • नियमित जांच से बच्चे की धड़कन और विकास का पता चलता है। अल्ट्रासाउंड और खून की जांच समय पर करवाना बहुत जरूरी है।
  • टहलना, प्रसवपूर्व योग, तैराकी और हल्के पिलेट्स सुरक्षित हैं। नई एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
  • अधिक थकावट, उछल-कूद या झटके से बचें। हल्की वॉक, गहरी सांस और संगीत तनाव कम करने में मदद करते हैं।
  • कोई भी दवाई चाहे सिरदर्द की दवा, एंटीबायोटिक या सप्लीमेंट केवल डॉक्टर की सलाह से लें। यह बच्चे और मां दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।

निष्कर्ष (Conclusion)

प्रेगनेंसी का दूसरा महीना बच्चे के अंगों के बनने और माँ के शरीर में बदलाव का अहम समय होता है। इस दौरान दिखने वाले ज़्यादातर लक्षण सामान्य होते हैं। 2 mahine ki pregnancy के समय सही पोषण, पर्याप्त आराम और नियमित जांच बहुत ज़रूरी रहती है। अगर कोई असामान्य लक्षण दिखें, तो बिना देर किए डॉक्टर से बात करना जरुरी होता है।

प्रेगनेंसी के दूसरे महीने के अक्सर पूछे जाने वाले सवाल ( FAQs)

क्या दूसरे महीने में थकान सामान्य है?

 

हां, हार्मोनल बदलाव और बढ़ती ऊर्जा की जरूरत की वजह से थकान आम है। आराम और संतुलित आहार मदद करता है।

मॉर्निंग सिकनेस कब होती है?

 

सिर्फ सुबह ही नहीं, दिन या रात कभी भी मॉर्निंग सिकनेस हो सकती है। यह हार्मोनल बदलावों पर निर्भर करती है।

क्या दूसरे महीने में सप्लीमेंट्स लेने चाहिए?

 

हां, फ़ोलिक एसिड, आयरन और डीएचए प्रीनेटल विटामिन आमतौर पर जरूरी होते हैं।

हल्की ब्लीडिंग या स्पॉटिंग सामान्य है?

 

हल्की स्पॉटिंग आम है। अगर ज्यादा ब्लीडिंग या दर्द और ऐंठन हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
© 2026 Indira IVF Hospital Private Limited. All Rights Reserved. T&C Apply | Privacy Policy| *Disclaimer