प्रेगनेंसी का चौथा महीना: Pregnancy ke 4 Month ke Lakshan

Last updated: January 05, 2026

Overview

चौथा महीना यानी 13 से 16 हफ्ते का समय प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही यानी सेकंड ट्राइमेस्टर (Second Trimester) की शुरुआत है। इस समय तक पहली तिमाही की मितली, उल्टी और थकान कम होने लगती है और ज्यादातर महिलाएं खुद को बेहतर महसूस करती हैं। इसीलिए इसे प्रेगनेंसी का सबसे आरामदायक समय माना जाता है।

इस महीने शिशु तेजी से बढ़ता है। चौथे महीने के अंत तक शिशु लगभग 12 से 14 सेंटीमीटर लंबा और 100 से 120 ग्राम वजन का हो जाता है। Pregnancy ke 4 month ke lakshan की बात करें तो इस समय बेबी बंप (Baby Bump) दिखना शुरू होता है और कुछ महिलाओं को पहली बार शिशु की हल्की हलचल महसूस हो सकती है। IVF से गर्भधारण करने वाली महिलाओं के लिए यह वो समय है जब प्रेगनेंसी आमतौर पर स्थिर हो जाती है और प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट धीरे-धीरे बंद किया जाता है।

चौथे महीने में शरीर में बदलाव

इस महीने आपके शरीर में कई बदलाव होते हैं जो बाहर से भी दिखने लगते हैं।

पेट का आकार:

गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) अब पेल्विक एरिया से ऊपर आ जाता है और बेबी बंप दिखना शुरू होता है। यह हर महिला में अलग होता है, कुछ में जल्दी दिखता है और कुछ में देर से।

वजन बढ़ना:

अब तक 2 से 4 किलोग्राम वजन बढ़ना सामान्य है। इस महीने हर हफ्ते लगभग 400 से 500 ग्राम वजन बढ़ सकता है।

स्तनों में बदलाव:

स्तन और बड़े हो जाते हैं। निप्पल के आसपास का हिस्सा यानी एरियोला (Areola) गहरे रंग का हो जाता है।

त्वचा में बदलाव:

कई महिलाओं को इस समय त्वचा में निखार आता है जिसे प्रेगनेंसी ग्लो (Pregnancy Glow) कहते हैं। लेकिन कुछ को पिगमेंटेशन (Pigmentation) या पेट पर नाभि से नीचे की तरफ एक गहरी रेखा दिख सकती है जिसे लीनिया निग्रा (Linea Nigra) कहते हैं।

बालों में बदलाव:

प्रेगनेंसी हार्मोन की वजह से बाल घने और चमकदार हो सकते हैं।

चौथे महीने के लक्षण

पहली तिमाही के मुकाबले चौथे महीने में कुछ लक्षण कम हो जाते हैं और कुछ नए आते हैं।

इन लक्षणों में राहत मिलती है:

  • मितली और उल्टी कम हो जाती है या बंद हो जाती है
  • थकान कम होती है और ऊर्जा बढ़ती है
  • मूड स्विंग (Mood Swing) कम होते हैं

ये नए लक्षण आ सकते हैं:

  • भूख बढ़ना: पहली तिमाही में जो भूख कम थी, वो अब बढ़ जाती है। कुछ खास चीजें खाने का मन करता है जिसे फूड क्रेविंग (Food Craving) कहते हैं।
  • नाक बंद होना: प्रेगनेंसी हार्मोन की वजह से नाक की अंदरूनी परत में सूजन आ सकती है। इसे प्रेगनेंसी राइनाइटिस (Pregnancy Rhinitis) कहते हैं।
  • पैरों में ऐंठन: खासकर रात में पैरों में ऐंठन हो सकती है। यह अक्सर कैल्शियम (Calcium) या मैग्नीशियम (Magnesium) की कमी से होता है।
  • कब्ज और गैस: हार्मोन की वजह से पाचन धीमा हो जाता है जिससे कब्ज और पेट फूलने की समस्या हो सकती है।
  • मसूड़ों में सूजन: कुछ महिलाओं के मसूड़ों में सूजन आ जाती है और ब्रश करते समय खून आ सकता है।
  • सफेद स्राव: योनि यानी वेजाइना (Vagina) से सफेद या पारदर्शी स्राव बढ़ सकता है जो सामान्य है।

हफ्ते के हिसाब से शिशु का विकास

चौथे महीने में शिशु का विकास बहुत तेजी से होता है। हर हफ्ते शिशु के आकार और अंगों में बदलाव होता है.

13वां हफ्ता:

  • शिशु की लंबाई लगभग 7 से 8 सेंटीमीटर और वजन 25 से 30 ग्राम होता है
  • उंगलियों पर फिंगरप्रिंट (Fingerprint) बनना शुरू होता है
  • शिशु अंगूठा चूसना सीख रहा होता है

14वां हफ्ता:

  • शिशु की लंबाई 8 से 9 सेंटीमीटर और वजन 40 से 45 ग्राम होता है
  • चेहरे के भाव बनने लगते हैं, शिशु भौंहें सिकोड़ सकता है
  • गर्दन लंबी होती है और सिर सीधा होने लगता है

15वां हफ्ता:

  • शिशु की लंबाई 10 से 11 सेंटीमीटर और वजन 70 से 75 ग्राम होता है
  • हड्डियां मजबूत होने लगती हैं और कैल्शियम जमा होने लगता है
  • शिशु रोशनी पर प्रतिक्रिया देने लगता है

16वां हफ्ता:

  • शिशु की लंबाई 11 से 14 सेंटीमीटर और वजन 100 से 120 ग्राम होता है
  • शिशु के दिल की धड़कन डॉपलर (Doppler) से सुनी जा सकती है, जो लगभग 150 से 160 प्रति मिनट होती है
  • कुछ महिलाओं को इस हफ्ते पहली बार शिशु की हलचल महसूस हो सकती है जिसे क्विकनिंग (Quickening) कहते हैं

चौथे महीने में जरूरी जांच और टेस्ट

प्रेगनेंसी के चौथे महीने में कुछ जरूरी जांच होती हैं, जिन्हें करवाना माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए जरुरी होती हैं।

ट्रिपल मार्कर टेस्ट (Triple Marker Test):

यह 15 से 20 हफ्ते के बीच होता है। खून की जांच से डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) और न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (Neural Tube Defect) का खतरा पता चलता है।

अल्ट्रासाउंड:

शिशु की ग्रोथ, दिल की धड़कन, और प्लेसेंटा (Placenta) की स्थिति देखी जाती है।

हीमोग्लोबिन टेस्ट:

खून की कमी यानी एनीमिया (Anemia) की जांच। प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर से ऊपर होना चाहिए।

यूरिन टेस्ट:

यूरिन में प्रोटीन और शुगर की जांच होती है।

खानपान और पोषण

दूसरी तिमाही में आपको रोजाना लगभग 300 से 350 अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत होती है। लेकिन यह कैलोरी पोषक तत्वों से भरपूर खाने से मिलनी चाहिए, न कि जंक फूड (Junk Food) से।

इन चीजों को खाने में शामिल करें:

  • प्रोटीन (Protein): दाल, पनीर, अंडे, चिकन, मछली शिशु की हड्डियों और मांसपेशियों के विकास के लिए जरूरी हैं
  • आयरन (Iron): पालक, चुकंदर, खजूर, गुड़ खाएं। प्रेगनेंसी में खून की मात्रा 50% बढ़ जाती है इसलिए डाइट में आयरन बहुत जरूरी है
  • कैल्शियम (Calcium): दूध, दही, पनीर रोज लें। शिशु की हड्डियों के लिए रोजाना 1000 मिलीग्राम कैल्शियम जरूरी है
  • फोलिक एसिड (Folic Acid): हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, संतरा खाएं
  • ओमेगा-3: अखरोट, अलसी के बीज शिशु के दिमाग के विकास के लिए जरूरी हैं

चौथे महीने की प्रेगनेंसी में इन चीजों से परहेज करें

  • कच्चा या अधपका मांस और अंडा
  • कच्चा पपीता और अनानास
  • ज्यादा कैफीन वाली चीजें जैसे चाय और कॉफी
  • शराब और धूम्रपान

चौथे महीने की प्रेगनेंसी में सावधानियां और देखभाल

  • भारी वजन न उठाएं और झुककर काम करने से बचें
  • टाइट कपड़े न पहनें, आरामदायक कपड़े और फ्लैट सैंडल पहनें
  • लंबी यात्रा में बीच-बीच में रुककर चलें और पानी पीते रहें
  • सोते समय बाईं करवट (Left Side) को प्राथमिकता दें क्योंकि इससे शिशु को खून का बहाव बेहतर होता है
  • हल्का व्यायाम जैसे पैदल चलना और प्रेगनेंसी योग करें
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई दवाई न लें

IVF प्रेगनेंसी में विशेष ध्यान

IVF से गर्भधारण करने वाली महिलाओं के लिए चौथा महीना एक अहम पड़ाव है। इस समय तक आमतौर पर प्रेगनेंसी स्थिर हो जाती है और कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:

  • प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट: IVF में शुरुआत में प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) की दवाई या इंजेक्शन दिए जाते हैं। चौथे महीने के आसपास डॉक्टर इसे धीरे-धीरे बंद करते हैं। अपने आप बंद न करें, डॉक्टर की सलाह लें।
  • ट्विन या मल्टीपल प्रेगनेंसी: IVF में जुड़वां या तीन बच्चों की प्रेगनेंसी की संभावना ज्यादा होती है। ऐसे में ज्यादा सावधानी और बार-बार अल्ट्रासाउंड जरूरी है।
  • नियमित जांच: IVF प्रेगनेंसी में शुरुआती महीनों में जांच ज्यादा होती है। चौथे महीने में भी डॉक्टर के साथ नियमित संपर्क जरूरी है।
  • तनाव से बचें: IVF का सफर भावनात्मक रूप से थका देने वाला होता है। चौथे महीने में प्रेगनेंसी स्थिर होने पर राहत मिलती है, लेकिन तनाव से बचना जरूरी है।

निष्कर्ष (Conclusion)

प्रेगनेंसी का चौथा महीना सबसे आरामदायक समय माना जाता है। पहली तिमाही की मितली और थकान कम हो जाती है और आप खुद को बेहतर महसूस करती हैं। इस आर्टिकल में आपने pregnancy ke 4 month ke lakshan के साथ शरीर में होने वाले बदलाव, शिशु का हफ्ते दर हफ्ते विकास, जरूरी जांच, और IVF प्रेगनेंसी में विशेष देखभाल के बारे में जाना। सही खानपान, नियमित जांच, और डॉक्टर की सलाह से इस समय को और भी आसान बनाया जा सकता है। अगर कोई असामान्य लक्षण जैसे तेज पेट दर्द, ब्लीडिंग, या बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

चौथे महीने की प्रेगनेंसी के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

चौथे महीने में शिशु की हलचल कब महसूस होती है?

 

पहली प्रेगनेंसी में आमतौर पर 18 से 20 हफ्ते में शिशु की हलचल महसूस होती है। लेकिन अगर यह दूसरी या तीसरी प्रेगनेंसी है तो 16 हफ्ते के आसपास भी हलचल महसूस हो सकती है।

चौथे महीने में कितना वजन बढ़ना सामान्य है?

 

पूरी प्रेगनेंसी में 10 से 12 किलोग्राम वजन बढ़ना सामान्य माना जाता है। चौथे महीने तक 2 से 4 किलोग्राम वजन बढ़ना चाहिए।

क्या चौथे महीने में यात्रा करना सुरक्षित है?

 

हां, दूसरी तिमाही यात्रा के लिए सबसे सुरक्षित समय माना जाता है। लेकिन लंबी यात्रा में बीच-बीच में रुकें, पानी पीते रहें, और डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

क्या इस समय संबंध बनाना सुरक्षित है?

 

अगर प्रेगनेंसी सामान्य है और डॉक्टर ने मना नहीं किया है तो संबंध बनाना सुरक्षित है। लेकिन अगर पहले ब्लीडिंग हुई है, प्लेसेंटा नीचे है, या कोई अन्य समस्या है तो डॉक्टर से पूछें।

IVF प्रेगनेंसी में चौथे महीने में प्रोजेस्टेरोन बंद करना कब सुरक्षित है?

 

आमतौर पर 10 से 12 हफ्ते के बाद प्लेसेंटा खुद प्रोजेस्टेरोन बनाने लगता है। चौथे महीने में डॉक्टर धीरे-धीरे प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट कम करते हैं। यह हर महिला में अलग होता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना खुद बंद न करें।

चौथे महीने में कौन सी जांच सबसे जरूरी है?

 

ट्रिपल मार्कर टेस्ट, 15 से 20 हफ्ते में होने वाला और अल्ट्रासाउंड सबसे जरूरी हैं। ट्रिपल मार्कर से डाउन सिंड्रोम और न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का खतरा पता चलता है।

डॉक्टर से कब तुरंत संपर्क करें?

 

अगर से ब्लीडिंग हो, पानी जैसा तरल निकले, तेज पेट दर्द हो, तेज बुखार हो, या शिशु की हलचल अचानक बंद हो जाए तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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