चौथा महीना यानी 13 से 16 हफ्ते का समय प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही यानी सेकंड ट्राइमेस्टर (Second Trimester) की शुरुआत है। इस समय तक पहली तिमाही की मितली, उल्टी और थकान कम होने लगती है और ज्यादातर महिलाएं खुद को बेहतर महसूस करती हैं। इसीलिए इसे प्रेगनेंसी का सबसे आरामदायक समय माना जाता है। इस महीने शिशु तेजी से बढ़ता है। चौथे महीने के अंत तक शिशु लगभग 12 से 14 सेंटीमीटर लंबा और 100 से 120 ग्राम वजन का हो जाता है। Pregnancy ke 4 month ke lakshan की बात करें तो इस समय बेबी बंप (Baby Bump) दिखना शुरू होता है और कुछ महिलाओं को पहली बार शिशु की हल्की हलचल महसूस हो सकती है। IVF से गर्भधारण करने वाली महिलाओं के लिए यह वो समय है जब प्रेगनेंसी आमतौर पर स्थिर हो जाती है और प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट धीरे-धीरे बंद किया जाता है।
इस महीने आपके शरीर में कई बदलाव होते हैं जो बाहर से भी दिखने लगते हैं।
गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) अब पेल्विक एरिया से ऊपर आ जाता है और बेबी बंप दिखना शुरू होता है। यह हर महिला में अलग होता है, कुछ में जल्दी दिखता है और कुछ में देर से।
अब तक 2 से 4 किलोग्राम वजन बढ़ना सामान्य है। इस महीने हर हफ्ते लगभग 400 से 500 ग्राम वजन बढ़ सकता है।
स्तन और बड़े हो जाते हैं। निप्पल के आसपास का हिस्सा यानी एरियोला (Areola) गहरे रंग का हो जाता है।
कई महिलाओं को इस समय त्वचा में निखार आता है जिसे प्रेगनेंसी ग्लो (Pregnancy Glow) कहते हैं। लेकिन कुछ को पिगमेंटेशन (Pigmentation) या पेट पर नाभि से नीचे की तरफ एक गहरी रेखा दिख सकती है जिसे लीनिया निग्रा (Linea Nigra) कहते हैं।
प्रेगनेंसी हार्मोन की वजह से बाल घने और चमकदार हो सकते हैं।
पहली तिमाही के मुकाबले चौथे महीने में कुछ लक्षण कम हो जाते हैं और कुछ नए आते हैं।
चौथे महीने में शिशु का विकास बहुत तेजी से होता है। हर हफ्ते शिशु के आकार और अंगों में बदलाव होता है.
प्रेगनेंसी के चौथे महीने में कुछ जरूरी जांच होती हैं, जिन्हें करवाना माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य के लिए जरुरी होती हैं।
यह 15 से 20 हफ्ते के बीच होता है। खून की जांच से डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) और न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (Neural Tube Defect) का खतरा पता चलता है।
शिशु की ग्रोथ, दिल की धड़कन, और प्लेसेंटा (Placenta) की स्थिति देखी जाती है।
खून की कमी यानी एनीमिया (Anemia) की जांच। प्रेगनेंसी में हीमोग्लोबिन 11 ग्राम प्रति डेसीलीटर से ऊपर होना चाहिए।
यूरिन में प्रोटीन और शुगर की जांच होती है।
दूसरी तिमाही में आपको रोजाना लगभग 300 से 350 अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत होती है। लेकिन यह कैलोरी पोषक तत्वों से भरपूर खाने से मिलनी चाहिए, न कि जंक फूड (Junk Food) से।
IVF से गर्भधारण करने वाली महिलाओं के लिए चौथा महीना एक अहम पड़ाव है। इस समय तक आमतौर पर प्रेगनेंसी स्थिर हो जाती है और कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
प्रेगनेंसी का चौथा महीना सबसे आरामदायक समय माना जाता है। पहली तिमाही की मितली और थकान कम हो जाती है और आप खुद को बेहतर महसूस करती हैं। इस आर्टिकल में आपने pregnancy ke 4 month ke lakshan के साथ शरीर में होने वाले बदलाव, शिशु का हफ्ते दर हफ्ते विकास, जरूरी जांच, और IVF प्रेगनेंसी में विशेष देखभाल के बारे में जाना। सही खानपान, नियमित जांच, और डॉक्टर की सलाह से इस समय को और भी आसान बनाया जा सकता है। अगर कोई असामान्य लक्षण जैसे तेज पेट दर्द, ब्लीडिंग, या बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
पहली प्रेगनेंसी में आमतौर पर 18 से 20 हफ्ते में शिशु की हलचल महसूस होती है। लेकिन अगर यह दूसरी या तीसरी प्रेगनेंसी है तो 16 हफ्ते के आसपास भी हलचल महसूस हो सकती है।
पूरी प्रेगनेंसी में 10 से 12 किलोग्राम वजन बढ़ना सामान्य माना जाता है। चौथे महीने तक 2 से 4 किलोग्राम वजन बढ़ना चाहिए।
हां, दूसरी तिमाही यात्रा के लिए सबसे सुरक्षित समय माना जाता है। लेकिन लंबी यात्रा में बीच-बीच में रुकें, पानी पीते रहें, और डॉक्टर से जरूर पूछ लें।
अगर प्रेगनेंसी सामान्य है और डॉक्टर ने मना नहीं किया है तो संबंध बनाना सुरक्षित है। लेकिन अगर पहले ब्लीडिंग हुई है, प्लेसेंटा नीचे है, या कोई अन्य समस्या है तो डॉक्टर से पूछें।
आमतौर पर 10 से 12 हफ्ते के बाद प्लेसेंटा खुद प्रोजेस्टेरोन बनाने लगता है। चौथे महीने में डॉक्टर धीरे-धीरे प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट कम करते हैं। यह हर महिला में अलग होता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना खुद बंद न करें।
ट्रिपल मार्कर टेस्ट, 15 से 20 हफ्ते में होने वाला और अल्ट्रासाउंड सबसे जरूरी हैं। ट्रिपल मार्कर से डाउन सिंड्रोम और न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट का खतरा पता चलता है।
अगर से ब्लीडिंग हो, पानी जैसा तरल निकले, तेज पेट दर्द हो, तेज बुखार हो, या शिशु की हलचल अचानक बंद हो जाए तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।