6 Months Pregnancy in Hindi: लक्षण, विकास और सावधानियाँ।

Last updated: January 05, 2026

Overview

प्रेगनेंसी के छठे महीने में एक पल आता है जब आपका बच्चा पहली बार आपकी आवाज सुनकर प्रतिक्रिया देता है। जब आप उससे बात करती हैं, वह गर्भ में हिलता है। 6 Month pregnancy वह खास समय होता जब मां और बच्चे के बीच बॉन्डिंग शुरू होती है।

21 से 24 हफ्ते का यह समय प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही यानी सेकंड ट्राइमेस्टर (Second Trimester) का आखिरी महीना होता है। इस महीने के बाद तीसरी तिमाही शुरू होती है और आप डिलीवरी के करीब पहुंचने लगती हैं। छठा महीना एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन है, जिसके 24वें हफ्ते को डॉक्टर वायबिलिटी वीक (Viability Week) कहते हैं क्योंकि इसके बाद अगर किसी कारण से बच्चा समय से पहले जन्म ले, तो आधुनिक चिकित्सा से उसके बचने की संभावना होती है। 6 Month pregnancy in hindi में जानें तो इसी महीने GTT टेस्ट होता है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान डायबिटीज़ की जांच की जाती है।

छठे महीने में बच्चे का विकास

छठे महीने के अंत तक बच्चा लगभग 30 सेंटीमीटर लंबा और 650 से 900 ग्राम वजन का हो जाता है। आइए देखें हर हफ्ते क्या नया होता है।

21वां हफ्ता: स्वाद की शुरुआत

बच्चे की जीभ पर स्वाद कलिकाएं (Taste Buds) विकसित हो चुकी होती हैं। वह एमनियोटिक फ्लूइड निगलकर अलग-अलग स्वाद पहचानने लगता है। आप जो खाती हैं, उसका हल्का स्वाद बच्चे तक पहुंचता है। इस समय बच्चे का वजन करीब 360 ग्राम होता है।

22वां हफ्ता: आंखें खुलने लगीं

अब तक बंद रहने वाली पलकें अलग होने लगती हैं हालांकि आंखों में अभी रंग नहीं आता है। बच्चे की आंखों का रंग जन्म के कुछ महीनों बाद तक बदलता रहता है। वजन बढ़कर 430 ग्राम के करीब हो जाता है।

23वां हफ्ता: सुनने की शक्ति

यह वह हफ्ता है जब बच्चा बाहर की आवाजें साफ सुनने लगता है। आपकी आवाज, दिल की धड़कन, और पेट में गुड़गुड़ाहट सब सुनता है। तेज आवाज से वह चौंक सकता है। संगीत सुनाने का यह सही समय है। बच्चे का वजन लगभग 500 ग्राम होता है।

24वां हफ्ता: वायबिलिटी का मील का पत्थर

यह प्रेगनेंसी का एक बड़ा मील का पत्थर है। 24वें हफ्ते के बाद अगर किसी इमरजेंसी में बच्चा जन्म ले, तो NICU (Neonatal Intensive Care Unit) में उसकी देखभाल संभव है। फेफड़ों में सर्फैक्टेंट (Surfactant) बनना शुरू हो गया है जो सांस लेने में मदद करता है। बच्चे का वजन 600 से 650 ग्राम होता है।

मां के शरीर में बदलाव

छठे महीने में पेट का उभार साफ दिखता है और गर्भाशय नाभि से लगभग 6 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका होता है।

  • वजन: अब तक 6 से 9 किलोग्राम वजन बढ़ना सामान्य है। हर हफ्ते करीब आधा किलो बढ़ता है।
  • त्वचा: पेट पर गुलाबी या बैंगनी रंग की धारियां यानी स्ट्रेच मार्क्स दिख सकती हैं। नाभि बाहर निकल आती है।
  • स्तन: कुछ महिलाओं में कोलोस्ट्रम (Colostrum) यानी पहला पीला गाढ़ा दूध निकलने लगता है जो बच्चे के लिए बहुत पौष्टिक होता है।
  • बाल और नाखून: प्रेगनेंसी हार्मोन से बाल घने और चमकदार हो जाते हैं, नाखून तेजी से बढ़ते हैं।
  • लिनिया नाइग्रा: पेट के बीच में नाभि से नीचे तक एक गहरी रेखा बन सकती है जो डिलीवरी के बाद धीरे-धीरे हल्की हो जाती है।

प्रेगनेंसी के 6 महीने के लक्षण

छठे महीने में कुछ सिम्प्टम आराम देते हैं तो कुछ नई परेशानियां सामने आती हैं।

राहत देने वाले बदलाव:

  • पहली तिमाही की मतली और उल्टी अब लगभग खत्म हो चुकी है
  • थकान कम हो गई है और एनर्जी लेवल बेहतर है
  • बार-बार पेशाब आने की समस्या में थोड़ी राहत मिलती है क्योंकि गर्भाशय ऊपर उठ गया है

नई चुनौतियां:

  • पीठ दर्द: बढ़ते पेट से शरीर का गुरुत्वाकर्षण केंद्र बदलता है जिससे पीठ के निचले हिस्से पर दबाव पड़ता है
  • पैरों में सूजन: शाम को पैर और टखने फूल जाते हैं क्योंकि शरीर में पानी जमा होता है
  • रात को ऐंठन: पिंडलियों में अचानक ऐंठन हो सकती है जो कैल्शियम या मैग्नीशियम की कमी का संकेत है
  • सीने में जलन: गर्भाशय पेट पर दबाव डालता है जिससे एसिड ऊपर आता है
  • सांस फूलना: सीढ़ियां चढ़ने या थोड़ा चलने पर भी सांस फूलती है
  • खर्राटे: नाक की झिल्ली में सूजन से कुछ महिलाओं को खर्राटे आने लगते हैं
  • भूलने की आदत: प्रेगनेंसी ब्रेन (Pregnancy Brain) यानी छोटी-छोटी बातें भूल जाना आम है

GTT टेस्ट और अन्य जांच

छठे महीने में एक बहुत जरूरी टेस्ट होता है जिसे GTT यानी ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (Glucose Tolerance Test) कहते हैं।

GTT टेस्ट क्या है?

यह टेस्ट 24 से 28 हफ्ते के बीच होता है। इसमें पहले खाली पेट खून लिया जाता है, फिर 75 ग्राम ग्लूकोज का घोल पीना होता है, और 1 घंटे और 2 घंटे बाद फिर खून लिया जाता है। इससे पता चलता है कि शरीर शुगर को कैसे प्रोसेस कर रहा है।

जेस्टेशनल डायबिटीज क्यों जांचें?

लगभग 5 से 10% गर्भवती महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational Diabetes) होती है। अगर समय पर पता न चले तो बच्चे का वजन बहुत ज्यादा हो सकता है जिससे डिलीवरी में परेशानी आती है। बच्चे को जन्म के बाद लो शुगर की समस्या हो सकती है।

अन्य जांच:

  • हीमोग्लोबिन: 11 ग्राम/डेसीलीटर से ऊपर होना चाहिए। कम होने पर आयरन की गोली दी जाती है।
  • ब्लड प्रेशर: हर विजिट में जांच होती है। 140/90 से ऊपर जाना चिंता का विषय है।
  • यूरिन टेस्ट: इसमें प्रोटीन और शुगर की जांच होती है।

कैसा रखें खानपान?

छठे महीने में बच्चे का दिमाग और हड्डियां तेजी से विकसित हो रही हैं। इसलिए कुछ चीजें रोज की डाइट में शामिल करें।

रोज खाएं:

  • DHA के लिए: अखरोट, अलसी के बीज, या मछली का तेल। बच्चे के दिमाग के विकास के लिए जरूरी है।
  • कैल्शियम के लिए: 2 गिलास दूध या दही, पनीर का एक टुकड़ा। रोजाना 1000 मिलीग्राम कैल्शियम चाहिए।
  • आयरन के लिए: पालक, चुकंदर, अनार, खजूर। आयरन के साथ विटामिन C लें तो बेहतर अवशोषण होता है।
  • फाइबर के लिए: साबुत अनाज, ओट्स, फल जो कब्ज से बचाते हैं।

कम करें या बंद करें:

  • नमक कम करें क्योंकि यह सूजन बढ़ाता है
  • मीठा कम करें खासकर GTT के बाद
  • तला हुआ और मसालेदार खाना जो सीने में जलन बढ़ाता है
  • चाय-कॉफी दिन में 1 कप से ज्यादा नहीं

डॉक्टर के पास कब जायें?

ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  • योनि से खून आना या पानी जैसा तरल निकलना
  • तेज पेट दर्द जो आराम करने पर भी कम न हो
  • बच्चे की हलचल अचानक कम या बंद हो जाना
  • तेज सिरदर्द जो दवाई से न जाए
  • आंखों के सामने धुंधलापन या चमकीले धब्बे दिखना
  • चेहरे या हाथों में अचानक ज्यादा सूजन
  • पेशाब में जलन या बुखार
  • 10 मिनट में बार-बार पेट में कसाव या दर्द महसूस होना, जो आराम करने पर भी कम न हो

निष्कर्ष (Conclusion)

छठा महीना प्रेगनेंसी का वह पड़ाव है जहां बच्चा आपकी आवाज पहचानने लगता है और 24वें हफ्ते में वायबिलिटी का मील का पत्थर पार करता है। Pregnancy ke 6 month in hindi के अनुसार यह समय बच्चे की हलचल होना सबसे बड़ा बदलाव है जो हर मां के लिए यादगार अनुभव होता है। इस महीने GTT टेस्ट करवाना न भूलें क्योंकि जेस्टेशनल डायबिटीज का समय पर पता चलना जरूरी है। किक काउंट पर ध्यान दें और अगर बच्चे की हलचल कम लगे तो डॉक्टर से जरूर मिलें।

6 महीने की प्रेगनेंसी के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

छठे महीने में बच्चे की हलचल कब ज्यादा होती है?

 

खाना खाने के बाद, रात को सोते समय, और जब आप आराम कर रही हों तब बच्चा ज्यादा हिलता है। जब आप चल रही होती हैं तो बच्चा सो जाता है क्योंकि हिलना उसे झूले जैसा लगता है।

GTT टेस्ट में फेल होने का मतलब क्या है?

 

इसका मतलब जेस्टेशनल डायबिटीज है जो प्रेगनेंसी में होती है और आमतौर पर डिलीवरी के बाद ठीक हो जाती है। डाइट कंट्रोल और कभी-कभी इंसुलिन से इसे मैनेज किया जाता है।

24वें हफ्ते से पहले डिलीवरी हो जाए तो?

 

24 हफ्ते से पहले जन्मे बच्चे को बचाना बहुत मुश्किल होता है। 24वें हफ्ते के बाद NICU में करीब 50% बच्चे बच जाते हैं। 28 हफ्ते के बाद यह संभावना 90% से ज्यादा हो जाती है।

छठे महीने में कितना पानी पीना चाहिए?

 

दिन में 8 से 10 गिलास यानी 2 से 2.5 लीटर पानी पीएं। कम पानी पीने से यूटीआई, कब्ज, और ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन बढ़ सकते हैं।

छठे महीने में हवाई यात्रा कर सकते हैं?

 

हां, दूसरी तिमाही यात्रा के लिए सबसे सुरक्षित है। लेकिन लंबी फ्लाइट में हर 2 घंटे में उठकर चलें और खूब पानी पीएं। कुछ एयरलाइंस 28 हफ्ते के बाद डॉक्टर का सर्टिफिकेट मांगती हैं।

बच्चा कम हिल रहा है, क्या करें?

 

पहले कुछ ठंडा पानी पीएं और बाईं करवट लेट जाएं। अगर हलचल न हों तो डॉक्टर को फोन करें। वे आपको NST (Non-Stress Test) के लिए बुला सकते हैं।

IVF प्रेगनेंसी में छठे महीने के बाद दवाइयां बंद हो जाती हैं?

 

हां, ज्यादातर मामलों में प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट 12वें हफ्ते तक बंद हो जाता है। छठे महीने तक IVF प्रेगनेंसी नॉर्मल प्रेगनेंसी की तरह ही होती है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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