प्रेगनेंसी के छठे महीने में एक पल आता है जब आपका बच्चा पहली बार आपकी आवाज सुनकर प्रतिक्रिया देता है। जब आप उससे बात करती हैं, वह गर्भ में हिलता है। 6 Month pregnancy वह खास समय होता जब मां और बच्चे के बीच बॉन्डिंग शुरू होती है। 21 से 24 हफ्ते का यह समय प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही यानी सेकंड ट्राइमेस्टर (Second Trimester) का आखिरी महीना होता है। इस महीने के बाद तीसरी तिमाही शुरू होती है और आप डिलीवरी के करीब पहुंचने लगती हैं। छठा महीना एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन है, जिसके 24वें हफ्ते को डॉक्टर वायबिलिटी वीक (Viability Week) कहते हैं क्योंकि इसके बाद अगर किसी कारण से बच्चा समय से पहले जन्म ले, तो आधुनिक चिकित्सा से उसके बचने की संभावना होती है। 6 Month pregnancy in hindi में जानें तो इसी महीने GTT टेस्ट होता है जिससे प्रेगनेंसी के दौरान डायबिटीज़ की जांच की जाती है।
छठे महीने के अंत तक बच्चा लगभग 30 सेंटीमीटर लंबा और 650 से 900 ग्राम वजन का हो जाता है। आइए देखें हर हफ्ते क्या नया होता है।
बच्चे की जीभ पर स्वाद कलिकाएं (Taste Buds) विकसित हो चुकी होती हैं। वह एमनियोटिक फ्लूइड निगलकर अलग-अलग स्वाद पहचानने लगता है। आप जो खाती हैं, उसका हल्का स्वाद बच्चे तक पहुंचता है। इस समय बच्चे का वजन करीब 360 ग्राम होता है।
अब तक बंद रहने वाली पलकें अलग होने लगती हैं हालांकि आंखों में अभी रंग नहीं आता है। बच्चे की आंखों का रंग जन्म के कुछ महीनों बाद तक बदलता रहता है। वजन बढ़कर 430 ग्राम के करीब हो जाता है।
यह वह हफ्ता है जब बच्चा बाहर की आवाजें साफ सुनने लगता है। आपकी आवाज, दिल की धड़कन, और पेट में गुड़गुड़ाहट सब सुनता है। तेज आवाज से वह चौंक सकता है। संगीत सुनाने का यह सही समय है। बच्चे का वजन लगभग 500 ग्राम होता है।
यह प्रेगनेंसी का एक बड़ा मील का पत्थर है। 24वें हफ्ते के बाद अगर किसी इमरजेंसी में बच्चा जन्म ले, तो NICU (Neonatal Intensive Care Unit) में उसकी देखभाल संभव है। फेफड़ों में सर्फैक्टेंट (Surfactant) बनना शुरू हो गया है जो सांस लेने में मदद करता है। बच्चे का वजन 600 से 650 ग्राम होता है।
छठे महीने में पेट का उभार साफ दिखता है और गर्भाशय नाभि से लगभग 6 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका होता है।
छठे महीने में कुछ सिम्प्टम आराम देते हैं तो कुछ नई परेशानियां सामने आती हैं।
छठे महीने में एक बहुत जरूरी टेस्ट होता है जिसे GTT यानी ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट (Glucose Tolerance Test) कहते हैं।
यह टेस्ट 24 से 28 हफ्ते के बीच होता है। इसमें पहले खाली पेट खून लिया जाता है, फिर 75 ग्राम ग्लूकोज का घोल पीना होता है, और 1 घंटे और 2 घंटे बाद फिर खून लिया जाता है। इससे पता चलता है कि शरीर शुगर को कैसे प्रोसेस कर रहा है।
लगभग 5 से 10% गर्भवती महिलाओं में जेस्टेशनल डायबिटीज (Gestational Diabetes) होती है। अगर समय पर पता न चले तो बच्चे का वजन बहुत ज्यादा हो सकता है जिससे डिलीवरी में परेशानी आती है। बच्चे को जन्म के बाद लो शुगर की समस्या हो सकती है।
छठे महीने में बच्चे का दिमाग और हड्डियां तेजी से विकसित हो रही हैं। इसलिए कुछ चीजें रोज की डाइट में शामिल करें।
ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
छठा महीना प्रेगनेंसी का वह पड़ाव है जहां बच्चा आपकी आवाज पहचानने लगता है और 24वें हफ्ते में वायबिलिटी का मील का पत्थर पार करता है। Pregnancy ke 6 month in hindi के अनुसार यह समय बच्चे की हलचल होना सबसे बड़ा बदलाव है जो हर मां के लिए यादगार अनुभव होता है। इस महीने GTT टेस्ट करवाना न भूलें क्योंकि जेस्टेशनल डायबिटीज का समय पर पता चलना जरूरी है। किक काउंट पर ध्यान दें और अगर बच्चे की हलचल कम लगे तो डॉक्टर से जरूर मिलें।
खाना खाने के बाद, रात को सोते समय, और जब आप आराम कर रही हों तब बच्चा ज्यादा हिलता है। जब आप चल रही होती हैं तो बच्चा सो जाता है क्योंकि हिलना उसे झूले जैसा लगता है।
इसका मतलब जेस्टेशनल डायबिटीज है जो प्रेगनेंसी में होती है और आमतौर पर डिलीवरी के बाद ठीक हो जाती है। डाइट कंट्रोल और कभी-कभी इंसुलिन से इसे मैनेज किया जाता है।
24 हफ्ते से पहले जन्मे बच्चे को बचाना बहुत मुश्किल होता है। 24वें हफ्ते के बाद NICU में करीब 50% बच्चे बच जाते हैं। 28 हफ्ते के बाद यह संभावना 90% से ज्यादा हो जाती है।
दिन में 8 से 10 गिलास यानी 2 से 2.5 लीटर पानी पीएं। कम पानी पीने से यूटीआई, कब्ज, और ब्रेक्सटन हिक्स संकुचन बढ़ सकते हैं।
हां, दूसरी तिमाही यात्रा के लिए सबसे सुरक्षित है। लेकिन लंबी फ्लाइट में हर 2 घंटे में उठकर चलें और खूब पानी पीएं। कुछ एयरलाइंस 28 हफ्ते के बाद डॉक्टर का सर्टिफिकेट मांगती हैं।
पहले कुछ ठंडा पानी पीएं और बाईं करवट लेट जाएं। अगर हलचल न हों तो डॉक्टर को फोन करें। वे आपको NST (Non-Stress Test) के लिए बुला सकते हैं।
हां, ज्यादातर मामलों में प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट 12वें हफ्ते तक बंद हो जाता है। छठे महीने तक IVF प्रेगनेंसी नॉर्मल प्रेगनेंसी की तरह ही होती है।