7 महीने की प्रेग्नेंसी – लक्षण, विकास और बदलाव

Last updated: January 05, 2026

Overview

प्रेगनेंसी का सातवां महीना मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद खास और अहम होता है। इस स्टेज तक सेकंड ट्राइमेस्टर पूरा हो चुका होता है और थर्ड ट्राइमेस्टर शुरू हो जाता है। इस दौरान बच्चा तेजी से बढ़ने लगता है, जिसका असर मां के शरीर में साफ दिखाई देने लगता है। क्योंकि अब पेट पहले से ज्यादा बाहर आने के साथ ही बच्चे की मूवमेंट्स यानी बच्चे की हलचल और किक भी पहले से ज्यादा महसूस होने लगती हैं। 7 month pregnancy in hindi में हम 7 महीने की प्रेगनेंसी के दौरान दिखने वाले लक्षण, बच्चे के विकास, और इस समय बरती जाने वाली जरूरी सावधानियों के बारे में बात करेंगे। इसके साथ यह भी जानेंगे कि इन दिनों में मां अपनी सेहत का सही तरीके से ख्याल कैसे रख सकती है जिससे बच्चा अच्छी तरह और स्वस्थ तरीके से बढ़े और आप एक हेल्दी बेबी को जन्म देने के साथ खुद भी स्वस्थ रह सकें।

7 महीने में होने वाले बच्चे का विकास

प्रेगनेंसी के सातवें महीने के दौरान बच्चा सिर्फ आकार यानी साइज में ही नहीं बढ़ता, बल्कि उसके दिमाग, अंदरूनी अंग और इंद्रियां भी तेजी से काम करने लगती हैं। इसी कारण मां को अब बच्चे की हर छोटी बड़ी हरकत पहले से ज्यादा साफ और ज्यादा महसूस होने लगती है। चलिए जानते हैं सातवें महीने में बच्चों के विकास में किस तरह के बदलाव होते हैं।

  • गतिविधि और प्रतिक्रिया इस महीने बच्चे की मूवमेंट काफी एक्टिव हो जाती है, जिससे वह बार बार लात मारता है, करवट बदलता है और हाथ पैर हिलाता रहता है। इसके साथ ही बच्चा मां की आवाज, आसपास की हलचल और हल्के स्पर्श पर भी प्रतिक्रिया देने लगता है, जिसकी वजह से पेट में हलचल पहले से ज्यादा महसूस होती है।
  • आंखें और हरकतें सातवें महीने में बच्चे की किक्स पहले से ज्यादा तेज और मजबूत महसूस होने लगती हैं और इसी के साथ ही बच्चा आंखें खोलना और बंद करना भी सीख जाता है।
  • अंगों का विकास इस समय बच्चे के फेफड़े तेजी से विकसित होते हैं और उनमें सर्फैक्टेंट बनना शुरू हो जाता है, जिससे जन्म के बाद सांस लेने में मदद मिलती है। इसके साथ ही पाचन तंत्र मजबूत होने लगता है और दिमाग का विकास भी तेजी से होता है।
  • त्वचा और बालों का विकास सातवें महीने में बच्चे के शरीर पर नर्म बाल उगने लगते हैं, जिन्हें लैनूगो कहा जाता है। इसके साथ ही त्वचा के नीचे फैट जमा होने लगता है, जिससे त्वचा पहले से ज्यादा मुलायम और भरी हुई दिखने लगती है।
  • बच्चे का आकार और वजन सातवें महीने तक बच्चा करीब 15 से 16 इंच लंबा हो सकता है और उसका वजन लगभग 1.2 से 1.5 किलो तक पहुंच जाता है।

सातवें महीने में महसूस होने वाले बदलाव

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में मां के शरीर में कई बदलाव महसूस होने लगते हैं, जो बच्चे के तेजी से बढ़ने का संकेत देते हैं।

  • पैरों और हाथों में सूजन सातवें महीने में शरीर में फ्लूड जमा होने और ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव होने की वजह से पैरों, टखनों और हाथों में हल्की सूजन आ सकती है। इसलिए इन दिनों में ज्यादा देर तक खड़े रहने से बचने के साथ ही आराम करते समय पैरों को थोड़ा ऊपर रखकर लेटें।
  • सांस जल्दी फूलना पेट बड़ा होने के कारण गर्भाशय और फेफड़ों के आसपास की जगह कम हो जाती है। इसलिए इस समय हल्का काम करने या थोड़ी दूरी चलने पर भी सांस फूल सकती है। ऐसे होने पर सीधा बैठें और धीरे-धीरे गहरी सांस लेने की आदत डालें।
  • बार-बार पेशाब लगना बच्चा बड़ा होने के कारण ब्लैडर पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे बार-बार पेशाब करने की जरूरत महसूस हो सकती है।
  • सीने में जलन और पेट की गड़बड़ी हार्मोनल बदलाव और बढ़ता हुआ गर्भाशय पेट पर दबाव डालते हैं, जिससे खाने के बाद सीने में जलन, गैस या अपच हो सकती है। इससे बचने के लिए आप थोड़ा-थोड़ा भोजन कई बार करें और ज्यादा मसालेदार या तला हुआ खाना कम करें।
  • कमर दर्द और जोड़ों में परेशानी पेट का वजन बढ़ने और हार्मोनल बदलावों की वजह से शरीर का संतुलन बदल जाता है, खासकर पेल्विक एरिया में। इससे बचने के लिए सही पोस्चर बनाए रखें, हल्की स्ट्रेचिंग करें और जरूरत पड़ने पर सपोर्ट बेल्ट का इस्तेमाल करें।
  • पेट में हल्का कसाव महसूस होना इन दिनों में कभी-कभी हल्का कसाव या खिंचाव महसूस हो सकता है, जिसे ब्रैक्सटन हिक्स कॉन्ट्रैक्शन कहते हैं। यह असली लेबर पेन नहीं होता। ऐसे में आराम करने और पानी पीने से राहत मिलती है लेकिन, अगर दर्द तेज हो या नियमित रूप से होने लगे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
  • चक्कर आना और जल्दी थक जाना बच्चे की तेजी से बढ़त के कारण शरीर को ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है। इसके चलते कभी-कभी चक्कर या जल्दी थकान महसूस हो सकती है। इसलिए इन दिनों में समय पर खाना खाएं, भरपूर पानी पिएं और अचानक उठने-बैठने से बचें।

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में क्या खाना चाहिए

प्रेगनेंसी का सातवां महीना बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत अहम होता है। इसलिए इस समय मां को संतुलित और पोषक आहार लेना जरूरी होता है, ताकि बच्चा सही तरह से बढ़े और मां की सेहत भी बनी रहे। डॉक्टर की सलाह से आप इन दिनों में आयरन के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें और नॉन वेज फूड, कैल्शियम के लिए दूध, दही, पनीर और फोर्टिफाइड सीरियल और ओमेगा 3 के लिए मछली, अखरोट और अलसी खा सकती है । इसके साथ ही शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पानी, नारियल पानी, सूप या ताजे फलों का जूस का सेवन भी आप कर सकती है।

प्रेगनेंसी के 7 महीने में क्या क्या सावधानी रखनी चाहिए

  • प्रेगनेंसी के सातवें महीने में संतुलित और पोषक आहार के साथ रोजमर्रा की आदतों पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है, क्योंकि इस समय की लापरवाही आगे चलकर परेशानी बढ़ा सकती है।
  • शरीर को एक्टिव रखने के लिए रोजाना थोड़ी देर टहलना, प्रेगनेंसी योग या पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज करना फायदेमंद होता है, जिससे कमर-पीठ दर्द कम होता है और नींद भी बेहतर आती है।
  • सही नींद के लिए मैटरनिटी पिलो का इस्तेमाल करें और बाईं करवट सोने की आदत डालें, ताकि गर्भ में बच्चे तक खून और ऑक्सीजन का प्रवाह ठीक बना रहे।
  • इस दौरान बच्चे की मूवमेंट पर नियमित ध्यान देना जरूरी होता है, क्योंकि आमतौर पर स्वस्थ बच्चा दो घंटे में लगभग 10 बार हलचल करता है।
  • अगर बच्चे की हलचल कम लगे, लंबे समय तक महसूस न हो, योनी से खून आए, पेट में लगातार दर्द हो या चेहरे और हाथों में अचानक सूजन दिखे, तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

सातवें महीने में इमोशनली अच्छा महसूस कैसे करें?

प्रेगनेंसी के सातवें महीने में सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि मां की भावनाओं में भी बदलाव होते हैं। इस दौरान कभी अचानक खुशी महसूस हो सकती है, तो कभी बिना वजह उदासी या चिड़चिड़ापन भी आ सकता है। इसके साथ ही बच्चे की सेहत, अपनी सेहत या डिलीवरी को लेकर चिंता और तनाव भी सामान्य हैं।

  • अगर मन में कोई चिंता, डर या उलझन हो, तो उसे अपने साथी, परिवार या किसी भरोसेमंद दोस्त से खुलकर साझा करना चाहिए, जिससे तनाव कम होता है और मन हल्का महसूस करता है।
  • रोजाना कुछ समय अपने लिए निकालना, जैसे पसंद का संगीत सुनना, हल्की पढ़ाई करना या शांत माहौल में बैठना, भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
  • ध्यान और सांस से जुड़ी एक्सरसाइज नियमित रूप से करने से घबराहट कम होती है, मन को सुकून मिलता है और नींद की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

प्रेगनेंसी का सातवां महीना मां और बच्चे दोनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दौरान शरीर और मन में कई बदलाव हो रहे होते हैं और साथ ही बच्चे का डेवलपमेंट भी बहुत तेजी से हो रहा होता है। 7 month pregnancy in hindi से जुड़ी सही जानकारी होने पर मां अपने लक्षणों को बेहतर तरीके से समझ पाती है और समय रहते जरूरी सावधानियां अपना सकती है। इसलिए संतुलित आहार, हल्की एक्सरसाइज, पूरा आराम और मानसिक शांति बनाए रखना जरूरी है। साथ ही बच्चे की हलचल पर ध्यान देना और किसी भी असामान्य लक्षण के दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना सुरक्षित प्रेगनेंसी के लिए बेहद अहम होता है।

Common Questions Asked

किन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

 

अगर पेट में तेज या लगातार दर्द हो, सूजन आ जाए, वेजाइना से ब्लीडिंग हो या बच्चे की हलचल कम महसूस हो, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।

क्या सातवें महीने में यात्रा करना सुरक्षित होता है?

 

इन दिनों में छोटा सफर करना सही होता है, लेकिन यात्रा करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरुर लें।

पैरों में ऐंठन या खिंचाव को कैसे कम किया जा सकता है?

 

पैरों में ऐंठन या खिंचाव कम करने के लिए सोने से पहले हल्की स्ट्रेचिंग करें, पानी पिएं और खाने में कैल्शियम और मैग्नीशियम वाली चीजें शामिल करें।

सातवें महीने में ज्यादा थकान, सांस फूलना या घबराहट क्यों महसूस होती है?

 

बच्चे की तेजी से बढ़ती ग्रोथ और बढ़ते गर्भाशय के कारण इन दिनों में थकान, सांस फूलना और हल्की घबराहट होना आम हैं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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