मासिक धर्म यानी पीरियड्स महिलाओं के शरीर का एक नेचुरल और रेगुलर प्रोसेस है। आमतौर पर हर महीने पीरियड आना इस बात का सिग्नल है कि शरीर में हॉर्मोन का सिस्टम और ओवुलेशन साइकिल सामान्य रूप से काम कर रही है।
लेकिन कई बार ऐसा होता है कि पीरियड अचानक रुक जाते हैं और प्रेग्नेंसी भी नहीं होती। ऐसी स्थिति में अक्सर भ्रम और चिंता दोनों बढ़ जाती हैं कि आखिर शरीर में ऐसा क्या हो रहा है?
आम तौर पर जब लगातार तीन महीने या उससे अधिक समय तक पीरियड का न आना एमेनोरिया (Amenorrhea) कहलाता है। Amenorrhea अपने आप में कोई बीमारी नहीं होती, बल्कि शरीर एक सिग्नल दे रहा होता है कि अंदर कहीं न कहीं बैलेंस गड़बड़ हो रहा है।
अगर फर्टिलिटी की बात हो तो यह समझना भी जरूरी है कि जब पीरियड नहीं आते, तो अक्सर इसका मतलब होता है कि ओवुलेशन नहीं हो रहा। और जब एग ही नहीं बन रहा, तो गर्भधारण यानी प्रेगनेंसी (pregnancy) भी नहीं होती है।
आगे समझते हैं Amenorrhea meaning in hindi, इसके मुख्य कारण क्या हो सकते हैं, यह फर्टिलिटी को कैसे प्रभावित करता है और कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
Amenorrhea का मतलब है पीरियड का न आना। लेकिन हर बार पीरियड का देर से आना एमेनोरिया नहीं होता। कई बार स्ट्रेस, बीमारी, ट्रेवल या लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण पीरियड एक-दो महीने देर से भी आ सकते हैं।
डॉक्टर आमतौर पर एमेनोरिया तब मानते हैं जब प्रेगनेंसी न होने के बावजूद लगातार तीन महीने या उससे अधिक समय तक मेंस्ट्रुएशन नहीं होता।
कुछ कंडीशन में पीरियड का न आना बिल्कुल नार्मल होता है, ये कंडीशन हैं।
इन कंडीशन को एमेनोरिया की समस्या नहीं माना जाता क्योंकि यह शरीर की नेचुरल कंडीशन होती है।
एमेनोरिया सभी महिलाओं में एक जैसा नहीं होता। इसकी दो कैटेगरी होती हैं।
जब किसी लड़की को 15–16 साल की उम्र तक पहली बार भी पीरियड्स आने शुरू नहीं होते, तो इसे प्राइमरी एमेनोरिया कहा जाता है।
वैसे तो यह कंडीशन कम देखने को मिलती है, लेकिन अगर किसी महिला को प्राइमरी एमेनोरिया होता है तो उसके पीछे अक्सर कुछ जन्मजात कारण हो सकते हैं।
इस कंडीशन में डॉक्टर आमतौर पर हॉर्मोन की जाँच और इमेजिंग टेस्ट जैसे पेल्विक अल्ट्रासाउंड, MRI इत्यादि के माध्यम से कारण का पता लगाने की कोशिश करते हैं।
सेकंडरी एमेनोरिया कॉमन होता है। अगर किसी महिला को पहले रेगुलर पीरियड्स आते थे लेकिन बाद में तीन महीने या उससे अधिक समय तक मेंस्ट्रुएशन बंद हो जाता है, तो इसे Secondary Amenorrhea कहा जाता है।
जब किसी महिला को फर्टिलिटी से संबंधित समस्या होती है यही कंडीशन अधिक देखने को मिलती है।
पीरियड आना हर महीने केवल खून का निकलना नहीं है। शरीर में हॉर्मोन से संबंधित बहुत से बदलाव होते हैं, इसके साथ ही ओवुलेशन भी होता है, पीरियड्स आना यानी मेंस्ट्रुएशन इन्हीं सारे फंक्शन का आखिरी स्टेप होता है।
जब पीरियड बंद हो जाते हैं, तो अक्सर इसका मतलब होता है कि शरीर के अंदर चलने वाली यह सारे फंक्शन कहीं न कहीं प्रभावित हो रहे हैं।
पीरियड हर महीने तभी आते हैं जब ओवुलेशन होता है, लेकिन प्रेगनेंसी नहीं होती। लेकिन अगर ओवुलेशन ही नहीं हो रहा मतलब एग नहीं बन रहा है, तो गर्भाशय की परत यानी एंडोमेट्रियम नॉर्मल तरीके से नहीं बनेगी और इस कंडीशन में पीरियड रुक सकते हैं।
ऐसी स्थिति का एक सामान्य कारण PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) है, जिसमें ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बन जाते हैं और एग पूरी तरह मैच्योर नहीं हो पाता।
पीरियड साइकिल कई हॉर्मोन के संतुलन पर निर्भर करती है। जब इन हॉर्मोन के लेवल में गड़बड़ी हो जाती है, तो ओवुलेशन पर असर पड़ता है और पीरियड्स या तो रुक जाते हैं या अनियमित हो जाते हैं।
इसके अलावा थायरॉइड की समस्या, प्रोलैक्टिन (Prolactin) हॉर्मोन का बढ़ना, या पिट्यूटरी ग्लैंड (Pituitary Gland) की गड़बड़ी भी पीरियड्स को प्रभावित कर सकते हैं।
कभी-कभी शरीर खुद ही रिप्रोडक्टिव प्रोसेस को अस्थायी रूप से रोक देता है। ऐसा तब होता है जब आपके ऊपर बहुत ज्यादा फिजिकल या मेंटल प्रेशर होता है, यह एक तरीके से आपका सुरक्षा तंत्र यानी डिफेंस सिस्टम होता है। इस कंडीशन को हाइपोथैलेमिक एमेनोरिया (Hypothalamic Amenorrhea) कहा जाता है।
कुछ महिलाओं में ओवरी अन्य महिलाओं की तुलना में जल्दी कमजोर हो जाती है और एग्स की संख्या घटने लगती है। इस कंडीशन को POI यानी प्रीमैच्योर ओवेरियन इंसफिशिएंसी (Premature Ovarian Insufficiency) कहा जाता है।
पीओआई में शुरुआत में पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं, फिर धीरे धीरे मेंस्ट्रुएशन साइकिल के बीच अंतर बढ़ने लगता है और कुछ केस में पीरियड्स बिलकुल बंद हो सकते हैं
प्रेगनेंसी के लिए एग बनना ज़रूरी है। अगर एग ही नहीं बन रहा, तो स्पर्म से मिलेगा क्या? और जब स्पर्म से कुछ मिलेगा ही नहीं तो फर्टिलाइजेशन वाला प्रोसेस ही नहीं होगा। इसीलिए एमेनोरिया सीधे इनफर्टिलिटी से जुड़ा है।
जब किसी महिला को 6 महीने या साल भर से पीरियड्स नहीं आ रहे, तो डॉक्टर सबसे पहले यही देखते हैं कि ओवुलेशन क्यों नहीं हो रहा। फिर उसका कारण पता करके इलाज किया जाता है।
अच्छी बात यह है कि एमेनोरिया का इलाज उपलब्ध है और ज़्यादातर मामलों में दवाइयों से ओवुलेशन फिर से शुरू हो जाता है, जिसके बाद प्रेगनेंसी संभव हो जाती है।
एमेनोरिया का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है।
PCOS होने पर डॉक्टर नीचे दिए उपाय बताते हैं।
अगर लाइफस्टाइल में बदलाव से फ़ायदा न मिले तो डॉक्टर ओवुलेशन शुरू करने के लिए दवाएं भी दे सकते हैं। फिर भी प्रेगनेंसी न हो तो माँ बनने के लिए IUI या IVF जैसे ऑप्शन भी होते हैं।
थायरॉइड हॉर्मोन शरीर के कई कामों को कंट्रोल करता है, जिनमें से एक पीरियड्स यानी मेंस्ट्रुएशन भी है। अगर थायरॉइड का लेवल सही नहीं है, तो उसकी दवाइयों से लेवल सही करके पीरियड साइकिल फिर से रेगुलर हो सकती है।
कुछ महिलाओं में प्रोलैक्टिन हॉर्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे ओवुलेशन पर असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में दवाइयों से इसके लेवल को कंट्रोल किया जा सकता है और पीरियड्स वापस शुरू किये जा सकते हैं।
अगर समस्या बहुत कम वज़न होने, स्ट्रेस या बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने से जुड़ी है, तो लाइफस्टाइल में बदलाव करके पीरियड्स को फिर से शुरू किया जा सकता है।
सही डाइट, पर्याप्त आराम और स्ट्रेस को सही कर लेने से कई बार स्थिति धीरे धीरे सुधर जाती है।
POI में ओवरी की क्षमता कम हो जाती है, इसके अलावा ओवरी में एग्स बहुत कम बचे होते हैं। कुछ केस में IVF की मदद से माँ बना जा सकता है।
अगर पीरियड नहीं आ रहे हों, तो कई महिलाओं को लगता है कि गर्भधारण संभव नहीं है। लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। प्रेगनेंसी होगी या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि एमेनोरिया का कारण क्या है।
पीरियड्स से संबंधित समस्या लंबे समय तक अनदेखा नहीं करना चाहिए। नीचे दी गयी कंडीशन में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
Amenorrhea यानी लंबे समय तक पीरियड का न आना शरीर का एक सिग्नल है कि अंदर कहीं न कहीं बैलेंस बिगड़ रहा है। जिसका कारण हॉर्मोन में बदलाव, PCOS, लाइफस्टाइल या ओवरी की क्षमता कम होना इत्यादि हो सकते हैं।
अगर फर्टिलिटी की बात की जाये तो पीरियड का न आना अक्सर ओवुलेशन के रुकने का लक्षण होता है। हालाँकि अच्छी बात यह है कि कई मामलों में सही कारण की पहचान कर ट्रीटमेंट किया जाए तो ओवुलेशन फिर से शुरू हो सकता है और प्रेगनेंसी की संभावना भी बन सकती है।
अगर लंबे समय से पीरियड नहीं आ रहे हैं और आप माँ बनने की योजना बना रही हैं, तो सही समय पर जाँच और सलाह लेना महत्वपूर्ण होता है।