Birth Asphyxia क्या है? नवजात में ऑक्सीजन की कमी के कारण और इलाज

Last updated: September 17, 2026

सारांश (Overview)

जन्म के तुरंत बाद बच्चा ठीक से सांस न ले या रोने में देर हो, तो माता पिता के मन में चिंता होना स्वाभाविक है। ऐसा तब होता है जब बच्चे तक ऑक्सीजन ठीक से न पहुंची हो। 

जन्म के आसपास बच्चे तक ऑक्सीजन और खून की सप्लाई कम पड़ने को Birth Asphyxia कहा जाता है। यह प्रसव से पहले, प्रसव के दौरान या जन्म के तुरंत बाद हो सकता है। इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि ऑक्सीजन की कमी कितनी देर रही और कितनी गंभीर थी।

आगे जानेंगे कि Birth Asphyxia क्यों होता है, इसकी पहचान कैसे की जाती है, इलाज में क्या किया जाता है और इसका बच्चे के आगे की ग्रोथ पर क्या असर पड़ सकता है।

Birth asphyxia क्या है और यह कब होता है?

जन्म से ठीक पहले, जन्म के दौरान या उसके तुरंत बाद बच्चे तक ऑक्सीजन और खून की सप्लाई कम पड़ने को Birth Asphyxia कहा जाता है।

शरीर का हर अंग ऑक्सीजन से मिलने वाली ऊर्जा पर काम करता है। जब ऑक्सीजन कम पड़ती है, तो शरीर बिना ऑक्सीजन के ऊर्जा बनाने लगता है और खून में एसिड जमा होने लगता है। यही बदलाव आगे चलकर शरीर के अलग-अलग अंगों को प्रभावित कर सकता है।

इसमें समय सबसे ज्यादा मायने रखता है। थोड़े समय के लिए ऑक्सीजन की कमी होने पर शरीर अक्सर खुद संभल जाता है। लेकिन ऑक्सीजन की कमी लंबे समय तक रहे, तो पहले दिमाग और फिर किडनी, दिल और फेफड़ों पर असर पड़ सकता है।

ज्यादातर मामले प्रसव के दौरान होते हैं। करीब 20% मामले प्रसव शुरू होने से पहले होते हैं और कुछ मामले जन्म के तुरंत बाद के घंटों में सामने आते हैं।

एक बात और। जन्म के बाद बच्चे को रोने में थोड़ी देर होना अपने आप Birth Asphyxia का मतलब नहीं है। कई बच्चे कुछ सेकंड की मदद के बाद ठीक से सांस लेने लगते हैं और आगे कोई दिक्कत नहीं होती।

नवजात में ऑक्सीजन की कमी के क्या कारण हैं?

इसके कारण इस बात पर निर्भर करते हैं कि ऑक्सीजन की कमी प्रसव से पहले, प्रसव के दौरान या जन्म के तुरंत बाद हुई है। 

कब

कॉमन कारण

बच्चे तक क्या असर पहुँचता है 

प्रसव से पहले

प्री-एक्लेम्पसिया, बच्चे की ग्रोथ रुक जाना, माँ को गंभीर एनीमिया, इन्फेक्शन, बेकाबू शुगर

प्लेसेंटा से ऑक्सीजन की सप्लाई पहले से कमजोर रहती है

प्रसव के दौरान

प्लेसेंटा का समय से पहले अलग होना, गर्भनाल का दबना या पहले निकल आना, लंबा और मुश्किल प्रसव, कंधा फंसना, गर्भाशय का फटना

बच्चे तक ऑक्सीजन की सप्लाई अचानक या धीरे-धीरे कम हो सकती है 

जन्म के तुरंत बाद

बहुत कम वजन या समय से पहले जन्म, फेफड़ों का न खुल पाना, गंभीर इन्फेक्शन, जन्मजात दिल की दिक्कत

बच्चा खुद से ठीक तरह सांस नहीं ले पाता 

इनमें से कई कारणों का पता प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली नियमित जांच से चल सकता है। वहीं, प्रसव के दौरान बच्चे की धड़कन पर नजर रखना जरूरी होता है, ताकि ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने पर समय रहते फैसला लिया जा सके। 

बर्थ एस्फिक्सिया की पहचान कैसे की जाती है?

जन्म के तुरंत बाद बच्चे की हालत देखकर डॉक्टर सबसे पहले यह देखते हैं कि उसे सांस लेने में दिक्कत तो नहीं है और उसे कितनी मदद की जरूरत है। इसके लिए Apgar स्कोर लिया जाता है, लेकिन सिर्फ इसी स्कोर से Birth Asphyxia की पुष्टि नहीं होती।

जहां ऑक्सीजन की कमी का शक हो, वहां कुछ और जांचें की जाती हैं। 

  • गर्भनाल के खून की जांच: इससे पता चलता है कि बच्चे के खून में एसिड कितना बढ़ा हुआ है।
  • खून की दूसरी जांचें: किडनी, लिवर और दिल पर इसका कोई असर हुआ है या नहीं, यह देखने के लिए।
  • MRI: दिमाग पर ऑक्सीजन की कमी का असर कहां और कितना हुआ है, यह देखने के लिए। यह जांच आमतौर पर जन्म के कुछ दिन बाद की जाती है।

इन सभी जांचों को बच्चे के लक्षण और उसके व्यवहार के साथ देखा जाता है। इससे डॉक्टर यह समझ पाते हैं कि ऑक्सीजन की कमी कितनी गंभीर थी और आगे किस तरह की निगरानी या इलाज की जरूरत है।

Apgar स्कोर क्या बताता है?

जन्म के तुरंत बाद बच्चे में पांच चीजें देखी जाती हैं। हर चीज के लिए 0, 1 या 2 नंबर दिए जाते हैं, यानी कुल स्कोर 10 होता है। 

 

क्या देखा जाता है

किस बात पर नंबर मिलते हैं

धड़कन

धड़कन है या नहीं, और कितनी तेज है

सांस

रोना और सांस लेने की कोशिश

मांसपेशियों का तनाव

हाथ-पैर मुड़े हुए और हिलते हुए हैं या ढीले

प्रतिक्रिया

छूने पर बच्चा रोता, खांसता या कोई दूसरी प्रतिक्रिया देता है या नहीं 

रंग

त्वचा का रंग, खासकर होंठ और शरीर का बीच का हिस्सा

Apgar स्कोर आमतौर पर जन्म के पहले और पांचवें मिनट पर लिया जाता है। 5 मिनट पर 7 से 10 का स्कोर सामान्य, 4 से 6 मध्यम रूप से असामान्य और 0 से 3 कम माना जाता है।

यह स्कोर डॉक्टर को यह समझने में मदद करता है कि जन्म के तुरंत बाद बच्चे की हालत कैसी है और उसे कितनी मदद की जरूरत है। लेकिन Apgar स्कोर अकेले Birth Asphyxia की पुष्टि नहीं करता और न ही इससे बच्चे के आगे के विकास का फैसला किया जा सकता है। इसके लिए बच्चे की पूरी स्थिति और दूसरी जांचों को भी देखा जाता है।

ऑक्सीजन की कमी का दिमाग पर कितना असर पड़ता है?

जब ऑक्सीजन की कमी दिमाग तक पहुंचती है, तो उससे पड़ने वाले असर को तीन कैटेगरी में बांटा जाता है। यह डिवीज़न समझना इसलिए जरुरी है क्योंकि बच्चे को लेकर आगे की पूरी उम्मीद इसी पर निर्भर करती है।

कैटेगरी

बच्चे में क्या दिखता है

आगे क्या उम्मीद रहती है

हल्की

बच्चा ज्यादा सतर्क और चिड़चिड़ा, नींद कम, दूध पीने में थोड़ी दिक्कत

ज्यादातर बच्चे कुछ दिनों में सामान्य हो जाते हैं

मध्यम

सुस्ती, मांसपेशियां ढीली, दूध पीने में दिक्कत, कई बार दौरे

कुछ बच्चों में आगे ग्रोथ से जुड़ी दिक्कतें रह सकती हैं

गंभीर

बेहोशी जैसी स्थिति, शरीर बिल्कुल ढीला, सांस में मदद की जरूरत

रिस्क सबसे ज्यादा, क्लोज़ ऑब्ज़र्वेशन जरूरी

जन्म के बाद पहले 72 घंटों में क्या किया जाता है?

इस कंडीशन में जन्म के बाद का हर मिनट और घंटा महत्वपूर्ण होता है। शुरुआत में बच्चे की सांस और धड़कन पर ध्यान दिया जाता है। इसके बाद अगले कुछ घंटों में दिमाग और शरीर के दूसरे अंगों पर नजर रखी जाती है। 

समय

क्या किया जाता है

क्यों

पहला मिनट

बच्चे को पोंछकर गर्म रखना, सांस का रास्ता साफ करना और जरूरत होने पर मास्क से सांस देना 

बच्चे की सांस शुरू कराने के लिए 

पहले 10 मिनट

सांस और धड़कन पर लगातार नजर रखना। जरूरत पड़ने पर छाती दबाकर CPR और दवाएं देना 

दिल की धड़कन और शरीर में खून का बहाव बनाए रखने के लिए 

पहला घंटा

बच्चे को NICU में रखना, शुगर और शरीर का तापमान संभालना और ऑक्सीजन का स्तर सही सीमा में रखना 

ऑक्सीजन की कमी से होने वाली आगे की परेशानी को कम करने के लिए 

पहले 6 घंटे

बच्चे के दिमाग की स्थिति देखना, दौरे पर नजर रखना और जरूरत होने पर ठंडा करने वाला इलाज शुरू करना 

दिमाग पर ऑक्सीजन की कमी के असर को कम करने के लिए 

पहले 72 घंटे

बच्चे के अलग-अलग अंगों की निगरानी करना, दौरे होने पर उनका इलाज करना और पोषण शुरू करना 

शरीर में होने वाले बदलावों को समय पर पहचानने और उनका इलाज करने के लिए 

पहला मिनट सबसे अहम होता है। जन्म के तुरंत बाद बच्चे की सांस शुरू कराने की कोशिश इसलिए की जाती है क्योंकि ज्यादातर बच्चे इसी शुरुआती मदद से संभल जाते हैं। हर बच्चे को छाती दबाने, दवा देने या लंबे समय तक NICU में रखने की जरूरत नहीं पड़ती। 

बर्थ एस्फिक्सिया का इलाज कैसे किया जाता है?

इलाज की शुरुआत बच्चे की सांस शुरू कराने से होती है। बच्चे को अच्छी तरह पोंछकर गर्म रखा जाता है, सांस का रास्ता साफ किया जाता है और जरूरत होने पर मास्क और बैग की मदद से सांस दी जाती है। अगर इसके बाद भी बच्चे की हालत नहीं सुधरती, तो छाती दबाकर CPR किया जाता है और जरूरत के अनुसार दवाएं दी जाती हैं। 

इसके बाद NICU में बच्चे की लगातार निगरानी की जाती है। इस दौरान शरीर का तापमान, शुगर और ऑक्सीजन का स्तर सही सीमा में रखना बहुत जरूरी होता है। ऑक्सीजन की कमी के बाद इनमें बहुत ज्यादा बदलाव होने पर दिमाग को और नुकसान हो सकता है। भारतीय प्रोटोकॉल में बताया गया है कि इन चीजों का स्तर कितना रखना चाहिए। 

  • तापमान: शरीर का तापमान सामान्य रखा जाता है और बुखार बिल्कुल नहीं आने दिया जाता।
  • शुगर: खून में शुगर 75 से 100 के बीच रखी जाती है।
  • ऑक्सीजन: ऑक्सीजन का स्तर 90 से 95% के बीच रखा जाता है।
  • पानी: बिना वजह पानी कम नहीं किया जाता।

अगर बच्चे को दौरे पड़ते हैं, तो उन्हें दवाओं से नियंत्रित किया जाता है। कई बार दौरे बाहर से दिखाई नहीं देते और सिर्फ मशीन की मदद से पता चलते हैं। ऐसे दौरे का भी इलाज किया जाता है। 

ऑक्सीजन की कमी का असर सिर्फ दिमाग पर नहीं पड़ता, इसलिए बच्चे के दूसरे अंगों पर भी नजर रखी जाती है। गुजरात के एक अस्पताल में हुए अध्ययन में ऐसे बच्चों में दिमाग पर असर 72.3% मामलों में, दौरे 36.9% में, एक से ज्यादा अंगों पर असर 16.2% में, और मशीन से सांस देने की जरूरत 23.1% में पड़ी। इसीलिए पेशाब कितना हो रहा है, धड़कन कैसी है और बच्चा ठीक से सांस ले पा रहा है या नहीं, इन सबकी लगातार निगरानी की जाती है। 

बर्थ एस्फिक्सिया में ठंडा करने वाला इलाज क्या है और कब किया जाता है?

अगर ऑक्सीजन की कमी से बच्चे के दिमाग पर असर पड़ने का खतरा हो, तो कुछ बच्चों में ठंडा करने वाला इलाज किया जाता है। इसमें बच्चे के शरीर का तापमान सामान्य से कम रखा जाता है। इससे दिमाग में होने वाली आगे की क्षति को कम करने में मदद मिल सकती है।

यह इलाज हर बच्चे को नहीं दिया जाता। आमतौर पर इसे जन्म के पहले 6 घंटे के अंदर शुरू करना जरूरी होता है और करीब 72 घंटे तक जारी रखा जाता है। इसलिए ऑक्सीजन की कमी के बाद बच्चे की हालत को जल्दी समझना और सही समय पर इलाज शुरू करना बहुत जरूरी है।

बर्थ एस्फिक्सिया का बच्चे के विकास पर क्या असर पड़ता है?

हल्की कैटेगरी वाले ज्यादातर बच्चों का विकास सामान्य रहता है। मध्यम कैटेगरी में कुछ बच्चों में आगे चलकर मांसपेशियों की जकड़न, बोलने या सीखने में देरी, या दौरे की समस्या दिख सकती है। गंभीर कैटेगरी में रिस्क सबसे ज्यादा रहता है।

इसीलिए डिस्चार्ज के बाद फॉलोअप छोड़ देना सबसे बड़ी गलती होती है। फॉलोअप में तीन चीजें देखी जाती हैं।

  • विकास के पड़ाव: बच्चा तय समय पर गर्दन संभालना, पलटना, बैठना और चलना सीख रहा है या नहीं।
  • सुनना और देखना: इन दोनों की जांच, क्योंकि इन पर असर पड़ सकता है।
  • नए संकेत: दौरे या मांसपेशियों की जकड़न के कोई नए लक्षण।

जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी से कैसे बचा जा सकता है?

  • नियमित जांच: खून की कमी, बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर, शुगर और इन्फेक्शन, इन चारों को समय पर पकड़ लेना बहुत सी जटिलताओं का रास्ता बंद कर देता है।
  • ग्रोथ पर नजर: स्कैन में बच्चे की ग्रोथ और पानी की मात्रा देखते रहना।
  • बच्चे की हलचल: आखिरी हफ्तों में हलचल में साफ कमी लगे तो उसी दिन दिखाना चाहिए, अगले दिन का इंतजार नहीं करना चाहिए।
  • डिलीवरी की जगह: ऐसी जगह चुनना जहां नवजात को संभालने का इंतजाम मौजूद हो।
  • प्रसव के दौरान निगरानी: बच्चे की धड़कन पर नजर और जरूरत पड़ने पर समय से लिया गया फैसला, चाहे वह सिजेरियन हो या उपकरण की मदद।

याद रखने वाली मुख्य बातें (Key takeaways)

  • Birth asphyxia का मतलब है जन्म के आसपास बच्चे तक ऑक्सीजन और खून की सप्लाई कम पड़ जाना।
  • भारत में यह नवजात मौतों की सबसे बड़ी वजहों में है, इसलिए समय पर पहचान और इलाज मायने रखता है।
  • ठंडा करने वाला इलाज भारत में हर बच्चे को नहीं दिया जाता, और इसके पीछे यहीं हुए एक बड़े अध्ययन के नतीजे हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

बर्थ एस्फिक्सिया में समय पर इलाज बहुत मायने रखता है। जन्म के तुरंत बाद सांस शुरू कराना और शुरुआती घंटों में बच्चे की लगातार निगरानी करना जरूरी होता है।

माता-पिता के लिए शुरुआती दिन मुश्किल हो सकते हैं, क्योंकि बच्चे पर ऑक्सीजन की कमी का कितना असर हुआ है, यह तुरंत पता नहीं चलता। इसका अंदाजा कुछ दिनों की जांच और बच्चे की हालत देखकर लगाया जाता है।

हल्के असर वाले ज्यादातर बच्चे अच्छी तरह ठीक हो जाते हैं। गंभीर मामलों में नियमित फॉलोअप से बच्चे के विकास पर नजर रखने और किसी परेशानी का समय पर पता लगाने में मदद मिलती है।

Birth asphyxia से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी के क्या कारण हैं?

नवजात शिशु को ऑक्सीजन की कमी से क्या समस्याएं हो सकती हैं?

गर्भावस्था के दौरान ऑक्सीजन की कमी के क्या लक्षण हैं?

ऑक्सीजन की कमी से दिमाग को नुकसान कैसे होता है?

क्या बर्थ एस्फिक्सिया को जन्म से पहले पहचाना जा सकता है?

क्या बर्थ एस्फिक्सिया के बाद बच्चा पूरी तरह ठीक हो सकता है?

क्या ठंडा करने वाला इलाज भारत में दिया जाता है?

बच्चा NICU में कितने दिन रहता है?

दौरे पड़ने का क्या मतलब है?

MRI कब की जाती है?

डिस्चार्ज के बाद किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

क्या यह अगली प्रेगनेंसी में दोबारा बर्थ एस्फिक्सिया हो सकता है?

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