प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। दूसरी बार माँ बनने वाली महिलाएं इन बदलावों से कुछ परिचित होती हैं, लेकिन पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं के लिए यह बिल्कुल नया अनुभव होता है। शरीर में होने वाला हर छोटा बदलाव उन्हें चिंतित कर सकता है। इन्हीं बदलावों में से एक है ब्राउन डिस्चार्ज। योनि यानि वजाइना से हल्का भूरा या कॉफी जैसा डिस्चार्ज देखकर कई महिलाएं परेशान हो जाती हैं। लेकिन प्रेगनेंसी में घबराने की जगह अपने शरीर को समझना ज़्यादा ज़रूरी है। ज़्यादातर मामलों में यह नॉर्मल होता है, लेकिन कभी-कभी यह किसी समस्या का संकेत भी हो सकता है। चलिए विस्तार से समझते हैं कि प्रेगनेंसी में brown discharge kyu hota hai, कब नॉर्मल है और कब चिंता करनी चाहिए, इसके लक्षण क्या हैं, और कैसे सुरक्षित रहें।
ब्राउन डिस्चार्ज वेजाइना से निकलने वाला हल्का भूरा या कॉफी कलर का फ्लूइड है। यह दरअसल पुराना खून होता है जो ऑक्सीजन के संपर्क में आने से भूरा हो जाता है। ताज़ा खून लाल होता है, लेकिन जब खून धीरे-धीरे बाहर निकलता है या शरीर में कुछ समय रहता है, तो यह ऑक्सीडाइज़ होकर ब्राउन कलर का हो जाता है। Brown discharge kyu hota hai को ऐसे समझिये कि प्रेगनेंसी में यह विभिन्न कारणों से हो सकता है। जिनमें से कुछ बिल्कुल नॉर्मल होते हैं और कुछ जिन पर ध्यान देने की ज़रूरत होती है।
Brown discharge kyu hota hai की एक वजह प्रेगनेंसी के शुरूआती हफ़्तों, आमतौर पर कंसेप्शन के 6-12 दिन बाद, जब फर्टिलाइज़्ड एग गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) की दीवार से चिपकता है, तो हल्की स्पॉटिंग हो सकती है। यह 1से 3 दिन तक रह सकती है और बिल्कुल नॉर्मल है।
प्रेगनेंसी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का लेवल तेज़ी से बढ़ता है। इससे सर्विक्स यानी गर्भाशय ग्रीवा बहुत सेंसिटिव हो जाती है और छोटी-सी इरिटेशन से भी हल्की ब्लीडिंग हो सकती है।
प्रेगनेंसी में सर्विक्स में ब्लड सप्लाई बढ़ जाती है और यह सॉफ्ट हो जाता है। इंटरकोर्स, पेल्विक एग्ज़ाम, या ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड के बाद हल्का ब्राउन डिस्चार्ज हो सकता है।
कभी-कभी पिछली माइनर ब्लीडिंग का खून धीरे-धीरे बाहर आता है, जो ब्राउन दिखता है।
यह प्लेसेंटा और यूट्राइन वॉल के बीच खून इकट्ठा होने से होता है। यह अक्सर अपने आप ठीक हो जाता है लेकिन मॉनिटरिंग ज़रूरी है।
प्रेगनेंसी में सर्विक्स पर छोटी-छोटी ग्रोथ हो सकती हैं जो हानिरहित होती हैं लेकिन हल्की ब्लीडिंग कर सकती हैं।
वेजाइनल या सर्विकल इंफेक्शन से भी ब्राउन डिस्चार्ज हो सकता है, अक्सर बदबू या खुजली के साथ।
ये गंभीर कंडीशन हैं जिनमें ब्राउन डिस्चार्ज के साथ तेज़ दर्द, क्रैम्पिंग, और हैवी ब्लीडिंग होती है।
यह सबसे आम समय है। इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग या हॉर्मोनल चेंजेस के कारण हल्का ब्राउन डिस्चार्ज होना नॉर्मल है। 20-30% प्रेगनेंट महिलाओं को फर्स्ट ट्राइमेस्टर में कुछ स्पॉटिंग होती है।
इस समय ब्राउन डिस्चार्ज कम आम है। अगर होता है तो सर्विक्स इरिटेशन, इंफेक्शन, या प्लेसेंटा से जुड़ी माइनर इश्यूज़ हो सकते हैं। लंबे समय तक या बढ़ते डिस्चार्ज पर डॉक्टर को बताना ज़रूरी है।
इस समय ब्राउन डिस्चार्ज म्यूकस प्लग के निकलने का संकेत हो सकता है, जो लेबर शुरू होने के कुछ दिन या हफ्ते पहले होता है। यह "ब्लडी शो" कहलाता है और नॉर्मल है।
हल्का भूरा कलर, कम मात्रा जैसे कुछ ड्रॉप्स या हल्की स्पॉटिंग, कोई दर्द नहीं, कोई बदबू नहीं, 1 से 3 दिन में अपने आप बंद हो जाता है।
तेज़ पेट दर्द या क्रैम्पिंग, हैवी ब्लीडिंग या ब्राइट रेड ब्लड, बदबूदार या इरिटेटिंग डिस्चार्ज, बुखार या चिल्स, चक्कर आना या कमजोरी, लगातार कई दिनों तक डिस्चार्ज, बैक पेन।
अगर ये वार्निंग साइन्स हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
एक्टोपिक प्रेगनेंसी एक गंभीर कंडीशन है जिसमें फर्टिलाइज़्ड एग गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब या कहीं और इम्प्लांट हो जाता है। यह नॉर्मल प्रेगनेंसी नहीं हो सकती और मेडिकल इमरजेंसी है।
ब्राउन या रेड डिस्चार्ज, पेट के एक साइड में शार्प, स्टैबिंग पेन, शोल्डर पेन जोकि इंटरनल ब्लीडिंग का साइन, चक्कर या बेहोशी, प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव लेकिन यूट्रस में सैक नहीं दिखना।
अगर एक्टोपिक प्रेगनेंसी का संदेह हो तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल केयर लें। अनट्रीटेड एक्टोपिक प्रेगनेंसी से ट्यूब फट सकती है और जानलेवा ब्लीडिंग हो सकती है।
यूट्रस, प्लेसेंटा, और फीटल हार्टबीट की जांच के लिए। एक्टोपिक प्रेगनेंसी या सबकोरियोनिक हेमोरेज को रूल आउट करने के लिए।
hCG (ह्यूमन कोरियोनिक गोनैडोट्रोपिन) लेवल चेक करने के लिए। नॉर्मल प्रेगनेंसी में hCG हर 48-72 घंटे में डबल होता है। प्रोजेस्टेरोन लेवल भी चेक किया जा सकता है।
सर्विक्स, वेजाइना की जांच और इंफेक्शन के साइन देखने के लिए।
अगर इंफेक्शन का संदेह हो तो वेजाइनल या सर्वाइकल स्वैब लिया जाता है।
नीचे लिखे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
ब्राउन डिस्चार्ज का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है।
अक्सर कोई ट्रीटमेंट नहीं चाहिए। बस रेस्ट और मॉनिटरिंग।
प्रोजेस्टेरोन सप्लीमेंट दिए जा सकते हैं अगर प्रोजेस्टेरोन लो हो।
एंटीबायोटिक्स या एंटीफंगल मेडिकेशन।
बेड रेस्ट, प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट, और क्लोज़ मॉनिटरिंग।
रेस्ट और फॉलो-अप अल्ट्रासाउंड।
मेडिकेशन (मेथोट्रेक्सेट) या सर्जरी।
अगर ज़रूरत हो तो पोस्ट-डिलीवरी रिमूवल।
प्रेगनेंसी में ब्राउन डिस्चार्ज एक आम अनुभव है जो ज़्यादातर केसेस में हानिरहित होता है। अर्ली प्रेगनेंसी में इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग या हॉर्मोनल चेंजेस के कारण हल्की स्पॉटिंग बिल्कुल नॉर्मल है। हालांकि, हर ब्राउन डिस्चार्ज को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए खासकर अगर इसके साथ दर्द, हैवी ब्लीडिंग, बुखार या अन्य वार्निंग साइन्स हों। सबसे महत्वपूर्ण है अपने शरीर को समझना और किसी भी असामान्य बदलाव पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना। नियमित प्रीनेटल चेकअप, हेल्दी लाइफस्टाइल, संतुलित डाइट, और पर्याप्त आराम से आप अपनी और अपने बच्चे की सेहत सुरक्षित रख सकती हैं।
ब्राउन डिस्चार्ज पुराना ऑक्सीडाइज़्ड खून है जो वेजाइना से निकलता है। प्रेगनेंसी में यह अक्सर नॉर्मल होता है और इम्प्लांटेशन, हॉर्मोनल चेंजेस या सर्विक्स इरिटेशन के कारण हो सकता है।
हाँ, फर्स्ट ट्राइमेस्टर में हल्का ब्राउन डिस्चार्ज बहुत आम है। 20-30% प्रेगनेंट महिलाओं को कुछ स्पॉटिंग होती है। यह अक्सर इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग होती है।
नॉर्मल केस में 1 से 3 दिन। अगर 1 हफ्ते से ज़्यादा जारी रहे या बढ़ जाए, तो डॉक्टर से मिलें।
अगर हैवी ब्लीडिंग, तेज़ दर्द, बुखार, बदबू, चक्कर, या शोल्डर पेन हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
हाँ, प्रेगनेंसी में सर्विक्स सेंसिटिव होता है और इंटरकोर्स के बाद हल्की स्पॉटिंग हो सकती है। लेकिन अगर बार-बार हो तो डॉक्टर को बताएं।
मिसकैरिज में आमतौर पर हैवी रेड ब्लीडिंग, बड़े क्लॉट्स, तेज़ क्रैम्पिंग और टिशू पास होता है। सिर्फ ब्राउन डिस्चार्ज अक्सर मिसकैरिज नहीं होता।
ज़्यादातर केस में नहीं। हल्का ब्राउन डिस्चार्ज बेबी को प्रभावित नहीं करता। लेकिन अंडरलाइंग कंडीशन जैसे एक्टोपिक या मिसकैरेज सीरियस हो सकती हैं, इसलिए डॉक्टर से चेक करवाना ज़रूरी है।