प्रेगनेंसी में ब्राउन डिस्चार्ज क्यों होता है? (Brown Discharge Kyu Hota Hai)

Last updated: December 26, 2025

Overview

प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। दूसरी बार माँ बनने वाली महिलाएं इन बदलावों से कुछ परिचित होती हैं, लेकिन पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं के लिए यह बिल्कुल नया अनुभव होता है। शरीर में होने वाला हर छोटा बदलाव उन्हें चिंतित कर सकता है। इन्हीं बदलावों में से एक है ब्राउन डिस्चार्ज। योनि यानि वजाइना से हल्का भूरा या कॉफी जैसा डिस्चार्ज देखकर कई महिलाएं परेशान हो जाती हैं। लेकिन प्रेगनेंसी में घबराने की जगह अपने शरीर को समझना ज़्यादा ज़रूरी है। ज़्यादातर मामलों में यह नॉर्मल होता है, लेकिन कभी-कभी यह किसी समस्या का संकेत भी हो सकता है। चलिए विस्तार से समझते हैं कि प्रेगनेंसी में brown discharge kyu hota hai, कब नॉर्मल है और कब चिंता करनी चाहिए, इसके लक्षण क्या हैं, और कैसे सुरक्षित रहें।

ब्राउन डिस्चार्ज क्या है? (What is Brown Discharge)

ब्राउन डिस्चार्ज वेजाइना से निकलने वाला हल्का भूरा या कॉफी कलर का फ्लूइड है। यह दरअसल पुराना खून होता है जो ऑक्सीजन के संपर्क में आने से भूरा हो जाता है। ताज़ा खून लाल होता है, लेकिन जब खून धीरे-धीरे बाहर निकलता है या शरीर में कुछ समय रहता है, तो यह ऑक्सीडाइज़ होकर ब्राउन कलर का हो जाता है। Brown discharge kyu hota hai को ऐसे समझिये कि प्रेगनेंसी में यह विभिन्न कारणों से हो सकता है। जिनमें से कुछ बिल्कुल नॉर्मल होते हैं और कुछ जिन पर ध्यान देने की ज़रूरत होती है।

प्रेगनेंसी में ब्राउन डिस्चार्ज के कारण

इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग (Implantation Bleeding):

Brown discharge kyu hota hai की एक वजह प्रेगनेंसी के शुरूआती हफ़्तों, आमतौर पर कंसेप्शन के 6-12 दिन बाद, जब फर्टिलाइज़्ड एग गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) की दीवार से चिपकता है, तो हल्की स्पॉटिंग हो सकती है। यह 1से 3 दिन तक रह सकती है और बिल्कुल नॉर्मल है।

हॉर्मोनल चेंजेस:

प्रेगनेंसी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का लेवल तेज़ी से बढ़ता है। इससे सर्विक्स यानी गर्भाशय ग्रीवा बहुत सेंसिटिव हो जाती है और छोटी-सी इरिटेशन से भी हल्की ब्लीडिंग हो सकती है।

सर्विक्स में इरिटेशन:

प्रेगनेंसी में सर्विक्स में ब्लड सप्लाई बढ़ जाती है और यह सॉफ्ट हो जाता है। इंटरकोर्स, पेल्विक एग्ज़ाम, या ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड के बाद हल्का ब्राउन डिस्चार्ज हो सकता है।

पुराना खून:

कभी-कभी पिछली माइनर ब्लीडिंग का खून धीरे-धीरे बाहर आता है, जो ब्राउन दिखता है।

सबकोरियोनिक हेमोरेज:

यह प्लेसेंटा और यूट्राइन वॉल के बीच खून इकट्ठा होने से होता है। यह अक्सर अपने आप ठीक हो जाता है लेकिन मॉनिटरिंग ज़रूरी है।

सर्विकल पॉलिप्स:

प्रेगनेंसी में सर्विक्स पर छोटी-छोटी ग्रोथ हो सकती हैं जो हानिरहित होती हैं लेकिन हल्की ब्लीडिंग कर सकती हैं।

इंफेक्शन:

वेजाइनल या सर्विकल इंफेक्शन से भी ब्राउन डिस्चार्ज हो सकता है, अक्सर बदबू या खुजली के साथ।

मिसकैरेज या एक्टोपिक प्रेगनेंसी:

ये गंभीर कंडीशन हैं जिनमें ब्राउन डिस्चार्ज के साथ तेज़ दर्द, क्रैम्पिंग, और हैवी ब्लीडिंग होती है।

प्रेगनेंसी में ब्राउन डिस्चार्ज कब होता है? (Pregnancy me brown discharge kab hota hai)

फर्स्ट ट्राइमेस्टर (पहले 12 हफ्ते):

यह सबसे आम समय है। इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग या हॉर्मोनल चेंजेस के कारण हल्का ब्राउन डिस्चार्ज होना नॉर्मल है। 20-30% प्रेगनेंट महिलाओं को फर्स्ट ट्राइमेस्टर में कुछ स्पॉटिंग होती है।

सेकंड ट्राइमेस्टर (13 से 27 हफ्ते):

इस समय ब्राउन डिस्चार्ज कम आम है। अगर होता है तो सर्विक्स इरिटेशन, इंफेक्शन, या प्लेसेंटा से जुड़ी माइनर इश्यूज़ हो सकते हैं। लंबे समय तक या बढ़ते डिस्चार्ज पर डॉक्टर को बताना ज़रूरी है।

थर्ड ट्राइमेस्टर (28 हफ्ते से डिलीवरी तक):

इस समय ब्राउन डिस्चार्ज म्यूकस प्लग के निकलने का संकेत हो सकता है, जो लेबर शुरू होने के कुछ दिन या हफ्ते पहले होता है। यह "ब्लडी शो" कहलाता है और नॉर्मल है।

ब्राउन डिस्चार्ज के लक्षण (Brown discharge ke Symptoms in Hindi)

नॉर्मल ब्राउन डिस्चार्ज:

हल्का भूरा कलर, कम मात्रा जैसे कुछ ड्रॉप्स या हल्की स्पॉटिंग, कोई दर्द नहीं, कोई बदबू नहीं, 1 से 3 दिन में अपने आप बंद हो जाता है।

चिंता के संकेत (वार्निंग साइन्स):

तेज़ पेट दर्द या क्रैम्पिंग, हैवी ब्लीडिंग या ब्राइट रेड ब्लड, बदबूदार या इरिटेटिंग डिस्चार्ज, बुखार या चिल्स, चक्कर आना या कमजोरी, लगातार कई दिनों तक डिस्चार्ज, बैक पेन।

अगर ये वार्निंग साइन्स हों तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी और ब्राउन डिस्चार्ज (Ectopic Pregnancy)

एक्टोपिक प्रेगनेंसी एक गंभीर कंडीशन है जिसमें फर्टिलाइज़्ड एग गर्भाशय के बजाय फैलोपियन ट्यूब या कहीं और इम्प्लांट हो जाता है। यह नॉर्मल प्रेगनेंसी नहीं हो सकती और मेडिकल इमरजेंसी है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण:

ब्राउन या रेड डिस्चार्ज, पेट के एक साइड में शार्प, स्टैबिंग पेन, शोल्डर पेन जोकि इंटरनल ब्लीडिंग का साइन, चक्कर या बेहोशी, प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव लेकिन यूट्रस में सैक नहीं दिखना।

अगर एक्टोपिक प्रेगनेंसी का संदेह हो तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल केयर लें। अनट्रीटेड एक्टोपिक प्रेगनेंसी से ट्यूब फट सकती है और जानलेवा ब्लीडिंग हो सकती है।

ब्राउन डिस्चार्ज की डायग्नोसिस

अल्ट्रासाउंड:

यूट्रस, प्लेसेंटा, और फीटल हार्टबीट की जांच के लिए। एक्टोपिक प्रेगनेंसी या सबकोरियोनिक हेमोरेज को रूल आउट करने के लिए।

ब्लड टेस्ट:

hCG (ह्यूमन कोरियोनिक गोनैडोट्रोपिन) लेवल चेक करने के लिए। नॉर्मल प्रेगनेंसी में hCG हर 48-72 घंटे में डबल होता है। प्रोजेस्टेरोन लेवल भी चेक किया जा सकता है।

पेल्विक एग्ज़ाम:

सर्विक्स, वेजाइना की जांच और इंफेक्शन के साइन देखने के लिए।

स्वैब टेस्ट:

अगर इंफेक्शन का संदेह हो तो वेजाइनल या सर्वाइकल स्वैब लिया जाता है।

ब्राउन डिस्चार्ज में सावधानियां

  • पर्सनल हाइजीन: जेनिटल एरिया को साफ और सूखा रखें। माइल्ड, अनसेंटेड सोप इस्तेमाल करें। दिन में 2 बार से ज़्यादा धोने से अवॉइड करें क्योंकि यह नेचुरल pH को डिस्टर्ब कर सकता है।
  • कॉटन अंडरवियर: ब्रीदेबल, कॉटन अंडरवियर पहनें। टाइट या सिंथेटिक कपड़े से बचें।
  • पैंटी लाइनर: अगर हल्की स्पॉटिंग है तो पैंटी लाइनर इस्तेमाल करें और बार-बार बदलें। सेंटेड या परफ्यूम्ड प्रोडक्ट्स अवॉइड करें।
  • टैम्पोन्स नहीं: प्रेगनेंसी में टैम्पोन्स बिल्कुल न इस्तेमाल करें क्योंकि ये इंफेक्शन का रिस्क बढ़ाते हैं।
  • सेक्शुअल एक्टिविटी: अगर ब्राउन डिस्चार्ज हो रहा है तो इंटरकोर्स अवॉइड करें। सर्विक्स सेंसिटिव होता है और इरिटेशन हो सकती है।
  • आराम: पर्याप्त आराम करें और स्ट्रेस कम रखें। हैवी लिफ्टिंग या स्ट्रेन्यूअस एक्सरसाइज अवॉइड करें।
  • हाइड्रेशन: खूब पानी पिएं लगभग 8-10 गिलास रोज़ाना।
  • संतुलित डाइट: आयरन, विटामिन C, फोलिक एसिड से भरपूर आहार लें। हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, नट्स, दालें शामिल करें।
  • डौचिंग नहीं: वेजाइनल डौचिंग बिल्कुल न करें क्योंकि यह वेजाइनल फ्लोरा को डिस्टर्ब करता है।

कब डॉक्टर से मिलें?

नीचे लिखे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

  • ब्राउन डिस्चार्ज हैवी ब्लीडिंग (सैनिटरी पैड 1 घंटे में भर जाए) में बदल जाए
  • तेज़ पेट दर्द या क्रैम्पिंग हो
  • बुखार (100.4°F से ऊपर) आए
  • बदबूदार या इरिटेटिंग डिस्चार्ज हो
  • चक्कर, बेहोशी या तेज़ कमजोरी महसूस हो
  • डिस्चार्ज 1 हफ्ते से ज़्यादा जारी रहे
  • फीटल मूवमेंट कम हो जाए (सेकंड या थर्ड ट्राइमेस्टर में)
  • शोल्डर पेन जो कि एक्टोपिक प्रेगनेंसी का साइन हो सकता है

ब्राउन डिस्चार्ज का इलाज (Treatment)

ब्राउन डिस्चार्ज का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है।

नॉर्मल केसेस में:

अक्सर कोई ट्रीटमेंट नहीं चाहिए। बस रेस्ट और मॉनिटरिंग।

हॉर्मोनल इम्बैलेंस:

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प्रोजेस्टेरोन सप्लीमेंट दिए जा सकते हैं अगर प्रोजेस्टेरोन लो हो।

इंफेक्शन:

एंटीबायोटिक्स या एंटीफंगल मेडिकेशन।

थ्रेटन्ड मिसकैरिज:

बेड रेस्ट, प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट, और क्लोज़ मॉनिटरिंग।

सबकोरियोनिक हेमोरेज:

रेस्ट और फॉलो-अप अल्ट्रासाउंड।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी:

मेडिकेशन (मेथोट्रेक्सेट) या सर्जरी।

सर्विकल पॉलिप्स:

अगर ज़रूरत हो तो पोस्ट-डिलीवरी रिमूवल।

निष्कर्ष (Conclusion)

प्रेगनेंसी में ब्राउन डिस्चार्ज एक आम अनुभव है जो ज़्यादातर केसेस में हानिरहित होता है। अर्ली प्रेगनेंसी में इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग या हॉर्मोनल चेंजेस के कारण हल्की स्पॉटिंग बिल्कुल नॉर्मल है। हालांकि, हर ब्राउन डिस्चार्ज को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए खासकर अगर इसके साथ दर्द, हैवी ब्लीडिंग, बुखार या अन्य वार्निंग साइन्स हों। सबसे महत्वपूर्ण है अपने शरीर को समझना और किसी भी असामान्य बदलाव पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना। नियमित प्रीनेटल चेकअप, हेल्दी लाइफस्टाइल, संतुलित डाइट, और पर्याप्त आराम से आप अपनी और अपने बच्चे की सेहत सुरक्षित रख सकती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रेगनेंसी में ब्राउन डिस्चार्ज क्या होता है?

 

ब्राउन डिस्चार्ज पुराना ऑक्सीडाइज़्ड खून है जो वेजाइना से निकलता है। प्रेगनेंसी में यह अक्सर नॉर्मल होता है और इम्प्लांटेशन, हॉर्मोनल चेंजेस या सर्विक्स इरिटेशन के कारण हो सकता है।

क्या अर्ली प्रेगनेंसी में ब्राउन डिस्चार्ज नॉर्मल है?

 

हाँ, फर्स्ट ट्राइमेस्टर में हल्का ब्राउन डिस्चार्ज बहुत आम है। 20-30% प्रेगनेंट महिलाओं को कुछ स्पॉटिंग होती है। यह अक्सर इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग होती है।

ब्राउन डिस्चार्ज कितने दिन तक रहता है?

 

नॉर्मल केस में 1 से 3 दिन। अगर 1 हफ्ते से ज़्यादा जारी रहे या बढ़ जाए, तो डॉक्टर से मिलें।

कब चिंता करनी चाहिए?

 

अगर हैवी ब्लीडिंग, तेज़ दर्द, बुखार, बदबू, चक्कर, या शोल्डर पेन हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

क्या सेक्स के बाद ब्राउन डिस्चार्ज नॉर्मल है?

 

हाँ, प्रेगनेंसी में सर्विक्स सेंसिटिव होता है और इंटरकोर्स के बाद हल्की स्पॉटिंग हो सकती है। लेकिन अगर बार-बार हो तो डॉक्टर को बताएं।

ब्राउन डिस्चार्ज और मिसकैरिज में क्या फर्क है?

 

मिसकैरिज में आमतौर पर हैवी रेड ब्लीडिंग, बड़े क्लॉट्स, तेज़ क्रैम्पिंग और टिशू पास होता है। सिर्फ ब्राउन डिस्चार्ज अक्सर मिसकैरिज नहीं होता।

क्या ब्राउन डिस्चार्ज से बेबी को नुकसान होता है?

 

ज़्यादातर केस में नहीं। हल्का ब्राउन डिस्चार्ज बेबी को प्रभावित नहीं करता। लेकिन अंडरलाइंग कंडीशन जैसे एक्टोपिक या मिसकैरेज सीरियस हो सकती हैं, इसलिए डॉक्टर से चेक करवाना ज़रूरी है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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