सी-सेक्शन डिलीवरी से आप माँ बन गयीं लेकिन अभी तक योनि वेजाइना (vagina) से खून आ रहा है, तो यह सोचना स्वाभाविक कि आखिर c section delivery ke baad bleeding kab tak hoti hai और क्या यह नॉर्मल है। कई महिलाएं सोचती हैं कि सी-सेक्शन में तो बच्चा पेट से निकलता है, फिर वेजाइना से खून क्यों आ रहा है। दरअसल डिलीवरी चाहे सी-सेक्शन से हो या नॉर्मल, दोनों ही में वेजाइना से ब्लीडिंग होती है। इसे लोकिया (Lochia) कहते हैं। यह ब्लीडिंग आमतौर पर 4 से 6 हफ्ते तक चलती है और धीरे-धीरे कम होती जाती है।यह सिर्फ़ खून नहीं है, बल्कि आपके गर्भाशय यानि यूट्रस (Uterus) के साफ होने और ठीक होने की एक प्रक्रिया है। इस आर्टिकल में हम लोचिया के अलग-अलग चरणों, ब्लीडिंग की समय-सीमा और उन संकेतों पर बात करेंगे जो बताते हैं कि आपकी रिकवरी सही दिशा में है या नहीं।
प्रेगनेंसी के दौरान यूट्रस यानी गर्भाशय के अंदर एक मोटी परत बनती है जो बच्चे को पोषण देती है। इसी परत से प्लेसेंटा यानी गर्भनाल जुड़ा होता है। डिलीवरी के बाद जब प्लेसेंटा बाहर निकलता है, तो यूट्रस की दीवार पर एक घाव जैसा बन जाता है।
यह घाव भरने में समय लगता है। इसी दौरान यूट्रस से खून, म्यूकस और टिशू बाहर निकलते हैं। यह प्रक्रिया वेजाइना के रास्ते ही होती है, भले ही आपकी डिलीवरी सी-सेक्शन से हुई हो। प्लेसेंटा यूट्रस से ही निकाला जाता है, इसलिए ब्लीडिंग होना बिल्कुल नॉर्मल है।
| स्टेज | समय |
|---|---|
| पहली मीटिंग और जाँच | 2-3 हफ्ते |
| ओवेरियन स्टिमुलेशन इंजेक्शन | 10-12 दिन |
| एग रिट्रीवल और लैब वर्क | 1-5 दिन |
| एम्ब्रियो ट्रांसफर | 1 दिन |
| प्रेगनेंसी टेस्ट तक का इंतज़ार | 12-14 दिन |
| कुल समय | लगभग 6 से 8 हफ्ते |
डिलीवरी के बाद होने वाली ब्लीडिंग को मेडिकल भाषा में लोकिया (Lochia) कहते हैं। यह सिर्फ़ खून नहीं होता, बल्कि इसमें तीन चीज़ें मिली होती हैं:
लोकिया में बिल्कुल पीरियड्स जैसी हल्की बासी गंध होना नॉर्मल है लेकिन अगर गंध बहुत तेज़ या बदबूदार हो, तो यह इंफेक्शन की तरफ इशारा हो सकता है।
सी-सेक्शन के बाद ब्लीडिंग आमतौर पर 4 से 6 हफ्ते तक होती है। कुछ महिलाओं में यह 8 हफ्ते तक भी हो सकती है, लेकिन 12 हफ्ते तक ब्लीडिंग बंद हो जानी चाहिए। सी-सेक्शन में नॉर्मल डिलीवरी के मुकाबले ब्लीडिंग थोड़ी कम होती है, लेकिन फिर भी कई हफ्तों तक चलती है।
लोकिया तीन स्टेज में बदलता है। हर स्टेज में इसका रंग और मात्रा अलग होती है।
| स्टेज | समय | ब्लीडिंग का रंग और बनावट | मात्रा और क्या उम्मीद करें? |
|---|---|---|---|
| लोकिया रूब्रा (Lochia Rubra) | दिन 1 से 7 | गहरा लाल (पीरियड्स जैसा) | सबसे ज़्यादा: शुरुआती 2-3 दिन हैवी ब्लीडिंग होगी। अंगूर के दाने जितने छोटे थक्के यानी क्लॉट्स ) आना नॉर्मल है। |
| लोकिया सेरोसा (Lochia Serosa) | दिन 7 से 14 | गुलाबी से भूरा (Pinkish-Brown) | काफी कम: पहले हफ्ते के मुकाबले खून कम हो जाता है और डिस्चार्ज में म्यूकस की मात्रा बढ़ने लगती है। |
| लोकिया अल्बा (Lochia Alba) | 3 से 6 हफ्ता | सफ़ेद या हल्का पीला | बहुत कम: ब्लीडिंग लगभग खत्म हो जाती है। सिर्फ़ हल्का डिस्चार्ज या बहुत मामूली स्पॉटिंग रह जाती है। |
कुछ परिस्थितियों में ब्लीडिंग अचानक बढ़ सकती है। अगर थोड़े समय के बाद यह वापस नॉर्मल हो जाए तो चिंता नहीं करनी चाहिए।
पहले कुछ हफ्तों में मोटे मैटरनिटी पैड्स यूज़ करें। पतले सैनिटरी पैड्स शुरुआत में काफ़ी नहीं होंगे। जैसे-जैसे ब्लीडिंग कम हो, आप नॉर्मल पैड्स पर आ सकती हैं।
डिलीवरी के बाद पहले 6 हफ्ते तक टैम्पोन या कप यूज़ करने से बचें। इनसे इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है क्योंकि यूट्रस अभी ठीक हो रहा होता है।
हर 4 से 6 घंटे में पैड बदलें। टॉयलेट जाने से पहले और बाद में हाथ धोएं। वेजाइना को साफ़ पानी से धोएं, साबुन या डूश यूज़ न करें।
ज़्यादा चलने-फिरने से ब्लीडिंग बढ़ती है। शुरुआती हफ्तों में आराम करें और भारी सामान न उठाएं।
शुरुआती दिनों में ध्यान दें कि कितने पैड यूज़ हो रहे हैं और ब्लीडिंग का रंग क्या जिससे अगर कुछ असामान्य लगे तो डॉक्टर को बताने में आसानी होगी। ज़रूरत हो तो पैड की फोटो रख लें।
ब्लीडिंग से शरीर में पानी की कमी हो सकती है। दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। इससे शरीर जल्दी रिकवर करेगा।
ब्लीडिंग के साथ-साथ पेट पर लगे टांकों की भी देखभाल ज़रूरी है। टांकों को साफ़ और सूखा रखें। अगर टांकों से पस या खून आए तो डॉक्टर को बताएं।
ब्लीडिंग होना नॉर्मल है, लेकिन कुछ लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
ये लक्षण पोस्टपार्टम हेमरेज यानी अत्यधिक रक्तस्राव या इंफेक्शन का संकेत हो सकते हैं जिनका तुरंत इलाज ज़रूरी है।
आपके सवाल C section delivery ke baad bleeding kab tak hoti hai का जवाब है 4 से 6 हफ्ते। यह ब्लीडिंग बिल्कुल नॉर्मल है और इसे लोकिया कहते हैं। पहले हफ्ते में यह गहरे लाल रंग की और भारी होती है, फिर धीरे-धीरे गुलाबी, भूरी और अंत में सफ़ेद हो जाती है।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि ब्लीडिंग का पैटर्न समझें। अगर ब्लीडिंग धीरे-धीरे कम हो रही है और रंग हल्का होता जा रहा है, तो सब ठीक है। लेकिन अगर ब्लीडिंग अचानक बहुत बढ़ जाए, बड़े क्लॉट्स आएं, या बुखार हो, तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें।
आमतौर पर 4 से 6 हफ्ते। कुछ महिलाओं में 8 हफ्ते तक हल्की स्पॉटिंग रह सकती है।
हाँ, सी-सेक्शन में शुरुआती ब्लीडिंग थोड़ी कम होती है, लेकिन कुल अवधि लगभग बराबर रहती है।
ब्रेस्टफीडिंग से ऑक्सीटोसिन निकलता है जो यूट्रस को सिकोड़ता है। इससे ब्लीडिंग थोड़ी बढ़ती है लेकिन यह अच्छा संकेत है।
यह पीरियड्स की वापसी हो सकती है या कोई समस्या। डॉक्टर से संपर्क करें।
हल्की बासी गंध नॉर्मल है। लेकिन तेज़ बदबू इंफेक्शन का संकेत है, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
अगर ब्रेस्टफीडिंग करवा रही हैं तो देर से आ सकते हैं। बॉटल फीडिंग में 6-12 हफ्ते में पीरियड्स वापस आ सकते हैं।