सर्वाइकल कैंसर को लेकर सबसे बड़ी समस्या जानकारी की कमी नहीं, बल्कि अधूरी और डर पैदा करने वाली जानकारी है। अक्सर महिलाएँ यह सुनकर घबरा जाती हैं कि यह “कैंसर” है, लेकिन यह नहीं बताया जाता कि यह बीमारी कैसे शुरू होती है, कितने समय में बढ़ती है, और किस स्टेज में पूरी तरह रोकी जा सकती है। चलिए समझते हैं कि cervical cancer kya hota hai, यह क्यों होता है, किन महिलाओं में इसका खतरा अधिक होता है, इसकी जांच कैसे की जाती है, और इलाज के साथ-साथ प्रजनन यानी फ़र्टिलिटी (fertility)और भविष्य के जीवन पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से, यानी गर्भाशय ग्रीवा या सर्विक्स (cervix) में विकसित होने वाला कैंसर है। सर्विक्स वह संकरा भाग है जो गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) को योनि मतलब वजाइना (Vagina) से जोड़ता है और महिला के प्रजनन तंत्र अर्थात रिप्रोडक्टिव सिस्टम (Reproductive System) में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सर्वाइकल कैंसर अचानक नहीं होता बल्कि शुरुआत में सर्विक्स की कोशिकाओं यानी सेल्स (cells) में हल्के-हल्के असामान्य बदलाव आते हैं, जिन्हें प्रीकैंसरस बदलाव कहा जाता है। इन्हें मेडिकल भाषा में सर्वाइकल इंट्राएपिथेलियल नियोप्लाजिया या सीआईएन (CIN – cervical intraepithelial neoplasia) कहा जाता है।
लगभग सभी सर्वाइकल कैंसर के मामलों में एक चीज़ समान पाई जाती है, वो है ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी (HPV – human papillomavirus) का लंबे समय तक शरीर में बने रहना। एचपीवी एक बहुत आम यौन संचारित यानी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड वायरस (Sexually Transmitted Virus) है।
ज़्यादातर यौन रूप से सक्रिय महिलाओं के शरीर में यह वायरस जीवन में कभी न कभी आ सकता है। एचपीवी अक्सर बिना किसी लक्षण के शरीर में बना रहता है।
जब एचपीवी लंबे समय तक सर्विक्स की सेल्स में मौजूद रहता है, तो वह धीरे-धीरे इन सेल्स के डीएनए में बदलाव करने लगता है। यही बदलाव पहले प्रीकैंसरस कंडीशन बनाते हैं और अगर वर्षों तक इसका पता न चले, तो सर्वाइकल कैंसर में बदल सकते हैं। अक्सर एचपीवी संक्रमण से कैंसर बनने में 10 से 20 साल लग सकते हैं।
यह लंबा समय रेगुलर स्क्रीनिंग और समय पर इस कंडीशन को पकड़ने का पर्याप्त मौका देता है।
यह सवाल बहुत स्वाभाविक है। अगर एचपीवी इतना आम है, तो हर महिला को कैंसर क्यों नहीं होता? इसका जवाब यह है कि सर्वाइकल कैंसर सिर्फ वायरस की वजह से नहीं बनता। cervical cancer kya hota hai का जवाब है कि जब कई फ़ैक्टर्स एक साथ मिल जाते हैं, तब सेल्स में आये बदलाव कैंसर में तब्दील हो जाते हैं। कुछ फ़ैक्टर्स नीचे दिए गए हैं।
इसीलिए दो महिलाओं में एक जैसा एचपीवी होने के बावजूद नतीजा अलग हो सकता है। एक महिला में वायरस चुपचाप खत्म हो जाता है, जबकि दूसरी में सेल्स के बदलाव आगे बढ़ सकते हैं। यही कारण है कि सर्वाइकल कैंसर को “प्रिवेंटिव कैंसर ” कहा जाता है, क्योंकि यह धीरे-धीरे बनता है, इसके पहले चेतावनी चरण यानी वार्निंग स्टेज होती हैं, और इन्हें जांच के ज़रिये पकड़ा जा सकता है।
सर्वाइकल कैंसर अक्सर उन महिलाओं में पाया जाता है, जो संतान पैदा करने की आयु की होती हैं। भारत में इसका सामान्यतः 35 से 45 वर्ष की आयु की महिलाओं में जाँच के दौरान यह पाया गया है। यह वह समय है जब अधिकाँश महिलायें फैमिली प्लानिंग कर रहीं होती हैं। वैसे अगर जाँच के दौरान सर्वाइकल कैंसर निकलता है तो इसका यह मतलब नहीं होता महिला कभी माँ नहीं बन सकती।
लेकिन माँ बनना इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी किस स्टेज में पकड़ी गई और किस तरह का इलाज किया गया।
अगर सर्वाइकल कैंसर का इलाज शुरू होने वाला है और महिला भविष्य में माँ बनने की इच्छा रखती है, तो फ़र्टिलिटी प्रिजर्वेशन पर बात करना इलाज से पहले बेहद ज़रूरी होता है। यह बातचीत जितनी जल्दी होती है, विकल्प उतने ही बेहतर रहते हैं।
सर्वाइकल कैंसर की एक चुनौती यह भी है कि इसके शुरुआती चरणों में अक्सर कोई साफ़ लक्षण दिखाई नहीं देते। महिला खुद को बिल्कुल सामान्य महसूस कर सकती है, और यही वजह है कि यह बीमारी कई बार बिना जांच के पकड़ में नहीं आती। cervical cancer kya hota hai जानने के लिए नीचे दिए गए लक्षण इस बीमारी के संकेत हो सकते हैं।
सर्वाइकल कैंसर की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बीमारी बनने से पहले भी पकड़ा जा सकता है। इसके लिए अलग-अलग तरह की जांचें होती हैं। एक होती है स्क्रीनिंग जांच और दूसरी डायग्नोसिस की पुष्टि करने वाली जांच।
स्क्रीनिंग का मकसद यह देखना होता है कि सर्विक्स की सेल्स में कोई शुरुआती, प्री-कैंसरस बदलाव तो नहीं हो रहे। यह जांच उन महिलाओं के लिए भी उतनी ही ज़रूरी है, जिन्हें कोई लक्षण नहीं हैं।
स्क्रीनिंग में कोई असामान्यता दिखने का मतलब यह नहीं होता कि कैंसर हो ही गया है। इसका मतलब सिर्फ़ यह होता है कि अब जांच को एक कदम आगे बढ़ाने की ज़रूरत है।
सर्वाइकल कैंसर का इलाज एक जैसा नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी किस स्टेज में पकड़ी गई है, महिला की उम्र क्या है, उसकी कुल सेहत कैसी है और वह भविष्य में प्रेग्नेंसी चाहती है या नहीं। इसी वजह से हर महिला के लिए इलाज की प्लानिंग अलग तरह से की जाती है।
यह समझना ज़रूरी है कि इलाज का उद्देश्य सिर्फ़ बीमारी को हटाना नहीं, बल्कि महिला की आगे की ज़िंदगी की क्वालिटी को भी बेहतर बनाए रखना होता है। इसलिए इलाज शुरू करने से पहले सभी विकल्पों पर खुलकर चर्चा करना बेहद अहम होता है।
सर्वाइकल कैंसर उन गिनी-चुनी बीमारियों में से है, जिन्हें सही जानकारी और समय पर कदम उठाकर काफी हद तक रोका जा सकता है।
सर्वाइकल कैंसर के लगभग 70 से 90% मामलों में एचपीवी वैक्सीन से सुरक्षा मिल सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और आई.सी.एम.आर (ICMR) के अनुसार 9 से 14 वर्ष की आयु में टीकाकरण सबसे ज़्यादा असरदार होता है, लेकिन 15–26 वर्ष की उम्र तक भी इससे लाभ मिल सकता है। यह वैक्सीन संक्रमण से पहले सबसे बेहतर काम करती है, लेकिन बाद में भी जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है।
30 से 65 वर्ष की महिलाओं के लिए हर 5 साल में वी.आई.ए (VIA) या एचपीवी डीएनए टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है, चाहे कोई लक्षण हों या न हों। नियमित जांच से प्री-कैंसरस बदलाव समय रहते पकड़ में आ जाते हैं, जिससे सर्वाइकल कैंसर का खतरा 80–90% तक कम किया जा सकता है।
धूम्रपान यानी किसी भी तरह की स्मोकिंग से दूरी रखना ज़रूरी है, क्योंकि तंबाकू सर्विक्स की सेल्स को नुकसान पहुँचाता है। प्रोटेक्टेड सेक्स अपनाने से एचपीवी संक्रमण का जोखिम कम होता है। संतुलित आहार और नियमित हल्की-फुल्की एक्सरसाइज शरीर की इम्यूनिटी को मज़बूत बनाती है, जिससे शरीर वायरस से बेहतर तरीके से लड़ पाता है।
सर्वाइकल कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन यह उन गिने-चुने कैंसरों में से है जिसे सही समय पर कदम उठाकर काफी हद तक रोका और शुरुआती चरण में पूरी तरह संभाला जा सकता है। इसलिए सबसे ज़रूरी है समय पर जांच कराना, सही जानकारी रखना और बिना झिझक डॉक्टर से खुलकर बात करना।
cervical cancer kya hota hai का सही जवाब डर में नहीं, बल्कि समझ और जागरूकता में छुपा है। अगर महिलाएं अपने शरीर के संकेतों को गंभीरता से लें और नियमित स्क्रीनिंग को आदत बनाएं, तो इस बीमारी का बोझ समाज से काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स (cervix) की कोशिकाओं में धीरे-धीरे होने वाले असामान्य बदलावों से शुरू होता है, जो ज़्यादातर मामलों में एचपीवी (HPV) इंफेक्शन से जुड़े होते हैं।
नहीं, ज़्यादातर एचपीवी इंफेक्शन शरीर खुद ही खत्म कर देता है, लेकिन जब हाई-रिस्क एचपीवी लंबे समय तक बना रहे, तभी कैंसर का खतरा बढ़ता है।
शुरुआत में अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, इसलिए नियमित स्क्रीनिंग सबसे ज़रूरी होती है; बाद में असामान्य ब्लीडिंग या डिस्चार्ज दिख सकता है।
आमतौर पर 30 वर्ष की उम्र के बाद हर 5 साल में वी.आई.ए (VIA) या एचपीवी डीएनए टेस्ट (HPV DNA test) कराने की सलाह दी जाती है।
हाँ, अगर यह शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए, तो इलाज से इसे पूरी तरह नियंत्रित या ठीक किया जा सकता है।
यह बीमारी के स्टेज और इलाज के तरीके पर निर्भर करता है; शुरुआती स्टेज में कई महिलाओं में प्रेगनेंसी संभव रहती है।
नहीं, वैक्सीन के बाद भी नियमित स्क्रीनिंग ज़रूरी होती है, क्योंकि वैक्सीन सभी एचपीवी टाइप्स से सुरक्षा नहीं देती।