प्रेगनेंसी टेस्ट में दो लाइनें आईं, खुशी का माहौल बना, लेकिन कुछ ही दिनों में पीरियड्स आ गए। मेडिकल भाषा में इसे केमिकल प्रेगनेंसी (chemical pregnancy) कहते हैं।
अगर आपके साथ ऐसा हुआ है, तो यह मायूस करने के साथ साथ बहुत कन्फ्यूज़ करने वाली स्थिति है। केमिकल प्रेगनेंसी असल में एक बहुत शुरुआती मिसकैरेज (miscarriage) है, जिसमें एग और स्पर्म मिलते तो हैं लेकिन भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (embryo) ठीक से बन नहीं पाता।
Chemical pregnancy in Hindi आर्टिकल में जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है, chemical pregnancy के लक्षण क्या हैं, क्या इसके बाद दोबारा मां बन सकते हैं। इसके साथ यह भी समझेंगे कि इस दौरान अपना शारीरिक और मानसिक ख्याल कैसे रखें।
केमिकल प्रेगनेंसी में एग का फर्टिलाइजेशन तो हो जाता है, यानी स्पर्म और अंडा मिल जाते हैं, लेकिन एम्ब्रीओ गर्भाशय की अंदरूनी दीवार यानी एंडोमेट्रियम की परत पर ठीक से जुड़ नहीं पाता या जुड़ने के बाद उसकी ग्रोथ बहुत जल्दी रुक जाती है।
इसे Chemical pregnancy इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस प्रेगनेंसी का पता सिर्फ केमिकल तरीके से चलता है। इसका मतलब है की hCG हार्मोन के ब्लड या यूरिन टेस्ट से ही इसका पता चलता है।
अल्ट्रासाउंड में कुछ दिखाई नहीं देता क्योंकि एम्ब्रीओ इतना छोटा होता है कि स्कैन में दिखने से पहले ही समाप्त हो जाता है।
केमिकल प्रेगनेंसी बहुत कॉमन है। रिसर्च बताती है कि सभी प्रेगनेंसी में से 50 से 75 प्रतिशत तक शुरुआती दिनों में ही खत्म हो जाती हैं, और ऐसी ज़्यादातर प्रेगनेंसी का पता भी नहीं चलता।
बस उन्हीं महिलाओं को केमिकल प्रेगनेंसी का पता चलता है जो सक्रिय रूप से प्रेगनेंसी की कोशिश कर रही हैं क्योंकि वे जल्दी टेस्ट कर लेती हैं।
सामान्य प्रेगनेंसी में फर्टिलाइजेशन के बाद एम्ब्रीओ गर्भाशय की दीवार यानी एंडोमेट्रियम की परत पर ठीक से जुड़ जाता है, hCG लेवल लगातार बढ़ता रहता है, और कुछ हफ्तों में अल्ट्रासाउंड में गेस्टेशनल सैक (gestational sac) दिखने लगता है।
केमिकल प्रेगनेंसी में hCG लेवल थोड़ा बढ़ता है, फिर गिरने लगता है। प्रेगनेंसी टेस्ट करने पर रिजल्ट भी पॉज़िटिव आता है, लेकिन कुछ दिनों बाद ब्लीडिंग शुरू हो जाती है। यह जनरली पीरियड्स के समय या उसके आसपास होता है। इसीलिए कई महिलाओं को लगता है कि पीरियड्स थोड़े लेट आये हैं और ज़्यादा हैवी आये हैं।
आजकल की प्रेगनेंसी टेस्ट किट बहुत सेंसिटिव होती हैं, जिसकी वजह से केमिकल प्रेगनेंसी का पता पहले से ज़्यादा लग रहा है।
केमिकल प्रेगनेंसी की सबसे कॉमन वजह एम्ब्रीओ में क्रोमोसोम (chromosomal) की गड़बड़ी होना है। जब एग और स्पर्म मिलते हैं तो एम्ब्रीओ के जींस (genes) बनते हैं। कभी कभी इस प्रक्रिया में गलती हो जाती है और एम्ब्रीओ में सही संख्या में क्रोमोसोम नहीं बन पाते। ऐसे एम्ब्रीओ की ग्रोथ आगे नहीं बढ़ पाती और शरीर खुद ही उसे बाहर कर देता है।
यह प्रकृति का सिलेक्शन का अपना तरीका है। इसके अलावा और भी कारण नीचे दिए जा रहे हैं।
लेकिन यह जान लें कि एक केमिकल प्रेगनेंसी का मतलब यह नहीं कि आगे भी ऐसा ही होगा। ज़्यादातर मामलों में यह एक बार की घटना होती है और अगली प्रेगनेंसी बिल्कुल सामान्य रहती है।
एक केमिकल प्रेगनेंसी का मतलब यह नहीं कि आगे भी ऐसा होगा। असल में तो केमिकल प्रेगनेंसी यह बताती है कि आपका शरीर गर्भधारण करने में सक्षम है, बस इस बार एम्ब्रीओ आगे नहीं बढ़ सका।
ज़्यादातर महिलाएं केमिकल प्रेगनेंसी के बाद अगले कुछ महीनों में ही सफलतापूर्वक गर्भधारण कर लेती हैं। इसीलिए एक या दो सामान्य पीरियड्स आने दें, फिर दोबारा कोशिश शुरू करें।
इस पीरियड में हार्मोन सामान्य हो जाते हैं और एंडोमेट्रियम की परत यानी यूटेराइन लाइनिंग नई शुरुआत के लिए तैयार हो जाती है। शारीरिक रूप से आपका शरीर बहुत जल्दी ठीक हो जाता है क्योंकि यह बहुत शुरुआती चरण में हुआ था।
अगर बार बार केमिकल प्रेगनेंसी हो रही है, यानी दो या तीन बार, तो डॉक्टर कुछ टेस्ट करवाने को कहते हैं। ये टेस्ट हैं हार्मोन लेवल, थाइरॉइड, प्रोलैक्टिन (prolactin), ऑटोइम्यून मार्कर, और यूटेराइन लाइनिंग का इवैल्यूएशन । कुछ मामलों में हिस्टेरोस्कोपी (hysteroscopy) से गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) के अंदर की कंडीशन भी देखी जा सकती है।
अगर आप IVF या IUI ट्रीटमेंट ले रही हैं, तो केमिकल प्रेगनेंसी होना और ज़्यादा निराशाजनक लग सकता है। लेकिन इसे पूरी तरह असफलता न मानें। IVF में एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद केमिकल प्रेगनेंसी होने का मतलब है कि इम्प्लांटेशन शुरू तो हुआ, बस टिक नहीं सका।
डॉक्टर इस जानकारी का इस्तेमाल अगले साइकल को बेहतर बनाने के लिए करते हैं। दवाओं की डोज़, एम्ब्रीओ ट्रांसफर का समय, या लाइनिंग की तैयारी में बदलाव किए जा सकते हैं। कुछ मामलों में PGT से भ्रूण की जेनेटिक जांच करवाने का सुझाव दिया जाता है ताकि सबसे स्वस्थ एम्ब्रीओ ट्रांसफर हो।
केमिकल प्रेगनेंसी मेडिकल रूप से "शुरुआती" मिसकैरेज भले ही हो, लेकिन भावनात्मक रूप से यह परेशान कर सकती है। जिस पल आपने पॉज़िटिव टेस्ट देखा, उसी पल से सपने बुनने शुरू हो गए थे। अपने इस दर्द को नज़रअंदाज़ न करें।
कई महिलाएं सोचती हैं कि शायद उन्होंने कुछ गलत किया। यह सच नहीं है। केमिकल प्रेगनेंसी आपकी किसी गलती की वजह से नहीं होती, न ज़्यादा काम से, न स्ट्रेस से, न किसी खास खाने से।
अपने पार्टनर, किसी करीबी दोस्त, या परिवार के सदस्य से बात करें। कई बार पार्टनर को भी उतना ही दुख होता है लेकिन वो जता नहीं पाते, इसलिए एक दूसरे का सहारा बनें। अगर भावनाएं बहुत भारी लग रही हैं, तो काउंसलर से बात करने में कोई बुराई नहीं है।
केमिकल प्रेगनेंसी बहुत कॉमन होती है और ज़्यादातर केसों में एक बार ही होती है। Chemical pregnancy का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप आगे प्रेगनेंट नहीं हो पाएंगी। कई महिलाओं में इसके बाद बिल्कुल सामान्य और स्वस्थ प्रेगनेंसी होती है।
समझने वाली बात यह है कि अक्सर यह शरीर का एक नैचुरल तरीका होता है, जहाँ किसी कारण से शुरुआती प्रेगनेंसी आगे नहीं बढ़ पाती। इसलिए खुद को दोष देना या घबराना सही नहीं है।
अगर यह बार-बार हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर सही जांच करवाना ज़रूरी है ताकि कारण समझा जा सके। साथ ही, अपने मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। धैर्य रखें, क्योंकि सही समय और सही परिस्थितियों में प्रेगनेंसी पूरी तरह संभव है।