चॉकलेट सिस्ट प्रेगनेंसी पर कैसे असर डालती है (chocolate cyst of ovary in Hindi)

Last updated: May 06, 2026

सारांश (Overview)

पीरियड्स में हर बार इतना तेज़ दर्द कि दवा से भी पूरा आराम न मिले, पेट के निचले हिस्से में लगातार भारीपन, और महीनों से प्रेगनेंसी की कोशिश के बावजूद कोई नतीजा न आए, तो ये सब एक साथ किसी एक समस्या की तरफ़ इशारा कर सकते हैं, जिसे Chocolate cyst of ovary कहते हैं।

चॉकलेट सिस्ट ओवरी पर बनने वाली एक गांठ है जिसके अंदर पुराना गाढ़ा खून जमा होता रहता है। यह कैंसर नहीं है, लेकिन इसकी समय पर पहचान करना और सही इलाज ज़रूरी होता है।

Chocolate cyst of ovary in Hindi आर्टिकल में समझते हैं कि यह सिस्ट कैसे बनती है, इसके लक्षण क्या होते हैं, प्रेगनेंसी पर इसका कितना असर पड़ता है, और इसका इलाज कैसे होता है।

Chocolate cyst of ovary क्या है और इसका ऐसा नाम क्यों है?

चॉकलेट सिस्ट को मेडिकल भाषा में एंडोमेट्रियोटिक सिस्ट (endometriotic cyst) कहते हैं। यह ओवरी यानी अंडाशय पर बनती है। इसके अंदर पुराना खून जमा होता है जो समय के साथ गाढ़ा और गहरे भूरे रंग का हो जाता है, बिल्कुल पिघली हुई चॉकलेट जैसा। इसी वजह से इसे "चॉकलेट सिस्ट" कहते हैं।

यह सिस्ट एंडोमेट्रियोसिस (endometriosis) नाम की बीमारी का हिस्सा है। एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम (endometrium) का टिश्यू गर्भाशय के बाहर दूसरी जगहों पर बढ़ने लगता है। जब यह टिश्यू ओवरी पर बढ़ता है, तो हर महीने पीरियड्स के दौरान वहां भी ब्लीडिंग होती है। लेकिन इस खून को बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलता, इसलिए यह ओवरी में इकट्ठा होता रहता है और धीरे धीरे सिस्ट बन जाती है।

Chocolate cyst कैसे और क्यों बनती है?

हर महीने पीरियड्स के दौरान गर्भाशय की लाइनिंग टूटकर ब्लीडिंग के रूप में बाहर आती है। लेकिन जब एंडोमेट्रियल टिश्यू ओवरी पर भी बनने लगते हैं, तो वहां भी हर महीने पीरियड्स वाली प्रक्रिया होती है। यानी खून निकलता है लेकिन बाहर नहीं जा पाता, इसलिए ओवरी के अंदर फंसा रहता है।

हर मेंस्ट्रुअल साइकिल के साथ थोड़ा और खून जमा होता जाता है और कुछ महीनों या सालों में यह एक सिस्ट बन जाती है।

सिस्ट का आकार 1 से 2 सेंटीमीटर से लेकर 10 सेंटीमीटर या उससे भी बड़ा हो सकता है। यह एक ओवरी पर हो सकती है या दोनों तरफ। अगर सिस्ट दोनों ओवरी पर हैं तो फर्टिलिटी पर ज़्यादा असर पड़ता है।

इसके बनने की वजह अभी पूरी तरह पता नहीं है। ऐसा मन जाता है कि पीरियड्स का कुछ खून फैलोपियन ट्यूब से होकर पेट में वापस चला जाता है, जिसे रेट्रोग्रेड मेन्स्ट्रुएशन (retrograde menstruation) कहते हैं। इम्यून सिस्टम और जेनेटिक कारण भी इसके इसकी वजह हो सकते हैं।

चॉकलेट सिस्ट के लक्षण कैसे पहचानें

कई बार चॉकलेट सिस्ट (chocolate cyst of ovary) बिना किसी लक्षण के होती है और रूटीन अल्ट्रासाउंड में पता चलती है।

  • पीरियड्स में बहुत तेज़ दर्द, जो सामान्य क्रैम्प से कहीं ज़्यादा होता है और कई बार दवा से भी पूरी तरह कम नहीं होता।
  • पीरियड्स के बीच में भी पेट के निचले हिस्से में भारीपन महसूस हो सकता है। 
  • ब्लीडिंग ज़्यादा होना।
  • पीरियड्स के बीच में हल्की स्पॉटिंग।
  • संबंध बनाते समय दर्द भी आम लक्षण हैं।
  • सिस्ट बड़ी हो जाने पर पेट में सूजन, गैस, या कब्ज़ हो सकती है क्योंकि सिस्ट आसपास की आंत पर दबाव डाल सकती है।
  • कुछ महिलाओं को यूरिन पास करते समय भी तकलीफ होती है।

अगर आपको पीरियड्स में असामान्य दर्द रहता है या लंबे समय से प्रेगनेंसी नहीं हो रही, तो एक बार अपने डॉक्टर से ज़रूर बात करें।

क्या Chocolate cyst होने से मां बनने में दिक्कत होती है?

चॉकलेट सिस्ट होने से कंसीव होने में मुश्किल आ सकती है, लेकिन प्रेगनेंसी होगी ही नहीं, ऐसा नहीं है। अगर सिस्ट छोटी है और एक ओवरी पर है, तो दूसरी ओवरी से एग बनते रहते हैं और प्रेगनेंसी हो जाती है। लेकिन बड़ी सिस्ट ओवरी के सामान्य टिश्यू को दबा देती है, जिससे उस तरफ एग्स की संख्या कम हो जाती है।

  • एंडोमेट्रियोसिस खुद भी फर्टिलिटी को प्रभावित करती है। इसकी वजह से फैलोपियन ट्यूब में चिपकाव यानी एडहेसन (adhesion) बन सकते हैं जिससे एग और स्पर्म का मिलना मुश्किल हो जाता है।
  • इसकी वजह से गर्भाशय की लाइनिंग यानी एंडोमेट्रियम पर भी असर पड़ता है, जिससे एम्ब्रीओ (embryo) का इम्प्लांट होना भी मुश्किल हो सकता है।

लेकिन सही समय पर सही इलाज से कई महिलाएं चॉकलेट सिस्ट के बावजूद मां बनती हैं। कुछ को सर्जरी के बाद नेचुरल प्रेगनेंसी हो जाती है, और कुछ IVF की सहायता से माँ बन जाती हैं। इसीलिए सबसे पहले अपने ओवेरियन रिज़र्व का टेस्ट करवाएं फिर आगे का निर्णय लें।

Chocolate Cyst of Ovary की जांच कैसे होती है?

चॉकलेट सिस्ट का पता लगाने का सबसे आम तरीका TVS अल्ट्रासाउंड है। इसमें ओवरी को करीब से देखा जाता है।

चॉकलेट सिस्ट अल्ट्रासाउंड में खास तरह से दिखती है। उसके अंदर गाढ़ा और एकसमान फ्लूइड दिखाई देता है जिसे ग्राउंड ग्लास अपीयरेंस (Ground Glass Appearance) कहते हैं। डॉक्टर अमूमन अल्ट्रासाउंड से ही chocolate cyst को पहचान लेते हैं।

कुछ केसों में खासकर जब यह न पता हो कि सिस्ट किस तरह की है, तब MRI की ज़रूरत पड़ सकती है। ब्लड टेस्ट में CA-125 मार्कर देखा जाता है जो एंडोमेट्रियोसिस के केस में बढ़ा हुआ मिल सकता है, हालांकि इस पर हमेशा भरोसा नहीं किया जा सकता।

AMH टेस्ट से पता चलता है कि ओवरी में एग्स का रिज़र्व कितना बचा है, जो प्रेगनेंसी प्लानिंग के लिए बहुत ज़रूरी जानकारी है।

Chocolate Cyst कैसे ठीक होती है?

चॉकलेट सिस्ट का इलाज उसके साइज़, लक्षणों की गंभीरता, और प्रेगनेंसी की प्लानिंग पर निर्भर करता है। छोटी सिस्ट जिसमें कोई लक्षण नहीं हों, उसे कई बार सिर्फ मॉनिटर किया जाता है। डॉक्टर हर कुछ महीनों में अल्ट्रासाउंड करवाते हैं ताकि पता चलता रहे कि सिस्ट बढ़ रही है या नहीं।

प्रेगनेंसी की जल्दी न हो तो हार्मोन की दवाएं दी जा सकती हैं। इनसे एंडोमेट्रियल टिश्यू की ग्रोथ धीमी हो जाती है। जिससे सिस्ट का बढ़ना रुक सकता है, लेकिन ये दवाएं सिस्ट को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं।

जब सिस्ट 4 सेंटीमीटर से बड़ी हो, लक्षण ज़्यादा हों, या प्रेगनेंसी का प्लान हो, तो लैप्रोस्कोपी (laparoscopy) सर्जरी की जाती है। इसमें पेट पर छोटे छोटे कट लगाकर कैमरा डाला जाता और और सिस्ट को सर्जरी करके ओवरी से अलग करके निकाल दिया जाता है। कोशिश होती है कि ओवरी को ज़्यादा से ज़्यादा बचाया जाए। सर्जरी के बाद आप 2 से 3 दिन में घर जा सकती हैं।

सर्जरी के बाद प्रेगनेंसी की कितनी संभावना है?

Chocolate Cyst of ovary की सर्जरी के बाद पहले 6 से 12 महीने प्रेगनेंसी के लिए सबसे अच्छा समय माना जाता है। इस दौरान ओवरी साफ होती है और एंडोमेट्रियोसिस वापस आने का समय नहीं मिला होता। इसीलिए डॉक्टर अक्सर सर्जरी के बाद जल्दी प्रेगनेंसी की कोशिश शुरू करने की सलाह देते हैं।

एक ज़रूरी बात यह है कि चॉकलेट सिस्ट वापस आ सकती है। एंडोमेट्रियोसिस को पूरी तरह ठीक करना मुश्किल है, सर्जरी से सिस्ट हट जाती है लेकिन अगर बीमारी बनी रहे तो नई सिस्ट बन सकती है। अगर प्राकृतिक तरीके से प्रेगनेंसी न हो, तो IVF सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।

जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी नहीं चाहिए, उन्हें सर्जरी के बाद हार्मोनल दवाएं दी जाती हैं ताकि सिस्ट की वापसी रुके। नियमित फॉलो अप और अल्ट्रासाउंड ज़रूरी है।

निष्कर्ष (Conclusion)

चॉकलेट सिस्ट सुनने में डरावनी लग सकती है, लेकिन यह कैंसर नहीं है और सही इलाज से इसे मैनेज किया जा सकता है। अगर आपको पीरियड्स में बहुत तेज़ दर्द रहता है, ब्लीडिंग ज़्यादा होती है, या लंबे समय से प्रेगनेंसी नहीं हो रही, तो TVS अल्ट्रासाउंड करवाना बहुत ज़रूरी है।

जितनी जल्दी इस सिस्ट का पता चले, उतना बेहतर इलाज संभव है। अपने दर्द को नज़रअंदाज़ न करें और अपने डॉक्टर से खुलकर बात करें।

Chocolate Cyst के बारे में पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या चॉकलेट सिस्ट अपने आप ठीक हो सकती है?

चॉकलेट सिस्ट फटने पर क्या होता है?

क्या दोनों ओवरी पर चॉकलेट सिस्ट हो सकती है?

क्या चॉकलेट सिस्ट में IVF सफल होता है?

सर्जरी के बाद सिस्ट वापस आने की कितनी संभावना है?

क्या चॉकलेट सिस्ट से कैंसर हो सकता है?

क्या डाइट से चॉकलेट सिस्ट पर फर्क पड़ता है?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
चॉकलेट सिस्ट प्रेगनेंसी पर कैसे असर डालती है (chocolate cyst of ovary in Hindi)
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