कन्सेप्शन (Conception ) यानी गर्भ की शुरुआत एक बहुत ही जटिल बायोलॉजी प्रक्रिया है। कन्सेप्शन के लिए सिर्फ सम्बन्ध बनाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि दोनों पार्टनर का प्रजनन स्वास्थ्य यानी फ़र्टिलिटी हेल्थ (fertility health), सम्बन्ध बनाने का समय इत्यादि बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। स्पर्म को एग तक पहुंचने, उसे फर्टिलाइज़ करने और फिर बने हुए एम्ब्रियो को यूटेरस तक जाकर वहां इम्प्लांट होने में आमतौर पर 6 से 12 दिनों का समय लगता है। दरअसल conception meaning in hindi की बात हो तो कई कपल्स यह समझना चाहते हैं कि शरीर के अंदर यह क्रम किस तरह से आगे बढ़ता है, ओव्यूलेशन के आसपास सही समय कैसे पहचाना जाए, और किन कारणों से यह प्रक्रिया कभी-कभी रुक जाती है। आगे इस आर्टिकल के माध्यम से conception meaning in hindi को सरल और स्पष्ट तरीके से समझेंगे ताकि आप जान सकें कि गर्भधारण की शुरुआत वास्तव में कब होती है, यह किन चरणों से गुजरती है, और यदि नेचुरल तरीके से conception नहीं हो रहा तो IUI या IVF जैसे विकल्प किस तरह मदद कर सकते हैं।
फर्टिलाइजेशन (fertilization), इंप्लांटेशन (implantation) और कन्सेप्शन (conception) तीनों शब्द अलग-अलग संतान होने की जर्नी के अलग अलग स्टेप्स को दर्शाते हैं। ये स्टेप्स प्रेगनेंसी की शुरुआत में होते हैं।
फर्टिलाइजेशन वो क्षण होता है जब स्पर्म एग के अंदर प्रवेश करता है। यह फैलोपियन ट्यूब में होता है, यूट्रस में नहीं। जब स्पर्म और एग का डीएनए (DNA) मिलता है, तो एक अकेली कोशिका यानी सिंगल सेल (single cell) बनती है जिसे जायगोट (zygote) कहते हैं। यह प्रेगनेंसी की सबसे पहली स्टेज है।
इंप्लांटेशन तब होता है जब फर्टिलाइज हो चुका एग,जायगोट बन चुका होता है और यह अनेक भागों में विभाजित यानी डिवाइड (divide) होते हुए यूट्रस तक पहुंचता है। 5-6 दिन में यह ब्लास्टोसिस्ट (blastocyst) बन जाता है और यूट्रस की दीवार यानी एंडोमेट्रियम (endometrium) में जाकर चिपक जाता है। यहीं से प्रेगनेंसी टेस्ट में दिखने वाला hCG हॉर्मोन बनना शुरू होता है।
कन्सेप्शन इन दोनों स्टेप्स को मिलाकर बनने वाली स्टेज को कहते हैं। बोलचाल के तौर पर कुछ डॉक्टर फर्टिलाइजेशन को कन्सेप्शन कह देते हैं, और कुछ इंप्लांटेशन को, लेकिन प्रैक्टिकली जब तक इंप्लांटेशन नहीं होता, प्रेगनेंसी कंफर्म नहीं मानी जाती यानी कन्सेप्शन नहीं माना जा सकता।
गर्भधारण यानी conception meaning in hindi में समझने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि स्पर्म की यात्रा कितनी चुनौतीपूर्ण होती है।
रिप्रोडक्शन के लिहाज़ से हेल्दी पुरुष सम्बन्ध बनाते समय एक बार के इजैक्युलेशन में 20 से 30 करोड़ स्पर्म रिलीज़ करता है। लेकिन वजाइना का एसिडिक एनवायरनमेंट, सर्विक्स का म्यूकस, और यूट्रस का रास्ता, इन सबको पार करते हुए सिर्फ कुछ सौ स्पर्म ही फैलोपियन ट्यूब तक पहुंच पाते हैं।
फैलोपियन ट्यूब में पहुंचने के बाद स्पर्म 3 से 5 दिन तक जीवित रह सकते हैं और एग का इंतज़ार कर सकते हैं। इसीलिए अगर ओव्यूलेशन से पहले शारीरिक सम्बन्ध बने हैं तब भी भी conception यानी प्रेगनेंसी हो सकती है।
जब ओवरी से एग रिलीज़ होकर फैलोपियन ट्यूब में आता है, तो कई स्पर्म उसकी बाहरी परत को भेदने की कोशिश करते हैं। लेकिन जैसे ही एक स्पर्म अंदर एंटर करता है, एग की बाहरी परत सख्त हो जाती है और बाकी स्पर्म बाहर रह जाते हैं। स्पर्म की यह पूरी जर्नी कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों में पूरी हो जाती है।
Conception तभी संभव है जब सम्बन्ध सही समय पर बने हों। इस समय को फर्टाइल विंडो कहते हैं।
ओव्यूलेशन के 5 दिन पहले से लेकर ओव्यूलेशन के 1 दिन बाद तक के समय को फर्टाइल विंडो कहते हैं। यह कुल मिलाकर करीब 6 दिन का समय कन्सेप्शन यानी प्रेगनेंसी के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है।
जब conception होता है, तो शरीर कुछ संकेत देता है।
जब एम्ब्रीओ यूटेरस की दीवार में इम्प्लांट होता है, तो हल्की स्पॉटिंग हो सकती है। यह गुलाबी या भूरे रंग की होती है और पीरियड से 3-4 दिन पहले हो सकती है। कन्सेप्शन वाली ब्लीडिंग पीरियड जैसी हैवी नहीं होती।
प्रेगनेंसी टेस्ट का सही समय इम्प्लांटेशन के बाद होता है क्योंकि इसी समय महिला के शरीर में hCG हॉर्मोन बनना शुरू होता है जिसे प्रेगनेंसी हॉर्मोन भी कहते हैं। पीरियड मिस होने के 5-7 दिन बाद यूरिन टेस्ट करने से सबसे सही रिज़ल्ट आता है। प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए सुबह का पहला यूरिन सबसे अच्छा होता है, क्योंकि इस समय हॉर्मोन का गाढ़ापन यानी कंसंट्रेशन (concentration) सबसे ज्यादा होता है।
हर मेंस्ट्रुअल साइकिल में कन्सेप्शन नहीं होता। conception meaning in hindi में पढ़ते हुए आप यह भी समझिये कि एक हेल्दी कपल में भी हर महीने कन्सेप्शन के चांस सिर्फ 20 से 25% होते हैं। कन्सेप्शन फ़ेल होने के कई कारण हो सकते हैं।
अगर 1 साल नैचुरली कोशिश के बाद कन्सेप्शन नहीं हो रहा, या 35+ उम्र में 6 महीने बाद भी नहीं हो रहा, तो फर्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलना चाहिए।
IVF में कन्सेप्शन कैसे अलग है: नैचुरल कन्सेप्शन में फर्टिलाइजेशन फैलोपियन ट्यूब में होता है। IVF में यह लैब में होता है। लेकिन इम्प्लांटेशन वैसे ही होता है, नेचुरल कन्सेप्शन वाले तरीके से ही होता है।
Conception एक जटिल यानी कॉम्प्लिकेटेड प्रोसेस है जिसमें सही टाइमिंग, हेल्दी स्पर्म, हेल्दी एग, और रिसेप्टिव यूट्रस सब कुछ सही होना चाहिए।
अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं तो अपना ओव्यूलेशन ट्रैक करें। ओव्यूलेशन के 2-3 दिन पहले और ओव्यूलेशन के दिन संबंध बनाने से कन्सेप्शन के चांस सबसे ज़्यादा होते हैं।
6 से 12 महीने कोशिश के बाद भी सफलता नहीं मिले तो फर्टिलिटी एक्सपर्ट से सलाह लें, जिससे टेस्ट से पता चल सके कि दिक्कत कहां है।
आज IUI और IVF जैसे विकल्प मौजूद हैं जिनसे लाखों कपल्स माता-पिता बन रहे हैं। कन्सेप्शन चाहे नैचुरल हो या IVF से,आपकी होने वाली संतान समान रूप से सामान्य होगी।
Conception को हिंदी में गर्भधारण कहते हैं। इसमें फर्टिलाइजेशन यानी स्पर्म और एग का मिलना और इम्प्लांटेशन यानी एम्ब्रीओ का यूट्रस में चिपकना दोनों शामिल हैं।
फर्टिलाइजेशन ओव्यूलेशन के 12 से 24 घंटे में हो सकता है। इम्प्लांटेशन में 6 से 10 दिन लगते हैं। पूरी प्रक्रिया 6-12 दिन की होती है।
Conception प्रेगनेंसी की शुरुआत है। जब एम्ब्रीओ इम्प्लांट हो जाता है, तब से 9 महीने की प्रेगनेंसी शुरू होती है।
अगर आपकी 28 दिन की मेंस्ट्रुअल साइकिल है तो ओव्यूलेशन पीरियड के करीब 14 दिन बाद होता है। Conception ओव्यूलेशन के आसपास होता है।
IVF में फर्टिलाइजेशन लैब में होता है। एग और स्पर्म बाहर मिलाए जाते हैं, एम्ब्रीओ बनता है, और यूट्रस में ट्रांसफर किया जाता है।
1 साल कोशिश के बाद फर्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलें। माता पिता बनने के लिए मॉडर्न मेडिकल टेक्नोलॉजी जैसे ओव्यूलेशन इंडक्शन, IUI, या IVF जैसे विकल्प मौजूद हैं।