अगर आपकी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में ओवेरियन सिस्ट आये तो दिमाग में एक साथ कई सवाल पैदा हो सकते हैं जैसे कि क्या यह कैंसर है? क्या इससे माँ बनने में दिक्कत होगी? क्या ऑपरेशन करना पड़ेगा? Cyst kya hota hai जानने से पहले एक बात समझ लीजिए कि हर सिस्ट ख़तरनाक नहीं होता। 10 में से 8 ओवेरियन सिस्ट बिना किसी इलाज के अपने आप ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं तो कुछ सिस्ट ऐसे होते हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है । यह आर्टिकल उन महिलाओं के लिए है जिन्हें हाल ही में अल्ट्रासाउंड में सिस्ट पता चला है और वे समझना चाहती हैं कि आगे क्या करना चाहिए। यहाँ हम बताएंगे कि कौन सा सिस्ट अपने आप सही हो जाता है, और कौन से सिस्ट में इलाज की जरुरत पड़ती है। इसके अलावा यह भी समझेंगे कि फर्टिलिटी पर सिस्ट का क्या असर पड़ता है एवं सर्जरी कब करवानी चाहिए।
सिस्ट एक थैली जैसी संरचना है जिसमें तरल पदार्थ यानी लिक्विड या थोड़ा सॉलिड (हाफ़ सॉलिड) पदार्थ भरा होता है। सिस्ट शरीर में कहीं भी जैसे कि ओवरी, किडनी, ब्रेस्ट, त्वचा आदि में बन सकती है । लेकिन महिलाओं में ज़्यादातर मामलों में यह ओवरी यानी अंडाशय में बनती है इसीलिए इसे ओवेरियन सिस्ट भी कहते हैं।
प्रजनन उम्र यानी जिस उम्र में महिला माँ बन सकती है, इस उम्र की लगभग 10 से 15% महिलाओं में कभी न कभी ओवेरियन सिस्ट पायी जाती है। अच्छी बात यह है कि इनमें से ज़्यादातर सिस्ट बिना किसी नुकसान के अपने आप ठीक हो जाते हैं।
सभी ओवेरियन सिस्ट एक जैसी नहीं होती। कुछ सिस्ट अपने आप बनती हैं और गायब हो जाती हैं लेकिन कुछ में ध्यान देने की जरुरत पड़ती है।
यह सबसे कॉमन सिस्ट होती है, जिसमें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। फ़ंक्शनल सिस्ट मासिक चक्र यानी मेंस्ट्रुअल साइकिल की वजह से बन सकती है। ख़ास बात यह है कि ये सिस्ट आमतौर पर 1 से 3 मेंस्ट्रुअल साइकिल में अपने आप गायब हो जाती हैं और इनके इलाज की ज़रूरत नहीं होती। फ़ंक्शनल सिस्ट दो तरह की होती है।
फॉलिक्युलर सिस्ट: जब ओव्यूलेशन के दौरान फॉलिकल से एग नहीं निकलता और फॉलिकल बढ़ता रहता है, तो यह सिस्ट बन जाता है।
कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट: जब एग निकलने के बाद फॉलिकल जो अब कॉर्पस ल्यूटियम बन गया है में तरल पदार्थ जमा हो जाता है।
इसे चॉकलेट सिस्ट इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें पुराना गाढ़ा खून होता है जो चॉकलेट जैसा दिखता है। यह एंडोमेट्रियोसिस से जुड़ा होता है, जहाँ गर्भाशय की परत जैसा टिशू ओवरी पर बढ़ने लगता है।
इस तरह की सिस्ट अपने आप नहीं जाती और फर्टिलिटी को सीधे प्रभावित कर सकती है। एंडोमेट्रियोमा का इलाज ज़रूरी होता है।
डर्मॉइड सिस्ट जन्म के समय से ही होती है और इसमें बाल, दाँत, त्वचा जैसे टिशू हो सकते हैं। इस तरह की सिस्ट अपने आप नहीं जाती और धीरे-धीरे बढ़ती रहती है जिसे आमतौर पर सर्जरी से निकालना पड़ता है।
यह सिस्ट ओवरी की बाहरी सतह पर बनती है और इसमें पानी जैसा या म्यूकस जैसा लिक्विड भरा होता है। इस तरह की सिस्ट में निगरानी रखने की ज़रूरत होती है क्योंकि आगे चलकर यह काफी बड़ी हो सकती है जिसकी सर्जरी करनी पड़ सकती है।
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) में ओवरी पर कई छोटी - छोटी सिस्ट (2 से 9mm साइज़ की) बन जाती हैं। यह एक अलग हॉर्मोनल कंडीशन है जिसकी वजह से ओव्यूलेशन पर असर पड़ता है। ख़ास बात यह है कि सिस्ट की तरह होने के बावजूद ये सिस्ट नहीं होती, बल्कि हॉर्मोनल समस्या होती है जिसका इलाज अलग तरीके से किया जाता है।
फंक्शनल सिस्ट ज़्यादातर मामलों में यह 1 से 3 मेंस्ट्रुअल साइकिल में अपने आप गायब हो जाती हैं। अगर सिस्ट छोटी है यानी 3 से 5 cm की है और कोई लक्षण नहीं है, तो डॉक्टर निगरानी रखने को कहते हैं, उसके 6-8 हफ्ते बाद दोबारा अल्ट्रासाउंड करवाया जाता है। अगर सिस्ट कम हो गयी है या गायब हो गयी है तो कुछ करने की ज़रूरत नहीं। अगर सिस्ट वैसी ही है या बढ़ गयी है, तो आगे की जाँच की जाती है।
आप बिना घबराए फॉलो-अप अल्ट्रासाउंड ज़रूर करवाएं। अगर इस बीच पेट में तेज़ दर्द, उल्टी, या बुखार हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
| सिस्ट का साइज़ | स्थिति और गंभीरता | अगला स्टेप क्या हो? |
|---|---|---|
| 3 cm से छोटा | चिंता की बात नहीं: क्योंकि ये आमतौर पर फंक्शनल सिस्ट होती हैं | फंक्शनल सिस्ट अक्सर अपने आप गायब हो जाती हैं। इस कंडीशन में सिर्फ़ एक फॉलो-अप अल्ट्रासाउंड काफी है। |
| 3 से 5 cm | सतर्क रहें: इस साइज़ पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि यह लक्षणों को बढ़ा सकती है। | अगर सिस्ट बढ़ रही है या उसकी वजह से दर्द हो रहा है, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। सर्जरी से पहले फर्टिलिटी के लिए एक्सपर्ट से मिलें। |
| 7 cm से बड़ी | इमरजेंसी की संभावना: यह काफी बड़ा साइज़ माना जाता है। | इसमें टॉर्शन यानी ओवरी ट्विस्टिंग (ovary twisting) का खतरा होता है। इस तरह की सिस्ट में अक्सर सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होता है। |
हर सिस्ट को सर्जरी की ज़रूरत नहीं होती। लेकिन कुछ स्थितियों में सर्जरी ज़रूरी हो जाती है।
सिस्ट होने पर भी IVF से माँ बनना संभव है। बस कुछ बातों पर ध्यान देना ज़रूरी होता है। अगर सिस्ट फंक्शनल है और आकार में छोटी है, तो कई बार उसी के साथ IVF ट्रीटमेंट शुरू किया जा सकता है। कुछ मामलों में डॉक्टर पहले सिस्ट के अपने-आप खत्म होने का इंतज़ार करते हैं। कभी-कभी सुई की मदद से सिस्ट का लिक्विड निकाल दिया जाता है और फिर IVF किया जाता है। एंडोमेट्रियोमा के साथ स्थिति थोड़ी अलग होती है। अगर यह छोटा है, तो IVF बिना सर्जरी के भी किया जा सकता है। लेकिन अगर सिस्ट बड़ी हो, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। यहाँ यह समझना ज़रूरी है कि सर्जरी से अंडों की संख्या कम होने का जोखिम भी हो सकता है। इसलिए यह फैसला सोच-समझकर लिया जाता है कि पहले IVF किया जाए या पहले सर्जरी। अगर आप IVF की योजना बना रही हैं, तो इलाज शुरू करने से पहले AMH टेस्ट करवायें, इससे ओवरी की क्षमता का अंदाज़ा लगता है। अगर सर्जरी की संभावना हो, तो एग फ्रीज़िंग पर भी विचार किया जा सकता है।
कम टेस्टोस्टेरोन लेवल को लाइफस्टाइल में बदलाव करके सही किया जा सकता है।
वज़न कम करें: 5 से 10% वज़न कम करने से टेस्टोस्टेरोन में सुधार आ सकता है।
व्यायाम करें: वेट ट्रेनिंग यानी डंबल, बारबेल जैसी एक्सरसाइज़ टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने में सबसे प्रभावी है। हफ्ते में 3-4 बार 30 से 45 मिनट वेट एक्सरसाइज जरूर करें।
नींद पूरी लें: 7-8 घंटे की नींद टेस्टोस्टेरोन लेवल को सही करने के लिए बहुत ज़रूरी है।
तनाव कम करें: योग, मेडिटेशन, या कोई भी एक्टिविटी करें जो तनाव कम करती है।
अल्ट्रासाउंड में सिस्ट आना डरने की बात नहीं है क्योंकि Cyst kya hota hai को विस्तार से समझा दिया गया है। ज़्यादातर सिस्ट से कोई नुकसान नहीं होता और ये अपने आप गायब हो जाती हैं। लेकिन हर सिस्ट को नज़रअंदाज़ भी न करें। सिस्ट का प्रकार और साइज़ जानना ज़रूरी है।अगर आप माँ बनने की प्लानिंग कर रही हैं, तो फर्टिलिटी एक्सपर्ट से ज़रूर मिलें।
ज़्यादातर ओवेरियन सिस्ट कैंसर नहीं होते। 95% से ज़्यादा सिस्ट बिनाइन (गैर-कैंसरयुक्त) होते हैं। लेकिन मेनोपॉज़ के बाद सिस्ट होने पर जाँच ज़रूरी है।
हाँ, छोटे फंक्शनल सिस्ट के साथ प्रेगनेंसी संभव है। कई महिलाएं सिस्ट के साथ नैचुरली कंसीव करती हैं।
सिस्ट फटने पर तेज़ पेट दर्द, बुखार, और कभी-कभी इंटरनल ब्लीडिंग हो सकती है। यह इमरजेंसी है, तुरंत हॉस्पिटल जाएं।
दवाई सिस्ट को सीधे नहीं मिटाती, लेकिन बर्थ कंट्रोल पिल्स नए सिस्ट बनने से रोक सकती हैं।
फाइबर युक्त आहार, हरी सब्ज़ियाँ, और एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड्स जैसे अदरक, हल्दी फ़ायदेमंद हैं। प्रोसेस्ड फूड और ज़्यादा शुगर से परहेज़ करें।
हाँ, खासकर एंडोमेट्रियोमा में दोबारा आने की संभावना होती है। इसीलिए रेगुलर फॉलो-अप ज़रूरी होता है।