कई बार आपको अपने शरीर में किसी गांठ या सूजन का एहसास होता है, या कुछ लक्षण महसूस होते हैं। इस कंडीशन में जब आप अल्ट्रासाउंड करवाती हैं तो हो सकता है कि आपकी रिपोर्ट में cystic lesion लिखा आये। Cystic Lesion Meaning in Hindi मतलब है, कि शरीर के किसी हिस्से में ऐसी थैली जैसी बनावट होना, जिसके अंदर तरल, हवा या अर्ध-ठोस पदार्थ भरा हो सकता है। यहाँ यह समझना जरूरी है कि सिस्टिक लीज़न अपने आप में कोई बीमारी नहीं है। रिपोर्ट में सिस्टिक लीज़न लिखे होने का मतलब सिर्फ यह है कि उस जगह पर सामान्य संरचना से थोड़ा अलग कुछ दिखाई दे रहा है।
हर सिस्टिक लीज़न का मतलब एक जैसा नहीं होता। यह शरीर के अलग-अलग अंगों में अलग कारणों से बन सकता है और इसकी गंभीरता भी हर केस में अलग हो सकती है। इसलिए जरूरी यह होता है कि इसे सही तरीके से समझा जाए कि यह सामान्य है या किसी समस्या की ओर इशारा है। Cystic Lesion Meaning in Hindi आर्टिकल में हम सरल भाषा में समझेंगे कि सिस्टिक लीज़न क्या होता है, यह किन कारणों से बनता है और कब इस पर ध्यान देना जरूरी होता है।
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि लीज़न और सिस्ट एक ही बात नहीं हैं।
लीज़न एक जनरल यानी अम्ब्रेला टर्म (umbrella term) है जो शरीर में किसी भी ऐसी बनावट को कह सकते हैं जिसके बारे में निश्चित तौर पर कुछ पता नहीं होता । लीज़न में फ्लूइड से भरी भी हो सकती है, ठोस भी हो सकती है, या दोनों का मिश्रण हो सकती है।
सिस्ट एक खास तरह की लीज़न होती है। इसके अंदर तरल पदार्थ यानी फ्लूइड भरा होता है और इसकी एक पतली दीवार होती है।
कहने मतलब यह है कि हर सिस्ट एक लीज़न होती है, लेकिन हर लीज़न सिस्ट नहीं होती।
जब रिपोर्ट में cystic lesion लिखा होता है, तो इसका मतलब होता है कि डॉक्टर को ऐसी बनावट दिखी है जो तरल से भरी लग रही है। लेकिन यह फाइनल डायग्नोसिस नहीं होती। इसका मतलब है कि सही कारण जानने के लिए पूरी क्लिनिकल जानकारी और कभी-कभी आगे की जाँच जरूरी होती है।
सिस्टिक लीजंस (cystic lesions) को आमतौर पर दो केटेगरी में बाँटा जाता है। इन दोनों के बीच का फ़र्क समझना बहुत ज़रूरी है।
ये वो लीज़न होती है जिसकी दीवार पतली और चिकनी हो, अंदर सिर्फ साफ फ्लूइड हो, कोई ठोस हिस्सा न हो, और कोई सेप्टेशन (septation) यानी अंदरूनी दीवार न हो। यह अल्ट्रासाउंड पर पूरी तरह काली यानी एनईकोइक (anechoic) दिखती है। सिंपल सिस्टिक लीज़न ज़्यादातर बिनाइन (benign) मतलब हानिरहित होती है और कई बार अपने आप ठीक हो जाती है।
इसमें सिंपल सिस्टिक लीज़न के गुणों के अलावा कुछ न कुछ एक्स्ट्रा जरूर होता है। जैसे इसके अंदर सेप्टेशन हो सकती है, कोई मोटी या असमान दीवार, ठोस हिस्सा, या गाढ़ा पदार्थ हो सकता है। कॉम्प्लेक्स का मतलब कैंसर नहीं है, लेकिन इसमें आगे जाँच ज़रूरी होती है ताकि डॉक्टर पक्के तौर पर बता सकें कि यह क्या है।
| लक्षण | सिंपल सिस्टिक लीज़न (Simple Cystic Lesion) | काम्प्लेक्स सिस्टिक लीज़न (Complex Cystic Lesion) |
|---|---|---|
| दीवार | पतली, चिकनी | मोटी या असमान |
| अंदर का पदार्थ | साफ तरल | तरल + ठोस या गाढ़ा पदार्थ |
| Septation | नहीं | हो सकती है |
| खून का बहाव (Doppler करवाने पर) | नहीं | हो सकता है |
| आगे जाँच | अक्सर ज़रूरत नहीं पड़ती | ज़रूर करवानी चाहिए |
सिस्टिक लीज़न शरीर के कई अंगों में हो सकती है और हर जगह इसका मतलब अलग होता है।
ओवरी में cystic lesion बनना सबसे ज़्यादा कॉमन है। माँ बनने की उम्र वाली महिलाओं में यह अक्सर फ़ंक्शनल सिस्ट (functional cyst) होती है जो ओवुलेशन के दौरान बनती है। फॉलिक्युलर सिस्ट (Follicular cyst) और कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट (corpus luteum cyst) दोनों सिस्टिक लीज़न के रूप में रिपोर्ट में आ सकती हैं। इनमें से ज़्यादातर एक से तीन महीने में खुद ठीक हो जाती हैं।
यूट्रस में सिस्टिक लीज़न दिखे तो यह नबीथियन सिस्ट (Nabothian cyst) हो सकती है जो सर्विक्स (cervix) पर बनती है और पूरी तरह हानिरहित यानी बिनाइन (benign) होती है। कभी-कभी एडेनोमायोसिस (adenomyosis) या फ़िब्रोइड (fibroid) के बिगड़ने पर भी अंदर पानी भरे हिस्से दिख सकते हैं।
40 साल की उम्र के बाद किडनी में सिंपल रीनल सिस्ट (simple renal cyst) बहुत कॉमन है। ज़्यादातर किडनी की बिनाइन सिस्टिक लीजंस को किसी इलाज की ज़रूरत नहीं होती। लिवर में भी ऐसी सिस्ट मिल जाती हैं, आमतौर पर ऐसी सिस्ट का कोई लक्षण दिखाई नहीं देता।
ब्रैस्ट में सिस्टिक लीज़न दिखे तो यह अक्सर हॉर्मोन के कम-ज्यादा होने की वजह से बनने वाली फ़िब्रोसिस्टिक (fibrocystic) के कारण बनती है। हालाँकि ब्रैस्ट में किसी भी तरह की गाँठ महसूस होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर उसकी जाँच करवानी चाहिए।
अल्ट्रासाउंड या CT रिपोर्ट में कई मेडिकल शब्द लिखे होते हैं। और हर शब्द का एक मतलब होता है जो सिस्टिक लीज़न के बारे में जानकरी देता है।
इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि सिस्टिक लीज़न कहाँ पर है, किस तरह की है, और कितनी बड़ी है।
अगर ओवरी में बिनाइन फ़ंक्शनल सिस्टिक लीज़न है तो माँ बनने की क्षमता पर कोई स्थायी असर नहीं पड़ता। सिस्ट बनना ओवुलेशन की प्रक्रिया का हिस्सा है और ठोस समय के बाद ये अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन अगर सिस्टिक लीज़न एंडोमेट्रीओमा (cystic lesion endometrioma) है तो इसका असर फर्टिलिटी पर जरूर पड़ सकता है क्योंकि यह आसपास के स्वस्थ ओवरी के टिश्यू को नुकसान पहुँचाती है।
डरमोइड सिस्ट (Dermoid cyst) जिसे मैच्योर सिस्टिक टेराटोमा (mature cystic teratoma) भी कहते हैं, वह भी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में सिस्टिक लोजान के रूप में आ सकती है। यह खुद से नहीं जाती और सर्जरी से निकालनी पड़ सकती है।
IVF इलाज के दौरान शुरुआती जाँच में अगर सिस्टिक लीज़न दिखे तो डॉक्टर पहले पता लगाते हैं कि यह फ़ंक्शनल है या लंबे समय से मौजूद है।
अगर फंक्शनल हो तो एक साइकल इंतज़ार करवाते हैं, वरना एस्पिरेशन (aspiration) जिसमें नीडल से फ्लूइड निकाल दिया जाता है, या सर्जरी करके IVF शुरू करते हैं।
Cystic lesion सिर्फ़ रेडियोलॉजी की एक भाषा है, बीमारी का नाम नहीं। इसका मतलब बस इतना है कि आपके शरीर में कहीं तरल पदार्थ भरी बनावट दिखी है जिसे आगे जाँचना है। माँ बनने वाली उम्र में ओवरी में मिलने वाली फ़ंक्शनल सिस्ट functional cysts ज़्यादातर बिनाइन होती हैं जिनसे आमतौर पर घबराने वाली कोई बात नहीं होती है । Complex cystic lesion में आगे जाँच ज़रूरी होती है, लेकिन कॉम्प्लेक्स का मतलब भी ज़रूरी नहीं कि कुछ गंभीर हो।
फर्टिलिटी के नज़रिये से बिनाइन सिस्टिक लीज़न होने पर चिंता की बात नहीं होती। एंडोमेट्रियोमा या बड़ी सिस्ट का इलाज करके भी IVF और नेचुरल गर्भधारण दोनों मुमकिन हैं। सबसे ज़रूरी बात यह है कि रिपोर्ट पढ़कर खुद नतीजे न निकालें, अपने डॉक्टर को दिखाएँ जो आपकी पूरी बात जानते हैं और सही सलाह दे सकते हैं।