डिलीवरी के तुरंत बाद जो ब्लीडिंग होती है वो पीरियड नहीं होती। इसे लोकिया (Lochia) कहते हैं जो 4 से 6 हफ्ते तक चलती है। यह प्लेसेंटा के अलग होने के बाद यूट्रस की हीलिंग प्रोसेस का हिस्सा है। Delivery ke baad period kab aata hai यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप बच्चे को कैसे फीड करा रही हैं। अगर ब्रेस्टफीडिंग नहीं करा रहीं तो 6 से 8 हफ्ते में, अगर एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग करा रही हैं तो 6 महीने या उससे भी ज़्यादा समय लग सकता है।
लेकिन एक बहुत ज़रूरी बात जो ज़्यादातर महिलाओं को नहीं पता वह यह है कि पीरियड आने से पहले भी आप प्रेगनेंट हो सकती हैं क्योंकि ओव्यूलेशन पीरियड से पहले होता है। इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि Delivery ke baad period kab aata hai, लोकिया और पीरियड में फर्क क्या है, ब्रेस्टफीडिंग पीरियड को कैसे प्रभावित करती है, और कब डॉक्टर से मिलना ज़रूरी है।
डिलीवरी के बाद होने वाली ब्लीडिंग को लेकर बहुत कन्फ्यूज़न रहता है। पहले समझते हैं कि लोकिया क्या है और यह पीरियड से कैसे अलग है।
लोकिया वो ब्लीडिंग है जो डिलीवरी के तुरंत बाद शुरू होती है, चाहे नॉर्मल डिलीवरी हो या सी-सेक्शन। यह यूट्रस के अंदर उस जगह से आती है जहाँ प्लेसेंटा जुड़ा था।
लोकिया तीन स्टेज में बदलती है। पहले 3-4 दिन यह गहरे लाल रंग की होती है और हैवी होती है, इसे लोकिया रूब्रा (Lochia Rubra) कहते हैं। फिर 4 से 12 दिन तक यह पिंक या ब्राउन हो जाती है और कम होने लगती है, इसे लोकिया सेरोसा (Lochia Serosa) कहते हैं। इसके बाद यह पीली या सफेद हो जाती है और स्पॉटिंग जैसी रह जाती है, इसे लोकिया अल्बा (Lochia Alba) कहते हैं।
लोकिया आमतौर पर 4-6 हफ्ते में खत्म हो जाती है, हालाँकि कुछ महिलाओं में 8 हफ्ते तक भी चल सकती है।
असली पीरियड्स तब शुरू होता है जब लोकिया पूरी तरह खत्म हो जाए और कुछ दिनों या हफ्तों के गैप के बाद फिर से ब्लीडिंग शुरू हो। अगर लोकिया खत्म होने के बाद कम से कम एक हफ्ते का गैप आया और फिर ब्लीडिंग शुरू हुई, तो यह आपका पहला पोस्टपार्टम पीरियड है।
ब्रेस्टफीडिंग और पीरियड्स के बीच गहरा संबंध होता है। जब आप बच्चे को दूध पिलाती हैं, तो शरीर में प्रोलैक्टिन (Prolactin) हॉर्मोन बनता है। यही हॉर्मोन दूध बनाने में मदद करता है।
प्रोलैक्टिन का एक और काम है, वह है ओव्यूलेशन को रोकना। जब ओव्यूलेशन नहीं होता, तो पीरियड्स भी नहीं आते। यही वजह है कि जो महिलाएं एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग कराती हैं, उनको कई महीनों तक पीरियड्स नहीं आते।
लेकिन यह तभी काम करता है जब ब्रेस्टफीडिंग बहुत रेगुलर हो यानी दिन में हर 4 घंटे और रात में हर 6 घंटे पर फीड हो रही हो। जैसे ही फीडिंग की फ्रीक्वेंसी कम होती है या सॉलिड फूड शुरू होता है, प्रोलैक्टिन कम होने लगता है और ओव्यूलेशन वापस आ सकता है।
अगर आप सिर्फ़ ब्रेस्टफीडिंग करा रही हैं और बच्चे को कोई फॉर्मूला या सॉलिड नहीं दे रही हैं, तो पीरियड्स 6 महीने से लेकर 1 साल या उससे भी ज़्यादा समय में आ सकते हैं। कुछ महिलाओं को पीरियड्स तब तक नहीं आते जब तक वो ब्रेस्टफीडिंग पूरी तरह बंद नहीं कर देतीं।
अगर आप ब्रेस्टमिल्क के साथ फॉर्मूला भी दे रही हैं, तो पीरियड 3-6 महीने में आ सकता है। जितनी ज़्यादा फॉर्मूला फीडिंग होगी, उतनी जल्दी पीरियड्स वापस आएंगे।
अगर आप बिल्कुल ब्रेस्टफीडिंग नहीं करा रहीं और बच्चा पूरी तरह फॉर्मूला पर है, तो पीरियड्स 6-8 हफ्ते में वापस आ सकते हैं। कुछ महिलाओं में 4-6 हफ्ते में भी आ जाता है।
अगर आप ब्रेस्टमिल्क पंप करके बोतल से दे रही हैं, तो पीरियड्स की टाइमिंग इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी बार पंप करती हैं। रेगुलर पंपिंग भी प्रोलैक्टिन बनाती है, इसलिए पीरियड्स देरी से आते हैं।
बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि सी-सेक्शन के बाद पीरियड्स जल्दी या देर से आता है। लेकिन सच यह है कि डिलीवरी का तरीका पीरियड्स की टाइमिंग को सीधे प्रभावित नहीं करता।
पीरियड्स कब आएंगे यह हॉर्मोन्स पर निर्भर करता है, न कि इस बात पर कि डिलीवरी वेजाइनल थी या सर्जिकल। नॉर्मल डिलीवरी हो या सी-सेक्शन, अगर आप ब्रेस्टफीडिंग करा रही हैं तो पीरियड्स देर से आएगा, और अगर नहीं करा रही हैं तो जल्दी आएगा।
हाँ, सी-सेक्शन में लोकिया थोड़ी अलग हो सकती है क्योंकि सर्जरी के दौरान यूट्रस की कुछ सफाई हो जाती है। लेकिन लोकिया की अवधि और पीरियड्स की टाइमिंग पर इसका कोई ख़ास असर नहीं पड़ता।
यह सबसे ज़रूरी बात है जो हर नई माँ को जाननी चाहिए कि आप पीरियड्स आने से पहले भी प्रेगनेंट हो सकती हैं।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ओव्यूलेशन पीरियड से लगभग 2 हफ्ते पहले होता है। अगर आपका शरीर ओव्यूलेट करने लगा है लेकिन पीरियड्स अभी नहीं आये, और इस बीच आपने अनप्रोटेक्टेड इंटरकोर्स किया, तो प्रेगनेंसी हो सकती है।
बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि जब तक पीरियड्स नहीं आये, तब तक प्रेगनेंसी नहीं हो सकती। यह सोच गलत है। डिलीवरी के 3 हफ्ते बाद से ही फर्टिलिटी वापस आ सकती है।
अगर आप अभी दूसरी प्रेगनेंसी नहीं चाहतीं, तो डिलीवरी के बाद जल्द से जल्द कॉन्ट्रासेप्शन के बारे में डॉक्टर से बात करें। ब्रेस्टफीडिंग को नेचुरल कॉन्ट्रासेप्टिव मानना पूरी तरह सेफ नहीं है।
पहले कुछ पीरियड्स में ब्लीडिंग ज़्यादा हो सकती है। यह इसलिए होता है क्योंकि प्रेगनेंसी के बाद यूट्रस का साइज़ बड़ा हो जाता है और यूट्रस की लाइनिंग भी ज़्यादा मोटी होती है।
पहले 3-4 पीरियड्स इर्रेगुलर हो सकते हैं। कभी 25 दिन में आए, कभी 35 दिन में। यह नॉर्मल है और धीरे-धीरे रेगुलर हो जाता है।
कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के बाद पीरियड क्रैम्प्स कम हो जाते हैं, जबकि कुछ को ज़्यादा। ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पीरियड आए तो क्रैम्प्स ज़्यादा हो सकते हैं क्योंकि ब्रेस्टफीडिंग से रिलीज़ होने वाला ऑक्सीटोसिन यूट्रस को कॉन्ट्रैक्ट करता है।
पीरियड की अवधि बदल सकती है पहले 4 दिन का था, अब 6 दिन का हो सकता है या इसका उल्टा।
सबसे ज़रूरी बात याद रखें पीरियड आने से पहले भी प्रेगनेंसी हो सकती है क्योंकि ओव्यूलेशन पहले होता है। Delivery ke baad period kab aata hai यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप बच्चे को कैसे फीड करा रही हैं। एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग में 6 महीने या उससे ज़्यादा, मिक्स्ड फीडिंग में 3-6 महीने, और फॉर्मूला फीडिंग में 6-8 हफ्ते में पीरियड वापस आ सकता है। अगर आप अभी दूसरा बच्चा नहीं चाहतीं, तो कॉन्ट्रासेप्शन के बारे में डॉक्टर से ज़रूर बात करें।
यह फीडिंग मेथड पर निर्भर करता है। ब्रेस्टफीडिंग नहीं करा रहीं तो 6-8 हफ्ते में, एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग में 6 महीने या उससे ज़्यादा समय लग सकता है।
लोकिया डिलीवरी के तुरंत बाद शुरू होती है और 4-6 हफ्ते तक चलती है। पीरियड लोकिया खत्म होने के बाद, कुछ गैप के बाद शुरू होता है।
हाँ, ब्रेस्टफीडिंग की फ्रीक्वेंसी कम होने पर या सॉलिड फूड शुरू करने पर पीरियड वापस आ सकता है।
नहीं, डिलीवरी का तरीका पीरियड की टाइमिंग को सीधे प्रभावित नहीं करता। यह ब्रेस्टफीडिंग पर निर्भर करता है।
हाँ, बिल्कुल। ओव्यूलेशन पीरियड से पहले होता है, इसलिए पीरियड आने से पहले भी प्रेगनेंसी हो सकती है।