डर्मॉइड सिस्ट क्या है? कारण, लक्षण और इलाज हिंदी में (Dermoid Cyst in Hindi)

Last updated: January 05, 2026

Overview

अल्ट्रासाउंड में ओवरी में गांठ दिखी और डॉक्टर ने बताया कि इसमें बाल और दांत जैसी चीजें हैं। सुनने में अजीब लगता है लेकिन यह डर्मोइड सिस्ट (Dermoid Cyst) लक्षण हैं। Dermoid cyst in hindi में समझें तो यह एक अनोखी गांठ है जो जन्म से पहले ही बनना शुरू हो जाती है और सालों बाद पता चलती है। वैसे तो यह सिस्ट नार्मल होती है, जो अगर छोटी है तो उससे कोई नुकसान नहीं होता लेकिन यही सिस्ट अगर बड़ी है तो आगे चल कर कुछ परेशानी पैदा कर सकती है। तब डॉक्टर की देखरेख में इसका उचित समाधान किया जाना जरूरी हो जाता है।

डर्मॉइड सिस्ट क्या है और कैसे बनती है?

डर्मोइड सिस्ट ओवरी में बनने वाली एक ऐसी गाँठ होती है जिसमें त्वचा, बाल, दांत, हड्डी और तेल ग्रंथियां जैसे टिश्यू हो सकते हैं। डर्मॉइड सिस्ट की शुरुआत गर्भ में ही हो जाती है। जब भ्रूण विकसित हो रहा होता है तब उसमें टोटीपोटेंट कोशिकाएं (Totipotent Cells) होती हैं। ये वो खास कोशिकाएं हैं जो शरीर का कोई भी अंग जैसे त्वचा, बाल, हड्डी, दांत या नर्व बन सकती हैं।

सामान्य विकास में ये कोशिकाएं अपनी जगह पर जाकर सही अंग बनाती हैं। लेकिन कभी-कभी कुछ कोशिकाएं गलत जगह जैसे ओवरी में फंस जाती हैं। ये फंसी हुई कोशिकाएं वहीं रहती हैं और धीरे-धीरे एक थैली यानी सिस्ट बनाती हैं।

डर्मॉइड सिस्ट के प्रकार

डर्मॉइड सिस्ट शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बन सकता है। इसके मुख्य प्रकार नीचे दिये जा रहे हैं।

  • ओवेरियन डर्मोइड सिस्ट (Ovarian Dermoid Cyst)

    यह सबसे कॉमन है जो अंडाशय में या उसके ऊपर बनती है। यह 15 से 40 साल की महिलाओं में ज्यादा पायी जाती है और अक्सर एक ओवरी में होती है लेकिन 10 से 20 प्रतिशत मामलों में दोनों ओवरी में हो सकती है।

  • पेरीऑर्बिटल डर्मोइड सिस्ट (Periorbital Dermoid Cyst)

    यह आंख की भौंह के पास बनती है और जन्म के समय या बचपन में दिखती है। यह त्वचा के नीचे एक छोटी गांठ जैसी होती है जिसमें आमतौर पर दर्द नहीं होता।

  • स्पाइनल डर्मोइड सिस्ट (Spinal Dermoid Cyst)

    यह रीढ़ की हड्डी में बनती है और धीरे-धीरे बढ़ती है। बड़ी होने पर यह रीढ़ की नसों पर दबाव डाल सकती है जिससे पैरों में कमजोरी या सुन्नपन हो सकता है।

  • इंट्राक्रेनियल डर्मोइड सिस्ट (Intracranial Dermoid Cyst)

    यह दिमाग में बनती है और बहुत रेयर है। ज्यादातर मामलों में यह कोई लक्षण नहीं देता लेकिन फटने पर गंभीर समस्या हो सकती है।

  • नेजल डर्मोइड सिस्ट (Nasal Dermoid Cyst)

    यह नाक में या उसके आसपास बनती है और बच्चों में ज्यादातर होती है।

कैसे पहचानें डर्मॉइड सिस्ट को?

ज्यादातर डर्मोइड सिस्ट धीरे-धीरे बढ़ती हैं। इसके शुरू में कोई लक्षण नहीं दिखते । बहुत सी महिलाओं को किसी और जांच के दौरान अल्ट्रासाउंड में इसका पता चलता है। जब सिस्ट बड़ी हो जाती है तब ये लक्षण दिख सकते हैं।

  • पेट के निचले हिस्से में दर्द: जिस तरफ की ओवरी में सिस्ट है उस तरफ हल्का से मध्यम दर्द हो सकता है जो आता-जाता रहता है।
  • पेट में भारीपन या फूलना: बड़ी सिस्ट से पेट में दबाव और भारीपन महसूस होता है और पेट फूला हुआ लगता है।
  • पीरियड्स में बदलाव: कुछ महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं या पीरियड्स के दौरान ज्यादा दर्द हो सकता है।
  • बार-बार पेशाब आना: बड़ी सिस्ट मूत्राशय यानी ब्लैडर (Bladder) पर दबाव डालती है जिससे बार-बार पेशाब जाने की जरूरत महसूस होती है।
  • कब्ज की समस्या: सिस्ट आंतों पर दबाव डाल सकती है जिससे मल त्याग में परेशानी होती है।
  • संबंध बनाते समय दर्द: बड़ी सिस्ट की वजह से शारीरिक संबंध बनाते समय पेट के निचले हिस्से में दर्द हो सकता है।

जांच और डायग्नोसिस

डर्मॉइड सिस्ट का पता लगाने के लिए डॉक्टर नीचे लिखी जांच करते हैं।

  • पेल्विक अल्ट्रासाउंड (Pelvic Ultrasound): डर्मॉइड सिस्ट अल्ट्रासाउंड में एक खास तरीके से दिखती है जिसमें ठोस और तरल दोनों हिस्से होते हैं और कभी-कभी बाल या दांत जैसी सफेद छाया दिखती है।
  • ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVS): वेजाइना के रास्ते किया जाने वाले इस अल्ट्रासाउंड में ओवरी ज्यादा करीब से दिखती है जिससे सिस्ट के आकार तथा प्रकार की बेहतर जानकारी मिलती है।
  • सीटी स्कैन (CT Scan): जब अल्ट्रासाउंड से पूरी जानकारी न मिले तब सीटी स्कैन किया जाता है। इसमें सिस्ट के अंदर की चर्बी और कैल्शियम वाले हिस्से साफ दिखते हैं जो डर्मोइड सिस्ट की पहचान है।
  • एमआरआई (MRI): यह जांच सिस्ट की विस्तृत तस्वीर देती है और यह पता लगाने में मदद करती है कि सिस्ट बिनाइन है या कैंसर की आशंका है।
  • ब्लड टेस्ट (CA-125): यह टेस्ट ओवेरियन कैंसर का पता लगाने के लिए किया जाता है। डर्मॉइड सिस्ट में आमतौर पर CA-125 का लेवल सामान्य रहता है लेकिन कभी-कभी थोड़ा बढ़ा हुआ हो सकता है।

डर्मॉइड सिस्ट का इलाज

डर्मॉइड सिस्ट का इलाज उसके आकार, लक्षण और महिला की उम्र पर निर्भर करता है।

  • निगरानी (Watchful Waiting):

    अगर सिस्ट 4 से 6 सेंटीमीटर से छोटी है और कोई लक्षण नहीं है तो डॉक्टर हर 6 महीने में अल्ट्रासाउंड से निगरानी रखते हैं। अगर सिस्ट नहीं बढ़ रही तो सर्जरी की जरूरत नहीं होती।

  • लेप्रोस्कोपिक सिस्टेक्टॉमी (Laparoscopic Cystectomy):

    इस सर्जरी में पेट में 3 से 4 छोटे छेद करके कैमरा और उपकरण डाल कर सिस्ट को निकालते हैं और ओवरी को बचा लेते हैं।

  • लेप्रोटॉमी (Laparotomy):

    अगर सिस्ट बहुत बड़ी है या कैंसर की आशंका है तो पेट में बड़ा चीरा लगाकर ओपन सर्जरी की जाती है।

  • ओफोरेक्टॉमी (Oophorectomy):

    अगर सिस्ट बहुत बड़ी है या ओवरी को नुकसान हो चुका है या कैंसर का खतरा है तो पूरी ओवरी निकालनी पड़ सकती है। अगर एक ओवरी निकल जाए तो दूसरी ओवरी से प्रेगनेंसी हो सकती है।

फर्टिलिटी पर प्रभाव

डर्मॉइड सिस्ट आमतौर पर फर्टिलिटी को सीधे प्रभावित नहीं करता क्योंकि यह हार्मोन नहीं बनाती लेकिन कुछ स्थितियों में समस्या हो सकती है।

  • बड़े सिस्ट का प्रभाव: अगर सिस्ट बहुत बड़ी है तो वह ओवरी के स्वस्थ टिशू को दबा सकती है जिससे एग बनने की क्षमता कम हो सकती है।
  • सर्जरी का प्रभाव: सिस्ट निकालते समय कुछ स्वस्थ ओवेरियन टिशू भी निकल सकता है जिससे ओवेरियन रिजर्व यानी अंडों की संख्या कम हो सकती है।
  • दोनों ओवरी में सिस्ट: अगर दोनों ओवरी में सिस्ट है और दोनों की सर्जरी हुई है तो फर्टिलिटी पर ज्यादा असर पड़ सकता है।
  • प्रेगनेंसी में जटिलता: अगर प्रेगनेंसी के दौरान डर्मोइड सिस्ट बढ़ती है तो ओवेरियन टॉर्शन का खतरा बढ़ जाता है इसलिए निगरानी जरूरी है।

अच्छी बात यह है कि ज्यादातर महिलाएं डर्मोइड सिस्ट की सर्जरी के बाद भी सामान्य रूप से गर्भधारण कर पाती हैं।

IVF और डर्मॉइड सिस्ट

अगर आप IVF की तैयारी कर रही हैं और डर्मोइड सिस्ट है तो कुछ बातों का ध्यान रखें।

  • एग रिट्रीवल में परेशानी: अगर सिस्ट बड़ी है और ओवरी के उस हिस्से में है जहां से अंडे निकालने हैं तो एग रिट्रीवल प्रक्रिया जटिल हो सकती है और सिस्ट फटने का खतरा रहता है।
  • IVF से पहले सर्जरी: कई फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट IVF शुरू करने से पहले बड़ी डर्मॉइड सिस्ट को निकालने की सलाह देते हैं ताकि एग रिट्रीवल आसान हो और किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।
  • ओवेरियन रिजर्व की जांच: सर्जरी के बाद AMH टेस्ट से अंडों की संख्या का अंदाजा लगाया जाता है ताकि IVF की सफलता का अनुमान लगाया जा सके।
  • छोटी सिस्ट में IVF संभव: अगर सिस्ट छोटी है और एग रिट्रीवल में रुकावट नहीं डाल रही तो बिना सर्जरी के IVF किया जा सकता है।

निष्कर्ष

Dermoid cyst in hindi में समझें तो यह एक जन्मजात गांठ है जो ओवरी में सबसे ज्यादा पाई जाती है और इसमें बाल, दांत, त्वचा जैसे ऊतक हो सकते हैं। 95 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में यह कैंसर रहित होता है इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। छोटे सिस्ट को निगरानी में रखा जा सकता है जबकि बड़े या लक्षण देने वाले सिस्ट को लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकाला जाता है। फर्टिलिटी पर इसका सीधा असर नहीं होता और ज्यादातर महिलाएं सर्जरी के बाद भी गर्भधारण कर पाती हैं। IVF की तैयारी में बड़े सिस्ट को पहले निकालना बेहतर रहता है। अगर पेट में दर्द, भारीपन या अनियमित पीरियड्स हों तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर मिलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या डर्मोइड सिस्ट कैंसर में बदल सकती है?

 

बहुत रेयर मामलों में यानी 1 से 2 प्रतिशत से भी कम मामलों में डर्मोइड सिस्ट कैंसर में बदल सकता है।

डर्मॉइड सिस्ट में क्या होती है?

 

इसमें त्वचा, बाल, दांत, हड्डी, तेल ग्रंथियां और नर्व जैसे ऊतक हो सकते हैं। इसमें एक चिकना पीला पदार्थ भी होता है जो सीबम जैसा होता है।

क्या डर्मोइड सिस्ट अपने आप खत्म हो जाती है?

 

नहीं, डर्मोइड सिस्ट अपने आप खत्म नहीं होती, इसे निकालने के लिए सर्जरी जरूरी होती है।

सर्जरी के बाद सिस्ट दोबारा हो सकती है?

 

हां, लेकिन ऐसा रेयर होता है। लगभग 3 से 4 प्रतिशत मामलों में सिस्ट दोबारा बन सकती है इसलिए सर्जरी के बाद नियमित फॉलो-अप जरूरी है।

क्या डर्मोइड सिस्ट से प्रेगनेंसी में परेशानी होती है?

 

छोटी सिस्ट से आमतौर पर कोई परेशानी नहीं होती। लेकिन प्रेगनेंसी में बढ़ते गर्भाशय से सिस्ट के मुड़ने यानी ओवेरियन टॉर्शन का खतरा बढ़ जाता है इसलिए निगरानी जरूरी है।

डर्मॉइड सिस्ट का ऑपरेशन कितने दिन में ठीक होता है?

 

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के बाद 1 से 2 हफ्ते में रिकवरी हो जाती है। ओपन सर्जरी यानी लेप्रोटॉमी में 4 से 6 हफ्ते लग सकते हैं।

क्या डर्मोइड सिस्ट को रोका जा सकता है?

 

नहीं, यह जन्मजात होता है इसलिए इसे रोकना संभव नहीं है। नियमित स्त्री रोग जांच से इसका जल्दी पता लग सकता है जिससे समय पर इलाज हो सके।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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