दो महिलाएँ, दोनों 33 साल की। दोनों को बताया गया कि "ओवेरियन रिज़र्व कम है"।
पहली के पीरियड्स समय पर आते हैं, ओव्यूलेशन हो रहा है, बस AMH कम है और IVF में अंडे कम मिलते हैं।
दूसरी के पीरियड्स छह महीने से आए ही नहीं, रात में गर्मी लगती है, नींद टूटती है।
दोनों को लगभग एक ही वाक्य सुनाया गया। लेकिन उनकी स्थिति एक जैसी बिल्कुल नहीं है - और सबसे ज़रूरी बात ये कि उनका इलाज भी एक जैसा नहीं होगा।
पहली स्थिति को DOR कहते हैं - डिमिनिश्ड ओवेरियन रिज़र्व (Diminished Ovarian Reserve)। दूसरी को POI - प्रीमैच्योर ओवेरियन इनसफ़िशिएंसी (Premature Ovarian Insufficiency)।
ये लेख इसी फ़र्क़ के बारे में है, क्योंकि ये फ़र्क़ भारत में सबसे ज़्यादा गड्डमड्ड होता है - और इसका ख़ामियाज़ा महिला उठाती है।
इसे बैंक खाते की तरह समझिए।
DOR का मतलब है - खाते में जमा राशि कम है। खाता पूरी तरह चालू है, लेन-देन हो रहा है, हर महीने पैसा निकल रहा है। बस बैलेंस उम्र के हिसाब से कम है।
POI का मतलब है - खाता बार-बार फ़्रीज़ हो रहा है। कभी चलता है, कभी नहीं। पैसा निकालने जाओ तो कभी मिल जाता है, कभी नहीं।
ध्यान दीजिए कि दूसरी स्थिति में भी खाता बंद नहीं हुआ है। ये बात आगे बहुत काम आएगी।
ओवेरियन रिज़र्व (Ovarian Reserve) का मतलब है - ओवरी (Ovary) में बचे हुए अंडों की संख्या। ये संख्या जन्म से ही तय होती है और उम्र के साथ लगातार घटती है। ये सामान्य है, सबके साथ होता है।
DOR तब कहा जाता है जब किसी महिला में यह संख्या उसकी अपनी उम्र की बाक़ी महिलाओं की तुलना में कम हो।
अब एक बात जो जानकर हैरानी हो सकती है - DOR की कोई एक तय, सर्वमान्य परिभाषा है ही नहीं।
शोध साहित्य में इसे स्पष्ट रूप से दर्ज किया गया है कि POI के उलट, DOR एक ऐसी अवधारणा है जिसकी न कोई मानक परिभाषा है और न किसी मार्कर की व्यापक रूप से स्वीकृत सीमा (NCBI, NIH)। अलग-अलग अध्ययनों में अलग-अलग मापदंड इस्तेमाल हुए हैं, और इसी वजह से नतीजे भी उलझे हुए रहते हैं ।
इसीलिए इस लेख में AMH या FSH का कोई आँकड़ा जान-बूझकर नहीं दिया जा रहा। जो नंबर एक क्लिनिक में DOR कहलाता है, वो दूसरी जगह नहीं भी हो सकता। अपनी रिपोर्ट का मतलब अपने डॉक्टर से समझिए, इंटरनेट से नहीं।
DOR में आमतौर पर पीरियड्स नियमित रहते हैं, ओव्यूलेशन (Ovulation) होता है, और हार्मोन का स्तर सामान्य दायरे में रहता है। शरीर काम कर रहा होता है - बस भंडार कम है।
POI इससे अलग स्थिति है। यहाँ 40 साल की उम्र से पहले ओवरी का कामकाज ही गड़बड़ा जाता है।
इसकी पहचान दो चीज़ों को साथ देखकर होती है - पीरियड्स का अनियमित होना या चार महीने या उससे ज़्यादा समय तक बिल्कुल न आना (Amenorrhea), और इसके साथ FSH (Follicle Stimulating Hormone) का बढ़ा हुआ होना, जो कम से कम चार हफ़्ते के अंतर पर ली गई दो अलग-अलग जाँचों में दिखे ।
UK की NICE गाइडलाइन इसी बात को और सख़्ती से कहती है - एक ब्लड टेस्ट के आधार पर POI का निदान नहीं करना चाहिए, और इसके लिए 4 से 6 हफ़्ते के अंतर पर दो बार FSH जाँचना ज़रूरी है ।
ये बात दोहराने लायक़ है, क्योंकि इससे बहुत सी बेवजह की घबराहट रुक सकती है। एक बार का बढ़ा हुआ FSH POI नहीं है। अगर आपकी एक रिपोर्ट में FSH ऊँचा आया है और उसी आधार पर आपको कुछ कह दिया गया है, तो दोबारा जाँच के बारे में ज़रूर पूछिए।
POI कितना आम है? 2024 की अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन के मुताबिक़ नए आँकड़े बताते हैं कि POI का प्रसार 3.5% है - जो पहले माने जाने से ज़्यादा है।
यानी लगभग हर 28-30 में से एक महिला। ये उतना दुर्लभ नहीं जितना समझा जाता है।
अगर इस पूरे लेख से आपको सिर्फ़ एक बात याद रखनी हो, तो ये:
DOR मुख्य रूप से प्रजनन क्षमता की समस्या है। POI उससे कहीं आगे की बात है - ये एक दीर्घकालिक स्वास्थ्य स्थिति है।
POI में एस्ट्रोजन (Estrogen) का स्तर लंबे समय तक कम रहता है, और एस्ट्रोजन सिर्फ़ प्रेग्नेंसी के लिए नहीं होता। वो हड्डियों, दिल और दिमाग़ - सबके काम में शामिल है।
2024 की अंतरराष्ट्रीय POI गाइडलाइन इसे साफ़ शब्दों में रखती है - POI के संभावित प्रभावों में जीवन की गुणवत्ता, प्रजनन क्षमता, और हड्डियों, हृदय व संज्ञानात्मक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल असर शामिल हैं, और हार्मोन थेरेपी इनमें से कुछ प्रभावों को कम कर सकती है ।
इसका व्यावहारिक मतलब समझिए।
DOR वाली महिला को हार्मोन थेरेपी (Hormone Therapy) की ज़रूरत नहीं होती। उसका प्रबंधन काउंसलिंग (Counselling), ज़रूरत पड़ने पर फर्टिलिटी प्रिज़र्वेशन (Fertility Preservation), और प्रेग्नेंसी चाहिए हो तो इलाज को बेहतर बनाने पर केंद्रित रहता है।
POI वाली महिला को हार्मोन थेरेपी की ज़रूरत होती है - चाहे वो प्रेग्नेंसी की योजना बना रही हो या नहीं। शोध साहित्य में यही दर्ज है कि POI में एस्ट्रोजन की कमी के हानिकारक प्रभावों को रोकने के लिए हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (Hormone Replacement Therapy, HRT) की ज़रूरत होती है, जबकि DOR में प्रबंधन का ध्यान काउंसलिंग, फर्टिलिटी प्रिज़र्वेशन और सहायक प्रजनन (Assisted Reproduction) के नतीजों को बेहतर करने पर रहता है (NCBI, NIH)।
ये वो हिस्सा है जो भारत में सबसे ज़्यादा छूट जाता है। महिला फर्टिलिटी क्लिनिक जाती है, बच्चा हो जाता है या नहीं होता, और फिर सिलसिला वहीं ख़त्म हो जाता है। किसी ने ये नहीं बताया कि उसे अगले दस-पंद्रह साल तक अपनी हड्डियों और दिल के लिए भी इलाज चाहिए।
एक और बारीक़ी, जो कम लोग जानते हैं - POI वाली महिलाओं को सामान्य उम्र में मेनोपॉज़ से गुज़रने वाली महिलाओं के मुक़ाबले एस्ट्रोजन की ज़्यादा मात्रा चाहिए होती है। यानी 50 साल की महिला वाली दवा 30 साल की POI वाली महिला के लिए काफ़ी नहीं है।
अगर आपको POI बताया गया है और हार्मोन थेरेपी पर बात नहीं हुई है, तो ये सवाल ज़रूर उठाइए।
नहीं। और ये बात दोनों स्थितियों के लिए सच है।
DOR में - अंडों की संख्या कम होना और प्रेग्नेंसी न हो पाना, ये एक बात नहीं है। शोध में साफ़ लिखा है कि AMH (Anti-Müllerian Hormone) का मान प्राकृतिक गर्भधारण के लिए एक कमज़ोर भविष्यवक्ता है।
ASRM की गाइडलाइन इससे भी आगे जाती है - ओवेरियन रिज़र्व के मार्कर अंडों की संख्या का अच्छा अनुमान देते हैं, लेकिन प्रजनन क्षमता के कमज़ोर स्वतंत्र भविष्यवक्ता हैं, और इसी वजह से इन्हें फर्टिलिटी टेस्ट की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, न ही इनके आधार पर किसी को इलाज से मना करना चाहिए ।
तो कम AMH का मतलब "अब नहीं हो सकता" नहीं है। इसका मतलब है - देर मत कीजिए, और योजना सोच-समझकर बनाइए।
POI में - यहाँ स्थिति ज़्यादा कठिन है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन याद कीजिए वो बैंक खाते वाली बात: खाता फ़्रीज़ है, बंद नहीं। POI में ओवरी का कामकाज रुक-रुक कर लौट सकता है, और इसीलिए कुछ महिलाओं में अनायास प्रेग्नेंसी हो जाती है।
यही वजह है कि POI वाली महिलाओं को गर्भनिरोधक के बारे में भी सलाह दी जाती है, अगर वो अभी प्रेग्नेंसी नहीं चाहतीं। ये बात विरोधाभासी लगती है, पर ज़रूरी है।