डिस्पेयरूनिया क्या है? Dyspareunia Meaning in Hindi

Last updated: January 05, 2026

Overview

संभोग यानी इंटरकोर्स (Intercourse) के दौरान दर्द होना एक आम समस्या है जिसके बारे में ज्यादातर महिलाएं खुलकर बात नहीं करतीं। इस समस्या को मेडिकल भाषा में डिस्पेयरूनिया (Dyspareunia) कहते हैं। लगभग 10 से 20% महिलाएं अपने जीवन में कभी न कभी इस समस्या का सामना करती हैं। यह दर्द योनि यानी वेजाइना (Vagina) के बाहरी हिस्से में हो सकता है या पेट के निचले हिस्से में गहराई में महसूस हो सकता है।

Dyspareunia meaning in hindi समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह समस्या सिर्फ शारीरिक नहीं है। इसका असर रिश्तों पर, मानसिक स्वास्थ्य पर, और प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी (Fertility) पर भी पड़ता है। दर्द की वजह से कई कपल्स संबंध बनाने से बचने लगते हैं, जिससे गर्भधारण में दिक्कत आती है। अच्छी बात यह है कि सही जांच और इलाज से ज्यादातर मामलों में इस समस्या को ठीक किया जा सकता है।

डिस्पेयरूनिया: संभोग के दौरान दर्द क्यों होता है?

डिस्पेयरूनिया का मतलब है पार्टनर के साथ शारीरक सम्बन्ध बनाने के दौरान या उसके तुरंत बाद दर्द होना। यह दर्द हल्की चुभन जैसा हो सकता है या इतना तेज कि संबंध बनाना मुश्किल हो जाए। कुछ महिलाओं को सिर्फ शुरुआत में दर्द होता है, जबकि कुछ को पूरे संभोग के दौरान इस समस्या का सामना करना पड़ता है।

यह समस्या सिर्फ महिलाओं में नहीं, पुरुषों में भी हो सकती है, लेकिन महिलाओं में यह ज्यादा आम है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रीशियन्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स के अनुसार, 75% महिलाएं जीवन में कम से कम एक बार सेक्स के दौरान दर्द का अनुभव करती हैं। लेकिन जब यह दर्द बार-बार हो और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करे, तो इसे डिस्पेयरूनिया कहा जाता है और इलाज जरूरी हो जाता है।

डिस्पेयरूनिया के प्रकार

शारीरिक संबंध बनाने के दौरान दर्द कहां होता है, इसके आधार पर डिस्पेयरूनिया दो तरह का होता है।

1. बाहरी या प्रवेश स्तर का दर्द (Entry Dyspareunia)

इस तरह का दर्द वेजाइना के मुख पर या उसके आसपास होता है। यह दर्द सेक्स की शुरुआत में ही महसूस होता है जब पेनिट्रेशन (Penetration) होता है। इसके मुख्य कारणों में वेजाइना का सूखापन, इंफेक्शन, या वेजाइनिस्मस (Vaginismus) शामिल हैं। वेजाइनिस्मस में वेजाइना की मांसपेशियां अपने आप कस जाती हैं, जिससे पेनिट्रेशन बहुत दर्दनाक या मुश्किल हो जाता है।

2. गहरा दर्द (Deep Dyspareunia)

इस तरह का दर्द पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया (Pelvic Area) में गहराई में होता है। यह दर्द गहरे पेनिट्रेशन के दौरान होता है और कुछ पोजीशन में ज्यादा तेज हो सकता है। इसके पीछे अक्सर कोई अंदरूनी समस्या जैसे एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis), ओवेरियन सिस्ट (Ovarian Cyst), या पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज यानी PID (Pelvic Inflammatory Disease) होती है।

संभोग में दर्द होने की वजहें

डिस्पेयरूनिया के कारण शारीरिक भी हो सकते हैं और मानसिक भी। ऐसे ही कुछ कारण नीचे दिए गए हैं।

शारीरिक कारण:

  • वेजाइना का सूखापन: यह सबसे आम कारण है। मेनोपॉज (Menopause) के बाद, स्तनपान के दौरान, या कुछ दवाइयों की वजह से एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन कम होने से वेजाइना में नमी कम हो जाती है।
  • इंफेक्शन: यीस्ट इंफेक्शन (Yeast Infection), बैक्टीरियल वेजिनोसिस (Bacterial Vaginosis), या यौन संचारित संक्रमण जैसे क्लैमाइडिया (Chlamydia) और गोनोरिया (Gonorrhea) से दर्द हो सकता है।
  • एंडोमेट्रियोसिस: इस बीमारी में गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) की अंदरूनी परत बाहर बढ़ जाती है। लगभग 50% एंडोमेट्रियोसिस की मरीजों को गहरे संभोग में दर्द होता है।
  • ओवेरियन सिस्ट या फाइब्रॉइड: अंडाशय यानी ओवरी (Ovary) पर सिस्ट या गर्भाशय में फाइब्रॉइड (Fibroid) होने से गहरे दर्द की शिकायत होती है।
  • PID (पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज): फैलोपियन ट्यूब्स (Fallopian Tubes) और आसपास के अंगों में इंफेक्शन और सूजन से यह समस्या होती है।
  • सर्जरी के बाद: सिजेरियन (C-Section), हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy), या पेल्विक सर्जरी के बाद बने निशान (Scar Tissue) से भी दर्द हो सकता है।

मानसिक कारण:

  • तनाव, चिंता, या अवसाद यानी डिप्रेशन (Depression)
  • पुराना कोई बुरा अनुभव या यौन शोषण का इतिहास
  • रिश्ते में समस्याएं या पार्टनर के साथ तालमेल न होना
  • शरीर की छवि को लेकर असुरक्षा की भावना होना

क्या हैं डिस्पेयरूनिया के लक्षण?

डिस्पेयरूनिया के लक्षण यानी सिम्पटम्स (symptoms) हर महिला में अलग हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ महिलाओं में एक साथ कई लक्षण भी हो सकते हैं।

  • पेनिट्रेशन के समय वेजाइना के मुंह पर जलन या चुभन
  • गहरे पेनिट्रेशन के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द
  • सेक्स के बाद कई घंटों तक दर्द बने रहना
  • कुछ खास पोजीशन में दर्द ज्यादा होना
  • रिलेशन बनाने की इच्छा में कमी आना
  • रिलेशन बनाने से डर लगना या उससे बचने की कोशिश करना

डिस्पेयरूनिया का पता कैसे लगाएं?

सही इलाज के लिए पहले सही जांच जरूरी है। डॉक्टर कुछ सवाल पूछते हैं और कुछ जांच करते हैं:

  • मेडिकल हिस्ट्री: डॉक्टर पूछेंगे कि दर्द कब शुरू हुआ, कहां होता है, कितना तेज होता है, और क्या कोई खास बात है जिससे दर्द बढ़ता या कम होता है।
  • पेल्विक जांच: वेजाइना, गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स (Cervix), और गर्भाशय की शारीरिक जांच होती है।
  • TVS (ट्रांसवेजाइनल सोनोग्राफी): इस अल्ट्रासाउंड से ओवेरियन सिस्ट, फाइब्रॉइड, या एंडोमेट्रियोसिस का पता चलता है।
  • इंफेक्शन टेस्ट: स्वैब टेस्ट (Swab Test) से यीस्ट, बैक्टीरियल, या यौन संचारित इंफेक्शन की जांच होती है।
  • लेप्रोस्कोपी: अगर एंडोमेट्रियोसिस या अंदरूनी चिपकाव का शक हो तो पेट में छोटा कट लगाकर कैमरे से अंदर देखा जाता है।

क्या है डिस्पेयरूनिया का इलाज?

इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि दर्द का कारण क्या है।

वेजाइना के सूखेपन के लिए:

  • सेक्स के दौरान पानी आधारित लुब्रिकेंट (Water-based Lubricant) का इस्तेमाल
  • वेजाइनल मॉइश्चराइजर का नियमित इस्तेमाल
  • मेनोपॉज के बाद टॉपिकल एस्ट्रोजन क्रीम (Topical Estrogen Cream) जो डॉक्टर की सलाह से लगाई जाती है

इंफेक्शन के लिए:

  • इंफेक्शन के प्रकार के अनुसार एंटीफंगल, एंटीबायोटिक, या एंटीवायरल दवाइयां

एंडोमेट्रियोसिस के लिए:

  • हार्मोनल इलाज जैसे गर्भनिरोधक गोलियां या GnRH दवाइयां
  • लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से एंडोमेट्रियल टिश्यू को हटाना

वेजाइनिस्मस के लिए:

  • पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपी (Pelvic Floor Physiotherapy)
  • वेजाइनल डाइलेटर्स (Vaginal Dilators) का इस्तेमाल जिससे धीरे-धीरे मांसपेशियों को आराम मिलता है
  • काउंसलिंग या सेक्स थेरेपी

मानसिक कारणों के लिए:

  • कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी यानी CBT (Cognitive Behavioral Therapy)
  • कपल्स काउंसलिंग
  • सेक्स थेरेपिस्ट से बात करना

वेजाइनिस्मस के इलाज में सफलता दर 80 से 90% है, बशर्ते मरीज नियमित रूप से थेरेपी करे और धैर्य रखे।

डिस्पेयरूनिया का फर्टिलिटी पर क्या असर पड़ता है?

डिस्पेयरूनिया का फर्टिलिटी पर सीधा और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह का असर पड़ता है, जैसे -

  • सेक्स में कमी: दर्द की वजह से कपल्स संबंध बनाने से बचने लगते हैं। इससे ओव्यूलेशन (Ovulation) के सही समय पर भी संबंध नहीं बनता और गर्भधारण मुश्किल हो जाता है।
  • अंदरूनी समस्याएं: एंडोमेट्रियोसिस, PID, या ओवेरियन सिस्ट जैसी समस्याएं जो दर्द का कारण हैं, वे सीधे तौर पर फर्टिलिटी को भी प्रभावित करती हैं।
  • मानसिक तनाव: तनाव से हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है और गर्भधारण में दिक्कत आती है।

अगर डिस्पेयरूनिया की वजह से प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण मुश्किल है, तो IUI (Intrauterine Insemination) या IVF (In Vitro Fertilization) के विकल्प मौजूद हैं। IUI में शुक्राणु यानी स्पर्म (Sperm) को सीधे गर्भाशय में डाला जाता है, इसलिए फिजिकल रिलेशन बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। IVF में तो पूरी प्रक्रिया लैब में होती है जहां अंडे और शुक्राणु को बाहर मिलाया जाता है और भ्रूण को गर्भाशय में डाला जाता है।

एक अध्ययन के अनुसार, जिन महिलाओं को डिस्पेयरूनिया की वजह से गर्भधारण में दिक्कत थी, उनमें से 60 से 70% IVF से सफलतापूर्वक गर्भवती हो सकीं।

निष्कर्ष

डिस्पेयरूनिया एक ऐसी समस्या है जिसका इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए सही जांच जरूरी है। इस आर्टिकल में आपने dyspareunia meaning in hindi के साथ इसके कारण, लक्षण, और इलाज के तरीके जाने। यह समस्या सिर्फ शारीरिक नहीं है, इसका असर रिश्तों और फर्टिलिटी पर भी पड़ता है। एंडोमेट्रियोसिस या PID जैसी समस्याओं का समय पर इलाज न हो तो फर्टिलिटी को स्थायी नुकसान हो सकता है। अगर आप इस समस्या से जूझ रही हैं, तो किसी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें और खुलकर बात करें।

डिस्पेयरूनिया के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या डिस्पेयरूनिया होने पर भी गर्भधारण हो सकता है?

 

हां, अगर समस्या का कारण ठीक हो जाए और संभोग संभव हो तो प्राकृतिक गर्भधारण हो सकता है। अगर संभोग बहुत दर्दनाक हो तो IUI या IVF से गर्भधारण संभव है।

पहली बार संभोग में दर्द होना सामान्य है?

 

हल्की असुविधा हो सकती है, लेकिन बहुत तेज दर्द सामान्य नहीं है। अगर पहली बार में बहुत दर्द हो या बार-बार हो तो डॉक्टर से मिलना चाहिए।

क्या लुब्रिकेंट इस्तेमाल करने से फर्क पड़ता है?

 

हां, खासकर अगर वेजाइना में सूखापन हो। पानी आधारित लुब्रिकेंट सबसे सुरक्षित और असरदार होते हैं। लेकिन अगर लुब्रिकेंट से भी आराम न मिले तो डॉक्टर से मिलें।

मेनोपॉज के बाद डिस्पेयरूनिया आम है?

 

हां। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन कम होने से वेजाइना की त्वचा पतली और सूखी हो जाती है। टॉपिकल एस्ट्रोजन या वेजाइनल मॉइश्चराइजर से आराम मिलता है।

वेजाइनिस्मस का इलाज संभव है?

 

हां। पेल्विक फ्लोर थेरेपी, वेजाइनल डाइलेटर्स, और काउंसलिंग से ज्यादातर मामलों में सुधार होता है। इलाज की सफलता दर 80 से 90% है।

डॉक्टर से कब मिलना जरूरी है?

 

अगर दर्द बार-बार हो, बहुत तेज हो, संभोग के बाद खून आए, या लुब्रिकेंट से भी आराम न मिले। साथ ही अगर गर्भधारण की कोशिश कर रही हों और दर्द बाधा बन रहा हो।

क्या योग से डिस्पेयरूनिया में मदद मिलती है?

 

कुछ योगासन जैसे बालासन (Child Pose) और तितली आसन (Butterfly Pose) पेल्विक मांसपेशियों को आराम देते हैं और तनाव कम करते हैं। ये दर्द की तीव्रता कम करने में मदद कर सकते हैं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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