संभोग यानी इंटरकोर्स (Intercourse) के दौरान दर्द होना एक आम समस्या है जिसके बारे में ज्यादातर महिलाएं खुलकर बात नहीं करतीं। इस समस्या को मेडिकल भाषा में डिस्पेयरूनिया (Dyspareunia) कहते हैं। लगभग 10 से 20% महिलाएं अपने जीवन में कभी न कभी इस समस्या का सामना करती हैं। यह दर्द योनि यानी वेजाइना (Vagina) के बाहरी हिस्से में हो सकता है या पेट के निचले हिस्से में गहराई में महसूस हो सकता है। Dyspareunia meaning in hindi समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह समस्या सिर्फ शारीरिक नहीं है। इसका असर रिश्तों पर, मानसिक स्वास्थ्य पर, और प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी (Fertility) पर भी पड़ता है। दर्द की वजह से कई कपल्स संबंध बनाने से बचने लगते हैं, जिससे गर्भधारण में दिक्कत आती है। अच्छी बात यह है कि सही जांच और इलाज से ज्यादातर मामलों में इस समस्या को ठीक किया जा सकता है।
डिस्पेयरूनिया का मतलब है पार्टनर के साथ शारीरक सम्बन्ध बनाने के दौरान या उसके तुरंत बाद दर्द होना। यह दर्द हल्की चुभन जैसा हो सकता है या इतना तेज कि संबंध बनाना मुश्किल हो जाए। कुछ महिलाओं को सिर्फ शुरुआत में दर्द होता है, जबकि कुछ को पूरे संभोग के दौरान इस समस्या का सामना करना पड़ता है।
यह समस्या सिर्फ महिलाओं में नहीं, पुरुषों में भी हो सकती है, लेकिन महिलाओं में यह ज्यादा आम है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रीशियन्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स के अनुसार, 75% महिलाएं जीवन में कम से कम एक बार सेक्स के दौरान दर्द का अनुभव करती हैं। लेकिन जब यह दर्द बार-बार हो और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करे, तो इसे डिस्पेयरूनिया कहा जाता है और इलाज जरूरी हो जाता है।
शारीरिक संबंध बनाने के दौरान दर्द कहां होता है, इसके आधार पर डिस्पेयरूनिया दो तरह का होता है।
इस तरह का दर्द वेजाइना के मुख पर या उसके आसपास होता है। यह दर्द सेक्स की शुरुआत में ही महसूस होता है जब पेनिट्रेशन (Penetration) होता है। इसके मुख्य कारणों में वेजाइना का सूखापन, इंफेक्शन, या वेजाइनिस्मस (Vaginismus) शामिल हैं। वेजाइनिस्मस में वेजाइना की मांसपेशियां अपने आप कस जाती हैं, जिससे पेनिट्रेशन बहुत दर्दनाक या मुश्किल हो जाता है।
इस तरह का दर्द पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया (Pelvic Area) में गहराई में होता है। यह दर्द गहरे पेनिट्रेशन के दौरान होता है और कुछ पोजीशन में ज्यादा तेज हो सकता है। इसके पीछे अक्सर कोई अंदरूनी समस्या जैसे एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis), ओवेरियन सिस्ट (Ovarian Cyst), या पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज यानी PID (Pelvic Inflammatory Disease) होती है।
डिस्पेयरूनिया के कारण शारीरिक भी हो सकते हैं और मानसिक भी। ऐसे ही कुछ कारण नीचे दिए गए हैं।
डिस्पेयरूनिया के लक्षण यानी सिम्पटम्स (symptoms) हर महिला में अलग हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ महिलाओं में एक साथ कई लक्षण भी हो सकते हैं।
सही इलाज के लिए पहले सही जांच जरूरी है। डॉक्टर कुछ सवाल पूछते हैं और कुछ जांच करते हैं:
इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि दर्द का कारण क्या है।
वेजाइनिस्मस के इलाज में सफलता दर 80 से 90% है, बशर्ते मरीज नियमित रूप से थेरेपी करे और धैर्य रखे।
डिस्पेयरूनिया का फर्टिलिटी पर सीधा और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह का असर पड़ता है, जैसे -
अगर डिस्पेयरूनिया की वजह से प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण मुश्किल है, तो IUI (Intrauterine Insemination) या IVF (In Vitro Fertilization) के विकल्प मौजूद हैं। IUI में शुक्राणु यानी स्पर्म (Sperm) को सीधे गर्भाशय में डाला जाता है, इसलिए फिजिकल रिलेशन बनाने की जरूरत नहीं पड़ती। IVF में तो पूरी प्रक्रिया लैब में होती है जहां अंडे और शुक्राणु को बाहर मिलाया जाता है और भ्रूण को गर्भाशय में डाला जाता है।
एक अध्ययन के अनुसार, जिन महिलाओं को डिस्पेयरूनिया की वजह से गर्भधारण में दिक्कत थी, उनमें से 60 से 70% IVF से सफलतापूर्वक गर्भवती हो सकीं।
डिस्पेयरूनिया एक ऐसी समस्या है जिसका इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए सही जांच जरूरी है। इस आर्टिकल में आपने dyspareunia meaning in hindi के साथ इसके कारण, लक्षण, और इलाज के तरीके जाने। यह समस्या सिर्फ शारीरिक नहीं है, इसका असर रिश्तों और फर्टिलिटी पर भी पड़ता है। एंडोमेट्रियोसिस या PID जैसी समस्याओं का समय पर इलाज न हो तो फर्टिलिटी को स्थायी नुकसान हो सकता है। अगर आप इस समस्या से जूझ रही हैं, तो किसी अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें और खुलकर बात करें।
हां, अगर समस्या का कारण ठीक हो जाए और संभोग संभव हो तो प्राकृतिक गर्भधारण हो सकता है। अगर संभोग बहुत दर्दनाक हो तो IUI या IVF से गर्भधारण संभव है।
हल्की असुविधा हो सकती है, लेकिन बहुत तेज दर्द सामान्य नहीं है। अगर पहली बार में बहुत दर्द हो या बार-बार हो तो डॉक्टर से मिलना चाहिए।
हां, खासकर अगर वेजाइना में सूखापन हो। पानी आधारित लुब्रिकेंट सबसे सुरक्षित और असरदार होते हैं। लेकिन अगर लुब्रिकेंट से भी आराम न मिले तो डॉक्टर से मिलें।
हां। मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन कम होने से वेजाइना की त्वचा पतली और सूखी हो जाती है। टॉपिकल एस्ट्रोजन या वेजाइनल मॉइश्चराइजर से आराम मिलता है।
हां। पेल्विक फ्लोर थेरेपी, वेजाइनल डाइलेटर्स, और काउंसलिंग से ज्यादातर मामलों में सुधार होता है। इलाज की सफलता दर 80 से 90% है।
अगर दर्द बार-बार हो, बहुत तेज हो, संभोग के बाद खून आए, या लुब्रिकेंट से भी आराम न मिले। साथ ही अगर गर्भधारण की कोशिश कर रही हों और दर्द बाधा बन रहा हो।
कुछ योगासन जैसे बालासन (Child Pose) और तितली आसन (Butterfly Pose) पेल्विक मांसपेशियों को आराम देते हैं और तनाव कम करते हैं। ये दर्द की तीव्रता कम करने में मदद कर सकते हैं।