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भ्रूण प्रत्यारोपण के बाद क्या सावधानी रखें?

Disclosure
Last updated: November 25, 2025

Overview

भ्रूण प्रत्यारोपण (इन व्रिटो फर्टिलाइज़ेशन) में गर्भाशय से बाहर शुक्राणुओं द्वारा अंड कोशिकाओं का कृत्रिम परिवेश में निषेचन किया जाता है। भ्रूण प्रत्यारोपण के बाद की सावधानी जानिये|

एम्ब्रीयो ट्रांसफर के बाद सावधानियाँ: सफल प्रेग्नेंसी के लिए आवश्यक बातें

एम्ब्रीयो ट्रांसफर (Embryo Transfer) इन-विट्रो फर्टिलाइज़ेशन (IVF) ट्रीटमेंट का अंतिम और महत्वपूर्ण चरण (लास्ट एंड इम्पोर्टेन्ट स्टेप) है। इस चरण में निषेचित भ्रूण (फ़र्टिलाइज़्ड एम्ब्रीओ) को महिला के गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। इसके पश्चात अगले दस से चौदह दिन अत्यंत संवेदनशील माने जाते हैं क्योंकि इसी अवधि में भ्रूण का स्थापन (इम्प्लांटेशन) होता है। इस समय शरीर में कई हार्मोनल परिवर्तन होते हैं जो गर्भाशय को भ्रूण के विकास हेतु उपयुक्त बनाते हैं। अतः, आईवीएफ के बाद सावधानियाँ (IVF transfer ke baad savdhaniya) अपनाना भ्रूण के सफल इम्प्लांटेशन तथा गर्भधारण की संभावना को बढ़ाने के लिए आवश्यक होता है।

एम्ब्रीयो ट्रांसफ़र के बाद शरीर में क्या होता है?

एम्ब्रीयो ट्रांसफ़र के बाद भ्रूण गर्भाशय की भीतरी परत (यूटेरिन लाइनिंग), जिसे एंडोमेट्रियम (endometrium) कहा जाता है, से जुड़ने का प्रयास करता है। इस प्रक्रिया को इम्प्लांटेशन (Implantation) कहा जाता है। इम्प्लांटेशन प्रायः ट्रांसफर के छठे से दसवें दिन के बीच होता है। दौरान शरीर प्रेगनेंसी हार्मोन बनाना शुरू कर देता है और महिला के शरीर में प्रोजेस्टेरोन और एचसीजी (hCG) ह्यूमन कोरिओनिक गोनाडोट्रोपिन (Human Chorionic Gonadotropin) हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है।

प्रोजेस्टेरोन का काम गर्भाशय की परत (यूटेरिन लाइनिंग) को मोटा करना, यूटेरिन कॉन्ट्रैक्शंस को रोकना जिससे महिला को समय से पहले लेबर में न जाना पड़े और उसके शरीर को प्रसव पश्चात् स्तनपान के लिए तैयार करना होता है।

लेकिन इस स्टेज पर प्रोजेस्टेरोन का मुख्य काम गर्भ को भ्रूण के स्थापन (एम्ब्रीओ इम्प्लांटेशन) के लिए तैयार करना होता है । वहीं, एचसीजी हार्मोन गर्भावस्था की पुष्टि और भ्रूण के विकास के लिए जरुरी आधार बनाता है।

अतः इस समय ज्यादा एक्टिविटी, मानसिक तनाव बचना चाहिए और पोषणयुक्त भोजन (न्यूट्रिशनल डाइट) करना चाहिए अन्यथा गर्भाशय के रक्त प्रवाह और हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे इम्प्लांटेशन की संभावना घट सकती है।

आईवीएफ के बाद कौन सी ज़रूरी सावधानियाँ रखनी चाहिए? (Embryo Transfer ke Baad Savdhaniya)

भ्रूण के सुरक्षित स्थापन के लिए निम्नलिखित सावधानियों का पालन करना आवश्यक है:

  • पर्याप्त आराम करें, परंतु पूरे दिन बिस्तर पर न रहें: सीमित शारीरिक गतिविधि रक्त संचार को सामान्य रखती है। अत्यधिक लेटने से नसों में रक्त प्रवाह धीमा पड़ जाता है, जिससे एंडोमेट्रियल परत को आवश्यक ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता।
  • हल्का और पौष्टिक आहार लें: प्रोटीन, आयरन और फोलिक एसिड युक्त भोजन जैसे दूध, दालें, पनीर, अंडा, फल और हरी सब्जियाँ लाभकारी होती हैं। जंक फूड और मसालेदार भोजन से बचना चाहिए क्योंकि यह पाचन को प्रभावित करता है।
  • नियमित रूप से दवाओं का सेवन करें: प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन आधारित दवाएँ गर्भाशय को भ्रूण स्थापन (एम्ब्रीओ इम्प्लांटेशन) हेतु उपयुक्त बनाए रखती हैं। डॉक्टर के परामर्श के बिना दवा बंद न करें।
  • मानसिक शांति बनाए रखें: तनाव (stress) शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ाता है, जो प्रोजेस्टेरोन के काम में डाल सकता है। IVF के बाद ध्यान (meditation) और पर्याप्त नींद लेने से मानसिक स्थिरता आती है।
  • हल्की वॉक करें, परंतु भारी व्यायाम न करें: हल्की एक्टिविटी जैसे धीमी गति से चलना ब्लड सर्कुलेशन को सुधारती हैं। जबकि भारी व्यायाम या योगासन पेल्विक एरिया पर अनावश्यक दबाव डाल सकते हैं। अतः डॉक्टर IVF के बाद हैवी एक्सरसाइज नहीं करने की सलाह देते हैं।

एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद किन चीज़ों से बचना चाहिए? (Don’ts)

कुछ गतिविधियाँ भ्रूण के इम्प्लांटेशन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। अतः IVF के बाद इनसे परहेज़ करना चाहिए। जैसे-

  • भारी वजन उठाना: भरी वज़न उठाने से पेल्विक मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है जिससे गर्भाशय की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इससे इम्प्लांटेशन को ख़तरा हो सकता है।
  • शराब और धूम्रपान: निकोटिन और अल्कोहल रक्त प्रवाह को कम करते हैं तथा हार्मोनल क्रियाओं को प्रभावित करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, शराब पीने और स्मोकिंग करने से भ्रूण के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • जंक फूड और कैफीन का अत्यधिक सेवन: कैफीन गर्भाशय के संकुचन (uterine contractions) को बढ़ा सकती है। जंक फूड में पाए जाने वाले ट्रांस-फैट्स हार्मोनल संतुलन बिगाड़ते हैं। अतः कॉफी, कोल्ड ड्रिंक और तले खाद्य पदार्थों से दूरी रखें।
  • तनाव और नींद की कमी: नींद की कमी शरीर के हार्मोनल सिग्नलिंग को प्रभावित करती है। तनाव (स्ट्रैस) से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, जिससे गर्भाशय का सूक्ष्म रक्त प्रवाह (माइक्रोसर्कुलेशन) प्रभावित हो सकता है।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना: कुछ दवाएँ जैसे पेनकिलर प्रोजेस्टेरोन के काम को डिस्टर्ब कर सकती हैं। अतः कोई भी दवा डॉक्टर के परामर्श के बिना न खायें।

एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद आम लक्षण (Common Symptoms After Embryo Transfer)

एम्ब्रीओ ट्रांसफर के पश्चात शरीर में कुछ हल्के परिवर्तन सामान्य रूप से देखे जाते हैं। ये परिवर्तन हार्मोनल बदलाव और भ्रूण के इम्प्लांटेशन के कारण होते हैं।

  • हल्की स्पॉटिंग या डिस्चार्ज: यह इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग का संकेत हो सकता है। आमतौर पर यह हानिरहित होता है।
  • पेट में हल्का दर्द या सूजन: प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के प्रभाव से पेट में हल्का दबाव या गैस की समस्या हो सकती है।
  • थकान और नींद अधिक आना: इम्प्लांटेशन के बाद शरीर ऊर्जा बचाने (एनर्जी कंज़र्वेशन) की प्रक्रिया में जाता है, जिससे थकान महसूस होती है।
  • मूड स्विंग्स या भावनात्मक परिवर्तन: • गर्भ के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन के स्तर में वृद्धि से मूड स्विंग्स हो सकते हैं। लेकिन यह लक्षण अत्यधिक बढ़ जाएँ या असामान्य हों, तो डॉक्टर से तत्काल संपर्क करें।

डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

निम्नलिखित परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक होता है:

  • भारी या लगातार रक्तस्राव (हैवी ब्लीडिंग)
  • तेज़ या लगातार पेट दर्द (सीवियर एब्डॉमिनल पेन)
  • लगातार बुखार या संक्रमण के लक्षण (फ़ीवर या इन्फ़ेक्शन)
  • अत्यधिक उल्टियाँ, चक्कर या निर्जलीकरण (सीवियर वॉमिटिंग, डिज़्ज़िनेस, या डिहाइड्रेशन)
  • ये संकेत किसी संक्रमण, हार्मोन में असंतुलन या गर्भाशय में असामान्य प्रतिक्रिया के हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में जल्दी से जल्दी डॉक्टर लेना भ्रूण की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

निष्कर्ष (Conclusion)

आईवीएफ और एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद सावधानियाँ गर्भधारण की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। भ्रूण को सइम्प्लांटेशन के लिए जरुरी वातावरण देने हेतु शरीर को पर्याप्त आराम, संतुलित आहार, नियमित दवा और मानसिक स्थिरता की आवश्यकता होती है। इन छोटे-छोटे उपायों से इम्प्लांटेशन की संभावना काफी बढ़ोत्तरी हो सकती है।

अतः IVF ट्रीटमेंट करवाने वाली प्रत्येक महिला को उल्लिखित नियमों का पालन दृढ़ता और संयम के साथ करना चाहिए।

एम्ब्रियो ट्रांसफ़र के बाद सावधानियाँ

क्या एम्ब्रियो ट्रांसफ़र के बाद पूर्ण बेड रेस्ट आवश्यक है?

 

नहीं। रिसर्च के अनुसार, हल्की एक्टिविटीज़ ब्लड सर्कुलेशन को नार्मल रखती हैं। जब तक डॉक्टर न कहे तब तक कम्पलीट बेड रेस्ट से लाभ की पुष्टि नहीं हुई है।

क्या IVF ट्रांसफ़र के बाद यात्रा सुरक्षित है?

 

पहले 5–7 दिनों तक लंबी यात्रा से बचना चाहिए। छोटी दूरी की यात्रा की जा सकती है, बशर्ते डॉक्टर ने अनुमति दी हो।

IVF के कितने दिनों बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट किया जाना चाहिए?

 

आमतौर पर भ्रूण ट्रांसफर के 14 दिन बाद बीटा hCG ब्लड टेस्ट कराया जाता है। यही गर्भधारण की पुष्टि करता है।

आईवीएफ में भ्रूण स्थानांतरण किस दिन किया जाता है?

 

आमतौर पर अंडाणु निषेचन के 3 या 5 दिन बाद भ्रूण ट्रांसफर किया जाता है, जो भ्रूण की गुणवत्ता पर निर्भर करता है।

आईवीएफ को पहली बार सफल कैसे बनाएं?

 

नियमित दवा सेवन, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण IVF की सफलता दर बढ़ाते हैं।

भ्रूण स्थानांतरण के कितने दिन बाद पॉजिटिव परिणाम मिल सकता है?

 

सामान्यतः 12–14 दिनों के बाद बीटा hCG स्तर बढ़ने लगता है और टेस्ट पॉजिटिव आता है।

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