पीरियड्स के दौरान इतना दर्द कि रोज़मर्रा के काम भी मुश्किल हो जाएं, पेट फूला हुआ लगे, थकान रहे और एनर्जी बिल्कुल न हो। अगर आपको एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) है तो ये सब बहुत जाना-पहचाना लगेगा। अच्छी बात यह है कि दवाओं के साथ-साथ सही खानपान से भी काफी राहत मिल सकती है। Endometriosis diet में ऐसे फूड शामिल होते हैं जो शरीर में इन्फ्लेमेशन (Inflammation) कम करते हैं और एस्ट्रोजन लेवल को संतुलित रखते हैं। रिसर्च के अनुसार एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट (Anti-inflammatory Diet) से 30 से 40 प्रतिशत महिलाओं को लक्षणों में सुधार महसूस होता है। यह डाइट इलाज की जगह तो नहीं ले सकती लेकिन दवाओं के साथ मिलकर बेहतर परिणाम देती है।
कुछ फूड इन्फ्लेमेशन बढ़ाने के साथ साथ एस्ट्रोजन लेवल को प्रभावित करते हैं। इनसे बचें या इनका सेवन सीमित करें।
आहार के अलावा कुछ सप्लीमेंट्स भी एंडोमेट्रियोसिस में लाभकारी हो सकते हैं। इन्हें डॉक्टर की सलाह से लें।
डाइट के साथ लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव भी एंडोमेट्रियोसिस को मैनेज करने में सहायता करते हैं।
Endometriosis diet का एक उदाहरण नीचे दिया जा रहा है।
एंडोमेट्रियोसिस इनफर्टिलिटी के कई कारणों में से एक कारण है, इसीलिए सही डाइट फॉलो करने से फर्टिलिटी में सुधार हो सकता है।
Endometriosis diet इलाज की जगह नहीं लेती लेकिन दवाओं के साथ मिलकर लक्षणों में काफी राहत दे सकती है। ओमेगा-3, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट युक्त फूड खाएं और रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड, चीनी और कैफीन से बचें। हल्दी, अदरक जैसे प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी फूड रोज़ाना की डाइट में शामिल करें।
फूड डायरी रखें ताकि पता चले कि कौन से फूड आपके लिए ट्रिगर हैं। डायटीशियन से मिलकर अपने लिए पर्सनलाइज़्ड मील प्लान बनवाएं। याद रखें कि हर महिला अलग है और जो एक के लिए काम करे वो दूसरे के लिए न भी करे।
नहीं, डाइट से एंडोमेट्रियोसिस पूरी तरह ठीक नहीं होता लेकिन सही आहार से लक्षणों में 30 से 40 प्रतिशत तक सुधार हो सकता है और दवाओं का असर भी बेहतर होता है।
यह व्यक्तिगत है। कुछ महिलाओं को डेयरी से दिक्कत होती है जबकि कुछ को नहीं। 2 से 3 हफ्ते डेयरी छोड़कर देखें और अगर लक्षणों में सुधार हो तो इसे सीमित करें।
एक अध्ययन में 75 प्रतिशत महिलाओं ने ग्लूटेन-फ्री डाइट से दर्द में कमी बताई। लेकिन यह सबके लिए ज़रूरी नहीं है। 6 से 8 हफ्ते ट्राई करें और देखें।
हां, एग्स प्रोटीन और विटामिन D का अच्छा स्रोत हैं। ऑर्गेनिक या फ्री-रेंज एग्स चुनें जिनमें ओमेगा-3 अधिक होता है।
पूरी तरह छोड़ना ज़रूरी नहीं लेकिन दिन में 1 से 2 कप से अधिक न लें। ग्रीन टी एक बेहतर विकल्प है जिसमें कैफीन कम और एंटीऑक्सीडेंट अधिक होते हैं।
आयुर्वेद में हल्का, गर्म और ताज़ा भोजन खाने की सलाह दी जाती है। हल्दी, अश्वगंधा, शतावरी जैसी जड़ी-बूटियां फायदेमंद मानी जाती हैं लेकिन इन्हें आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से लें।
IVF साइकल से कम से कम 2 से 3 महीने पहले एंटी-इन्फ्लेमेटरी डाइट शुरू करें। इससे एग क्वालिटी और यूटेराइन लाइनिंग में सुधार होता है जो इम्प्लांटेशन में मदद करता है।