एंडोमेट्रियोसिस में क्या खाएं और क्या न खाएं (Endometriosis Diet in Hindi)

Last updated: January 05, 2026

Overview

पीरियड्स के दौरान इतना दर्द कि रोज़मर्रा के काम भी मुश्किल हो जाएं, पेट फूला हुआ लगे, थकान रहे और एनर्जी बिल्कुल न हो। अगर आपको एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) है तो ये सब बहुत जाना-पहचाना लगेगा। अच्छी बात यह है कि दवाओं के साथ-साथ सही खानपान से भी काफी राहत मिल सकती है। Endometriosis diet में ऐसे फूड शामिल होते हैं जो शरीर में इन्फ्लेमेशन (Inflammation) कम करते हैं और एस्ट्रोजन लेवल को संतुलित रखते हैं। रिसर्च के अनुसार एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट (Anti-inflammatory Diet) से 30 से 40 प्रतिशत महिलाओं को लक्षणों में सुधार महसूस होता है। यह डाइट इलाज की जगह तो नहीं ले सकती लेकिन दवाओं के साथ मिलकर बेहतर परिणाम देती है।

एंडोमेट्रियोसिस में क्या न खाएं

कुछ फूड इन्फ्लेमेशन बढ़ाने के साथ साथ एस्ट्रोजन लेवल को प्रभावित करते हैं। इनसे बचें या इनका सेवन सीमित करें।

  • रेड मीट: रेड मीट में हीम आयरन होता है जो इन्फ्लेमेशन बढ़ा सकता है और कुछ रिसर्च के अनुसार इससे एंडोमेट्रियोसिस का जोखिम भी बढ़ता है, इसलिए इसका सेवन हफ्ते में एक बार से अधिक न करें।
  • ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड फूड: ट्रांस फैट (Trans Fat) जो फास्ट फूड, पैकेज्ड स्नैक्स, बेकरी आइटम्स और तले हुए खाने में मिलता है इन्फ्लेमेशन बढ़ाता है और एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण गंभीर कर सकता है।
  • चीनी और मीठे पेय: अधिक चीनी खाने से इंसुलिन का स्तर बढ़ता है जो हॉर्मोनल असंतुलन पैदा करता है और इन्फ्लेमेशन भी बढ़ाता है, इसलिए सोडा, कोल्ड ड्रिंक्स और मिठाइयों से बचें।
  • कैफीन: अधिक कैफीन एस्ट्रोजन के स्तर को बढ़ा सकता है, इसलिए कॉफी का सेवन दिन में 1 से 2 कप तक सीमित रखें और एनर्जी ड्रिंक्स से बचें।
  • शराब: शराब लिवर की एस्ट्रोजन मेटाबॉलिज़्म क्षमता को प्रभावित करती है जिससे शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ता है और इन्फ्लेमेशन भी बढ़ती है।
  • ग्लूटेन: कुछ महिलाओं को ग्लूटेन-फ्री डाइट (Gluten-free Diet) से राहत मिलती है क्योंकि ग्लूटेन आंत में इन्फ्लेमेशन पैदा कर सकता है, इसलिए 6 से 8 हफ्ते ग्लूटेन छोड़कर देखें कि फर्क पड़ता है या नहीं।
  • सोया: सोया में फाइटोएस्ट्रोजन (Phytoestrogen) होता है जो एस्ट्रोजन जैसा काम करता है और कुछ महिलाओं में लक्षण बढ़ा सकता है, इसलिए सोया मिल्क, टोफू और सोया प्रोडक्ट्स का सेवन सीमित करें।

फायदेमंद सप्लीमेंट्स

आहार के अलावा कुछ सप्लीमेंट्स भी एंडोमेट्रियोसिस में लाभकारी हो सकते हैं। इन्हें डॉक्टर की सलाह से लें।

  • ओमेगा-3 सप्लीमेंट: अगर मछली नहीं खाते तो फिश ऑयल या अलसी के तेल का सप्लीमेंट लें जो इन्फ्लेमेशन कम करने में मदद करता है।
  • विटामिन D: विटामिन D की कमी एंडोमेट्रियोसिस के जोखिम से जुड़ी है और इसका पर्याप्त स्तर बनाए रखने से लक्षणों में सुधार हो सकता है।
  • विटामिन E और C: एक रिसर्च में 1200 IU विटामिन E और 1000 mg विटामिन C लेने से पेल्विक दर्द और इन्फ्लेमेशन में कमी देखी गई।
  • करक्यूमिन: हल्दी का सक्रिय तत्व करक्यूमिन सप्लीमेंट के रूप में लेने से एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रभाव मिलता है।
  • प्रोबायोटिक्स: आंत के स्वास्थ्य का एस्ट्रोजन मेटाबॉलिज़्म से संबंध है, इसलिए प्रोबायोटिक्स (Probiotics) लेने से हॉर्मोनल संतुलन में मदद मिल सकती है।

जीवनशैली में बदलाव

डाइट के साथ लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव भी एंडोमेट्रियोसिस को मैनेज करने में सहायता करते हैं।

  • नियमित व्यायाम: हल्का व्यायाम जैसे योग, वॉकिंग या स्विमिंग इन्फ्लेमेशन कम करता है, तनाव घटाता है और एंडोर्फिन रिलीज़ करता है जो प्राकृतिक दर्द निवारक है।
  • पर्याप्त नींद: 7 से 8 घंटे की नींद हॉर्मोनल संतुलन और इम्यून फंक्शन के लिए ज़रूरी है जो दोनों एंडोमेट्रियोसिस को प्रभावित करते हैं।
  • तनाव प्रबंधन यानी स्ट्रैस मैनेजमेंट: तनाव इन्फ्लेमेशन बढ़ाता है, इसलिए मेडिटेशन, प्राणायाम या डीप ब्रीदिंग जैसी तकनीकें अपनाएं।
  • फूड डायरी रखें: रोज़ाना क्या खाते हैं और लक्षण कैसे हैं इसका रिकॉर्ड रखें ताकि पता चले कि कौन से फूड आपके लक्षण बढ़ाते हैं।

एक दिन का सैंपल मील प्लान

Endometriosis diet का एक उदाहरण नीचे दिया जा रहा है।

  • सुबह का नाश्ता: ओट्स का दलिया जिसमें अलसी के बीज, ब्लूबेरी और बादाम डालें और साथ में हल्दी वाला दूध लें।
  • मिड-मॉर्निंग स्नैक: मुट्ठी भर अखरोट और एक सेब खाएं जो फाइबर और ओमेगा-3 देता है।
  • दोपहर का खाना: ब्राउन राइस, दाल, पालक की सब्जी, सलाद जिसमें खीरा, टमाटर और नींबू हो।
  • शाम का स्नैक: अदरक की चाय और भुने हुए चने या मखाने खाएं।
  • रात का खाना: ग्रिल्ड सैल्मन या पनीर, क्विनोआ, ब्रोकोली और गाजर की सब्जी जिसमें जैतून का तेल और हल्दी डालें।

फर्टिलिटी और डाइट

एंडोमेट्रियोसिस इनफर्टिलिटी के कई कारणों में से एक कारण है, इसीलिए सही डाइट फॉलो करने से फर्टिलिटी में सुधार हो सकता है।

  • एंटी-इन्फ्लेमेटरी डाइट: इन्फ्लेमेशन कम होने से रिप्रोडक्टिव ऑर्गन्स का वातावरण बेहतर होता है जिससे गर्भधारण की संभावना बढ़ती है।
  • IVF से पहले: IVF साइकल से 2 से 3 महीने पहले एंटी-इन्फ्लेमेटरी डाइट शुरू करने से एग क्वालिटी और इम्प्लांटेशन में सुधार हो सकता है।
  • फोलिक एसिड: गर्भधारण की योजना बना रही हैं तो फोलिक एसिड युक्त फूड जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां और दालें ज़रूर खाएं।
  • वज़न संतुलन: स्वस्थ वज़न बनाए रखना हॉर्मोनल संतुलन के लिए ज़रूरी है जो ओव्यूलेशन और गर्भधारण दोनों में मदद करता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

Endometriosis diet इलाज की जगह नहीं लेती लेकिन दवाओं के साथ मिलकर लक्षणों में काफी राहत दे सकती है। ओमेगा-3, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट युक्त फूड खाएं और रेड मीट, प्रोसेस्ड फूड, चीनी और कैफीन से बचें। हल्दी, अदरक जैसे प्राकृतिक एंटी-इन्फ्लेमेटरी फूड रोज़ाना की डाइट में शामिल करें।

फूड डायरी रखें ताकि पता चले कि कौन से फूड आपके लिए ट्रिगर हैं। डायटीशियन से मिलकर अपने लिए पर्सनलाइज़्ड मील प्लान बनवाएं। याद रखें कि हर महिला अलग है और जो एक के लिए काम करे वो दूसरे के लिए न भी करे।

एंडोमेट्रियोसिस डाइट के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या डाइट से एंडोमेट्रियोसिस ठीक हो सकता है?

 

नहीं, डाइट से एंडोमेट्रियोसिस पूरी तरह ठीक नहीं होता लेकिन सही आहार से लक्षणों में 30 से 40 प्रतिशत तक सुधार हो सकता है और दवाओं का असर भी बेहतर होता है।

एंडोमेट्रियोसिस में दूध पीना चाहिए या नहीं?

 

यह व्यक्तिगत है। कुछ महिलाओं को डेयरी से दिक्कत होती है जबकि कुछ को नहीं। 2 से 3 हफ्ते डेयरी छोड़कर देखें और अगर लक्षणों में सुधार हो तो इसे सीमित करें।

ग्लूटेन-फ्री डाइट से कितना फायदा होता है?

 

एक अध्ययन में 75 प्रतिशत महिलाओं ने ग्लूटेन-फ्री डाइट से दर्द में कमी बताई। लेकिन यह सबके लिए ज़रूरी नहीं है। 6 से 8 हफ्ते ट्राई करें और देखें।

क्या एंडोमेट्रियोसिस में एग्स खा सकते हैं?

 

हां, एग्स प्रोटीन और विटामिन D का अच्छा स्रोत हैं। ऑर्गेनिक या फ्री-रेंज एग्स चुनें जिनमें ओमेगा-3 अधिक होता है।

कॉफी पूरी तरह छोड़नी होगी?

 

पूरी तरह छोड़ना ज़रूरी नहीं लेकिन दिन में 1 से 2 कप से अधिक न लें। ग्रीन टी एक बेहतर विकल्प है जिसमें कैफीन कम और एंटीऑक्सीडेंट अधिक होते हैं।

क्या आयुर्वेदिक आहार एंडोमेट्रियोसिस में मदद करता है?

 

आयुर्वेद में हल्का, गर्म और ताज़ा भोजन खाने की सलाह दी जाती है। हल्दी, अश्वगंधा, शतावरी जैसी जड़ी-बूटियां फायदेमंद मानी जाती हैं लेकिन इन्हें आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से लें।

IVF करवाने से पहले कितने समय डाइट बदलें?

 

IVF साइकल से कम से कम 2 से 3 महीने पहले एंटी-इन्फ्लेमेटरी डाइट शुरू करें। इससे एग क्वालिटी और यूटेराइन लाइनिंग में सुधार होता है जो इम्प्लांटेशन में मदद करता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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