IVF में एम्ब्रीओ ट्रांसफर से पहले एंडोमेट्रियम (Endometrium) की मोटाई यानी थिकनेस (thickness) देखी जाती है। अगर यह थोड़ी कम होती है यानी पतली होती है, तो उस कंडीशन में प्रेगनेंसी सफल होने में मुश्किलें आती हैं। इसके अलावा अगर एंडोमेट्रियम पतली है या पर्याप्त मोटी नहीं है तो निःसंतानता या शुरूआती मिसकैरेज का खतरा हो सकता है।
अब आप सोच रहीं हैं एंडोमेट्रियम क्या होता है तो आइये समझते हैं Endometrium meaning in hindi और पता करते हैं कि इसका पतला-मोटा होने से प्रेगनेंसी पर क्या फर्क पड़ता है?
एंडोमेट्रियम आपके गर्भाशय यानी यूट्रस की अंदरूनी परत है। इसे आप एम्ब्रीओ का बिस्तर समझिए। जैसे एक अच्छे गद्दे पर आप आराम से सो सकती हैं, वैसे ही एक अच्छी मोटाई वाले एंडोमेट्रियम में एम्ब्रीओ आराम से इम्प्लांट हो सकता है। अगर बिस्तर पतला और सख्त हो, तो एम्ब्रीओ टिक नहीं पाएगा।
इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि एंडोमेट्रियम असल में क्या है, यह हर महीने कैसे बदलता है, प्रेगनेंसी के लिए कितनी मोटाई यानी थिकनेस होनी चाहिए, और अगर यह पतला है तो क्या करें।
यूट्रस की तीन परतें होती हैं जिनमें सबसे अंदरूनी परत को एंडोमेट्रियम कहते हैं । यह यूट्रस की कैविटी को लाइन करती है मतलब यूट्रस की कैविटी में जो लाइनिंग होती है, वह एंडोमेट्रियम की वजह से होती है।
यह एक नरम, खून की नलियों यानी वेंस (veins) से भरपूर परत है जो हर महीने आपके मेंस्ट्रुअल साइकिल के साथ बदलती रहती है। पीरियड्स के दौरान जो खून बाहर आता है, वो इसी एंडोमेट्रियम का हिस्सा होता है।
Endometrium के दो हिस्से होते हैं। पहला है फंक्शनल लेयर जो हर महीने बनती है, मोटी होती है, और अगर प्रेगनेंसी नहीं हुई तो पीरियड्स में झड़ जाती है। दूसरा है बेसल लेयर जो परमानेंट रहती है और हर महीने नई फंक्शनल लेयर बनाती है।
एंडोमेट्रियम हर महीने नए सिरे से तैयार होती है। इसमें ब्लड वेसल्स, ग्लैंड्स, और स्ट्रोमा होता है जो एम्ब्रीओ को पोषण देने के लिए ज़रूरी है।
Endometrium को याद रखने का सबसे आसान तरीका है इसे एम्ब्रीओ का बिस्तर समझना। सोचिए आपको एक कमरे में सोना है। अगर वहां एक मोटा, नरम, गद्देदार बिस्तर है तो आप आराम से सो सकेंगी। लेकिन अगर सिर्फ एक पतली चादर फर्श पर बिछी है, तो सोना मुश्किल होगा।
एम्ब्रीओ के साथ भी ऐसा ही है। जब एम्ब्रीओ यूट्रस में आता है, तो उसे एंडोमेट्रियम में इम्प्लांट होना होता है यानी उसमें धंसकर जुड़ना होता है। अगर एंडोमेट्रियम मोटा, नरम और खून की सप्लाई से भरपूर है, तो एम्ब्रीओ आसानी से इम्प्लांट हो जाता है और उसे पोषण मिलता रहता है। अगर endometrium पतला है, तो एम्ब्रीओ को इम्प्लांट होने में दिक्कत होती है और प्रेगनेंसी नहीं टिकती।
यही कारण है कि IVF में डॉक्टर एम्ब्रीओ ट्रांसफर से पहले endometrium thickness चेक करते हैं।
एंडोमेट्रियम हमेशा एक जैसा नहीं रहता। इसमें हर महीने की साइकिल के दौरान बदलाव होता रहता है।
इस दौरान अगर प्रेगनेंसी नहीं हुई तो प्रोजेस्टेरोन गिरता है, एंडोमेट्रियम टूट जाता है और पीरियड्स आ जाते हैं। लेकिन अगर प्रेगनेंसी हुई तो एम्ब्रीओ इम्प्लांट होता है, hCG हॉर्मोन बनता है, और एंडोमेट्रियम बना रहता है।
प्रेगनेंसी के लिए endometrium thickness सबसे ज़रूरी है।
| मेंस्ट्रुअल साइकिल का फेज | नॉर्मल मोटाई (Normal Thickness) | मेडिकल महत्व |
|---|---|---|
| पीरियड्स के दौरान (Day 1-5) | 1 - 4 mm | पुरानी परत बाहर निकल रही होती है, इसलिए यह सबसे पतली होती है। |
| पीरियड्स के ठीक बाद | 4 - 8 mm | एस्ट्रोजन हॉर्मोन नई परत को बनाने का काम शुरू करता है। |
| ओव्यूलेशन के समय | 8 - 10 mm | अंडा रिलीज़ होने के समय परत मखमली और तैयार होनी चाहिए। |
| ओव्यूलेशन के बाद (Luteal Phase) | 10 - 14 mm | प्रोजेस्टेरोन इसे और घना और पोषक तत्वों से भरपूर बनाता है। |
| सफल प्रेगनेंसी के लिए आइडियल | 8 - 13 mm | यह वह रेंज है जहाँ एम्ब्रीओ इम्प्लांटेशन की संभावना सबसे ज़्यादा है। |
Thin endometrium यानी पतला एंडोमेट्रियम प्रेगनेंसी में रुकावट बन सकता है।
एंडोमेट्रियम पतला होने के कई कारण हो सकते हैं।
अगर एंडोमेट्रियम पतला है तो घबराएं नहीं। कई तरीकों से इसे बढ़ाया जा सकता है।
IVF में endometrium thickness का सही होना बहुत ज़रूरी है। एम्ब्रीओ ट्रांसफर से पहले डॉक्टर अल्ट्रासाउंड से एंडोमेट्रियम की मोटाई चेक करते हैं। आमतौर पर 7-8mm से ज़्यादा मोटाई होने पर एम्ब्रीओ ट्रांसफर किया जाता है।
Endometrium meaning in hindi पढ़ते हुए यह जाना कि हेल्दी एंडोमेट्रियम एम्ब्रीओ इम्प्लांटेशन के लिए बहुत जरुरी है। बिस्तर गद्देदार होगा तो एम्ब्रीओ आराम से टिकेगा। प्रेगनेंसी के लिए 8mm या उससे ज़्यादा thickness अच्छी मानी जाती है। 7mm से कम होने पर इम्प्लांटेशन में दिक्कत हो सकती है।
अगर आपका एंडोमेट्रियम पतला है तो निराश न हों। एस्ट्रोजन सप्लीमेंट, ब्लड फ्लो बढ़ाने वाली दवाइयां, और PRP जैसे कई इलाज उपलब्ध हैं जिससे endometrium thickness को बढ़ाया जा सकता है।
IVF में पतला एंडोमेट्रियम होने पर एम्ब्रीओ फ्रीज़ करके बाद में ट्रांसफर किया जा सकता है। और अगर बार-बार IVF फेल हो रहा है और एम्ब्रीओ अच्छे हैं, तो एंडोमेट्रियम की जांच ज़रूर करवाएं।
प्रेगनेंसी के लिए एंडोमेट्रियम कम से कम 7-8mm होना चाहिए। 8-13mm को आइडियल माना जाता है।
पतले एंडोमेट्रियम में एम्ब्रीओ को इम्प्लांट होने में दिक्कत होती है। इससे प्रेगनेंसी नहीं रुकती या IVF फेल हो सकता है।
एस्ट्रोजन सप्लीमेंट, विटामिन E, L-Arginine, और PRP थेरेपी से एंडोमेट्रियम की thickness बढ़ाई जा सकती है।
IVF में एम्ब्रीओ ट्रांसफर के लिए आमतौर पर 7-8mm या उससे ज़्यादा एंडोमेट्रियम होना चाहिए।
एंडोमेट्रियम यूटेरस की नॉर्मल अंदरूनी परत है। एंडोमेट्रियोसिस एक बीमारी है जिसमें एंडोमेट्रियम जैसा टिश्यू यूटेरस के बाहर बढ़ने लगता है।
पीरियड्स में एंडोमेट्रियम की ऊपरी परत झड़ जाती है और खून के साथ बाहर निकलती है। फिर अगले साइकिल में यह दोबारा बनती है।