नॉर्मल डिलीवरी के लिए योग, व्यायाम और आसान गाइड

Last updated: December 26, 2025

Overview

प्रेगनेंसी हर महिला के लिए एक ऐसा समय होता है, जब उसके मन में उम्मीद और खुशी के साथ ही डिलीवरी के समय होने वाले दर्द से भी डर लगता है, क्योंकि कंसीव करने के 9 महीने बाद उसका बच्चा दुनिया में आने वाला होता है। वैसे तो प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिनकी वजह से महिलाओं को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की कई परेशानियों से गुजरना पडता है। लेकिन इन सब के बावजूद, जैसे-जैसे डिलीवरी का समय पास आता है, महिलाएं खुशी-खुशी अपने नन्हे मेहमान का स्वागत करने की तैयारी में जुट जाती हैं। अगर आप जल्द मां बनने वाली हैं और नॉर्मल डिलीवरी चाहती हैं, तो normal delivery ke liye exercise करने में गाइड आपके लिए मददगार हो सकती है।

क्यों नॉर्मल डिलीवरी माँ और संतान के लिए फायदेमंद होती है?

ज्यादातर महिलाएं चाहती हैं कि उनकी डिलीवरी नॉर्मल (Normal Delivery) हो, क्योंकि इसमें रिकवरी जल्दी होती है और मां तुरंत अपने बच्चें से जुड पाती है। इसके अलावा सर्जरी की तरह ज्यादा समय तक इसमें परहेज भी नही करना पडता। हालांकि कई बार कुछ मेडिकल कारणों की वजह से सभी महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी मुमकिन नही हो पाती।

नॉर्मल डिलीवरी मां और बच्चे दोनों के लिए कई तरह से फायदेमंद होती है। इससे जन्मे बच्चों को अक्सर सांस से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं, क्योंकि इस प्रक्रिया के दौरान उनके फेफडों में मौजूद तरल पदार्थ ((Liquid)) आसानी से साफ हो जाते हैं। इसके अलावा, नॉर्मल डिलीवरी के बाद मां जल्दी रिकवर कर नवजात से तुरंत जुड़ पाती है। यही वजह है कि ज्यादातर महिलाएं सी सेक्शन की जगह नॉर्मल डिलीवरी को ज्यादा पसंद करती हैं।

बता दें, नॉर्मल डिलीवरी के लिए सही जानकारी रखना, पहले से तैयारी करना, normal delivery ke liye exercise, हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना और समय–समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।

नॉर्मल डिलीवरी के लिए योग

प्रेगनेंसी में योगा करने से शरीर और मन दोनों शांत रहते हैं। यह normal delivery ke liye exercise के अलावा इम्पोर्टेन्ट एक्टिविटी हो सकती है। योग पेल्विक मांसपेशियों को मजबूत करता है, लचीलापन बढ़ाता है और डिलीवरी को आसान बनाने में मदद करता है। नीचे कुछ आसान योगासन दिए गए हैं जिनका रोजाना अभ्यास करने से नॉर्मल डिलीवरी के चांसेस बढ़ जाते है।

शवासन ( Corpse Pose)

  • फायदे: यह आसन तनाव यानी स्ट्रेस कम कर शरीर को आराम देता है, जिससे प्रेगनेंसी में थकान कम महसूस होता है।
  • कैसे करें: पीठ के बल लेटें, हाथ और पैर आराम से फैलाएं। गहरी सांस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। आंखें बंद रखें और ध्यान केंद्रित करें। इस आसन को रोजाना 10-15 मिनट करना फायदेमंद रहता है।

कैट-काउ पोज (Cat-Cow Pose)

  • फायदे: यह आसन पीठ और रीढ़ की हड्डी को मजबूत करता है, जिससे पीठ दर्द में राहत मिलता है।इसके साथ ही यह बच्चे को जन्म के लिए सही स्थिति में लाने में भी मदद करता है।
  • कैसे करें: दोनों हाथ और घुटनों के सहारे झुकें। गहरी सांस लेते हुए पीठ को ऊपर और फिर नीचे ले जाएं। इस प्रक्रिया को धीरे-धीरे दोहराएं।

तितली मुद्रा (Butterfly Pose)

  • फायदे: यह आसन पेल्विक मांसपेशियों को मजबूत करता है, कूल्हों में लचीलापन लाता है और शरीर को डिलीवरी के लिए तैयार करता है।
  • कैसे करें: सीधे बैठें और पैरों को एक साथ जोड़ें। धीरे-धीरे घुटनों को बाहर की ओर फड़फड़ाएं जैसे तितली अपने पंख फैलाती है। इस स्थिति में कुछ समय तक बैठें और गहरी सांस लें।

सांस से जुड़े व्यायाम (Breathing Exercises)

  • फायदे: नाड़ी शोधन प्राणायाम और पेट की सांस लेने की तकनीक नर्वस सिस्टम को शांत करती है। शरीर और बच्चे को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है और तनाव कम होता है।
  • कैसे करें: धीरे-धीरे गहरी सांस लें और छोड़ें। पेट को बाहर और अंदर फैलाएं। दिन में 10-15 मिनट अभ्यास करने से फायदा मिलता है।

मलासन (Garland Pose)

  • फायदे: पेल्विक एरिया खुलता है और बच्चे के जन्म के लिए जगह बनती है। जांघों और निचले हिस्से की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, जिससे डिलीवरी आसान होती है।
  • कैसे करें: पैरों को जमीन पर सपाट रखें और स्क्वाट की स्थिति में बैठें। हाथों को छाती के सामने जोड़ें। पीठ सीधी रखें और कुछ समय तक गहरी सांस लें और छोड़ें।

नॉर्मल डिलीवरी के लिए एक्सरसाइज

पेल्विक टिल्ट (Pelvic Tilt)

  • फायदे: Normal delivery ke liye exercise में पेल्विक टिल्ट पीठ दर्द कम करने में मदद करने के साथ ही पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और बच्चे को डिलीवरी के लिए तैयार करता है।
  • कैसे करें: पीठ के बल लेट जाएँ, घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर रखकर धीरे-धीरे पेल्विक हिस्से को ऊपर उठाएँ। कुछ सेकंड वहीं रहें और फिर छोड़ दें।

स्क्वाट (Squats)

  • फायदे: यह पेल्विक क्षेत्र को खोलता है, पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करता है और बच्चे को सही पोजीशन में लाने में मदद करता है।
  • कैसे करें: पैरों को कंधे की चौड़ाई पर रखें और धीरे-धीरे नीचे की ओर बैठें जैसे आप स्क्वाट कर रहे हों। संतुलन बनाए रखने के लिए दीवार या कुर्सी का सहारा ले सकते हैं।

चलना-फिरना (Walking)

  • फायदे: यह शरीर को एक्टिव रखता है, बच्चे को सही स्थिति में आने में मदद करता है और सहनशक्ति बढ़ाता है जो लेबर के लिए जरूरी है।
  • कैसे करें: रोजाना कम से कम 30 मिनट तेजी से, आरामदायक जूते पहनकर, जोड़ों पर ज्यादा दबाव न डालते हुए चलें।

कीगल एक्सरसाइज (Kegel Exercises)

  • फायदे: यह पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है, जो यूट्रस और ब्लैडर को सहारा देती हैं और डिलीवरी व बाद में रिकवरी को आसान बनाती हैं।
  • कैसे करें: पेल्विक मांसपेशियों को ऐसे कसें, जैसे आप पेशाब रोक रही हों। इसे 5 सेकंड तक रोककर रखें, फिर ढीला छोड़ दें, ऐसे 10–15 बार करें।

प्रेगनेंसी में नॉर्मल डिलीवरी को आसान बनाने के घरेलू टिप्स

नॉर्मल डिलीवरी को आसान बनाने के लिए कुछ घरेलू उपाय काम के साबित हो सकते हैं। ये उपाय शरीर को मजबूत बनाते हैं, पाचन और ब्लड सर्कुलेशन को सही रखते हैं और लेबर पेन के लिए यूट्रस को तैयार करते हैं। लेकिन ध्यान दें, कोई भी टिप्स इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

नेचुरल तेल और घी (Natural Oils and Ghee)

अरंडी का गुनगुना तेल पेल्विक एरिया में मालिश करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और लेबर की तैयारी आसान होती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के आखिरी हफ्तों में दूध में घी मिलाकर पीने से शरीर को थोड़ी राहत मिल सकती है।

हर्बल चाय (Herbal Tea)

रासबेरी पत्तियों (Raspberry Leaf) की चाय पीने से यूट्रस मजबूत होता है और सर्विक्स लेबर के लिए तैयार रहता है। यह एक प्राकृतिक तरीका है जो डिलीवरी को आसान बनाने में मदद कर सकता है।

मसाले (Spices)

जीरा, आजवाइन और सौंफ जैसे मसाले पाचन को आसान बनाते हैं और सही मात्रा में लेने से डिलीवरी के समय मदद मिलती है।

बैलेंस हेल्दी डाइट (Balanced and Healthy Diet)

प्रेगनेंसी के दौरान सही और हेल्दी डाइट लेना बहुत जरूरी है। ज्यादा फाइबर वाले फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाने से कब्ज कम होता है और शरीर में एनर्जी बनी रहती है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और एमनियोटिक फ्लूइड का स्तर सही बना रहता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

नॉर्मल डिलीवरी एक नेचुरल तरीका है, जिसे सही तैयारी और देखभाल के साथ काफी आसान बनाया जा सकता है। अगर आप घरेलू उपाय, योग और एक्सरसाइज को अपनी डेली रूटीन में शामिल करती हैं, तो आपका शरीर और मन धीरे–धीरे नॉर्मल डिलीवरी के लिए तैयार हो जाते हैं। इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि हर महिला की प्रेगनेंसी अलग होती है, इसलिए डिलीवरी का अनुभव भी अलग हो सकता है। इसलिए ऐसे समय में normal delivery ke liye exercise शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना, सही जानकारी रखना जरुरी है।

इन छोटी–छोटी बातों का ध्यान रखने और नियमित अभ्यास करने से नॉर्मल डिलीवरी सुरक्षित, आसान और सुखद हो सकती है।

नॉर्मल डिलीवरी से जुड़े सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या चौड़ी पेल्विक हिप्स वाली महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी आसानी से होती है?

 

केवल हिप्स का चौड़ा होना नॉर्मल डिलीवरी की गारंटी नहीं है। बच्चे की पोजिशन, उसका आकार और पेल्विस का स्ट्रक्चर मिलकर तय करते हैं कि डिलीवरी कितनी आसान से और कैसे होगी।

क्या दूसरी बार की डिलीवरी हमेशा कम दर्द वाली होती है?

 

जरूरी नहीं। कुछ महिलाओं को दूसरी बार कम समय और कम दर्द महसूस होता है, लेकिन यह सभी के लिए समान नहीं होता।

क्या रोज वॉक करने से लेबर तय समय पर शुरू हो जाता है?

 

चलना प्रेगनेंसी के लिए हेल्दी है और शरीर को एक्टिव रखता है, लेकिन सिर्फ वॉक करने से लेबर जल्दी शुरू होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। लेबर हार्मोन और शरीर की तैयारी पर निर्भर करता है।

अगर पहले सी-सेक्शन हुआ है, तो क्या अगली बार भी सी-सेक्शन ही होगा?

 

हमेशा नहीं। कई महिलाएं डॉक्टर की सलाह और सही मेडिकल स्थिति में VBAC (वैगिनल बर्थ आफ्टर सी-सेक्शन) करवा सकती हैं।

क्या मसालेदार खाना या घी खाने से लेबर जल्दी शुरू होता है?

 

इन घरेलू चीजों का लेबर शुरू करवाने में अब तक कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है। लेबर का समय शरीर की अंदरूनी प्रक्रिया और हार्मोन पर निर्भर करता है।

क्या छोटे कद या कम वजन वाली महिलाएं नॉर्मल डिलीवरी नहीं कर पातीं?

 

ऐसा नहीं है। कई छोटी कद और स्लिम महिलाओं को भी नॉर्मल डिलीवरी आसानी से होती है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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