प्रेगनेंसी हर महिला के लिए एक ऐसा समय होता है, जब उसके मन में उम्मीद और खुशी के साथ ही डिलीवरी के समय होने वाले दर्द से भी डर लगता है, क्योंकि कंसीव करने के 9 महीने बाद उसका बच्चा दुनिया में आने वाला होता है। वैसे तो प्रेगनेंसी के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिनकी वजह से महिलाओं को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की कई परेशानियों से गुजरना पडता है। लेकिन इन सब के बावजूद, जैसे-जैसे डिलीवरी का समय पास आता है, महिलाएं खुशी-खुशी अपने नन्हे मेहमान का स्वागत करने की तैयारी में जुट जाती हैं। अगर आप जल्द मां बनने वाली हैं और नॉर्मल डिलीवरी चाहती हैं, तो normal delivery ke liye exercise करने में गाइड आपके लिए मददगार हो सकती है।
ज्यादातर महिलाएं चाहती हैं कि उनकी डिलीवरी नॉर्मल (Normal Delivery) हो, क्योंकि इसमें रिकवरी जल्दी होती है और मां तुरंत अपने बच्चें से जुड पाती है। इसके अलावा सर्जरी की तरह ज्यादा समय तक इसमें परहेज भी नही करना पडता। हालांकि कई बार कुछ मेडिकल कारणों की वजह से सभी महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी मुमकिन नही हो पाती।
नॉर्मल डिलीवरी मां और बच्चे दोनों के लिए कई तरह से फायदेमंद होती है। इससे जन्मे बच्चों को अक्सर सांस से जुड़ी समस्याएं कम होती हैं, क्योंकि इस प्रक्रिया के दौरान उनके फेफडों में मौजूद तरल पदार्थ ((Liquid)) आसानी से साफ हो जाते हैं। इसके अलावा, नॉर्मल डिलीवरी के बाद मां जल्दी रिकवर कर नवजात से तुरंत जुड़ पाती है। यही वजह है कि ज्यादातर महिलाएं सी सेक्शन की जगह नॉर्मल डिलीवरी को ज्यादा पसंद करती हैं।
बता दें, नॉर्मल डिलीवरी के लिए सही जानकारी रखना, पहले से तैयारी करना, normal delivery ke liye exercise, हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना और समय–समय पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।
प्रेगनेंसी में योगा करने से शरीर और मन दोनों शांत रहते हैं। यह normal delivery ke liye exercise के अलावा इम्पोर्टेन्ट एक्टिविटी हो सकती है। योग पेल्विक मांसपेशियों को मजबूत करता है, लचीलापन बढ़ाता है और डिलीवरी को आसान बनाने में मदद करता है। नीचे कुछ आसान योगासन दिए गए हैं जिनका रोजाना अभ्यास करने से नॉर्मल डिलीवरी के चांसेस बढ़ जाते है।
नॉर्मल डिलीवरी को आसान बनाने के लिए कुछ घरेलू उपाय काम के साबित हो सकते हैं। ये उपाय शरीर को मजबूत बनाते हैं, पाचन और ब्लड सर्कुलेशन को सही रखते हैं और लेबर पेन के लिए यूट्रस को तैयार करते हैं। लेकिन ध्यान दें, कोई भी टिप्स इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
अरंडी का गुनगुना तेल पेल्विक एरिया में मालिश करने से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और लेबर की तैयारी आसान होती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी के आखिरी हफ्तों में दूध में घी मिलाकर पीने से शरीर को थोड़ी राहत मिल सकती है।
रासबेरी पत्तियों (Raspberry Leaf) की चाय पीने से यूट्रस मजबूत होता है और सर्विक्स लेबर के लिए तैयार रहता है। यह एक प्राकृतिक तरीका है जो डिलीवरी को आसान बनाने में मदद कर सकता है।
जीरा, आजवाइन और सौंफ जैसे मसाले पाचन को आसान बनाते हैं और सही मात्रा में लेने से डिलीवरी के समय मदद मिलती है।
प्रेगनेंसी के दौरान सही और हेल्दी डाइट लेना बहुत जरूरी है। ज्यादा फाइबर वाले फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाने से कब्ज कम होता है और शरीर में एनर्जी बनी रहती है। पर्याप्त पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है और एमनियोटिक फ्लूइड का स्तर सही बना रहता है।
नॉर्मल डिलीवरी एक नेचुरल तरीका है, जिसे सही तैयारी और देखभाल के साथ काफी आसान बनाया जा सकता है। अगर आप घरेलू उपाय, योग और एक्सरसाइज को अपनी डेली रूटीन में शामिल करती हैं, तो आपका शरीर और मन धीरे–धीरे नॉर्मल डिलीवरी के लिए तैयार हो जाते हैं। इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि हर महिला की प्रेगनेंसी अलग होती है, इसलिए डिलीवरी का अनुभव भी अलग हो सकता है। इसलिए ऐसे समय में normal delivery ke liye exercise शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना, सही जानकारी रखना जरुरी है।
इन छोटी–छोटी बातों का ध्यान रखने और नियमित अभ्यास करने से नॉर्मल डिलीवरी सुरक्षित, आसान और सुखद हो सकती है।
केवल हिप्स का चौड़ा होना नॉर्मल डिलीवरी की गारंटी नहीं है। बच्चे की पोजिशन, उसका आकार और पेल्विस का स्ट्रक्चर मिलकर तय करते हैं कि डिलीवरी कितनी आसान से और कैसे होगी।
जरूरी नहीं। कुछ महिलाओं को दूसरी बार कम समय और कम दर्द महसूस होता है, लेकिन यह सभी के लिए समान नहीं होता।
चलना प्रेगनेंसी के लिए हेल्दी है और शरीर को एक्टिव रखता है, लेकिन सिर्फ वॉक करने से लेबर जल्दी शुरू होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। लेबर हार्मोन और शरीर की तैयारी पर निर्भर करता है।
हमेशा नहीं। कई महिलाएं डॉक्टर की सलाह और सही मेडिकल स्थिति में VBAC (वैगिनल बर्थ आफ्टर सी-सेक्शन) करवा सकती हैं।
इन घरेलू चीजों का लेबर शुरू करवाने में अब तक कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है। लेबर का समय शरीर की अंदरूनी प्रक्रिया और हार्मोन पर निर्भर करता है।
ऐसा नहीं है। कई छोटी कद और स्लिम महिलाओं को भी नॉर्मल डिलीवरी आसानी से होती है।