फाइब्रॉएड के बारे में एक कम्पलीट गाइड (Fibroid Meaning in Hindi)

Last updated: March 16, 2026

Overview

हर 10 में से 7 महिलायें में 50 साल की उम्र तक पहुँचते-पहुँचते फाइब्रॉइड होता है, लेकिन ज़्यादातर महिलाओं को इसका पता भी नहीं चलता। आइये समझते हैं Fibroid meaning in hindi, फाइब्रॉएड को हिंदी में गर्भाशय की गाँठ, रसौली, या बच्चेदानी में गाँठ कहते हैं। यह गर्भाशय की मांसपेशियों में बनने वाली एक गैर-कैंसरस गाँठ है जो छोटी सी मटर से लेकर बड़े तरबूज़ तक किसी भी साइज़ की हो सकती है।

अच्छी खबर यह है कि फाइब्रॉइड होने का मतलब बीमार होना नहीं है। कई महिलाएँ पूरी ज़िंदगी फाइब्रॉइड के साथ बिना किसी परेशानी के जीती हैं, माँ बनती हैं, और उन्हें कभी इलाज की ज़रूरत नहीं पड़ती।

इस आर्टिकल में आपको समझाया जाएगा कि fibroid का पता चलने से पहले, पता चलने पर, और आगे क्या करें ताकि आप इसे पूरी तरह समझ सकें और सही फ़ैसला ले सकें।

फाइब्रॉइड क्या होती है (Fibroid meaning in Hindi)

फाइब्रॉइड गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) की मांसपेशियों से बनने वाली एक गाँठ को कहते हैं। डॉक्टरों की भाषा में इसे लेयोमायोमा (Leiomyoma) या यूटरिन मायोमा (Uterine Myoma) भी कहते हैं।

इसके बारे में तीन बातें समझना जरुरी होता है।

  • फाइब्रॉइड होने का मतलब कैंसर होना नहीं है। 99% से ज़्यादा फाइब्रॉइड हानिरहित यानी Benign होते हैं और कभी कैंसर में नहीं बदलते।
  • महिलाओं में Fibroid होना यह बहुत कॉमन है। 30-50 साल की उम्र में लगभग 70% महिलाओं को Fibroid होता है।
  • हर फाइब्रॉइड को इलाज की ज़रूरत नहीं होती। आधी से ज़्यादा महिलाओं को Fibroid होने के बावजूद कोई लक्षण दिखाई नहीं देते।

Fibroid कहाँ-कहाँ बनता है?

फाइब्रॉइड बच्चेदानी मतलब यूट्रस में चार जगहों पर बन सकता है।

  • इंट्राम्यूरल (Intramural) फाइब्रॉइड: यूट्रस की दीवार के अंदर बनता है। यह Fibroid सबसे कॉमन होता है। लगभग 55 से 60% केस में यही Fibroid पाया जाता है। अगर इसका आकार बड़ा हो जाए, तो इससे अक्सर हैवी पीरियड्स की समस्या हो सकती है।
  • सबम्यूकोसल (Submucosal) फाइब्रॉइड: यूट्रस की अंदरूनी परत में बनता है और यह लगभग 5 से 10% मामलों में पाया जाता है। अगर महिला को सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड है तो उसे ज़्यादा ब्लीडिंग हो सकती है और इसका असर फर्टिलिटी पर भी पड़ सकता है।
  • सबसीरोसल (Subserosal) फाइब्रॉइड: यूट्रस के बाहरी हिस्से में बनता है और लगभग 30 से 35% मामलों में पाया जाता है। यह अक्सर दूसरे अंगों, जैसे ब्लैडर या आंत, पर दबाव डालकर परेशानी पैदा कर सकता है।
  • पेडंक्युलेटेड (Pedunculated) फाइब्रॉइड: एक पतली स्टेम यानी डंठल जैसी आकृति से जुड़ा होता है। इस तरह का fibroid अपेक्षाकृत दुर्लभ यानी रेयर (rare) होता है। अगर यह डंठल पर घूम जाए, तो महिला को अचानक तेज़ दर्द हो सकता है।

किन महिलाओं को Fibroid होने का रिस्क ज्यादा है?

  • जिन महिलाओं की उम्र 30 से 50 साल के बीच है उनमें फाइब्रॉइड होने की संभावना सबसे ज़्यादा देखी जाती है।
  • अगर महिला की फैमिली हिस्ट्री है यानी माँ या बहन को फाइब्रॉइड रहा है, तो अन्य महिलाओं की तुलना में उसे इसका जोखिम लगभग तीन गुना बढ़ सकता है।
  • मोटापा यानी ऑबेसिटी (Obesity) होने पर fibroid होने का ख़तरा बढ़ जाता है। क्योंकि जब BMI ज़्यादा होता है, तो शरीर में एस्ट्रोजन (Estrogen) का लेवल बढ़ सकता है, जिससे फाइब्रॉइड बनने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
  • जिन महिलाओं ने अभी तक बच्चे को जन्म नहीं दिया है, उनमें फाइब्रॉइड होने की संभावना थोड़ी ज़्यादा देखी जाती है।
  • हाल के कुछ शोधों में पाया गया है कि विटामिन D की कमी से भी fibroid हो सकता है।

फाइब्रॉइड की जाँच कैसे होती है?

  • सामान्यतः फाइब्रॉइड के कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, ऐसी स्थिति में महिलाओं को अलग अलग तरीकों से उन्हें fibroid होने का पता चलता है।
  • अक्सर अचानक: ज़्यादातर महिलाओं को किसी और जाँच जैसे प्रेगनेंसी प्लानिंग या रूटीन चेकअप के दौरान उन्हें fibroid होने का पता चलता है।
  • कभी-कभी लक्षणों से: कुछ महिलाएँ हैवी पीरियड्स, पेट में भारीपन, या बार-बार यूरिन आने की शिकायत लेकर डॉक्टर से पास आती हैं, तब जाँच में उन्हें fibroid होने का पता चलता है।

फाइब्रॉइड की कौन सी जाँचें होती हैं?

1. पेल्विक एग्जाम (Pelvic Examination)

इसमें डॉक्टर पेट और पेल्विक एरिया को छूकर यूट्रस का साइज़ और आकार चेक करते हैं। अगर फाइब्रॉइड बड़े हैं तो इसी तरह से पकड़ में आ जाते हैं।

2. टीवीएस (Transvaginal Ultrasound)

डॉक्टर सबसे पहले TVS अल्ट्रासाउंड करते हैं। इससे फाइब्रॉइड का साइज़, संख्या, और लोकेशन पता चलती है।

3. MRI

अगर डॉक्टर सर्जरी प्लान करते हैं तब उन्हें fibroid की ज़्यादा डिटेल चाहिए होती है ऐसे में एमआरआई से फाइब्रॉइड का एकदम सटीक मैप बनाया जाता है।

4. हिस्टेरोस्कोपी (Hysteroscopy)

इसमें डॉक्टर एक पतली कैमरा ट्यूब द्वारा यूट्रस के अंदर देखते हैं जिससे सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड की पुष्टि की जाती है।

5. SIS सेलाइन इनफ्यूज़न सोनोग्राफी (Saline Infusion Sonography)

गर्भाशय में पानी डालकर अल्ट्रासाउंड करना। Uterine cavity पर फाइब्रॉइड का असर देखने के लिए।

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट को कैसे समझें?

जब अल्ट्रासाउंड में फाइब्रॉइड दिखता है, तो रिपोर्ट में कुछ खास शब्द लिखे होते हैं। इन्हें समझ लेना आसान है।

साइज़ (Size):

फाइब्रॉइड का आकार यानी उसकी लम्बाई, चौड़ाई, और गहराई आमतौर पर mm या cm में लिखी होती है।

लोकेशन (Location):

इससे पता चलता है कि फाइब्रॉइड यूट्रस यानी बच्चेदानी के किस हिस्से में है।

  • अगर एंटीरियर (Anterior) लिखा है तो fibroid यूट्रस की सामने वाली दीवार पर है
  • अगर पोस्टेरियर (Posterior) लिखा है तो यूट्रस की पीछे वाली दीवार पर है
  • अगर फंडल (Fundal)लिखा है तो fibroid यूट्रस के ऊपरी हिस्से पर है

टाइप (Type):

यह बताता है कि फाइब्रॉइड बच्चेदानी की किस परत में बना है। रिपोर्ट में आमतौर पर इंट्राम्यूरल (Intramural), सबम्यूकोसल (Submucosal), या सबसेरोसल (Subserosal) लिखा होता है।

Fibroid के इलाज के तरीके

  • अगर फाइब्रॉइड छोटा है और कोई लक्षण नहीं हैं, तो आमतौर पर इंतज़ार और देखभाल यानी wait and watch की सलाह दी जाती है। इस स्थिति में साल में एक बार चेक-अप करवाना काफ़ी होता है।
  • अगर लक्षण हल्के हैं, जैसे थोड़ा दर्द या हल्की अनियमित ब्लीडिंग, तो अक्सर इन्हें दवाइयों से मैनेज किया जा सकता है।
  • अगर लक्षण गंभीर हैं, जैसे बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग या लगातार दर्द, तो डॉक्टर ट्रीटमेंट की सलाह दे सकते हैं।
  • अगर महिला को माँ बनना है और फाइब्रॉइड प्रेगनेंसी में रुकावट बन रहा है, तो ऐसे में मायोमेक्टमी (myomectomy) यानी फाइब्रॉइड हटाने की सर्जरी करने का सुझाव दिया जा सकता है।
  • UAE यानी यूटेराइन आर्टरी एम्बोलिज़ेशन (Uterine Artery Embolization) में फाइब्रॉइड की ब्लड सप्लाई बंद कर दी जाती है, जिससे वह सिकुड़ने लगता है।
  • MRI गाइडेड फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (MRI-guided Focused Ultrasound) में अल्ट्रासाउंड वेव्स से फाइब्रॉइड को नष्ट किया जाता है।
  • हिस्टेरेक्टॉमी (Hysterectomy) में पूरा गर्भाशय यानी यूट्रस हटा दिया जाता है। यह आमतौर पर आखिरी विकल्प होता है और इसके बाद फाइब्रॉइड दोबारा नहीं बनते।

फर्टिलिटी पर Fibroid का क्या असर पड़ता है?

ज़्यादातर महिलाएँ फाइब्रॉइड होने के बावजूद नेचुरली प्रेगनेंट हो जाती हैं। फाइब्रॉइड वाली केवल 2 से 3 प्रतिशत महिलाओं में ही यह निःसंतानता का मुख्य कारण होता है। लगभग 10 से 12 प्रतिशत प्रेग्नेंट महिलाओं को फाइब्रॉइड होता है, जिनमें से अधिकतर की प्रेगनेंसी सामान्य रहती है।

कौन सा फाइब्रॉइड फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है?

सबम्यूकोसल (Submucosal) फाइब्रॉइड

यह यूट्रस की अंदरूनी परत में बनता है और इम्प्लांटेशन में रुकावट डाल सकता है, इसलिए फर्टिलिटी पर इसका असर सबसे ज्यादा माना जाता है। ऐसे मामलों में अक्सर हिस्टेरोस्कोपी से फाइब्रॉइड हटाने की सलाह दी जाती है।

इंट्राम्यूरल (Intramural) फाइब्रॉइड

अगर fibroid का आकार 5 सेमी से बड़ा हो, तो यह यूट्रस की बनावट बदलकर फर्टिलिटी को कुछ हद तक प्रभावित कर सकता है। इसके इलाज के लिए साइज़, लोकेशन और लक्षण देखकर फिर फैसला किया जाता है।

सबसीरोसल (Subserosal) फाइब्रॉइड

यह यूट्रस के बाहरी हिस्से में बनता है और आमतौर पर फर्टिलिटी पर असर नहीं डालता। इसलिए ज़्यादातर मामलों में इसे हटाने की जरूरत नहीं होती।

पेडंक्युलेटेड (Pedunculated) फाइब्रॉइड

यह डंठल से जुड़ा होता है और सामान्यतः प्रेगनेंसी की क्षमता को प्रभावित नहीं करता, इसलिए इसे अक्सर बिना इलाज के ही छोड़ दिया जाता है।

प्रेगनेंसी के दौरान फाइब्रॉइड होने पर क्या होता है?

  • अधिकतर मामलों में कोई बड़ी समस्या नहीं होती और प्रेगनेंसी सामान्य चलती है
  • गर्भावस्था के दौरान हार्मोन बढ़ने से फाइब्रॉइड थोड़ा बड़ा हो सकता है
  • डिलीवरी के बाद कई बार फाइब्रॉइड अपने-आप छोटा हो जाता है
  • कुछ मामलों में फाइब्रॉइड की ब्लड सप्लाई कम होने से अचानक दर्द यानी फाइब्रॉइड डिजनरेशन (Fibroid Degeneration) हो सकता है
  • कभी कभी प्रीटर्म डिलीवरी का जोखिम थोड़ा बढ़ जाता है
  • अगर फाइब्रॉइड बच्चे के रास्ते में हो, तो सी-सेक्शन की जरूरत पड़ सकती है

IVF की जरूरत कब पड़ सकती है?

हर फाइब्रॉइड के मामले में IVF की जरूरत नहीं होती। ज़्यादातर महिलाएँ इलाज के बाद नेचुरली कंसीव कर लेती हैं। लेकिन कुछ स्थितियों में डॉक्टर IVF की सलाह दे सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड हटाने के बाद भी 6 से 12 महीने तक प्रेगनेंसी न हो, तो आगे की फर्टिलिटी ट्रीटमेंट पर विचार किया जाता है। इसी तरह अगर महिला की उम्र 35 साल से ज्यादा हो, तो समय की वजह से IVF एक बेहतर विकल्प माना जा सकता है। कई बार अन्य फर्टिलिटी समस्याएँ, जैसे ओव्यूलेशन या स्पर्म से जुड़ी दिक्कतें, साथ में होने पर भी IVF की जरूरत पड़ सकती है।

निष्कर्ष

गर्भाशय की गाँठ या रसौली बहुत कॉमन कंडीशन है जो ज़्यादातर मामलों में गंभीर नहीं होती। लेकिन तीन बातें याद रखें।

  • पता चलने से पहले: फाइब्रॉइड 70% महिलाओं को होता है, कैंसर नहीं है, और हमेशा लक्षण नहीं देता।
  • पता चलने पर:अल्ट्रासाउंड से साइज़ और लोकेशन जानें। सबम्यूकोसल सबसे ज्यादा समस्या उत्पन्न करने वाला fibroid है, सबसीरोसल आमतौर पर कोई समस्या पैदा नहीं करता।
  • आगे क्या करें: हर फाइब्रॉइड के इलाज की जरुरत नहीं होती। Wait and Watch से लेकर मायोमेक्टमी तक, ये सारे विकल्प आपकी स्थिति पर निर्भर करते हैं।

इसीलिए जानकारी लें, घबराएं नहीं, अपने डॉक्टर से खुलकर बात करें और उसके बाद अपनी स्थिति के अनुसार सही फैसला लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फाइब्रॉइड का पता कैसे चलता है?

 

अक्सर रूटीन अल्ट्रासाउंड या प्रेगनेंसी प्लानिंग के दौरान अचानक पता चलता है। कभी-कभी हैवी पीरियड्स, पेट में भारीपन, या बार-बार पेशाब जैसे लक्षणों से शक होता है और जाँच होती है।

क्या फाइब्रॉइड में ऑपरेशन ज़रूरी है?

 

नहीं, हर फाइब्रॉइड को ऑपरेशन की ज़रूरत नहीं। छोटे और बिना लक्षण वाले फाइब्रॉइड को सिर्फ़ मॉनिटर किया जा सकता है। 

फाइब्रॉइड होने पर माँ बनना संभव होता है?

 

हाँ, ज़्यादातर महिलाएँ फाइब्रॉइड के साथ नेचुरली कंसीव करती हैं। सबम्यूकोसल फाइब्रॉइड फर्टिलिटी पर सबसे ज़्यादा असर डालता है, जबकि सबसीरोसल आमतौर पर फ़र्टिलिटी के लिहाज़ से कोई असर नहीं डालता।

किस साइज के फाइब्रॉइड का ऑपरेशन करवा लेना चाहिए?

 

फाइब्रॉइड के साइज़ से ज़्यादा लोकेशन और लक्षण मायने रखते हैं। आमतौर पर डॉक्टर 5 सेमी से बड़े फाइब्रॉइड के ट्रीटमेंट की सलाह देते हैं , खासकर तब जब लक्षण हों या फर्टिलिटी पर असर पड़ रहा हो।

मायोमेक्टोमी के बाद फाइब्रॉइड वापस आ सकता है?

 

हाँ, 15 से 30 प्रतिशत मामलों में 5 साल के अंदर नया फाइब्रॉइड बन सकता है। हिस्टेरेक्टॉमी ही 100% गारंटी देता है, लेकिन यह आखिरी विकल्प है।

मेनोपॉज़ के बाद फाइब्रॉइड का क्या होता है?

 

एस्ट्रोजन लेवल गिरने से ज़्यादातर फाइब्रॉइड मेनोपॉज़ के बाद खुद सिकुड़ जाते हैं और लक्षण कम हो जाते हैं। इसीलिए 45 से 50+ उम्र की महिलाओं को कभी-कभी इंतज़ार करने की सलाह दी जाती है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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