फोलिक एसिड को लेकर सबसे बड़ी ग़लतफ़हमी एक ही है - लोग सोचते हैं कि ये प्रेग्नेंसी पता चलने के बाद शुरू करनी है।
पर असल में इसका सबसे ज़रूरी काम प्रेग्नेंसी पता चलने से पहले ही हो चुका होता है। और यही एक बात इस पूरी दवा को समझने की कुंजी है।
तो सीधे मुद्दे पर।
ये एक विटामिन है - विटामिन B9 का बना हुआ रूप। शरीर में जो प्राकृतिक विटामिन होता है उसे फोलेट (Folate) कहते हैं, और उसी का दवा वाला रूप फोलिक एसिड (Folic Acid) कहलाता है।
इसका काम है नई कोशिकाएँ बनाना, और ख़ास तौर पर लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) का निर्माण। यही वजह है कि इसकी कमी से एक तरह का एनीमिया (ख़ून की कमी) हो जाता है।
पर प्रेग्नेंसी के संदर्भ में इसका एक और, बहुत बड़ा काम है - बच्चे की न्यूरल ट्यूब बनाना।
गर्भ में बच्चे का दिमाग़ और रीढ़ की हड्डी एक ढाँचे से बनते हैं जिसे न्यूरल ट्यूब (Neural Tube) कहते हैं। ये ट्यूब प्रेग्नेंसी के बिल्कुल शुरुआती दिनों में बनकर बंद हो जाती है।
अगर ये ठीक से बंद न हो, तो बच्चे में गंभीर जन्मजात विकृति हो सकती है - जिसे न्यूरल ट्यूब डिफ़ेक्ट (Neural Tube Defect) कहते हैं। स्पाइना बिफ़िडा इसका एक जाना-पहचाना उदाहरण है।
और अच्छी ख़बर ये है कि फोलिक एसिड इसे काफ़ी हद तक रोकती है। अध्ययनों में पाया गया है कि गर्भधारण के आसपास फोलिक एसिड लेने से न्यूरल ट्यूब डिफ़ेक्ट के 50 प्रतिशत या उससे ज़्यादा मामले रोके जा सकते हैं।
यहाँ ध्यान से पढ़िए, क्योंकि यही पूरी बात की जड़ है।
न्यूरल ट्यूब गर्भधारण के करीब 26 से 28 दिन के भीतर बनकर बंद हो जाती है। यानी पहले महीने के अंदर ही - उस वक़्त, जब कई बार महिला को पता भी नहीं होता कि वो प्रेग्नेंट है।
इसका सीधा मतलब ये है कि प्रेग्नेंसी कन्फ़र्म होने पर फोलिक एसिड शुरू करना अक्सर देर हो जाती है। असली फ़ायदा तभी मिलता है जब गर्भधारण के वक़्त वो पहले से शरीर में मौजूद हो।
इसीलिए अंतरराष्ट्रीय सिफ़ारिश साफ़ है - गर्भधारण से कम से कम एक महीने पहले फोलिक एसिड शुरू कर देनी चाहिए, और प्रेग्नेंसी की पहली तिमाही (करीब 12वें हफ़्ते) तक जारी रखनी चाहिए।
एक और ज़रूरी बात, जिसका आँकड़ा चौंकाने वाला है - बहुत सी प्रेग्नेंसी अनियोजित होती हैं। इसीलिए सलाह दी जाती है कि हर वो महिला जो प्रेग्नेंट हो सकती है, फोलिक एसिड ले - भले ही वो अभी बच्चे की योजना न बना रही हो। भारत में जहाँ बहुत सी शादियों के बाद प्रेग्नेंसी की कोई तय योजना नहीं होती, ये बात और भी काम की है।
यहाँ दो अलग-अलग डोज़ हैं, और यही अक्सर उलझन पैदा करती हैं।
आम डोज़ - 400 माइक्रोग्राम (mcg) रोज़। ज़्यादातर महिलाओं के लिए यही सही मात्रा है। कुछ सिफ़ारिशों में 400 से 800 mcg के बीच की मात्रा बताई गई है। ये वही आम फोलिक एसिड की गोली है जो बिना किसी ख़ास परेशानी के ली जाती है।
ज़्यादा डोज़ - 4 से 5 मिलीग्राम (mg) रोज़। ये सिर्फ़ कुछ ख़ास महिलाओं के लिए है, और ये सिर्फ़ डॉक्टर के पर्चे पर मिलती है। ध्यान दीजिए - ये आम डोज़ से करीब दस गुना ज़्यादा है, इसलिए इसे ख़ुद से लेना नहीं है।
ज़्यादा डोज़ किन्हें दी जाती है? अंतरराष्ट्रीय गाइडलाइन के मुताबिक़ -
तो अगर इनमें से कुछ आप पर लागू होता है, तो आम गोली से काम नहीं चलेगा - डॉक्टर से बात करके सही मात्रा तय करवाइए।
एक बात साफ़ कर दें - "ज़्यादा फोलिक एसिड ज़्यादा फ़ायदा" वाली सोच ग़लत है। जिन्हें आम डोज़ चाहिए, उनके लिए ज़्यादा मात्रा लेने का कोई अतिरिक्त फ़ायदा साबित नहीं हुआ। सही मात्रा वही है जो आपकी स्थिति के हिसाब से हो।
हालाँकि इसका सबसे बड़ा फ़ायदा प्रेग्नेंसी से जुड़ा है, पर इसके काम इतने तक सीमित नहीं।
दवा के अलावा, फोलेट कई खाने की चीज़ों में क़ुदरती तौर पर होता है - हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, दालें, खट्टे फल, और कुछ अनाज।
पर यहाँ एक ईमानदार बात - प्रेग्नेंसी की ज़रूरत के हिसाब से अकेले खाने से इतना फोलेट मिलना मुश्किल होता है, ख़ासकर उस अहम शुरुआती दौर में। इसीलिए गोली की सलाह दी जाती है। खाना और गोली, दोनों साथ चलें तो सबसे अच्छा।