1st ट्राइमेस्टर की उल्टी, थकान और घबराहट के टाइम से गुज़रने के बाद Fourth month pregnancy बहुत-सी महिलाओं के लिए राहत लेकर आती है। इसे अक्सर प्रेगनेंसी का हनीमून पीरियड कहा जाता है, क्योंकि इस समय शरीर नई लय में ढलने लगता है और एनर्जी वापस आने लगती है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इस महीने में कोई बदलाव नहीं होता। आपका पेट अब दिखने लगता है, पेट के अंदर भ्रूण तेज़ी से बढ़ रहा होता है, और कुछ नए लक्षण भी सामने आते हैं।
Fourth month pregnancy symptoms in Hindi में जानेंगे कि चौथे महीने यानी वीक 13 से 16 में आपकी संतान की ग्रोथ कैसी हो रही होती है, आपके शरीर में क्या बदलाव आते हैं, आपको कौन-से टेस्ट करवाने चाहिए, और प्रेगनेंसी अच्छे से चले इसके लिए किन लक्षणों पर ध्यान देना ज़रूरी है।
वीक 13 से 16 के बीच बच्चे का आकार एक नींबू से बढ़कर लगभग एक एवोकैडो जितना हो जाता है। इस समय तक बच्चे के सभी अंग बन चुके होते हैं और अब वो बड़े हो रहे होते हैं।
बच्चे की हड्डियाँ मज़बूत होने लगती हैं, उसकी उँगलियों पर फ़िंगरप्रिंट बनने लगते हैं, और चेहरे की बनावट साफ़ दिखने लगती है।
इस समय तक भ्रूण हिलना-डुलना शुरू कर देता है, लेकिन ये हरकतें इतनी हल्की होती हैं कि ज़्यादातर महिलाओं को महसूस नहीं होतीं। लेकिन जिन महिलाओं की पहले भी प्रेगनेंसी हो चुकी है, उन्हें 16वें वीक के आसपास हल्की हलचल हो सकती है, जिसे "क्विकनिंग" (quickening) कहते हैं।
प्लेसेंटा (placenta) अब पूरी तरह काम कर रहा होता है और भ्रूण को ऑक्सीजन और पोषण पहुँचा रहा होता है।
Fourth month pregnancy symptoms में सबसे बड़ा सिम्पटम यह है कि अब आपकी प्रेगनेंसी दिखने लगती है। गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus) जो अब तक पेल्विस (pelvis) के अंदर था, अब ऊपर की तरफ़ बढ़ने लगता है। इसकी वजह से पेट का निचला हिस्सा उभरा हुआ दिखता है।
इस समय शरीर में खून की मात्रा लगभग 30 से 40 प्रतिशत बढ़ चुकी होती है। इसका असर आपके चेहरे पर दिखने लगता है, कई महिलाओं को इस दौरान चेहरे पर एक ख़ास चमक दिखती है जिसे "प्रेगनेंसी ग्लो" कहते हैं। कुछ महिलाओं को इस बढ़े हुए खून की वजह से नाक से हल्की ब्लीडिंग हो सकती है इसके अलावा मसूड़ों से भी खून आ सकता है, लेकिन जनरली यह चिंता की बात नहीं होती।
हर महिला का शरीर अलग होता है, इसलिए पेट कब दिखेगा यह सबके लिए एक जैसा नहीं होता। पहली प्रेगनेंसी में पेट थोड़ा देर से दिखता है क्योंकि पेट की मसल्स अभी टाइट होती हैं। दूसरी या तीसरी प्रेगनेंसी में पेट जल्दी दिखने लगता है।
Fourth month pregnancy के अंत तक ज्यादातर महिलाओं को अपने पुराने कपड़े टाइट लगने लगते हैं। पेट का आकार आपकी लंबाई, वजन, और शरीर की बनावट पर भी निर्भर करता है, इसलिए किसी से तुलना जरूरी नहीं। जब तक डॉक्टर कह रहे हैं कि भ्रूण की ग्रोथ सही है, तब तक सब ठीक है।
पहली तिमाही में अगर उल्टी या जी मिचलाने की वजह से खाने में दिक्कत हो रही थी, तो Fourth month pregnancy के समय में राहत मिलने लगती है। भूख बढ़ती है और कुछ महिलाओं को ख़ास चीज़ें खाने की तेज़ इच्छा होती है, जिसे क्रेविंग कहते हैं।
इस समय रोज़ाना लगभग 300 से 350 एक्स्ट्रा कैलोरी काफ़ी होती हैं। प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, और फ़ोलिक एसिड (folic acid) वाली चीज़ें ज़रूरी हैं। पानी भरपूर पिएँ क्योंकि डिहाइड्रेशन से बचना ज़रूरी है।
ज़्यादातर महिलाओं को चौथे महीने में उल्टी और जी मिचलाना कम हो जाता है। hCG हॉर्मोन का लेवल जो पहली तिमाही में तेज़ी से बढ़ रहा था, अब स्थिर हो जाता है, जिससे मॉर्निंग सिकनेस में राहत मिलती है।
लेकिन कुछ महिलाओं में वॉमिटिंग Fourth month pregnancy में भी जारी रह सकती है। अगर आपको अभी भी उल्टी हो रही है, तो डॉक्टर से बात करें।
थकान के बारे में अच्छी ख़बर यह है कि ज़्यादातर महिलाओं को सेकंड ट्राइमेस्टर में एनर्जी वापस आने लगती है। यह समय बहुत-सी महिलाओं के लिए प्रेगनेंसी का सबसे अच्छा समय होता है।
जैसे-जैसे यूट्रस बढ़ता है, उसके आसपास के लिगामेंट्स (ligaments) खिंचते हैं। इसकी वजह से पेट के दोनों तरफ़ या निचले हिस्से में हल्का दर्द या खिंचाव महसूस हो सकता है। इसे राउंड लिगामेंट पेन (round ligament pain) कहते हैं और यह बिल्कुल सामान्य है। अचानक उठने, छींकने, या करवट बदलने पर यह दर्द ज़्यादा हो सकता है।
कमर दर्द भी शुरू हो सकता है क्योंकि पेट आगे बढ़ने से शरीर का बैलेंस बदलता है। आरामदायक जूते पहनें, लंबे समय तक खड़े न रहें, और सोते समय बाईं करवट लें।
प्रेगनेंसी हॉर्मोन का असर स्किन और बालों पर भी दिखता है। कुछ महिलाओं को चेहरे पर भूरे या गहरे रंग के धब्बे दिख सकते हैं, जिसे मेलाज़्मा (melasma) या "मास्क ऑफ़ प्रेगनेंसी" कहते हैं।
पेट पर नाभि से नीचे एक गहरे रंग की लाइन दिख सकती है। ये सब हॉर्मोन में बदलाव की वजह से होता है और डिलीवरी के बाद अक्सर ख़ुद ठीक हो जाता है।
अच्छी ख़बर यह है कि प्रेगनेंसी में बाल ज़्यादा घने और चमकदार हो जाते हैं क्योंकि एस्ट्रोजन (estrogen) की वजह से बालों का गिरना कम होता है। डिलीवरी के बाद बाल थोड़ा ज़्यादा गिर सकते हैं, जो टेम्पररी होता है।
चौथे महीने में कुछ ज़रूरी टेस्ट होते हैं जो भ्रूण के ग्रोथ और आपकी सेहत दोनों की जाँच करते हैं।
डबल मार्कर टेस्ट या क्वाड्रपल मार्कर टेस्ट (quadruple marker test) अगर फर्स्ट ट्राइमेस्टर में नहीं हुआ तो इस समय इसे करवा लेना चाहिए। यह टेस्ट से आपकी होने वाली संतान में क्रोमोज़ोम (chromosomal) से सम्बंधित गड़बड़ी जैसे डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) की संभावना चेक की जाती है।
रूटीन ब्लड टेस्ट में हीमोग्लोबिन (hemoglobin), शुगर, और थाइरॉइड चेक किया जाता है। अल्ट्रासाउंड में भ्रूण की ग्रोथ, हार्टबीट, और प्लेसेंटा की पोज़ीशन देखी जाती है।
हालाँकि Fourth month pregnancy का समय ज्यादातर आरामदायक होता है, लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है।
अगर आपने IVF से कंसीव किया है, तो चौथे महीने तक ज़्यादातर प्रोजेस्टेरॉन (progesterone) सपोर्ट की दवाइयाँ बंद हो चुकी होती हैं, क्योंकि अब प्लेसेंटा यह काम ख़ुद सँभाल लेता है।
इस टाइम तक IVF प्रेगनेंसी और नैचुरल प्रेगनेंसी में कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं रहता।
हालाँकि, अगर ट्विन प्रेगनेंसी है, तो चौथे महीने में पेट जल्दी और ज़्यादा बड़ा दिखता है, थकान ज़्यादा हो सकती है, और डॉक्टर ज़्यादा बार चेकअप रखते हैं।
Fourth month pregnancy में प्रोटीन और आयरन का ख़ास ध्यान रखें। इस समय आयरन की कमी होना कम्यून होता है, इसलिए डॉक्टर के बताए सप्लीमेंट रेगुलर लें।
हल्की एक्सरसाइज़ जैसे चलना, योगा, या स्विमिंग फ़ायदेमंद है, लेकिन नई एक्सरसाइज़ शुरू करने से पहले डॉक्टर से पूछ लें।
सोते समय बाईं करवट लेना सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इससे भ्रूण को खून और ऑक्सीजन बेहतर मिलती है।
Fourth month pregnancy का वो दौर है जब पहली तिमाही की तकलीफ़ें कम होने लगती हैं और आप अपनी प्रेगनेंसी को enjoy करना शुरू कर सकती हैं। बच्चा तेज़ी से बढ़ रहा है, आपका पेट दिखने लगा है, और एनर्जी वापस आ रही है। सही खानपान रखें, डॉक्टर के बताए टेस्ट समय पर करवाएँ, और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से बात करें।