प्रेगनेंसी टेस्ट करने का सही तरीका (Ghar Par Pregnancy Test Kaise Kare)

Last updated: January 27, 2026

Overview

प्रेगनेंसी की कोशिश कर रहे किसी भी कपल के लिए पीरियड आने के पहले के वो 10-12 दिन किसी इम्तहान की घड़ी से कम नहीं होते। इसे मेडिकल भाषा में 'टू वीक वेट' (Two Week Wait) कहा जाता है। इस दौरान शरीर में होने वाली हर छोटी हलचल चाहे वह स्तनों में भारीपन हो या पेट के निचले हिस्से में हल्की मरोड़ मन में एक ही सवाल पैदा करती है कि क्या इस बार खुशखबरी मिलेगी? अक्सर बेचैनी में कई महिलाएं बहुत जल्दी टेस्ट कर लेती हैं, जिससे रिजल्ट गलत आने की संभावना बढ़ जाती है। स्वस्थ जोड़ों में भी हर महीने गर्भधारण की संभावना केवल 20 से 25 प्रतिशत होती है, इसलिए टेस्ट करने की जल्दबाजी केवल मानसिक तनाव बढ़ाती है। यह लेख आपको केवल यह नहीं समझाएगा कि ghar par pregnancy test kaise kare, बल्कि यह उन संकेतों को भी बताएगा कि प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में किस तरह के बदलाव आते हैं और उन संकेतों को सही तरीके से पढ़ना क्यों जरूरी है।

प्रेगनेंसी टेस्ट में क्या जाँच होती है?

जब स्पर्म और एग (egg) का मिलन फैलोपियन ट्यूब में होता है, तो एक भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (embryo) बनता है। यह भ्रूण जब बच्चेदानी की परत (endometrium) में जाकर चिपकता है, तो उस जगह की कोशिकाएं hCG (Human Chorionic Gonadotropin) नाम का हार्मोन बनाना शुरू करती हैं। घर पर इस्तेमाल होने वाली प्रेगनेंसी टेस्ट किट आपके यूरिन में इसी hCG की मौजूदगी को पहचानती है। मेडिकल नजरिए से देखें तो सफल इम्प्लांटेशन (implantation) के बाद hCG का स्तर हर 48 से 72 घंटों में दोगुना होने लगता है। यदि आप बहुत जल्दी टेस्ट करती हैं, तो यूरिन में इस हार्मोन की सांद्रता यानी कंसंट्रेशन (concentration) इतनी कम हो सकती है कि किट उसे 'सेंस' ही न कर पाए।

सही समय का चुनाव कैसे करें?

ज्यादातर महिलाएं ओव्यूलेशन के 4-5 दिन बाद ही टेस्ट करने लगती हैं, जिसके बाद अक्सर निराशा ही उनके हाथ लगती है। क्यों यह समय इस टेस्ट के हिसाब से बहुत जल्दी है, चलिए इसे ऐसे समझते हैं।

  • फर्टिलाइजेशन: ओव्यूलेशन के 24 घंटे के भीतर होता है।
  • सफर: फर्टिलाइज हुआ एग 5-6 दिन तक ट्यूब में सफर करता है।
  • इम्प्लांटेशन: यह ओव्यूलेशन के लगभग 7 से 10 दिन बाद होता है।
  • हार्मोन का बढ़ना: इम्प्लांटेशन के 2-3 दिन बाद ही यूरिन में पर्याप्त hCG आता है।

इसीलिए, सबसे सटीक जानकारी के लिए पीरियड मिस होने के पहले दिन तक रुकना ही 'गोल्डन रूल' माना जाता है।

घर पर टेस्ट करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया और जरूरी सावधानियां

ghar par pregnancy test kaise kare इस सवाल का जवाब जितना आसान दिखता है, इसमें उतनी ही सावधानियों की जरूरत होती है।

  • सुबह का पहला यूरिन: रात भर पेशाब रुकने से उसमें hCG की मात्रा सबसे ज्यादा जमा होती है। दिन में पानी या चाय पीने से यूरिन पतला (dilute) हो जाता है, जिससे शुरुआती प्रेग्नेंसी पकड़ में नहीं आती।
  • कंटेनर की सफाई: यूरिन इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला बर्तन पूरी तरह साफ और सूखा होना चाहिए। साबुन या नमी केमिकल रिएक्शन को खराब कर सकती है।
  • ड्रॉपर का सही इस्तेमाल: किट के खांचे में यूरिन की केवल उतनी ही बूंदें डालें जितनी निर्देश में दी गई हैं यानी 2-3 बूंदें। ज्यादा यूरिन डालने से स्ट्रिप ओवरफ्लो हो सकती है और रिजल्ट धुंधला हो सकता है।
  • समय का ध्यान: रिजल्ट देखने के लिए 3-5 मिनट का इंतजार करें। 10 मिनट के बाद दिखने वाली किसी भी लाइन को प्रेगनेंसी नहीं माना जाता।

रिजल्ट को कैसे देखें?

रिजल्ट विंडो में दिखने वाली लाइनों को लेकर मरीजों में काफी उलझन रहती है।

  • सकारात्मक यानी पॉजिटिव (Positive): अगर समय के भीतर दो रंगीन लाइनें दिखती हैं, तो यह प्रेगनेंसी है। भले ही दूसरी लाइन बहुत हल्की गुलाबी हो, इसका मतलब है कि शरीर में hCG बनना शुरू हो चुका है।
  • नकारात्मक यानी नेगेटिव (Negative): अगर विंडो में केवल 'C' (Control) वाली जगह पर एक गहरी रंगीन लाइन आती है और 'T' वाली जगह पूरी तरह साफ रहती है, तो इसका मतलब है कि टेस्ट नेगेटिव है।
  • अमान्य यानी इनवैलिड (Invalid): अगर विंडो में कोई भी लाइन नहीं आती, या केवल 'T' पर लाइन आती है लेकिन 'C' वाली जगह खाली रहती है, तो टेस्ट खराब है। इसका कारण या तो किट का एक्सपायर होना होता है या यूरिन की मात्रा का सही नहीं होना होता है। ऐसी स्थिति में आपको दूसरी किट से दोबारा टेस्ट करना चाहिए
  • इवैपोरेशन लाइन (Evaporation Line): यह लाइन तब दिखती है जब यूरिन सूखने लगता है। यह आमतौर पर रंगहीन या ग्रे रंग की होती है और 10 मिनट के बाद दिखाई देती है। इसे पॉजिटिव नहीं माना जाता।
  • केमिकल प्रेगनेंसी: कई बार टेस्ट पहले पॉजिटिव आता है और फिर पीरियड्स आ जाते हैं। इसका मतलब है कि भ्रूण चिपकने की कोशिश कर रहा था लेकिन पूरी तरह इम्प्लांट नहीं हो पाया।

डिजिटल और मैनुअल किट में क्या अंतर है?

हर प्रेगनेंसी किट की एक 'सेंसिटिविटी रेटिंग' होती है जिसे mIU/mL में मापा जाता है।

  • 10 mIU/mL वाली किट: यह बहुत कम hCG को भी पहचान लेती है और पीरियड मिस होने से 4-5 दिन पहले रिजल्ट दे सकती है।
  • 25 mIU/mL वाली किट: यह स्टैंडर्ड किट है जो पीरियड मिस होने के दिन ही सही रिजल्ट देती है। डिजिटल किट उन महिलाओं के लिए बेहतर है जो 'हल्की लाइन' को लेकर कंफ्यूज रहती हैं, क्योंकि इसमें सीधा 'Pregnant' लिखा आता है।

फॉल्स पॉजिटिव और फॉल्स नेगेटिव का क्या मतलब होता है?

कभी-कभी टेस्ट का रिजल्ट हकीकत से अलग हो सकता है।

  • फॉल्स नेगेटिव: बहुत ज्यादा पानी पी लेना, बहुत जल्दी टेस्ट करना, या किट का खराब होना।
  • फॉल्स पॉजिटिव: यह कम होता है लेकिन मुमकिन है। यह तब होता है जब हाल ही में गर्भपात यानी मिसकैरिज़ (miscarriage) हुआ हो या आप फर्टिलिटी के लिए hCG ट्रिगर इंजेक्शन ले रही हों। इंजेक्शन का अंश शरीर में 10-12 दिनों तक रह सकता है, जिससे टेस्ट बेवजह पॉजिटिव आ सकता है।

पीसीओएस (PCOS) और फर्टिलिटी दवाओं का टेस्ट पर असर

PCOS वाली महिलाओं में हॉर्मोन्स का स्तर अक्सर ऊपर-नीचे रहता है। कभी-कभी बढ़ा हुआ LH (Luteinizing Hormone) प्रेगनेंसी किट के साथ 'क्रॉस-रिएक्ट' कर सकता है, जिससे कन्फ्यूजन पैदा होता है। इसके अलावा, यदि आप फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के तहत हार्मोनल दवाएं ले रही हैं, तो घर पर यूरिन टेस्ट करने के बजाय क्लिनिक में ब्लड टेस्ट (Beta-hCG) कराना कहीं ज्यादा भरोसेमंद होता है।

आईवीएफ (IVF) और एम्ब्रीओ ट्रांसफर के बाद टेस्ट की टाइमिंग

IVF के मरीजों के लिए 'टू वीक वेट' का समय मानसिक रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण होता है।

  • सावधानी: एम्ब्रीओ ट्रांसफर (embryo transfer) के बाद कभी भी घर पर जल्दी टेस्ट न करें। आईवीएफ में दिए जाने वाले हार्मोनल सपोर्ट की वजह से यूरिन टेस्ट गलत नतीजे दे सकता है।
  • सटीक तरीका: ट्रांसफर के 14 दिन बाद डॉक्टर आपको Beta-hCG ब्लड टेस्ट के लिए बुलाते हैं। यह टेस्ट न केवल यह बताता है कि आप प्रेगनेंट हैं या नहीं, बल्कि यह hCG की सटीक वैल्यू भी देता है जिससे प्रेग्नेंसी की मजबूती का पता चलता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट करना आपके पैरेंटहुड के सफर की पहली आधिकारिक सीढ़ी है। ghar par pregnancy test kaise kare का जवाब है कि शरीर की बायोलॉजी को अपना काम करने का समय दें ताकि हार्मोन का स्तर किट की पकड़ में आ सके। यदि टेस्ट नेगेटिव आता है लेकिन आपके पीरियड्स अभी भी नहीं आए हैं, तो 48 से 72 घंटे का इंतजार करें और दोबारा टेस्ट करें। याद रखें, एक घर का टेस्ट शुरुआती संकेत है, लेकिन इसकी अंतिम पुष्टि हमेशा एक फर्टिलिटी एक्सपर्ट के पास ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड से ही होनी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या प्रेगनेंसी टेस्ट के लिए खास कंटेनर की जरूरत होती है?

 

नहीं, आप किसी भी साफ और सूखे प्लास्टिक या कांच के बर्तन का इस्तेमाल कर सकती हैं। बस सुनिश्चित करें कि उसमें पहले से कोई लिक्विड या साबुन न लगा हो।

क्या टेस्ट से पहले चाय या कॉफी पी सकते हैं?

 

बेहतर है कि टेस्ट से पहले कुछ न पिएं। कैफीन और पानी दोनों ही यूरिन को पतला कर सकते हैं, जिससे hCG का कंसंट्रेशन कम हो जाता है।

अगर टेस्ट स्ट्रिप पर कोई लाइन न आए तो?

 

इसका मतलब है कि टेस्ट 'इनवैलिड' (Invalid) है। शायद स्ट्रिप पर यूरिन कम पड़ा है या किट खराब है। आपको दूसरी किट से दोबारा टेस्ट करना चाहिए।

क्या एंटीबायोटिक्स लेने से प्रेगनेंसी टेस्ट का रिजल्ट बदल जाता है?

 

आमतौर पर एंटीबायोटिक्स या दर्द निवारक दवाएं hCG के स्तर को प्रभावित नहीं करती हैं। केवल hCG युक्त फर्टिलिटी इंजेक्शन ही रिजल्ट बदल सकते हैं।

हल्की लाइन आने पर क्या करना चाहिए?

 

हल्की लाइन का मतलब आमतौर पर पॉजिटिव होता है। 2 दिन बाद दोबारा टेस्ट करें; अगर लाइन गहरी हो रही है, तो प्रेग्नेंसी बढ़ रही है।

क्या एक्टोपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic Pregnancy) में टेस्ट पॉजिटिव आता है?

 

हाँ, क्योंकि एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में भी hCG बनता है। हालांकि, यदि टेस्ट पॉजिटिव है और साथ में तेज पेट दर्द या ब्लीडिंग हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

बीटा-एचसीजी (Beta-hCG) ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट से बेहतर क्यों है?

 

ब्लड टेस्ट यूरिन टेस्ट की तुलना में बहुत कम hCG (5 mIU/mL तक) को भी पहचान लेता है और यह प्रेग्नेंसी की प्रोग्रेस को ट्रैक करने में मदद करता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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