प्रेगनेंसी की कोशिश कर रहे किसी भी कपल के लिए पीरियड आने के पहले के वो 10-12 दिन किसी इम्तहान की घड़ी से कम नहीं होते। इसे मेडिकल भाषा में 'टू वीक वेट' (Two Week Wait) कहा जाता है। इस दौरान शरीर में होने वाली हर छोटी हलचल चाहे वह स्तनों में भारीपन हो या पेट के निचले हिस्से में हल्की मरोड़ मन में एक ही सवाल पैदा करती है कि क्या इस बार खुशखबरी मिलेगी? अक्सर बेचैनी में कई महिलाएं बहुत जल्दी टेस्ट कर लेती हैं, जिससे रिजल्ट गलत आने की संभावना बढ़ जाती है। स्वस्थ जोड़ों में भी हर महीने गर्भधारण की संभावना केवल 20 से 25 प्रतिशत होती है, इसलिए टेस्ट करने की जल्दबाजी केवल मानसिक तनाव बढ़ाती है। यह लेख आपको केवल यह नहीं समझाएगा कि ghar par pregnancy test kaise kare, बल्कि यह उन संकेतों को भी बताएगा कि प्रेगनेंसी के दौरान आपके शरीर में किस तरह के बदलाव आते हैं और उन संकेतों को सही तरीके से पढ़ना क्यों जरूरी है।
जब स्पर्म और एग (egg) का मिलन फैलोपियन ट्यूब में होता है, तो एक भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (embryo) बनता है। यह भ्रूण जब बच्चेदानी की परत (endometrium) में जाकर चिपकता है, तो उस जगह की कोशिकाएं hCG (Human Chorionic Gonadotropin) नाम का हार्मोन बनाना शुरू करती हैं। घर पर इस्तेमाल होने वाली प्रेगनेंसी टेस्ट किट आपके यूरिन में इसी hCG की मौजूदगी को पहचानती है। मेडिकल नजरिए से देखें तो सफल इम्प्लांटेशन (implantation) के बाद hCG का स्तर हर 48 से 72 घंटों में दोगुना होने लगता है। यदि आप बहुत जल्दी टेस्ट करती हैं, तो यूरिन में इस हार्मोन की सांद्रता यानी कंसंट्रेशन (concentration) इतनी कम हो सकती है कि किट उसे 'सेंस' ही न कर पाए।
ज्यादातर महिलाएं ओव्यूलेशन के 4-5 दिन बाद ही टेस्ट करने लगती हैं, जिसके बाद अक्सर निराशा ही उनके हाथ लगती है। क्यों यह समय इस टेस्ट के हिसाब से बहुत जल्दी है, चलिए इसे ऐसे समझते हैं।
इसीलिए, सबसे सटीक जानकारी के लिए पीरियड मिस होने के पहले दिन तक रुकना ही 'गोल्डन रूल' माना जाता है।
ghar par pregnancy test kaise kare इस सवाल का जवाब जितना आसान दिखता है, इसमें उतनी ही सावधानियों की जरूरत होती है।
रिजल्ट विंडो में दिखने वाली लाइनों को लेकर मरीजों में काफी उलझन रहती है।
हर प्रेगनेंसी किट की एक 'सेंसिटिविटी रेटिंग' होती है जिसे mIU/mL में मापा जाता है।
कभी-कभी टेस्ट का रिजल्ट हकीकत से अलग हो सकता है।
PCOS वाली महिलाओं में हॉर्मोन्स का स्तर अक्सर ऊपर-नीचे रहता है। कभी-कभी बढ़ा हुआ LH (Luteinizing Hormone) प्रेगनेंसी किट के साथ 'क्रॉस-रिएक्ट' कर सकता है, जिससे कन्फ्यूजन पैदा होता है। इसके अलावा, यदि आप फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के तहत हार्मोनल दवाएं ले रही हैं, तो घर पर यूरिन टेस्ट करने के बजाय क्लिनिक में ब्लड टेस्ट (Beta-hCG) कराना कहीं ज्यादा भरोसेमंद होता है।
IVF के मरीजों के लिए 'टू वीक वेट' का समय मानसिक रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण होता है।
घर पर प्रेगनेंसी टेस्ट करना आपके पैरेंटहुड के सफर की पहली आधिकारिक सीढ़ी है। ghar par pregnancy test kaise kare का जवाब है कि शरीर की बायोलॉजी को अपना काम करने का समय दें ताकि हार्मोन का स्तर किट की पकड़ में आ सके। यदि टेस्ट नेगेटिव आता है लेकिन आपके पीरियड्स अभी भी नहीं आए हैं, तो 48 से 72 घंटे का इंतजार करें और दोबारा टेस्ट करें। याद रखें, एक घर का टेस्ट शुरुआती संकेत है, लेकिन इसकी अंतिम पुष्टि हमेशा एक फर्टिलिटी एक्सपर्ट के पास ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड से ही होनी चाहिए।
नहीं, आप किसी भी साफ और सूखे प्लास्टिक या कांच के बर्तन का इस्तेमाल कर सकती हैं। बस सुनिश्चित करें कि उसमें पहले से कोई लिक्विड या साबुन न लगा हो।
बेहतर है कि टेस्ट से पहले कुछ न पिएं। कैफीन और पानी दोनों ही यूरिन को पतला कर सकते हैं, जिससे hCG का कंसंट्रेशन कम हो जाता है।
इसका मतलब है कि टेस्ट 'इनवैलिड' (Invalid) है। शायद स्ट्रिप पर यूरिन कम पड़ा है या किट खराब है। आपको दूसरी किट से दोबारा टेस्ट करना चाहिए।
आमतौर पर एंटीबायोटिक्स या दर्द निवारक दवाएं hCG के स्तर को प्रभावित नहीं करती हैं। केवल hCG युक्त फर्टिलिटी इंजेक्शन ही रिजल्ट बदल सकते हैं।
हल्की लाइन का मतलब आमतौर पर पॉजिटिव होता है। 2 दिन बाद दोबारा टेस्ट करें; अगर लाइन गहरी हो रही है, तो प्रेग्नेंसी बढ़ रही है।
हाँ, क्योंकि एक्टोपिक प्रेग्नेंसी में भी hCG बनता है। हालांकि, यदि टेस्ट पॉजिटिव है और साथ में तेज पेट दर्द या ब्लीडिंग हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
ब्लड टेस्ट यूरिन टेस्ट की तुलना में बहुत कम hCG (5 mIU/mL तक) को भी पहचान लेता है और यह प्रेग्नेंसी की प्रोग्रेस को ट्रैक करने में मदद करता है।