HSG टेस्ट यानी हिस्टेरोसालपिंगोग्राम (Hysterosalpingogram)। HSG एक आसान, सुरक्षित और बेहद ज़रूरी डायग्नोस्टिक प्रॉसिजर है जो बताता है कि महिला के गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) और फैलोपियन ट्यूब (Fallopian Tubes) की कंडीशन कैसी है। चलिए समझते हैं कि HSG test in Hindi, कि यह टेस्ट क्या होता, क्यों किया जाता है, कैसे किया जाता है, इसमें किस तरह का अनुभव होता है, और प्रेगनेंसी की संभावनाओं पर इसका क्या असर पड़ सकता है।
HSG यानी हिस्टेरोसालपिंगोग्राम (Hysterosalpingogram) एक एक्स-रे बेस्ड इमेजिंग टेस्ट है जिसमें एक ख़ास कंट्रास्ट डाई यानी रंग (Contrast Dye) का इस्तेमाल किया जाता है। इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य यह देखना होता है कि:
इस पूरे प्रोसेस में सर्विक्स यानी गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) के ज़रिये एक पतली ट्यूब यानी कैथेटर (Catheter) अंदर डाली जाती है, और फिर धीरे-धीरे कंट्रास्ट डाई को यूट्रस और फैलोपियन ट्यूब में भेजा जाता है। जब यह डाई अंदर फैलती है, तो एक्स-रे मशीन से लगातार तस्वीरें ली जाती हैं, जिससे पूरा इंटरनल स्ट्रक्चर साफ़ दिखाई देता है। अगर ट्यूब खुली हैं, तो डाई आसानी से बाहर निकल जाएगी; अगर कहीं रुकावट है, तो वह भी साफ़ दिखाई देगी।
HSG सिर्फ़ एक डायग्नोस्टिक टेस्ट नहीं है, कुछ मामलों में यह थेराप्यूटिक भी हो सकता है। कुछ महिलाओं में ऐसा देखा गया है कि डाई के बहाव से फैलोपियन ट्यूब की हल्की रुकावटें खुल जाती हैं, जिससे प्रेगनेंसी के चांस बढ़ सकते हैं।
फीमेल इनफर्टिलिटी यानी महिला निःसंतानता के कारणों में फैलोपियन ट्यूब की रुकावट और यूट्रस की स्ट्रक्चरल समस्याएं प्रमुख कारण होती हैं। इसलिए जब किसी कपल को एक साल से ज़्यादा समय हो जाता है और प्रेगनेंसी नहीं हो रही, तो डॉक्टर HSG टेस्ट की सिफारिश करते हैं।
HSG टेस्ट का सही समय बहुत महत्वपूर्ण है। यह टेस्ट पीरियड्स खत्म होने के बाद और ओव्यूलेशन से पहले करवाया जाता है, आमतौर पर मेंस्ट्रुअल साइकिल के 7वें से 12वें दिन के बीच। इसके पीछे कई कारण हैं:
टेस्ट से पहले डॉक्टर एक यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट करते हैं ताकि यह पक्का हो सके कि महिला प्रेग्नेंट नहीं है। कुछ डॉक्टर टेस्ट से एक-दो दिन पहले एंटीबायोटिक्स भी दे सकते हैं ताकि इंफेक्शन का रिस्क कम हो जाए।
HSG टेस्ट की तैयारी बहुत आसान है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है:
HSG टेस्ट का अनुभव हर महिला के लिए अलग होता है और यह उनकी पेन टॉलरेंस पर निर्भर करता है। कुछ महिलाओं को बहुत हल्की असुविधा होती है, जबकि कुछ को मॉडरेट क्रैम्पिंग महसूस होती है।
याद रखें, HSG टेस्ट एक बहुत छोटी प्रक्रिया है और असुविधा भी अस्थायी होती है। इससे मिलने वाली जानकारी आपकी फर्टिलिटी जर्नी में बहुत महत्वपूर्ण होती है।
HSG टेस्ट के बाद आप तुरंत घर जा सकती हैं क्योंकि यह एक डे-केयर प्रॉसिजर है जिसमें एक घंटे से भी कम समय लगता है। हालांकि, कुछ चीज़ें हो सकती हैं जो बिल्कुल नॉर्मल हैं।
हालांकि HSG टेस्ट बहुत सुरक्षित है, लेकिन अगर आपको ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
HSG टेस्ट का खर्च भारत में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग हो सकता है। आमतौर पर HSG टेस्ट का खर्च ₹3,000 से ₹10,000 के बीच होता है। लेकिन यह कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है:
मेट्रो सिटीज़ जैसे दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर में खर्च ज़्यादा हो सकता है, जबकि छोटे शहरों में कम।
प्राइवेट फर्टिलिटी क्लीनिक में सरकारी अस्पतालों से ज़्यादा चार्ज हो सकता है।
ऑयल-बेस्ड कंट्रास्ट वाटर-बेस्ड से थोड़ा महंगा हो सकता है।
अगर सेडेशन या स्पेशल इमेजिंग की ज़रूरत है, तो खर्च बढ़ सकता है।
HSG टेस्ट पीरियड के बाद और ओव्यूलेशन से पहले किया जाता है, इसलिए उसी महीने में ओव्यूलेशन के दौरान आप नेचुरली कंसीव करने की कोशिश कर सकती हैं। कुछ स्टडीज़ बताती हैं कि HSG के तुरंत बाद के 3 से 6 महीने प्रेगनेंसी के लिए "गोल्डन पीरियड" हो सकते हैं, खासकर अगर ट्यूब्स खुली हुई हैं।
HSG टेस्ट फीमेल इनफर्टिलिटी की जांच में एक महत्वपूर्ण और बेसिक स्टेप है जो गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब के बारे में क्लियर पिक्चर देता है। HSG test in Hindi में समझें तो, यह सिर्फ़ एक डायग्नोस्टिक टूल नहीं है बल्कि आपकी फर्टिलिटी जर्नी का एक अहम हिस्सा है जो आगे के ट्रीटमेंट प्लान को तय करने में मदद करता है। अगर HSG में कोई प्रॉब्लम मिलती है, तो उसका इलाज संभव है। यह आपके माँ बनने के सपने को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सही जानकारी, सही समय पर टेस्ट, और सही ट्रीटमेंट के साथ, आप अपने माँ बनने के सपने को साकार सकती हैं।
HSG यानी हिस्टेरोसालपिंगोग्राम एक एक्स-रे बेस्ड टेस्ट है जो गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब की जांच के लिए किया जाता है।
ज़्यादातर महिलाओं को हल्की से मॉडरेट क्रैम्पिंग महसूस होती है जो पीरियड जैसी होती है।
पीरियड खत्म होने के बाद और ओव्यूलेशन से पहले किया जाता है, आमतौर पर मेंस्ट्रुअल साइकिल के 7वें से 12वें दिन के बीच।
हाँ, आप उसी साइकिल में प्रेगनेंसी ट्राई कर सकती हैं। कुछ स्टडीज़ बताती हैं कि HSG के बाद प्रेगनेंसी के चांस थोड़े बढ़ सकते हैं।
पूरी प्रक्रिया 10 से 30 मिनट में पूरी हो जाती है। यह एक आउटपेशेंट प्रॉसिजर है।
हल्की क्रैम्पिंग और स्पॉटिंग नॉर्मल है। आप उसी दिन अपनी नॉर्मल गतिविधियां कर सकती हैं, बस भारी सामान उठाने से 1-2 दिन बचें। अगर तेज़ बुखार, भारी ब्लीडिंग या तेज़ दर्द हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।
भारत में HSG टेस्ट का खर्च आमतौर पर ₹3,000 से ₹10,000 के बीच होता है, जो लोकेशन और हॉस्पिटल पर निर्भर करता है।