HSG टेस्ट क्या है? – प्रक्रिया और पूरी जानकारी (HSG Test in Hindi)

Last updated: December 22, 2025

Overview

HSG टेस्ट यानी हिस्टेरोसालपिंगोग्राम (Hysterosalpingogram)। HSG एक आसान, सुरक्षित और बेहद ज़रूरी डायग्नोस्टिक प्रॉसिजर है जो बताता है कि महिला के गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) और फैलोपियन ट्यूब (Fallopian Tubes) की कंडीशन कैसी है। चलिए समझते हैं कि HSG test in Hindi, कि यह टेस्ट क्या होता, क्यों किया जाता है, कैसे किया जाता है, इसमें किस तरह का अनुभव होता है, और प्रेगनेंसी की संभावनाओं पर इसका क्या असर पड़ सकता है।

HSG टेस्ट क्या होता है?

HSG यानी हिस्टेरोसालपिंगोग्राम (Hysterosalpingogram) एक एक्स-रे बेस्ड इमेजिंग टेस्ट है जिसमें एक ख़ास कंट्रास्ट डाई यानी रंग (Contrast Dye) का इस्तेमाल किया जाता है। इस टेस्ट का मुख्य उद्देश्य यह देखना होता है कि:

  • महिला का यूट्रस किस आकार और बनावट का है?
  • फैलोपियन ट्यूब्स खुली हैं या बंद (Blocked or Patent)?
  • यूट्रस के अंदर किसी तरह की असामान्यता तो नहीं है, जैसे फाइब्रॉयड, पॉलिप या सिनेकिया (Adhesions)?

इस पूरे प्रोसेस में सर्विक्स यानी गर्भाशय ग्रीवा (Cervix) के ज़रिये एक पतली ट्यूब यानी कैथेटर (Catheter) अंदर डाली जाती है, और फिर धीरे-धीरे कंट्रास्ट डाई को यूट्रस और फैलोपियन ट्यूब में भेजा जाता है। जब यह डाई अंदर फैलती है, तो एक्स-रे मशीन से लगातार तस्वीरें ली जाती हैं, जिससे पूरा इंटरनल स्ट्रक्चर साफ़ दिखाई देता है। अगर ट्यूब खुली हैं, तो डाई आसानी से बाहर निकल जाएगी; अगर कहीं रुकावट है, तो वह भी साफ़ दिखाई देगी।

HSG सिर्फ़ एक डायग्नोस्टिक टेस्ट नहीं है, कुछ मामलों में यह थेराप्यूटिक भी हो सकता है। कुछ महिलाओं में ऐसा देखा गया है कि डाई के बहाव से फैलोपियन ट्यूब की हल्की रुकावटें खुल जाती हैं, जिससे प्रेगनेंसी के चांस बढ़ सकते हैं।

HSG टेस्ट क्यों किया जाता है?

फीमेल इनफर्टिलिटी यानी महिला निःसंतानता के कारणों में फैलोपियन ट्यूब की रुकावट और यूट्रस की स्ट्रक्चरल समस्याएं प्रमुख कारण होती हैं। इसलिए जब किसी कपल को एक साल से ज़्यादा समय हो जाता है और प्रेगनेंसी नहीं हो रही, तो डॉक्टर HSG टेस्ट की सिफारिश करते हैं।

किन महिलाओं को HSG टेस्ट करवाना चाहिए?

  • जो महिलाएं लंबे समय से कंसीव करने की कोशिश कर रही हैं: अगर एक साल (35 साल से कम उम्र में) या छह महीने (35 साल से ज़्यादा उम्र में) तक नियमित असुरक्षित संबंध बनाने के बावजूद प्रेगनेंसी नहीं हो रही हो, तो HSG टेस्ट की सलाह दी जाती है।
  • जिन महिलाओं को बार-बार गर्भपात हो रहा हो: अगर कोई महिला गर्भवती तो हो जाती है लेकिन बार-बार गर्भपात यानी मिसकैरिज़ हो जाता है, तो यूट्रस की बनावट और शेप की जांच के लिए HSG ज़रूरी होता है। कई बार यूट्रस में सेप्टम (Septum) या फाइब्रॉयड की वजह से प्रेगनेंसी टिक नहीं पाती।
  • जिनमें पेल्विक इंफेक्शन, एंडोमेट्रियोसिस या फाइब्रॉयड की हिस्ट्री हो: ये सभी कंडीशन फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज या स्कारिंग का कारण बन सकती हैं। HSG इन समस्याओं को पकड़ने में मदद करता है।
  • जो महिलाएं IVF या IUI करवाना चाहती हैं: असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) जैसे IVF या IUI से पहले यह देखना ज़रूरी होता है कि यूट्रस और ट्यूब्स की कंडीशन कैसी है। अगर ट्यूब्स में हाइड्रोसलपिंक्स (Hydrosalpinx) यानी पानी भरा हुआ है, तो IVF की सक्सेस रेट कम हो सकती है।
  • जिन्होंने ट्यूबल लाइगेशन करवाया हो: कुछ महिलाएं स्टरलाइजेशन प्रॉसिजर यानी ट्यूबल लाइगेशन (Tubal Ligation) के बाद HSG करवाती हैं ताकि यह कन्फर्म हो सके कि ट्यूब पूरी तरह बंद हो गई हैं।

HSG टेस्ट कब करवाना चाहिए?

HSG टेस्ट का सही समय बहुत महत्वपूर्ण है। यह टेस्ट पीरियड्स खत्म होने के बाद और ओव्यूलेशन से पहले करवाया जाता है, आमतौर पर मेंस्ट्रुअल साइकिल के 7वें से 12वें दिन के बीच। इसके पीछे कई कारण हैं:

  • प्रेगनेंसी का कोई रिस्क नहीं: पीरियड के बाद और ओव्यूलेशन से पहले का समय यह सुनिश्चित करता है कि महिला प्रेग्नेंट नहीं है। अगर महिला प्रेग्नेंट हो और HSG किया जाए, तो यह हानिकारक हो सकता है।
  • सर्विक्स थोड़ा खुला रहता है: पीरियड के तुरंत बाद सर्विक्स थोड़ा सा खुला रहता है, जिससे कैथेटर डालना आसान हो जाता है।
  • इंफेक्शन का कम खतरा: इस समय एंडोमेट्रियम पतली होती है, इसलिए इंफेक्शन का खतरा कम रहता है।
  • क्लियर इमेज: मेंस्ट्रुअल ब्लड और डेब्रिस साफ हो चुके होते हैं, इसलिए एक्स-रे इमेज क्लियर आती है।

टेस्ट से पहले डॉक्टर एक यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट करते हैं ताकि यह पक्का हो सके कि महिला प्रेग्नेंट नहीं है। कुछ डॉक्टर टेस्ट से एक-दो दिन पहले एंटीबायोटिक्स भी दे सकते हैं ताकि इंफेक्शन का रिस्क कम हो जाए।

HSG टेस्ट की तैयारी कैसे करें? (HSG Test Preparation)

HSG टेस्ट की तैयारी बहुत आसान है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है:

  • डॉक्टर को अपनी मेडिकल हिस्ट्री बताएं: अगर आपको किसी दवा से एलर्जी है, खासकर आयोडीन या कंट्रास्ट डाई से, तो डॉक्टर को पहले बता दें। अगर आपको अस्थमा, किडनी की समस्या या थायरॉइड की बीमारी है, तो यह भी ज़रूरी जानकारी है।
  • प्रेगनेंसी टेस्ट: टेस्ट से पहले यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट किया जाएगा। अगर आपको थोड़ी भी शंका है कि आप प्रेग्नेंट हो सकती हैं, तो डॉक्टर को बता दें।
  • पेनकिलर ले सकती हैं: कई डॉक्टर टेस्ट से 30 से 45 मिनट पहले पेनकिलर लेने की सलाह देते हैं ताकि क्रैम्पिंग और असुविधा कम हो सके।
  • हल्का खाना खाएं: टेस्ट से पहले हेवी मील खाने से बचें। कुछ महिलाओं को घबराहट या नर्वसनेस की वजह से मतली महसूस हो सकती है।
  • पैड साथ रखें: टेस्ट के बाद थोड़ी डाई लीकेज हो सकती है, इसलिए सेनेटरी पैड साथ रखें।
  • किसी को साथ ले जाएं: हालांकि यह एक आउटपेशेंट प्रॉसिजर है, लेकिन टेस्ट के बाद कुछ महिलाओं को चक्कर या कमजोरी महसूस हो सकती है। इसलिए किसी परिवार के सदस्य या दोस्त को साथ ले जाना अच्छा रहता है।

क्या HSG टेस्ट में दर्द होता है?

HSG टेस्ट का अनुभव हर महिला के लिए अलग होता है और यह उनकी पेन टॉलरेंस पर निर्भर करता है। कुछ महिलाओं को बहुत हल्की असुविधा होती है, जबकि कुछ को मॉडरेट क्रैम्पिंग महसूस होती है।

दर्द कम करने के टिप्स

  • टेस्ट से पहले पेनकिलर लेने से क्रैम्पिंग काफी कम हो जाती है
  • कुछ डॉक्टर लोकल एनेस्थीसिया या सेडेटिव भी दे सकते हैं जिससे प्रॉसिजर पेनलेस हो जाता है
  • गहरी सांस लेना और रिलैक्स रहना भी मदद करता है

याद रखें, HSG टेस्ट एक बहुत छोटी प्रक्रिया है और असुविधा भी अस्थायी होती है। इससे मिलने वाली जानकारी आपकी फर्टिलिटी जर्नी में बहुत महत्वपूर्ण होती है।

HSG टेस्ट के बाद क्या होता है?

HSG टेस्ट के बाद आप तुरंत घर जा सकती हैं क्योंकि यह एक डे-केयर प्रॉसिजर है जिसमें एक घंटे से भी कम समय लगता है। हालांकि, कुछ चीज़ें हो सकती हैं जो बिल्कुल नॉर्मल हैं।

  • टेस्ट के बाद क्रैम्पिंग 5 मिनट से लेकर कुछ घंटों तक रह सकती है। आप ओवर-द-काउंटर पेनकिलर ले सकती हैं।
  • हल्की स्पॉटिंग या वजाइनल ब्लीडिंग काफी आम है और यह चिंता की बात नहीं है। यह 1-2 दिन तक रह सकती है।
  • आपको कुछ स्टिकी डिस्चार्ज महसूस हो सकता है जो कंट्रास्ट डाई है। यह बिल्कुल नॉर्मल है। इसलिए पैड पहनें।
  • कुछ महिलाओं को हल्की कमजोरी या चक्कर आ सकते हैं। थोड़ी देर आराम करें और फिर नॉर्मल एक्टिविटीज शुरू कर सकती हैं।

कब डॉक्टर को कॉल करें?

हालांकि HSG टेस्ट बहुत सुरक्षित है, लेकिन अगर आपको ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:

  • तेज़ बुखार (100.4°F से ज़्यादा)
  • बहुत ज़्यादा वजाइनल ब्लीडिंग जो पीरियड से भी भारी हो
  • तेज़ पेट दर्द जो बढ़ता जा रहा हो
  • बदबूदार डिस्चार्ज जो कि यह इंफेक्शन का संकेत हो सकता है
  • उल्टी आने या बेहोशी होने पर

HSG टेस्ट का खर्च कितना आता है? (HSG Test Cost in India)

HSG टेस्ट का खर्च भारत में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग हो सकता है। आमतौर पर HSG टेस्ट का खर्च ₹3,000 से ₹10,000 के बीच होता है। लेकिन यह कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है:

लोकेशन:

मेट्रो सिटीज़ जैसे दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर में खर्च ज़्यादा हो सकता है, जबकि छोटे शहरों में कम।

हॉस्पिटल या क्लीनिक:

प्राइवेट फर्टिलिटी क्लीनिक में सरकारी अस्पतालों से ज़्यादा चार्ज हो सकता है।

कंट्रास्ट डाई का टाइप:

ऑयल-बेस्ड कंट्रास्ट वाटर-बेस्ड से थोड़ा महंगा हो सकता है।

एडिशनल सर्विसेज़:

अगर सेडेशन या स्पेशल इमेजिंग की ज़रूरत है, तो खर्च बढ़ सकता है।

HSG टेस्ट के बाद प्रेगनेंसी प्लानिंग

HSG टेस्ट पीरियड के बाद और ओव्यूलेशन से पहले किया जाता है, इसलिए उसी महीने में ओव्यूलेशन के दौरान आप नेचुरली कंसीव करने की कोशिश कर सकती हैं। कुछ स्टडीज़ बताती हैं कि HSG के तुरंत बाद के 3 से 6 महीने प्रेगनेंसी के लिए "गोल्डन पीरियड" हो सकते हैं, खासकर अगर ट्यूब्स खुली हुई हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

HSG टेस्ट फीमेल इनफर्टिलिटी की जांच में एक महत्वपूर्ण और बेसिक स्टेप है जो गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब के बारे में क्लियर पिक्चर देता है। HSG test in Hindi में समझें तो, यह सिर्फ़ एक डायग्नोस्टिक टूल नहीं है बल्कि आपकी फर्टिलिटी जर्नी का एक अहम हिस्सा है जो आगे के ट्रीटमेंट प्लान को तय करने में मदद करता है। अगर HSG में कोई प्रॉब्लम मिलती है, तो उसका इलाज संभव है। यह आपके माँ बनने के सपने को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सही जानकारी, सही समय पर टेस्ट, और सही ट्रीटमेंट के साथ, आप अपने माँ बनने के सपने को साकार सकती हैं।

Common Questions Asked

HSG टेस्ट क्या होता है और यह क्यों किया जाता है?

 

HSG यानी हिस्टेरोसालपिंगोग्राम एक एक्स-रे बेस्ड टेस्ट है जो गर्भाशय और फैलोपियन ट्यूब की जांच के लिए किया जाता है।

क्या HSG टेस्ट में बहुत दर्द होता है?

 

ज़्यादातर महिलाओं को हल्की से मॉडरेट क्रैम्पिंग महसूस होती है जो पीरियड जैसी होती है।

HSG टेस्ट किस दिन किया जाता है?

 

पीरियड खत्म होने के बाद और ओव्यूलेशन से पहले किया जाता है, आमतौर पर मेंस्ट्रुअल साइकिल के 7वें से 12वें दिन के बीच।

क्या HSG टेस्ट के बाद उसी महीने प्रेगनेंसी ट्राई कर सकते हैं?

 

हाँ, आप उसी साइकिल में प्रेगनेंसी ट्राई कर सकती हैं। कुछ स्टडीज़ बताती हैं कि HSG के बाद प्रेगनेंसी के चांस थोड़े बढ़ सकते हैं।

HSG टेस्ट में कितना समय लगता है?

 

पूरी प्रक्रिया 10 से 30 मिनट में पूरी हो जाती है। यह एक आउटपेशेंट प्रॉसिजर है।

HSG टेस्ट के बाद क्या सावधानियां रखनी चाहिए?

 

हल्की क्रैम्पिंग और स्पॉटिंग नॉर्मल है। आप उसी दिन अपनी नॉर्मल गतिविधियां कर सकती हैं, बस भारी सामान उठाने से 1-2 दिन बचें। अगर तेज़ बुखार, भारी ब्लीडिंग या तेज़ दर्द हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।

HSG टेस्ट का खर्च कितना आता है?

 

भारत में HSG टेस्ट का खर्च आमतौर पर ₹3,000 से ₹10,000 के बीच होता है, जो लोकेशन और हॉस्पिटल पर निर्भर करता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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