क्या अंडकोष में पानी होने पर भी संतान हो सकती है? (Hydrocele Meaning in Hindi)

Last updated: March 17, 2026

साराँश (Overview)

कभी-कभी पुरुषों को अचानक महसूस होता है कि उनके अंडकोष में सूजन आ गई है। छूने पर ऐसा लगता है जैसे अंदर पानी भरा हुआ हो। इसे हाइड्रोसील कहते हैं।

Hydrocele meaning in hindi है अंडकोष के आसपास तरल पदार्थ का जमा हो जाना। इसे सामान्य बोलचाल में अंडवृद्धि भी कहा जाता है। अंडकोष यानी स्क्रोटम के अंदर टेस्टिस के चारों ओर एक पतली झिल्ली होती है जिसमें सामान्य रूप से थोड़ा सा लिक्विड भरा होता है, जो टेस्टिस को सेफ रखता है और उसे आसानी से हिलने-डुलने में मदद करता है।

जब किसी कारण से यह लिक्विड नार्मल से थोड़ा ज्यादा हो जाता है, तो स्क्रोटम में सूजन दिखाई देने लगती है। इसी कंडीशन को हाइड्रोसील कहा जाता है।

ज्यादातर मामलों में हाइड्रोसील का पुरुष की फर्टिलिटी पर कोई नेगेटिव असर नहीं पड़ता यानी केवल Hydrocele होने से पिता बनने की क्षमता सामान्य रूप से प्रभावित नहीं होती।

Hydrocele meaning in hindi आर्टिकल में जानेंगे कि हाइड्रोसील क्या होता है, यह वेरीकोसील (Varicocele) से अलग कैसे है, फर्टिलिटी पर इसका असर कब पड़ सकता है, खुद से इसकी पहचान कैसे करें और कब इसके इलाज या सर्जरी की जरूरत पड़ती है।

हाइड्रोसील क्या होता है? (Hydrocele meaning in Hindi)

हाइड्रोसील को समझने के लिए पहले अंडकोष यानी टेस्टिस (testes) की सामान्य बनावट को समझना जरूरी है।

टेस्टिस स्क्रोटम नाम की त्वचा की एक थैली के अंदर मौजूद होते हैं। इन टेस्टिस के चारों ओर एक पतली झिल्ली होती है जिसमें सामान्य रूप से थोड़ी मात्रा में लिक्विड भरा रहता है। यह लिक्विड टेस्टिस को सेफ रखता है और उन्हें आपस में रगड़ने से बचाता है।

कई बार कुछ कारणों से टेस्टिस की इस झिल्ली में भरा हुआ लिक्विड अधिक मात्रा में जमा हो जाता है, जिसकी वजह से स्क्रोटम में सूजन दिखाई देने लगती है। इसे ही हाइड्रोसील कहते हैं।

Hydrocele दो तरह का हो सकता है।

कम्युनिकेटिंग हाइड्रोसील (Communicating Hydrocele)

इसमें पेट और स्क्रोटम के बीच का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता जिसकी वजह से लिक्विड ऊपर नीचे आ जा सकता है। यही वजह है कि स्क्रोटम की सूजन कभी कम और कभी ज्यादा महसूस हो सकती है।

नॉन- कम्युनिकेटिंग हाइड्रोसील (Non-communicating Hydrocele)

इसमें पेट और स्क्रोटम के बीच का रास्ता बंद होता है, इसीलिए बढ़ा हुआ लिक्विड स्क्रोटम में जमा ही रहता है और शरीर उसे वापस सोख नहीं पाता। वयस्क पुरुषों में आमतौर पर इसी प्रकार का Hydrocele देखा जाता है।

Hydrocele और Varicocele में फ़र्क़

हाइड्रोसील और वेरीकोसील दोनों ही स्क्रोटम से जुड़ी परेशानियाँ हैं, इसलिए कई बार लोग इन दोनों में अंतर नहीं कर पाते।

हाइड्रोसील

  • स्क्रोटम के अंदर लिक्विड जमा हो जाता है जिसके कारण सूजन दिखाई देती है
  • छूने पर स्क्रोटम मुलायम और भारी महसूस हो सकता है
  • अधिकतर मामलों में दर्द नहीं होता, केवल सूजन या भारीपन महसूस होता है
  • मोबाइल या टॉर्च की रोशनी स्क्रोटम के आर-पार जा सकती है

वेरीकोसील

  • स्क्रोटम के अंदर मौजूद नसें फूल जाती हैं और गुच्छे की तरह दिखाई देती हैं
  • छूने पर यह अक्सर “कीड़ों के गुच्छे” जैसा महसूस होता है
  • लंबे समय तक खड़े रहने या चलने पर भारीपन या दर्द महसूस हो सकता है
  • टॉर्च की रोशनी स्क्रोटम के आर-पार नहीं जाती क्योंकि इसमें लिक्विड नहीं बल्कि नसों का फैलाव होता है

वैरिकोसील की वजस से कई बार स्पर्म की क्वालिटी ख़राब हो सकती है, जबकि साधारण हाइड्रोसील होने पर ऐसा नहीं होता।

Hydrocele खुद कैसे पहचानें?

नीचे दिए गए सभी तरीके केवल शुरुआती अंदाज़ा लगाने के लिए हैं। कन्फर्म करने के लिए डॉक्टर से जाँच करवानी चाहिए।

Step 1: देखकर

सबसे पहले शीशे के सामने खड़े होकर स्क्रोटम को ध्यान से देखें। अगर एक तरफ का स्क्रोटम दूसरी तरफ की तुलना में ज्यादा बड़ा दिखाई दे रहा है, तो यह Hydrocele का लक्षण हो सकता है।

Step 2: छूकर महसूस करें

दोनों हाथों से स्क्रोटम को धीरे-धीरे छूकर देखें। हाइड्रोसील में सूजन आमतौर पर मुलायम और पानी से भरी हुई थैली जैसा महसूस होता है। वहीं वैरीकोसील में नसों का गुच्छा जैसा महसूस होता है।

Step 3: टॉर्च टेस्ट

अंधेरे कमरे में मोबाइल की टॉर्च स्क्रोटम के पीछे रखें। अगर रोशनी आर-पार दिखाई देती है, तो हाइड्रोसील है।

Step 4: दर्द पर ध्यान दें

साधारण हाइड्रोसील होने पर अमूमन दर्द नहीं होता। लेकिन अचानक तेज़ दर्द, लालिमा या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह किसी दूसरी समस्या के कारण हो सकता है।

क्या Hydrocele से फर्टिलिटी पर असर पड़ता है?

अधिकतर मामलों में हाइड्रोसील का फर्टिलिटी पर कोई असर नहीं पड़ता। अगर हाइड्रोसील केवल लिक्विड जमा हो जाने के कारण है और टेस्टिस पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो स्पर्म नेचुरल तरीके से बनते रहते हैं। टेस्टिस के अंदर स्पर्म प्रोडक्शन पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ता।

ज्यादातर केसों में Hydrocele होने के बावजूद सीमेन रिपोर्ट पूरी तरह नार्मल ही होती है। कुछ कंडीशन में डॉक्टर अतिरिक्त जाँच करवा सकते हैं।

  • अगर हाइड्रोसील बहुत बड़ा हो गया हो जिससे टेस्टिस पर लगातार दबाव पड़ रहा हो, तो टेस्टिस के टेम्परेचर और काम पर असर पड़ सकता है
  • अगर हाइड्रोसील के साथ किसी प्रकार का संक्रमण मौजूद हो, तो यह टेस्टिस के ऊतकों को प्रभावित कर सकता है
  • अगर असल में समस्या वैरीकोसील हो और उसे हाइड्रोसील समझ लिया जाये, तो फर्टिलिटी पर असर पड़ सकता है
  • अगर हाइड्रोसील किसी अन्य बीमारी जैसे ट्यूमर या चोट की वजह से बना हो, तो आगे की जाँच जरूरी होती है

Hydrocele का इलाज़ कब ज़रूरी है, कब नहीं?

हाइड्रोसील के हर मामले में इलाज या सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। कई बार केवल निगरानी रखना ही काफी होता है।

जब इलाज की जरूरत नहीं होती

  • नवजात शिशुओं में हाइड्रोसील अक्सर अपने आप ठीक हो जाता है क्योंकि जन्म के बाद शरीर धीरे-धीरे एक्स्ट्रा लिक्विड को सोख लेता है।
  • अगर वयस्क पुरुष में हाइड्रोसील छोटा है, दर्द नहीं है और रोज़मर्रा की गतिविधियों में कोई परेशानी नहीं हो रही, तो डॉक्टर केवल समय-समय पर जाँच की सलाह दे सकते हैं।

जब इलाज जरूरी हो सकता है

  • अगर सूजन इतनी बढ़ जाए कि चलने-फिरने या बैठने में असहजता होने लगे
  • अगर स्क्रोटम में लगातार भारीपन या दर्द महसूस हो रहा हो
  • अगर सूजन धीरे-धीरे बढ़ती जा रही हो और आकार बड़ा होता जा रहा हो
  • अगर यौन संबंध बनाने में परेशानी महसूस हो रही हो
  • अगर दिखने में असामान्य होने के कारण मानसिक असहजता या चिंता हो रही हो
  • अगर संक्रमण के संकेत जैसे बुखार, लालिमा या तेज दर्द दिखाई दें

Hydrocele का इलाज क्या है

हाइड्रोसील के इलाज के दो मुख्य तरीके होते हैं।

एस्पिरेशन (Aspiration)

इसमें डॉक्टर एक पतली सुई की मदद से स्क्रोटम के अंदर जमा लिक्विड को बाहर निकाल देते हैं। यह तरीका आसान तो है, लेकिन कई बार अस्थायी होता है क्योंकि कुछ केसों में लिक्विड फिर से जमा हो सकता है। इसलिए यह तरीका आमतौर पर तब अपनाया जाता है जब मरीज की सर्जरी की सर्जरी नहीं हो पा रही हो।

हाइड्रोसीलेक्टॉमी (Hydrocelectomy)

यह हाइड्रोसील का सबसे प्रभावी और स्थायी ट्रीटमेंट माना जाता है। इस सर्जरी में स्क्रोटम में छोटा सा चीरा लगाकर जमा लिक्विड निकाल दिया जाता है और उस झिल्ली का इलाज किया जाता है जिससे दोबारा लिक्विड जमा होने की संभावना कम हो जाती है।

यह सर्जरी सामान्य रूप से 30 से 45 मिनट में पूरी हो जाती है और अधिकतर मरीज उसी दिन या अगले दिन घर लौट सकते हैं।

Hydrocele की सर्जरी के बाद क्या होता है?

हाइड्रोसील की सर्जरी यानी हाइड्रोसीलेक्टॉमी के बाद रिकवरी आमतौर पर आसान होती है, लेकिन शुरुआती दिनों में कुछ सावधानियाँ रखनी चाहिए।

पहले कुछ दिन

सर्जरी के बाद हल्की सूजन और दर्द महसूस हो सकता है। डॉक्टर दर्द कम करने की दवाइयाँ देते हैं और स्क्रोटल सपोर्ट पहनने की सलाह देते हैं।

पहला सप्ताह

धीरे-धीरे हल्की एक्टिविटी शुरू की जा सकती है, लेकिन भारी सामान उठाने और अधिक मेहनत वाले काम से बचना चाहिए।

2 से 4 सप्ताह

अधिकतर लोग इस समय तक अपने सारे काम नॉर्मल तरीके से करने लगते हैं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार 2 से 3 सप्ताह बाद शारीरिक सम्बन्ध भी बनाये जा सकते हैं।

फर्टिलिटी पर असर

अगर सर्जरी से पहले स्पर्म प्रोडक्शन सामान्य था, तो सर्जरी के बाद भी सामान्य ही रहता है। हाइड्रोसील की सर्जरी से स्पर्म प्रोडक्शन पर असर नहीं पड़ता।

निष्कर्ष (Conclusion)

Hydrocele यानी अंडकोष में पानी भरना एक कॉमन कंडीशन है जो अधिकतर मामलों में सीरियस नहीं होती। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साधारण हाइड्रोसील से आमतौर पर फर्टिलिटी प्रभावित नहीं होती। टेस्टिस सामान्य रूप से काम करते रहते हैं और स्पर्म का प्रोडक्शन पहले की तरह होता रहता है।

हालाँकि हाइड्रोसील और वैरीकोसील के बीच अंतर समझना जरूरी है, क्योंकि वैरीकोसील कुछ मामलों में स्पर्म क्वालिटी को प्रभावित कर सकता है।

अगर अंडकोष में सूजन दिखाई दे रही है और आप इसके कारण को लेकर चिंतित हैं, तो डॉक्टर से जाँच करवाना ही सही रहेगा। सही जाँच से समस्या का कारण स्पष्ट हो जाता है और उसी के अनुसार डॉक्टर ट्रीटमेंट करते हैं।

Hydrocele के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

हाइड्रोसील से बच्चा पैदा करने में दिक्कत होती है क्या?

हाइड्रोसील और वैरीकोसील में क्या अंतर है?

क्या हाइड्रोसील अपने आप ठीक हो सकता है?

हाइड्रोसील की सर्जरी में कितना समय लगता है?

सर्जरी के बाद दोबारा हाइड्रोसील हो सकता है?

हाइड्रोसील होने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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