कभी-कभी पुरुषों को अचानक महसूस होता है कि उनके अंडकोष में सूजन आ गई है। छूने पर ऐसा लगता है जैसे अंदर पानी भरा हुआ हो। इसे हाइड्रोसील कहते हैं।
Hydrocele meaning in hindi है अंडकोष के आसपास तरल पदार्थ का जमा हो जाना। इसे सामान्य बोलचाल में अंडवृद्धि भी कहा जाता है। अंडकोष यानी स्क्रोटम के अंदर टेस्टिस के चारों ओर एक पतली झिल्ली होती है जिसमें सामान्य रूप से थोड़ा सा लिक्विड भरा होता है, जो टेस्टिस को सेफ रखता है और उसे आसानी से हिलने-डुलने में मदद करता है।
जब किसी कारण से यह लिक्विड नार्मल से थोड़ा ज्यादा हो जाता है, तो स्क्रोटम में सूजन दिखाई देने लगती है। इसी कंडीशन को हाइड्रोसील कहा जाता है।
ज्यादातर मामलों में हाइड्रोसील का पुरुष की फर्टिलिटी पर कोई नेगेटिव असर नहीं पड़ता यानी केवल Hydrocele होने से पिता बनने की क्षमता सामान्य रूप से प्रभावित नहीं होती।
Hydrocele meaning in hindi आर्टिकल में जानेंगे कि हाइड्रोसील क्या होता है, यह वेरीकोसील (Varicocele) से अलग कैसे है, फर्टिलिटी पर इसका असर कब पड़ सकता है, खुद से इसकी पहचान कैसे करें और कब इसके इलाज या सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
हाइड्रोसील को समझने के लिए पहले अंडकोष यानी टेस्टिस (testes) की सामान्य बनावट को समझना जरूरी है।
टेस्टिस स्क्रोटम नाम की त्वचा की एक थैली के अंदर मौजूद होते हैं। इन टेस्टिस के चारों ओर एक पतली झिल्ली होती है जिसमें सामान्य रूप से थोड़ी मात्रा में लिक्विड भरा रहता है। यह लिक्विड टेस्टिस को सेफ रखता है और उन्हें आपस में रगड़ने से बचाता है।
कई बार कुछ कारणों से टेस्टिस की इस झिल्ली में भरा हुआ लिक्विड अधिक मात्रा में जमा हो जाता है, जिसकी वजह से स्क्रोटम में सूजन दिखाई देने लगती है। इसे ही हाइड्रोसील कहते हैं।
Hydrocele दो तरह का हो सकता है।
इसमें पेट और स्क्रोटम के बीच का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होता जिसकी वजह से लिक्विड ऊपर नीचे आ जा सकता है। यही वजह है कि स्क्रोटम की सूजन कभी कम और कभी ज्यादा महसूस हो सकती है।
इसमें पेट और स्क्रोटम के बीच का रास्ता बंद होता है, इसीलिए बढ़ा हुआ लिक्विड स्क्रोटम में जमा ही रहता है और शरीर उसे वापस सोख नहीं पाता। वयस्क पुरुषों में आमतौर पर इसी प्रकार का Hydrocele देखा जाता है।
हाइड्रोसील और वेरीकोसील दोनों ही स्क्रोटम से जुड़ी परेशानियाँ हैं, इसलिए कई बार लोग इन दोनों में अंतर नहीं कर पाते।
वैरिकोसील की वजस से कई बार स्पर्म की क्वालिटी ख़राब हो सकती है, जबकि साधारण हाइड्रोसील होने पर ऐसा नहीं होता।
नीचे दिए गए सभी तरीके केवल शुरुआती अंदाज़ा लगाने के लिए हैं। कन्फर्म करने के लिए डॉक्टर से जाँच करवानी चाहिए।
सबसे पहले शीशे के सामने खड़े होकर स्क्रोटम को ध्यान से देखें। अगर एक तरफ का स्क्रोटम दूसरी तरफ की तुलना में ज्यादा बड़ा दिखाई दे रहा है, तो यह Hydrocele का लक्षण हो सकता है।
दोनों हाथों से स्क्रोटम को धीरे-धीरे छूकर देखें। हाइड्रोसील में सूजन आमतौर पर मुलायम और पानी से भरी हुई थैली जैसा महसूस होता है। वहीं वैरीकोसील में नसों का गुच्छा जैसा महसूस होता है।
अंधेरे कमरे में मोबाइल की टॉर्च स्क्रोटम के पीछे रखें। अगर रोशनी आर-पार दिखाई देती है, तो हाइड्रोसील है।
साधारण हाइड्रोसील होने पर अमूमन दर्द नहीं होता। लेकिन अचानक तेज़ दर्द, लालिमा या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें, तो यह किसी दूसरी समस्या के कारण हो सकता है।
अधिकतर मामलों में हाइड्रोसील का फर्टिलिटी पर कोई असर नहीं पड़ता। अगर हाइड्रोसील केवल लिक्विड जमा हो जाने के कारण है और टेस्टिस पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो स्पर्म नेचुरल तरीके से बनते रहते हैं। टेस्टिस के अंदर स्पर्म प्रोडक्शन पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ता।
ज्यादातर केसों में Hydrocele होने के बावजूद सीमेन रिपोर्ट पूरी तरह नार्मल ही होती है। कुछ कंडीशन में डॉक्टर अतिरिक्त जाँच करवा सकते हैं।
हाइड्रोसील के हर मामले में इलाज या सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती। कई बार केवल निगरानी रखना ही काफी होता है।
हाइड्रोसील के इलाज के दो मुख्य तरीके होते हैं।
इसमें डॉक्टर एक पतली सुई की मदद से स्क्रोटम के अंदर जमा लिक्विड को बाहर निकाल देते हैं। यह तरीका आसान तो है, लेकिन कई बार अस्थायी होता है क्योंकि कुछ केसों में लिक्विड फिर से जमा हो सकता है। इसलिए यह तरीका आमतौर पर तब अपनाया जाता है जब मरीज की सर्जरी की सर्जरी नहीं हो पा रही हो।
यह हाइड्रोसील का सबसे प्रभावी और स्थायी ट्रीटमेंट माना जाता है। इस सर्जरी में स्क्रोटम में छोटा सा चीरा लगाकर जमा लिक्विड निकाल दिया जाता है और उस झिल्ली का इलाज किया जाता है जिससे दोबारा लिक्विड जमा होने की संभावना कम हो जाती है।
यह सर्जरी सामान्य रूप से 30 से 45 मिनट में पूरी हो जाती है और अधिकतर मरीज उसी दिन या अगले दिन घर लौट सकते हैं।
हाइड्रोसील की सर्जरी यानी हाइड्रोसीलेक्टॉमी के बाद रिकवरी आमतौर पर आसान होती है, लेकिन शुरुआती दिनों में कुछ सावधानियाँ रखनी चाहिए।
सर्जरी के बाद हल्की सूजन और दर्द महसूस हो सकता है। डॉक्टर दर्द कम करने की दवाइयाँ देते हैं और स्क्रोटल सपोर्ट पहनने की सलाह देते हैं।
धीरे-धीरे हल्की एक्टिविटी शुरू की जा सकती है, लेकिन भारी सामान उठाने और अधिक मेहनत वाले काम से बचना चाहिए।
अधिकतर लोग इस समय तक अपने सारे काम नॉर्मल तरीके से करने लगते हैं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार 2 से 3 सप्ताह बाद शारीरिक सम्बन्ध भी बनाये जा सकते हैं।
अगर सर्जरी से पहले स्पर्म प्रोडक्शन सामान्य था, तो सर्जरी के बाद भी सामान्य ही रहता है। हाइड्रोसील की सर्जरी से स्पर्म प्रोडक्शन पर असर नहीं पड़ता।
Hydrocele यानी अंडकोष में पानी भरना एक कॉमन कंडीशन है जो अधिकतर मामलों में सीरियस नहीं होती। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि साधारण हाइड्रोसील से आमतौर पर फर्टिलिटी प्रभावित नहीं होती। टेस्टिस सामान्य रूप से काम करते रहते हैं और स्पर्म का प्रोडक्शन पहले की तरह होता रहता है।
हालाँकि हाइड्रोसील और वैरीकोसील के बीच अंतर समझना जरूरी है, क्योंकि वैरीकोसील कुछ मामलों में स्पर्म क्वालिटी को प्रभावित कर सकता है।
अगर अंडकोष में सूजन दिखाई दे रही है और आप इसके कारण को लेकर चिंतित हैं, तो डॉक्टर से जाँच करवाना ही सही रहेगा। सही जाँच से समस्या का कारण स्पष्ट हो जाता है और उसी के अनुसार डॉक्टर ट्रीटमेंट करते हैं।