हाइपरथायराइड के 10 लक्षण जिन्हें इग्नोर न करें (Hyperthyroid Ke Lakshan)

Last updated: February 09, 2026

Overview

अगर आपका वज़न बिना किसी कोशिश के घट रहा है, दिल की धड़कन अक्सर तेज रहती है, हाथ काँप रहे हैं, या फिर गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही और अगर ये सब एक साथ हो रहा है तो सावधान हो जायें क्योंकि यह सिर्फ़ स्ट्रेस या थकान नहीं है। ये hyperthyroid ke lakshan यानी हाइपरथायराइड के लक्षण हो सकते हैं। हाइपरथायराइड यानी ओवरएक्टिव थायराइड (Overactive Thyroid) एक ऐसी कंडीशन है जिसमें थायराइड ग्रंथि यानी थायराइड ग्लैंड (Thyroid Gland) ज़रूरत से ज़्यादा हॉर्मोन बनाने लगती है। ये हॉर्मोन शरीर की हर क्रिया को तेज़ कर देते हैं यानी दिल की धड़कन से लेकर पाचन तक, सब कुछ ओवरड्राइव में चला जाता है। इस आर्टिकल में हम हाइपरथायराइड के हर लक्षण को समझेंगे और जानेंगे कि वो लक्षण क्यों होता है। क्योंकि जब जब आपको पता चलेगा कि आपके शरीर में क्या हो रहा है तभी सही समय पर सही निर्णय लेने में आसानी होगी।

हाइपरथायरायडिज्म क्या है?

थायराइड ग्लैंड गर्दन के सामने तितली के आकार की एक ग्रंथि है। यह दो हॉर्मोन बनाती है, T3 (ट्राईआयोडोथायरोनिन) और T4 (थायरॉक्सिन)। ये हॉर्मोन शरीर के मेटाबॉलिज़्म यानी चयापचय को कंट्रोल करते हैं।

जब थायराइड ओवरएक्टिव हो जाती है, तो T3 और T4 का लेवल खून में बहुत बढ़ जाता है, जिससे शरीर की हर कोशिका यानी सेल (cell) बहुत तेज़ी से काम करने लगती है। इससे शरीर की हर प्रक्रिया तेज़ हो जाती है। यही कारण है कि हाइपरथायराइड के लक्षण ऐसे लगते हैं जैसे शरीर हमेशा ‘फास्ट फॉरवर्ड’ मोड में है।

इसे एक उदहारण से ऐसे समझिये कि एक कार खड़ी है लेकिन उसका इंजन पूरी रफ़्तार से घूम रहा है ज़ाहिर है, वह इंजन जल्दी गर्म होगा और खराब भी हो सकता है। हाइपरथायरायडिज्म में आपका शरीर भी इसी तरह अंदर ही अंदर थकता रहता है।

हाइपरथायरायडिज्म के मुख्य लक्षण

हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण इतने सामान्य लग सकते हैं कि इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है। यहाँhyperthyroid ke lakshan की लिस्ट दी गई है जिन पर नज़र रखने से आप इसे समय पर पहचान सकते हैं।

  • अचानक वजन कम होना (Weight Loss)

    आप अच्छी डाइट ले रही हैं, भूख भी खूब लग रही है, फिर भी वजन तेज़ी से गिर रहा है। यह हाइपरथायरायडिज्म का सबसे बड़ा लक्षण है क्योंकि इस कंडीशन में मेटाबॉलिज्म बहुत तेज़ हो जाता है जिससे बिना किसी वजह जैसे पिइसीकाल एक्टिविटी या डाइटिंग के वजन तेजी से घटना शुरू कर देता है।

  • दिल की धड़कन तेज़ होना (Palpitations)

    बैठे-बैठे अचानक ऐसा महसूस होना कि दिल बहुत ज़ोर से धड़क रहा है या छाती में लगातार ‘धुक-धुक’ हो रही है। इस दौरान पल्स रेट अक्सर सामान्य से ज़्यादा हो जाती है और कई बार 100 से ऊपर तक पहुँच सकती है।

  • गर्मी बर्दाश्त न होना (Heat Intolerance)

    जब आसपास के लोगों को मौसम सामान्य लग रहा हो, तब भी आपको असहनीय गर्मी लगने लगे और बिना ज़्यादा मेहनत के पसीना आने लगे।

  • हाथों में कंपन (Tremors)

    उँगलियों और हाथों का हल्का-हल्का कांपना, जो हाथ आगे की ओर फैलाने पर या किसी चीज़ को पकड़ने की कोशिश करने पर ज़्यादा महसूस हो।

  • चिड़चिड़ापन और बेचैनी (Anxiety)

    बिना किसी बात के घबराहट होना, नींद न आना (Insomnia) और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना।

  • मांसपेशियों में कमज़ोरी (Muscle Weakness)

    खासकर जांघों और ऊपरी बाहों में इतनी कमज़ोरी महसूस होना कि सीढ़ियां चढ़ना या भारी सामान उठाना मुश्किल लगे।

  • पीरियड्स में बदलाव (Irregular Periods)

    महिलाओं में पीरियड्स बहुत कम मात्रा में आना यानी लाइट फ्लो आना या महीनों तक मिस हो जाना।

  • पाचन तंत्र में गड़बड़ी

    बार-बार मोशन (Frequent bowel movements) आना क्योंकि थायराइड हार्मोन आंतों की गतिविधि को तेज़ कर देते हैं, जिससे खाना पाचन तंत्र से सामान्य से ज़्यादा तेज़ी से गुजरने लगता है।

  • थायराइड ग्रंथि का बढ़ना (Goiter)

    थायराइड ग्लैंड बढ़ने की वजह से गर्दन के निचले हिस्से में सूजन दिखाई देना।

  • आंखों में बदलाव (Eye Problems)

    आँखों का बाहर की तरफ उभरा हुआ दिखना, साथ में आँखों में सूखापन या लालिमा रहना। यह लक्षण अक्सर ग्रेव्स डिज़ीज़ में देखा जाता है।

हाइपरथायरायडिज्म के कारण

इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिन्हें समझना ज़रूरी है।

  • ग्रेव्स डिजीज (Graves' Disease): यह हाइपरथायरायडिज्म का सबसे आम कारण है जो लगभग 70-80% मामलों में होता है। यह एक 'ऑटोइम्यून' समस्या है जहाँ आपका अपना इम्यून सिस्टम ही थायराइड ग्रंथि पर हमला कर उसे ज़्यादा हॉर्मोन बनाने के लिए कहता है।
  • थायराइड नोड्यूल्स (Nodules): थायराइड ग्रंथि में छोटी-छोटी गांठें बन जाना जो खुद ही हॉर्मोन बनाने लगती हैं।
  • थायरायडाइटिस (Thyroiditis): थायराइड में सूजन आने की वजह से स्टोर किया हुआ हॉर्मोन अचानक खून में रिसने लगता है।
  • आयोडीन की अधिकता: बहुत ज़्यादा आयोडीन युक्त नमक या सप्लीमेंट्स लेने से भी थायराइड ओवरएक्टिव हो सकता है।

हाइपरथायरायडिज्म और फर्टिलिटी

हाइपरथायरायडिज्म सिर्फ़ वजन और दिल पर असर नहीं डालता, यह प्रजनन तंत्र यानी रिप्रोडक्टिव सिस्टम (Reproductive System) को भी डिस्टर्ब कर देता है।

जब T3 और T4 हॉर्मोन बढ़ते हैं, तो वे उन हॉर्मोन्स (FSH और LH) के साथ छेड़छाड़ करते हैं जो ओव्यूलेशन यानी एग बनाने के प्रोसेस को कंट्रोल करते हैं। नतीजा यह होता है की एग समय पर नहीं बनता या बनता ही नहीं। इसके अलावा, अगर हाइपरथायरायडिज्म के दौरान प्रेगनेंसी हो भी जाए, तो मिसकैरेज (Miscarriage) या समय से पहले डिलीवरी (Pre-term birth) का खतरा बहुत बढ़ जाता है।

हाइपरथायरायडिज्म में IVF करवाते समय सावधानी?

अगर आप IVF ट्रीटमेंट लेने की सोच रही हैं तो सबसे पहले थायराइड की जाँच करवानी चाहिए क्योंकि IVF में इसका बहुत जरुरी रोल होता है।

  • अंडों की क्वालिटी: हॉर्मोनल असंतुलन की वजह से अंडों की क्वालिटी खराब हो सकती है, जिससे IVF फेल होने का डर रहता है।
  • इम्प्लांटेशन (Implantation): अगर थायराइड लेवल सही नहीं है, तो भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (embryo) गर्भाशय की दीवार से सही से नहीं चिपक पाता।
  • सक्सेस रेट (Success Rate): डॉक्टर हमेशा सलाह देते हैं कि जब तक आपका TSH लेवल नॉर्मल रेंज में न आ जाए, तब तक एम्ब्रीओ ट्रांसफर नहीं करना चाहिए।

अगर आपको हाइपरथायरायडिज्म है, तो IVF ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले अपने एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (Endocrinologist) और फर्टिलिटी एक्सपर्ट के बीच कोऑर्डिनेट करें। जिससे दवाइयों के ज़रिए हॉर्मोन कंट्रोल होने के बाद ही IVF ट्रीटमेंट शुरू हो ।

क्या हाइपरथायरायडिज्म को रोका जा सकता है?

हालांकि 'ग्रेव्स डिजीज' जैसी ऑटोइम्यून समस्याओं को पूरी तरह रोकना मुमकिन नहीं है, लेकिन आप अपनी लाइफस्टाइल से थायराइड को बिगड़ने से रोक सकते हैं।

  • आयोडीन का संतुलन: न बहुत ज़्यादा आयोडीन खाएं, न बहुत कम। सी-फ़ूड (Seafood) और आयोडीन वाले सप्लीमेंट्स डॉक्टर की सलाह पर ही लें।
  • तनाव कम करें: तनाव ऑटोइम्यून समस्याओं को ट्रिगर कर सकता है। योग और मेडिटेशन थायराइड को शांत रखने में मदद करते हैं।
  • धूम्रपान छोड़ें: रिसर्च बताती है कि स्मोकिंग करने वालों में ग्रेव्स डिजीज होने का खतरा ज़्यादा होता है, खासकर यह आंखों पर बुरा असर डालता है।
  • नियमित जाँच: अगर परिवार में किसी को थायराइड की समस्या रही है, तो साल में एक बार TSH टेस्ट ज़रूर करवाएं।

हाइपरथायरायडिज्म की जाँच और इलाज

अगर आपको hyperthyroid ke lakshan महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर ये टेस्ट करवाएंगे।

  • T3, T4 और TSH टेस्ट: हाइपर होने की कंडीशन में T3-T4 बढ़े हुए और TSH बहुत कम, लगभग शून्य मिलता है।
  • अल्ट्रासाउंड: थायराइड में गांठें या सूजन देखने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जाता है।

इलाज के विकल्प

  • दवाइयां (Anti-thyroid drugs): ये दवाइयां थायराइड को हॉर्मोन बनाने से रोकती हैं।
  • रेडियोएक्टिव आयोडीन: यह थायराइड की उन सेल्स को नष्ट कर देता है जो ज़्यादा हॉर्मोन बना रही हैं।
  • सर्जरी: अगर गांठें बड़ी हैं या कैंसर का डर है, तो थायराइड ग्रंथि का कुछ हिस्सा निकाल दिया जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

हाइपरथायरायडिज्म सुनने में डरावना लग सकता है, लेकिन hyperthyroid ke lakshan सही समय पर पहचान कर और इलाज से इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। हर समस्या को लेकर शरीर कुछ न कुछ सकेंत जरूर देता है। चाहे वह अचानक कम होता वजन हो या तेज़ धड़कन हो, इन्हें 'नॉर्मल' समझकर नज़रअन्दाज़ न करें। यदि आप प्रेगनेंसी या IVF प्लान कर रही हैं, तो थायराइड को बैलेंस करना आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए किया गया एक छोटा सा ब्लड टेस्ट आपके जीवन और आपकी फर्टिलिटी की दिशा बदल सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

हाइपरथायराइड और हाइपोथायराइड में क्या फ़र्क है?

 

हाइपरथायराइड में थायराइड हॉर्मोन ज़्यादा बनते हैं और मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है। हाइपोथायराइड में हॉर्मोन कम बनते हैं और मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है।

क्या हाइपरथायरायडिज्म में वजन कभी बढ़ सकता है?

 

आमतौर पर वजन घटता है, लेकिन कुछ रेयर केस में मेटाबॉलिज्म बढ़ने की वजह से भूख इतनी ज़्यादा बढ़ जाती है कि इंसान ज़रुरत से ज़्यादा खाने लगता है, जिससे वजन बढ़ सकता है।

क्या हाइपरथायरायडिज्म हमेशा के लिए ठीक हो जाता है?

 

हाँ, सही दवाइयों या रेडियोएक्टिव आयोडीन ट्रीटमेंट से इसे ठीक किया जा सकता है।

क्या हाइपरथायराइड प्रेगनेंसी में बच्चे के लिए खतरनाक है?

 

अगर हाइपरथायरायडिज्म अनियंत्रित (Uncontrolled) है, तो यह खतरनाक है। यह बच्चे की धड़कन बढ़ा सकता है और बच्चे का लो-बर्थ वेट हो सकता है। लेकिन दवाइयों से कंट्रोल रहने पर प्रेगनेंसी पूरी तरह सेफ हो सकती है।

क्या डार्क चॉकलेट खाना हाइपरथायराइड में सही है?

 

डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम होता है जो मसल्स को रिलैक्स करता है, लेकिन इसमें कैफीन भी होता है जो दिल की धड़कन बढ़ा सकता है। इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही खाएं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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