अगर आपका वज़न बिना किसी कोशिश के घट रहा है, दिल की धड़कन अक्सर तेज रहती है, हाथ काँप रहे हैं, या फिर गर्मी बर्दाश्त नहीं हो रही और अगर ये सब एक साथ हो रहा है तो सावधान हो जायें क्योंकि यह सिर्फ़ स्ट्रेस या थकान नहीं है। ये hyperthyroid ke lakshan यानी हाइपरथायराइड के लक्षण हो सकते हैं। हाइपरथायराइड यानी ओवरएक्टिव थायराइड (Overactive Thyroid) एक ऐसी कंडीशन है जिसमें थायराइड ग्रंथि यानी थायराइड ग्लैंड (Thyroid Gland) ज़रूरत से ज़्यादा हॉर्मोन बनाने लगती है। ये हॉर्मोन शरीर की हर क्रिया को तेज़ कर देते हैं यानी दिल की धड़कन से लेकर पाचन तक, सब कुछ ओवरड्राइव में चला जाता है। इस आर्टिकल में हम हाइपरथायराइड के हर लक्षण को समझेंगे और जानेंगे कि वो लक्षण क्यों होता है। क्योंकि जब जब आपको पता चलेगा कि आपके शरीर में क्या हो रहा है तभी सही समय पर सही निर्णय लेने में आसानी होगी।
थायराइड ग्लैंड गर्दन के सामने तितली के आकार की एक ग्रंथि है। यह दो हॉर्मोन बनाती है, T3 (ट्राईआयोडोथायरोनिन) और T4 (थायरॉक्सिन)। ये हॉर्मोन शरीर के मेटाबॉलिज़्म यानी चयापचय को कंट्रोल करते हैं।
जब थायराइड ओवरएक्टिव हो जाती है, तो T3 और T4 का लेवल खून में बहुत बढ़ जाता है, जिससे शरीर की हर कोशिका यानी सेल (cell) बहुत तेज़ी से काम करने लगती है। इससे शरीर की हर प्रक्रिया तेज़ हो जाती है। यही कारण है कि हाइपरथायराइड के लक्षण ऐसे लगते हैं जैसे शरीर हमेशा ‘फास्ट फॉरवर्ड’ मोड में है।
इसे एक उदहारण से ऐसे समझिये कि एक कार खड़ी है लेकिन उसका इंजन पूरी रफ़्तार से घूम रहा है ज़ाहिर है, वह इंजन जल्दी गर्म होगा और खराब भी हो सकता है। हाइपरथायरायडिज्म में आपका शरीर भी इसी तरह अंदर ही अंदर थकता रहता है।
हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण इतने सामान्य लग सकते हैं कि इसे पहचानना मुश्किल हो जाता है। यहाँhyperthyroid ke lakshan की लिस्ट दी गई है जिन पर नज़र रखने से आप इसे समय पर पहचान सकते हैं।
आप अच्छी डाइट ले रही हैं, भूख भी खूब लग रही है, फिर भी वजन तेज़ी से गिर रहा है। यह हाइपरथायरायडिज्म का सबसे बड़ा लक्षण है क्योंकि इस कंडीशन में मेटाबॉलिज्म बहुत तेज़ हो जाता है जिससे बिना किसी वजह जैसे पिइसीकाल एक्टिविटी या डाइटिंग के वजन तेजी से घटना शुरू कर देता है।
बैठे-बैठे अचानक ऐसा महसूस होना कि दिल बहुत ज़ोर से धड़क रहा है या छाती में लगातार ‘धुक-धुक’ हो रही है। इस दौरान पल्स रेट अक्सर सामान्य से ज़्यादा हो जाती है और कई बार 100 से ऊपर तक पहुँच सकती है।
जब आसपास के लोगों को मौसम सामान्य लग रहा हो, तब भी आपको असहनीय गर्मी लगने लगे और बिना ज़्यादा मेहनत के पसीना आने लगे।
उँगलियों और हाथों का हल्का-हल्का कांपना, जो हाथ आगे की ओर फैलाने पर या किसी चीज़ को पकड़ने की कोशिश करने पर ज़्यादा महसूस हो।
बिना किसी बात के घबराहट होना, नींद न आना (Insomnia) और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना।
खासकर जांघों और ऊपरी बाहों में इतनी कमज़ोरी महसूस होना कि सीढ़ियां चढ़ना या भारी सामान उठाना मुश्किल लगे।
महिलाओं में पीरियड्स बहुत कम मात्रा में आना यानी लाइट फ्लो आना या महीनों तक मिस हो जाना।
बार-बार मोशन (Frequent bowel movements) आना क्योंकि थायराइड हार्मोन आंतों की गतिविधि को तेज़ कर देते हैं, जिससे खाना पाचन तंत्र से सामान्य से ज़्यादा तेज़ी से गुजरने लगता है।
थायराइड ग्लैंड बढ़ने की वजह से गर्दन के निचले हिस्से में सूजन दिखाई देना।
आँखों का बाहर की तरफ उभरा हुआ दिखना, साथ में आँखों में सूखापन या लालिमा रहना। यह लक्षण अक्सर ग्रेव्स डिज़ीज़ में देखा जाता है।
इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिन्हें समझना ज़रूरी है।
हाइपरथायरायडिज्म सिर्फ़ वजन और दिल पर असर नहीं डालता, यह प्रजनन तंत्र यानी रिप्रोडक्टिव सिस्टम (Reproductive System) को भी डिस्टर्ब कर देता है।
जब T3 और T4 हॉर्मोन बढ़ते हैं, तो वे उन हॉर्मोन्स (FSH और LH) के साथ छेड़छाड़ करते हैं जो ओव्यूलेशन यानी एग बनाने के प्रोसेस को कंट्रोल करते हैं। नतीजा यह होता है की एग समय पर नहीं बनता या बनता ही नहीं। इसके अलावा, अगर हाइपरथायरायडिज्म के दौरान प्रेगनेंसी हो भी जाए, तो मिसकैरेज (Miscarriage) या समय से पहले डिलीवरी (Pre-term birth) का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
अगर आप IVF ट्रीटमेंट लेने की सोच रही हैं तो सबसे पहले थायराइड की जाँच करवानी चाहिए क्योंकि IVF में इसका बहुत जरुरी रोल होता है।
अगर आपको हाइपरथायरायडिज्म है, तो IVF ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले अपने एंडोक्रिनोलॉजिस्ट (Endocrinologist) और फर्टिलिटी एक्सपर्ट के बीच कोऑर्डिनेट करें। जिससे दवाइयों के ज़रिए हॉर्मोन कंट्रोल होने के बाद ही IVF ट्रीटमेंट शुरू हो ।
हालांकि 'ग्रेव्स डिजीज' जैसी ऑटोइम्यून समस्याओं को पूरी तरह रोकना मुमकिन नहीं है, लेकिन आप अपनी लाइफस्टाइल से थायराइड को बिगड़ने से रोक सकते हैं।
अगर आपको hyperthyroid ke lakshan महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर ये टेस्ट करवाएंगे।
हाइपरथायरायडिज्म सुनने में डरावना लग सकता है, लेकिन hyperthyroid ke lakshan सही समय पर पहचान कर और इलाज से इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है। हर समस्या को लेकर शरीर कुछ न कुछ सकेंत जरूर देता है। चाहे वह अचानक कम होता वजन हो या तेज़ धड़कन हो, इन्हें 'नॉर्मल' समझकर नज़रअन्दाज़ न करें। यदि आप प्रेगनेंसी या IVF प्लान कर रही हैं, तो थायराइड को बैलेंस करना आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए किया गया एक छोटा सा ब्लड टेस्ट आपके जीवन और आपकी फर्टिलिटी की दिशा बदल सकता है।
हाइपरथायराइड में थायराइड हॉर्मोन ज़्यादा बनते हैं और मेटाबॉलिज़्म तेज़ हो जाता है। हाइपोथायराइड में हॉर्मोन कम बनते हैं और मेटाबॉलिज़्म धीमा हो जाता है।
आमतौर पर वजन घटता है, लेकिन कुछ रेयर केस में मेटाबॉलिज्म बढ़ने की वजह से भूख इतनी ज़्यादा बढ़ जाती है कि इंसान ज़रुरत से ज़्यादा खाने लगता है, जिससे वजन बढ़ सकता है।
हाँ, सही दवाइयों या रेडियोएक्टिव आयोडीन ट्रीटमेंट से इसे ठीक किया जा सकता है।
अगर हाइपरथायरायडिज्म अनियंत्रित (Uncontrolled) है, तो यह खतरनाक है। यह बच्चे की धड़कन बढ़ा सकता है और बच्चे का लो-बर्थ वेट हो सकता है। लेकिन दवाइयों से कंट्रोल रहने पर प्रेगनेंसी पूरी तरह सेफ हो सकती है।
डार्क चॉकलेट में मैग्नीशियम होता है जो मसल्स को रिलैक्स करता है, लेकिन इसमें कैफीन भी होता है जो दिल की धड़कन बढ़ा सकता है। इसलिए इसे सीमित मात्रा में ही खाएं।