थायराइड की समस्या अक्सर चुपचाप शुरू होती है। शुरुआत में कोई तेज़ दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। धीरे-धीरे शरीर में बदलाव आने लगते हैं। थकान बढ़ने लगती है, वज़न बढ़ जाता है, त्वचा और बाल बदलने लगते हैं, और कई महिलाओं में पीरियड्स भी अनियमित हो जाते हैं।
Hypothyroidism in hindi का मतलब है कि थायराइड ग्रंथि शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त हॉर्मोन नहीं बना पा रही है। भारत में लाखों महिलाएँ इस समस्या से प्रभावित हैं, लेकिन उनमें से कई को लंबे समय तक इसका पता नहीं चलता।
बहुत से कपल जो कई महीनों या सालों से गर्भधारण की कोशिश कर रहे होते हैं लेकिन उन्हें थायराइड का पता नहीं होता है और जाँच करने पर पता चलता है कि उनका TSH थोड़ा बढ़ा हुआ है।
थायराइड हॉर्मोन का असर एग्स की क्वालिटी, ओव्यूलेशन, भ्रूण के इम्प्लांटेशन और गर्भावस्था को बनाए रखने पर पड़ता है। इसलिए अगर थायराइड में गड़बड़ी हो, तो कंसीव करने में कठिनाई आ सकती है या गर्भपात यानी मिसकैरिज़ (misscariage) का खतरा बढ़ सकता है।
Hypothyroidism in hindi, उन 10 लक्षणों के बारे है जो बताते हैं कि थायराइड खासकर Hypothyroidism आपकी फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती है।
थायराइड गर्दन के सामने स्थित एक छोटी ग्रंथि है जिसका आकार तितली जैसा होता है। यह दो मुख्य हॉर्मोन बनाती है T3 और T4। ये हॉर्मोन शरीर की ऊर्जा, मेटाबॉलिज्म, तापमान, वजन और कई अन्य प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
Hypothyroidism तब होता है जब यह ग्रंथि धीमी हो जाती है और पर्याप्त हॉर्मोन नहीं बना पाती। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म भी धीमा पड़ जाता है और कई शारीरिक बदलाव दिखाई देने लगते हैं।
इसका सबसे सामान्य कारण हाशिमोतो थायरॉयडिटिस (Hashimoto’s thyroiditis) नाम की ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से थायराइड ग्रंथि को ही नुकसान पहुँचाने लगती है।
अगर पहले आपका पीरियड चक्र नियमित था और अब कभी 35 दिन तो कभी 45 दिन बाद आ रहा है, या बहुत हल्का या बहुत भारी हो गया है, तो यह एक लक्षण हो सकता है।
थायराइड हॉर्मोन का असर उन हॉर्मोन्स पर पड़ता है जो ओव्यूलेशन को कंट्रोल करते हैं। जब थायराइड कम काम करता है, तो ओव्यूलेशन रेगुलर नहीं होता और पीरियड्स भी अनियमित हो जाते हैं।
अगर पर्याप्त नींद लेने के बाद भी शरीर में थकान बनी रहती है और छोटी-छोटी गतिविधियाँ भी मुश्किल लगती हैं, तो यह भी एक संकेत हो सकता है।
थायराइड हॉर्मोन शरीर की एनर्जी को कंट्रोल करते हैं। इनके कम होने पर मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है और शरीर में एनर्जी की कमी महसूस होती है।
अगर आपकी खाने-पीने की आदतें पहले जैसी ही हैं लेकिन फिर भी वजन धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा हो, खासकर पेट और कमर के आसपास, तो यह Hypothyroidism की वजह से हो सकता है।
जब थायराइड कम सक्रिय होता है, तो शरीर कैलोरी कम जलाता है। इससे वसा यानी फैट जमा होने लगती है और वजन बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ वजन आगे चलकर हॉर्मोन में गड़बड़ी को और बढ़ा सकता है।
अगर आसपास के लोग सामान्य महसूस कर रहे हों लेकिन आपको ठंड लग रही हो, हाथ-पैर ठंडे रहते हों या हल्के मौसम में भी ठंड का एहसास हो, तो यह भी एक लक्षण हो सकता है।
थायराइड हॉर्मोन शरीर के टेंपरेचर को कंट्रोल करते हैं। इनके कम होने पर शरीर की टेंपरेचर कंट्रोल करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
बालों का अचानक ज्यादा झड़ना भी hypothyroidism का संकेत हो सकता है। इसमें बाल पतले और कमजोर हो जाते हैं। एक विशेष लक्षण यह भी माना जाता है कि भौंहों के बाहरी हिस्से के बाल कम होने लगते हैं।
अगर त्वचा सामान्य से अधिक सूखी रहने लगे, क्रीम लगाने के बावजूद सुधार न हो, या एड़ियाँ बार-बार फटने लगें, तो यह भी hypothyroidism से जुड़ा हो सकता है क्योंकि थायराइड हॉर्मोन त्वचा की नमी बनाए रखने में भी भूमिका निभाते हैं।
Hypothyroidism में पाचन तंत्र भी धीमा हो सकता है। इससे आंतों की गति कम हो जाती है और कब्ज़ की समस्या रहने लगती है। अगर पहले पाचन सामान्य था और अब धीरे-धीरे समस्या बढ़ रही है, तो थायराइड जाँच करवाना उचित हो सकता है।
कई लोगों में hypothyroidism के साथ उदासी, चिड़चिड़ापन या मन का भारी रहना भी देखा जाता है।
थायराइड हॉर्मोन मस्तिष्क के केमिकल संतुलन को प्रभावित करते हैं। इनके कम होने पर मनोदशा भी प्रभावित हो सकती है।
थायराइड हॉर्मोन मस्तिष्क के सामान्य कार्य के लिए भी जरूरी होते हैं। कुछ लोगों को ऐसा महसूस होता है कि ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो गया है या छोटी-छोटी बातें भूलने लगे हैं। इसे कई बार ब्रेन फॉग (brain fog) कहा जाता है।
अगर गर्भधारण हुआ लेकिन शुरुआती महीनों में गर्भपात हो गया, या एक से अधिक बार ऐसा हुआ है, तो थायराइड जाँच आवश्यक हो सकती है।
गर्भावस्था के शुरुआती 12 हफ्तों में भ्रूण पूरी तरह माँ के थायराइड हॉर्मोन पर निर्भर रहता है। अगर हॉर्मोन पर्याप्त न हों, तो गर्भपात का जोखिम बढ़ सकता है।
ऊपर दिए गए 10 लक्षणों को ध्यान से पढ़ें और देखें कि उनमें से कितने लक्षण आपमें मौजूद हैं। यह कोई अंतिम डायग्नोसिस नहीं है, लेकिन इससे यह अंदाज़ा लग सकता है कि आपको थायराइड जाँच करवाने की ज़रूरत है या नहीं।
जब थायराइड स्तर सामान्य हो जाता है, तो शरीर की कई एक्टिविटीज़ बेहतर तरीके से काम करने लगती हैं।
Hypothyroidism का इलाज आमतौर पर Levothyroxine नाम की दवा से किया जाता है। यह वही थायरॉक्सिन (T4) हॉर्मोन है जो सामान्य रूप से शरीर में बनता है। जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त हॉर्मोन नहीं बना पाती, तो यह दवा उस कमी को पूरा करके शरीर के हॉर्मोन स्तर को संतुलित रखने में मदद करती है।
दवा आमतौर पर सुबह खाली पेट ली जाती है और नियमित जाँच के आधार पर उसकी खुराक तय की जाती है। यह दवा गर्भावस्था में भी सुरक्षित मानी जाती है और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसे जारी रखना चाहिए।
Hypothyroidism in Hindi को समझने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसके लक्षण अक्सर धीरे-धीरे दिखाई देते हैं और कई बार लोग उन्हें सामान्य थकान या जीवनशैली से जुड़ी समस्या समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। लेकिन अगर थायराइड लंबे समय तक असंतुलित रहे, तो इसका असर केवल ऊर्जा या वजन पर ही नहीं, बल्कि फर्टिलिटी और गर्भावस्था पर भी पड़ सकता है।
अनियमित पीरियड्स, लगातार थकान, बिना कारण वजन बढ़ना, बाल झड़ना, कब्ज़, या बार-बार गर्भपात जैसे संकेत कई बार शरीर का यह तरीका होते हैं जिससे वह बता रहा होता है कि थायराइड जाँच की ज़रूरत है। अच्छी बात यह है कि Hypothyroidism का पता एक साधारण ब्लड टेस्ट से चल जाता है और सही दवा से इसे नियंत्रित भी किया जा सकता है।
फर्टिलिटी के संदर्भ में थायराइड का संतुलित होना और भी ज़रूरी हो जाता है। सही TSH स्तर होने पर ओव्यूलेशन नियमित होता है, अंडों की गुणवत्ता बेहतर होती है और गर्भावस्था को बनाए रखने की संभावना बढ़ती है।
इसलिए अगर आपको ऊपर बताए गए संकेतों में से कई लक्षण दिखाई दें, तो देर न करें। समय पर जाँच और सही इलाज से थायराइड को नियंत्रित रखा जा सकता है और माँ बनने का सफर भी आसान बनाया जा सकता है।