प्रेगनेंसी की उम्मीद कर रही किसी भी महिला के लिए जब तक प्रेगनेंसी शुरू होने का कन्फर्मेशन नहीं हो जाता तब तक एक ऊहापोह लगी रहती है। ओवुलेशन के बाद अगर योनि मतलब वेजाइना (Vagina) से हल्का गुलाबी या ब्राउन डिस्चार्ज महसूस हो, तो यह प्रेगनेंसी शुरू होने का एक लक्षण हो सकता है। यह जानने के लिए कि implantation bleeding kab hota hai आपको यह भी जानना होगा कि इम्प्लांटेशन आखिर क्या है क्योंकि बिना पीरियड्स के ब्लीडिंग नहीं होती फिर इस ब्लीडिंग का मतलब क्या है।
इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग की टाइमिंग समझना बहुत ज़रूरी है क्योंकि इससे आपको पता चल सकता है कि आप प्रेग्नेंट हैं या नहीं। लेकिन सिर्फ 25 से 30 प्रतिशत महिलाओं में ही इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग दिखती है। जो महिलायें पहली बार माँ बनने वाली हैं, उनके लिए ये कन्फ्यूज़न की स्थिति बन जाती है। इस आर्टिकल के माध्यम से पता करते हैं implantation bleeding kab hota hai और प्रेगनेंसी में उसका क्या महत्त्व है।
जब फर्टिलाइज्ड एग यानी एम्ब्रीओ (embryo) फैलोपियन ट्यूब से होते हुए गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) में पहुंचता है, तो यहाँ पर इसे गर्भाशय की दीवार में जगह बनानी होती है ताकि वो वहीं बड़ा हो सके। इस प्रोसेस को इम्प्लांटेशन कहते हैं।
गर्भाशय की अंदरूनी दीवार एक मोटी परत से ढकी होती है जिसे एंडोमेट्रियम (Endometrium) कहते हैं। ये परत खून की बारीक नसों से भरी होती है। जब भ्रूण यानी एम्ब्रीओ इस परत में अपनी जगह बनाता है तो वो थोड़ा अंदर धंसता है। इस दौरान कुछ छोटी ब्लड वेसल्स यानी रक्त वाहिकाएं टूट जाती हैं। इसी वजह से हल्का सा खून निकलता है जिसे हम इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग कहते हैं।
ये ब्लीडिंग बिल्कुल नॉर्मल है और इसका मतलब है कि एम्ब्रीओ सही तरीके से गर्भाशय में जुड़ गया है। लेकिन ध्यान रखें, अगर आपको इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग नहीं हुई तो इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि आप गर्भवती नहीं हैं। ज्यादातर महिलाओं में इम्प्लांटेशन बिना किसी खून के हो जाता है ।
ओव्यूलेशन के दौरान एग फैलोपियन ट्यूब में रिलीज होता है और वहाँ स्पर्म पहले से मौजूद हो या अगले 12 से 24 घंटे में आ जाए तो फर्टिलाइजेशन हो सकता है यानी एम्ब्रीओ मतलब एम्ब्रीओ (embryo) बन सकता है।
इसके बाद एम्ब्रीओ को फैलोपियन ट्यूब से यूट्रस तक पहुँचने में 5 से 6 दिन लगते हैं, जहाँ वह ब्लास्टोसिस्ट (blastocyst) में बदल चुका होता है। यूट्रस में पहुंचने के बाद एम्ब्रीओ को एंडोमेट्रियम में जगह बनाने में 1 से 3 दिन और लगते हैं। इसलिए ओव्यूलेशन के बाद कुल मिलाकर 6 से 12 दिनों में इम्प्लांटेशन पूरा होता है।
ज़्यादातर मामलों में इम्प्लांटेशन आपके अगले पीरियड की संभावित तारीख से करीब एक हफ्ता या कुछ दिन पहले होता है। यही कारण है कि इस दौरान होने वाली हल्की ब्लीडिंग को अक्सर अर्ली पीरियड (early period) समझ लिया जाता है।
यदि आपको पीरियड की तारीख से 4-5 दिन पहले हल्की स्पॉटिंग दिखती है, तो मेडिकल तौर पर इसके सफल इम्प्लांटेशन होने की संभावना बहुत अधिक होती है।
सबसे पहला और सबसे अहम बदलाव प्लेसेंटा यानी गर्भनाल का बनना शुरू हो जाता है। जब एम्ब्रीओ एंडोमेट्रियम में जुड़ता है तो वो अपने चारों तरफ से यूट्रस की सेल्स के साथ कनेक्शन बनाना शुरू कर देता है। ये कनेक्शन धीरे-धीरे प्लेसेंटा में बदल जाते हैं। प्लेसेंटा ही वो मीडियम है जिससे एम्ब्रीओ को माँ से पोषण और ऑक्सीजन मिलती है।
इम्प्लांटेशन के तुरंत बाद एचसीजी हार्मोन बनना शुरू हो जाता है। ये हार्मोन बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये अंडाशय यानी ओवरी (Ovary) को सिग्नल देता है कि प्रेगनेंसी हो गई है। इस सिग्नल के बाद ओवरी प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन बढ़ा देती है।
प्रोजेस्टेरोन ही वो हार्मोन है जो गर्भाशय की परत को मोटा और स्थिर रखता है ताकि एम्ब्रीओ सेफ रहे और प्रेगनेंसी चलती रहे।
इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग सिर्फ़ 25% से 30% महिलाओं में ही देखी जाती है। बाकी 70 से 75 प्रतिशत महिलाओं में इम्प्लांटेशन बिना किसी ब्लीडिंग के हो जाता है।
कुछ मामलों में एम्ब्रीओ इतनी सफाई से एंडोमेट्रियम के अंदर चला जाता है कि वह किसी भी बड़ी नस को नुकसान नहीं पहुँचाता। इसे अ-ट्रॉमेटिक इम्प्लांटेशन कहा जाता है। इसका मतलब है कि अगर आपको ब्लीडिंग नहीं हुई तो भी आप गर्भवती हो सकती हैं।
एक्यूरेट रिजल्ट के लिए ब्लड टेस्ट करवाएं। ब्लड टेस्ट यूरिन टेस्ट से ज्यादा संवेदनशील होता है और कम एचसीजी लेवल को भी पकड़ लेता है। अगर आप आईवीएफ (IVF) करवा रही हैं या फर्टिलिटी ट्रीटमेंट ले रही हैं तो डॉक्टर आपको ब्लड टेस्ट की ही सलाह देंगे।
Implantation bleeding kab hota hai, यह जानने के बाद जो अगला सवाल आता है, वह है प्रेगनेंसी टेस्ट कब करें। जैसे ही एम्ब्रीओ का संपर्क इम्प्लांटेशन के ज़रिए आपके खून से होता है, तभी से hCG हॉर्मोन आपकी ब्लड स्ट्रीम में मिलना शुरू होता है। डॉक्टरों के अनुसार नीचे दिए गए समय पर टेस्ट करना चाहिए।
जल्दी टेस्ट करने पर फॉल्स नेगेटिव (false negative) आने का खतरा रहता है क्योंकि hCG हॉर्मोन का लेवल अभी इतना नहीं बढ़ा होता कि किट उसे पकड़ सके।
इम्प्लांटेशन ब्लीडिंग को सिर्फ़ प्रेग्नेंट होने का एक लक्षण नहीं है, बल्कि प्रेगनेंसी शुरू हो चुकी है इस बात का कन्फ़र्मेशन है। Implantation bleeding kab hota hai, इसका जवाब जब आपका शरीर और एम्ब्रीओ एक दूसरे को स्वीकार करने की प्रक्रिया में होते हैं।
यदि आपने अपनी मेंस्ट्रुअल साइकिल को ठीक से ट्रैक किया है, बेसल टेम्परेचर और डिस्चार्ज के बदलावों पर गौर करती हैं, तो आप इम्प्लांटेशन को बेहतर तरीके से महसूस कर सकती हैं। याद रखें कि यह ब्लीडिंग एक शुरुआती लक्षण ज़रूर है, लेकिन प्रेगनेंसी की आखिरी पुष्टि तभी होती है जब ब्लड टेस्ट या अल्ट्रासाउंड कन्फर्म न कर दे।
इसमें पीरियड जैसा तेज़ दर्द नहीं होता। प्रोजेस्टेरोन और एम्ब्रीओ के जुड़ाव की वजह से सिर्फ़ हल्की ऐंठन या खिंचाव महसूस हो सकता है।
ज़्यादातर मामलों में यह कुछ घंटों से लेकर 48 घंटों तक रहती है। इससे ज़्यादा समय तक चलने वाली ब्लीडिंग अक्सर पीरियड या किसी और समस्या का संकेत होती है।
हाँ, जो महिलाएं प्रोजेस्टेरोन सप्लीमेंट्स ले रही हैं, उनमें एंडोमेट्रियम ज़्यादा मज़बूत होता है, जिससे कभी-कभी स्पॉटिंग होने की संभावना बढ़ जाती है।
यदि ब्लीडिंग हल्की है तो कोई खतरा नहीं है, लेकिन डॉक्टर इस संवेदनशील समय में आराम करने की सलाह देते हैं ताकि एम्ब्रीओ को जुड़ने में कोई बाधा न आए।
प्रक्रिया वही रहती है, लेकिन IVF में समय ज़्यादा सटीक होता है क्योंकि हमें पता होता है कि एम्ब्रीओ किस दिन ट्रांसफर किया गया है। ट्रांसफर के 5 से 10 दिन बाद ऐसी स्पॉटिंग दिख सकती है।