प्रेगनेंसी में आयरन टैबलेट के उपयोग (Iron Tablet Uses in Hindi)

Last updated: September 16, 2026

Overview

प्रेग्नेंसी की पहली विजिट पर ही डॉक्टर आयरन की टैबलेट लिख देते हैं और कई महिलाओं के मन में सवाल आता है कि जब कोई तकलीफ नहीं है, तो रोज एक दवा क्यों खानी है। कुछ महिलाएं सोचती हैं कि दालें और हरी सब्जी रोज खा रही हैं, तो अलग से टैबलेट की जरूरत नहीं। लेकिन पूरी प्रेग्नेंसी में शरीर को लगभग 1000 mg अतिरिक्त आयरन चाहिए होता है, जो अकेले खाने से पूरा नहीं होता। NFHS-5 (2019-21) के अनुसार भारत में 52.2 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में खून की कमी यानी एनीमिया (Anemia) पाई जाती है और इसकी सबसे बड़ी वजह आयरन की कमी ही होती है। इस आर्टिकल में हम iron tablet uses in hindi को समझेंगे कि यह टैबलेट करती क्या है, iron ki tablet कब लेनी चाहिए और कौन से साइड इफेक्ट्स सामान्य हैं। 

प्रेगनेंसी में आयरन टैबलेट क्या है?

आयरन टैबलेट ताकत की दवा नहीं, बल्कि एक सप्लीमेंट है जो शरीर में आयरन का लेवल बनाए रखता है। सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली टैबलेट को IFA यानी आयरन और फोलिक एसिड (Iron and Folic Acid) टैबलेट कहते हैं, जिसमें 60 mg एलिमेंटल आयरन और 500 mcg फोलिक एसिड होता है।

प्रेगनेंसी के अलावा भी iron supplements for women की जरूरत कुछ स्थितियों में पड़ सकती है, खासकर जब शरीर में आयरन की कमी हो या भोजन से पर्याप्त आयरन न मिल रहा हो। सप्लीमेंट की जरूरत और डोज़ डॉक्टर जांच के आधार पर तय करते हैं।  आयरन का काम हीमोग्लोबिन (Hemoglobin) बनाना है, जो ऑक्सीजन को शरीर के हर हिस्से तक और प्लेसेंटा के रास्ते गर्भ में पल रही संतान तक पहुंचाता है।

Iron ki goli khane ke fayde: प्रेगनेंसी में आयरन टैबलेट के उपयोग?

आयरन की गोली खाने के फायदे मुख्य रूप से शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने और हीमोग्लोबिन के स्तर को बनाए रखने से जुड़े हैं। प्रेगनेंसी में बढ़ी हुई आयरन की जरूरत को पूरा करने के लिए भी डॉक्टर इसे सलाह दे सकते हैं। 

आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया से बचाव

प्रेगनेंसी में सबसे आम एनीमिया आयरन की कमी से होता है। टैबलेट का पहला काम यही है कि कमी होने से पहले उसे रोका जाए, इसलिए यह नॉर्मल हीमोग्लोबिन वाली महिलाओं को भी दी जाती है।

हीमोग्लोबिन का लेवल बनाए रखने में मदद

प्रेगनेंसी बढ़ने के साथ खून की मात्रा बढ़ती है और हीमोग्लोबिन धीरे-धीरे गिरने लगता है। रोज ली गई टैबलेट इस गिरावट को संभालती है।

प्रेगनेंसी में बढ़ी हुई आयरन की जरूरत पूरी करना

पहली तिमाही यानी फर्स्ट ट्राइमेस्टर में आयरन की जरूरत कम रहती है, लेकिन दूसरे ट्राइमेस्टर से यह तेजी से बढ़ती है, जो रोज के खाने से पूरी होना आसान नहीं।

मां और बच्चे के स्वास्थ्य में आयरन की भूमिका

कमी लंबे समय तक बनी रहे तो प्रीटर्म डिलीवरी और बच्चे का वजन कम होने का खतरा बढ़ सकता है। डिलीवरी में ज्यादा ब्लीडिंग होने पर भी शरीर उसे आसानी से नहीं संभाल पाता।

प्रेगनेंसी में आयरन की जरूरत क्यों बढ़ जाती है?

इसकी वजह कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर के सामान्य बदलाव हैं।

  • प्लाज्मा वॉल्यूम लगभग 50 प्रतिशत बढ़ जाता है और ज्यादा खून बनाने के लिए ज्यादा आयरन चाहिए।
  • बच्चे और प्लेसेंटा को भी आयरन आपके शरीर से ही मिलता है।
  • डिलीवरी में होने वाले ब्लड लॉस के लिए शरीर को ब्लड रिजर्व चाहिए होता है।
  • दो प्रेगनेंसी में कम अंतर हो या पीरियड्स में ज्यादा ब्लीडिंग रही हो, तो ब्लड स्टोर पहले से कम रहता है।

प्रेगनेंसी में आयरन की कमी के लक्षण

शुरुआत में लक्षण साफ नहीं होते और अक्सर महिलाएं इन्हें सामान्य थकान समझ लेती हैं।

थकान और कमजोरी

थोड़ा सा काम करने पर थक जाना और दिनभर सुस्ती रहना सबसे आम लक्षण है, जो आराम के बाद भी नहीं जाता।

चक्कर आना

बैठे से खड़े होने पर सिर घूमना या आंखों के आगे अंधेरा आना आम है, क्योंकि दिमाग तक ऑक्सीजन कम पहुंचती है।

सांस फूलना

थोड़ा चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलने का मतलब हो सकता है कि हीमोग्लोबिन कम है और दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है।

त्वचा का पीला या फीका दिखना

चेहरा, हथेली, नाखून और आंख के अंदर की पलक का रंग फीका पड़ जाना इस कमी में दिखता है।

प्रेगनेंसी में आयरन टैबलेट कब और कैसे लेनी चाहिए?

Iron ki goli kab khani chahiye यह सवाल खासकर प्रेगनेंसी में आम है। इसे डॉक्टर द्वारा बताए गए समय और डोज़ के अनुसार लेना चाहिए। आम तौर पर आयरन को चाय, कॉफी, दूध और कैल्शियम सप्लीमेंट से अलग समय पर लेने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ये आयरन के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं।

भारत के दिशा-निर्देशों के अनुसार यह टैबलेट चौथे महीने यानी दूसरे ट्राइमेस्टर से शुरू होती है और प्रेगनेंसी में कम से कम 180 दिन तथा डिलीवरी के बाद भी 180 दिन तक चलती है। शुरुआती महीनों में मितली ज्यादा रहती है, इसलिए इसे बाद में शुरू किया जाता है। रिपोर्ट में पहले से खून की कमी हो, तो डॉक्टर इसे जल्दी भी शुरू करवा सकते हैं।


 

आयरन का असर बढ़ाने वाली चीजें

आयरन का असर घटाने वाली चीजें

नींबू, संतरा और आंवला

चाय और कॉफी

सादे पानी के साथ टैबलेट

दूध और कैल्शियम की टैबलेट

खाने के बीच का समय

एंटासिड यानी गैस की दवा

इनके बीच कम से कम दो घंटे का अंतर रखें। खाली पेट लेने से जलन हो, तो टैबलेट खाने के बाद लें।

प्रेगनेंसी में आयरन टैबलेट की डोज़ कैसे तय की जाती है?

Iron tablet in pregnancy कब और कैसे लेनी चाहिए, यह आपकी हीमोग्लोबिन रिपोर्ट, आयरन की जरूरत और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। आयरन की डोज़ आपकी हीमोग्लोबिन रिपोर्ट देखकर तय होती है, इसलिए किसी और की टैबलेट खुद से शुरू न करें। हीमोग्लोबिन नॉर्मल हो तो रोज एक IFA टैबलेट दी जाती है। एनीमिया होने पर एनीमिया मुक्त भारत के प्रोटोकॉल के तहत दिन में दो टैबलेट तीन महीने तक दी जाती हैं। मध्यम एनीमिया में जरूरत पड़ने पर IV आयरन सुक्रोज और हीमोग्लोबिन 7 g/dL से नीचे होने पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सलाह दी जा सकती है।

आयरन टैबलेट के साइड इफेक्ट्स

ज्यादातर शिकायतें पेट से जुड़ी होती हैं और कुछ दिनों में शरीर इनका आदी हो जाता है।

कब्ज

यह सबसे आम शिकायत है। पर्याप्त पानी, फाइबर और हल्की वॉक से इसमें फर्क पड़ता है।

मतली और उल्टी

खाली पेट टैबलेट लेने पर मितली ज्यादा होती है। ऐसे में इसे रात को खाने के बाद लें।

पेट में दर्द या असहजता

कुछ महिलाओं को पेट में भारीपन या हल्का दर्द होता है। लगातार बना रहे तो डॉक्टर को बताएं, क्योंकि दवा बदलने से फायदा हो जाता है।

मल यानी स्टूल (stool) का काला होना

स्टूल का रंग काला या गहरा हरा होना सामान्य है, यह शरीर से निकलने वाला अतिरिक्त आयरन होता है।

प्रेगनेंसी में आयरन की कमी का पता कैसे लगाया जाता है?

इसके लिए एक साधारण ब्लड टेस्ट होता है जिसे CBC यानी कंप्लीट ब्लड काउंट (Complete Blood Count) कहते हैं। WHO के अनुसार पहली और तीसरी ट्राइमेस्टर में हीमोग्लोबिन 11 g/dL से कम और दूसरी ट्राइमेस्टर में 10.5 g/dL से कम आने पर एनीमिया माना जाता है। जरूरत पड़ने पर सीरम फेरिटिन (Serum Ferritin) टेस्ट भी होता है, जो बताता है कि शरीर में आयरन का स्टोर कितना बचा है।

प्रेगनेंसी में आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ कौन-से हैं?

पालक और मेथी जैसी हरी सब्जियां, चना, राजमा और रागी, तथा खजूर, किशमिश और गुड़ अच्छे स्रोत हैं। अंडा, चिकन और मछली वाला आयरन शरीर आसानी से सोख लेता है। सब्जियों और दालों वाला आयरन उतनी आसानी से नहीं जाता, इसलिए इनके साथ विटामिन C वाली चीज लेने से अब्जॉर्प्शन बेहतर होता है।

आयरन टैबलेट लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?

Pregnancy me iron ki tablet kab leni chahiye और कितनी मात्रा में लेनी है, यह डॉक्टर तय करते हैं। आयरन की कमी होने पर इसे पहले भी शुरू किया जा सकता है।

  • टैबलेट रोज एक ही समय पर लें, ताकि छूटे नहीं।
  • कैल्शियम की टैबलेट हमेशा अलग समय पर लें।
  • साइड इफेक्ट की वजह से दवा खुद से बंद न करें और डोज भी खुद से न बढ़ाएं।

डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए?

अगर टैबलेट लेने के बाद भी थकान, चक्कर और सांस फूलना बढ़ रहा है, या उल्टी की वजह से दवा शरीर में टिक नहीं पा रही, तो डॉक्टर से मिलें। रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन लगातार गिरना भी तुरंत दिखाने वाली स्थिति है। प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं, तो कंसीव करने से पहले ही हीमोग्लोबिन चेक करवा लें।

निष्कर्ष (Conclusion)

प्रेग्नेंसी में आयरन टैबलेट इसलिए दी जाती है क्योंकि इन नौ महीनों में शरीर को लगभग 1000 mg अतिरिक्त आयरन चाहिए, जो अकेले खाने से पूरा नहीं होता। इसका काम हीमोग्लोबिन बनाए रखना, एनीमिया से बचाना और बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाना है। यह आमतौर पर चौथे महीने से शुरू होकर कम से कम 180 दिन तक चलती है, लेकिन खून की कमी होने पर डॉक्टर इसे जल्दी शुरू करवा सकते हैं और खुराक बढ़ा सकते हैं। कब्ज, हल्की मितली और मल का काला होना इसके आम असर हैं, जिनकी वजह से दवा बंद करने की जरूरत नहीं। सबसे ज्यादा फर्क दवा लेने का तरीका डालता है, यानी चाय, दूध और कैल्शियम से दूरी और विटामिन C का साथ।

Frequently Asked Questions

1. क्या प्रेग्नेंसी में हर महिला को आयरन टैबलेट लेनी चाहिए?

2. क्या आयरन टैबलेट लेने से बच्चे के विकास में मदद मिलती है?

3. आयरन टैबलेट लेने के बाद कब्ज क्यों होती है?

4. अगर आयरन टैबलेट लेने के बाद उल्टी हो जाए तो क्या करना चाहिए?

5. क्या आयरन टैबलेट के साथ कैल्शियम सप्लीमेंट लिया जा सकता है?

6. आयरन की कमी ठीक होने में कितना समय लग सकता है?

7. क्या प्रेग्नेंसी में आयरन की कमी दोबारा हो सकती है?

8. क्या बिना डॉक्टर की सलाह के प्रेग्नेंसी में आयरन टैबलेट लेना सही है?

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