जब घर के आँगन में अपनी संतान की किलकारी न गूँजे तो जीवन बड़ा अधूरा सा लगता है। पहले तो सारे स्वस्थ कपल प्राकृतिक यानी नैचुरल तरीके से संतान प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। लेकिन जब लम्बे समय तक सफलता न मिले तब मॉडर्न मेडिकल साइंस आर्टिफिशियल रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी जिसे एआरटी (ART) कहते हैं,के माध्यम से माता पिता बनने का सपना पूरा करने में मदद करती है। ART में जिस तरीके की सक्सेस रेट सबसे ज्यादा होती है वह है आईवीएफ़ IVF यानी इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (In Vitro Fertilization)। IVF ट्रीटमेंट के लिए विचार कर रहे कपल्स जानना चाहते हैं कि IVF Kaise Hota Hai? यह आर्टिकल उन सभी कपल्स के लिए है जो अपनी पहली आईवीएफ साइकिल शुरू करने जा रहे हैं। यहाँ हम आसान भाषा में स्टेप बाई स्टेप इस पूरे तरीके से IVF Kaise Hota Hai को समझेंगे। हम पहले दिन की डॉक्टर विजिट से लेकर प्रेगनेंसी टेस्ट कन्फर्म होने तक का सफर बारीकी से समझेंगे। इस लेख का सार (Take Away): इस गाइड को पढ़ने के बाद आप जान पाएंगे कि आईवीएफ की पूरी टाइमलाइन क्या है, लैब में एम्ब्रियो कैसे बनते हैं, हॉर्मोन इंजेक्शन का क्या रोल है और आप अपनी प्रेगनेंसी की सफलता की संभावना यानी सक्सेस रेट (Success Rate) को कैसे बढ़ा सकते हैं।
अगर आपको लगता है कि आईवीएफ के प्रोसेस में दर्द होता या यह कोई बहुत बड़ी सर्जरी जैसा प्रोसेस है तो आप गलत समझ रहे हैं। IVF (In Vitro Fertilization) ट्रीटमेंट का काम सिर्फ़ इतना है कि एग और स्पर्म मिलने का जो काम शरीर के अंदर नहीं हो पा रहा, उसे लैब में किया जा रहा है।
इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि अगर किसी हाईवे पर जाम लगा है, तो हम रास्ता बदलकर दूसरी सड़क से मंज़िल तक पहुँचते हैं। आईवीएफ भी वही दूसरा रास्ता यानी बाईपास (Bypass) है।
नेचुरल प्रेगनेंसी में महिला के शरीर के अंदर फैलोपियन ट्यूब (fallopian tubes) में एग और स्पर्म मिलते हैं, जिसे फर्टिलाइजेशन (Fertilization) कहते हैं। लेकिन जब किसी हेल्थ इशू की वजह से यह प्रक्रिया शरीर के अंदर नहीं हो पाती तो डॉक्टर महिला के शरीर से एग्स और पुरुष के स्पर्म को लेकर उन्हें लैब में मिलाते हैं यानी फर्टिलाइजेशन करवाते हैं। और जब भ्रूण यानी एम्ब्रीओ (Embryo) तैयार हो जाता है, तो उसे वापस माँ के गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus) में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसके बाद की पूरी प्रेगनेंसी वैसी ही होती है जैसी एक नैचुरल प्रेगनेंसी होती है। इसे ही IVF कहा जाता है।
ऐसा नहीं है कि हर वह कपल जिसे कंसीव करने में दिक्कत आ रही है, उसे आईवीएफ की ज़रूरत होती है। लेकिन कुछ कंडीशन ऐसी हैं जहाँ आईवीएफ आपके लिए संतान प्राप्त करने का सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है।
जब आप अपनी पहली साइकिल शुरू करते हैं, तो आपको स्टेप-बाय-स्टेप इन फेज से गुज़रना होगा।
पहली मीटिंग में डॉक्टर आपकी और आपके पार्टनर की पूरी हिस्ट्री लेते हैं। आपसे पूछा जाता है कि आप कब से कंसीव करने की कोशिश कर रहे हैं, पीरियड्स कैसे हैं, पहले कोई प्रेगनेंसी हुई है या नहीं, कोई सर्जरी या बीमारी की हिस्ट्री तो नहीं है, और आपकी लाइफस्टाइल कैसी है। पिछली सभी रिपोर्ट्स जो आपके पास हैं जैसे अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट, सीमेन एनालिसिस अपने साथ लेकर जाएं इसके आलावा अगर पहले कोई ट्रीटमेंट हुआ है तो उसके पेपर्स भी साथ रखें। इस दौरान डॉक्टर आपके हॉर्मोन्स और गर्भाशय की कंडीशन देखेंगे और आपके IVF ट्रीटमेंट की प्लानिंग करेंगे।
नैचुरली हर महीने एक एग बनता है, लेकिन IVF में दवाइयों से ओवरी को स्टिमुलेट किया जाता है ताकि ज़्यादा एग्स बनें। आमतौर पर पीरियड के दूसरे या तीसरे दिन से ओवेरियन स्टीमुलेशन इंजेक्शन लगने शुरू होते हैं। 10-12 दिन तक हर 2-3 दिन में क्लिनिक कर आना होता है। इन इंजेक्शन में दर्द नहीं होता, यह इंसुलिन जैसे ही होते हैं, लेकिन इनसे पेट में हल्का भारीपन या मूड में बदलाव महसूस हो सकता है।
इस दिन ओवरी से मैच्योर एग निकाले जाते हैं। यह एक छोटा प्रोसीजर है जो हल्की एनेस्थीसिया यानी बेहोशी में होता है। इसमें अल्ट्रासाउंड की गाइडेंस में एक पतली सुई से फॉलिकल्स से एग्स निकाले जाते हैं। पूरा प्रोसीजर 15-20 मिनट का होता है। इसी दिन पुरुष पार्टनर का सीमेन सैंपल लिया जाता है। 20 मिनट के इस प्रोसीजर के बाद आप 2-3 घंटे में घर जा सकते हैं।
एग रिट्रीवल के बाद लैब में फर्टिलाइजेशन होता है जहाँ एम्ब्रियोलॉजिस्ट एग और स्पर्म को मिलाते हैं। आपको हर दिन क्लिनिक से अपडेट मिलता है कि कितने एग्स फर्टिलाइज़ हुए और कितने एम्ब्रियो बने।
यह सबसे इमोशनल पल होता है। बिना किसी सर्जरी या बेहोशी के, डॉक्टर एक बहुत पतली नली से भ्रूण को महिला के गर्भाशय यानी यूट्रस में ट्रांसफर कर देते हैं। आजकल ज़्यादातर क्लिनिक सिंगल एम्ब्रीओ ट्रांसफर करते हैं ताकि मल्टीपल प्रेगनेंसी (multiple pregnancy) का रिस्क न हो। इस प्रोसेस में सिर्फ़ 10 से 15 मिनट कासमय लगता है। 15-20 मिनट आराम करके घर जा सकती हैं। बेड रेस्ट की ज़रूरत नहीं है, नॉर्मल एक्टिविटी कर सकती हैं।
| स्टेज | समय |
|---|---|
| पहली मीटिंग और जाँच | 2-3 हफ्ते |
| ओवेरियन स्टिमुलेशन इंजेक्शन | 10-12 दिन |
| एग रिट्रीवल और लैब वर्क | 1-5 दिन |
| एम्ब्रियो ट्रांसफर | 1 दिन |
| प्रेगनेंसी टेस्ट तक का इंतज़ार | 12-14 दिन |
| कुल समय | लगभग 6 से 8 हफ्ते |
अक्सर कपल्स पूछते हैं कि हम अपनी तरफ से क्या कर सकते हैं? यहाँ वो 5 चीज़ें हैं जो आपके कंट्रोल में हैं।
आईवीएफ सेंटर चुनते समय सिर्फ़ 'सक्सेस रेट' के विज्ञापनों पर न जाएं। इन बातों का ध्यान रखें।
आईवीएफ का रास्ता थोड़ा लंबा ज़रूर है, लेकिन यह आपके संतान प्राप्तकरने केसपने को साकरकर सकता है। IVF kaise hota hai को जानने के बाद आप आश्वस्त हो सकते हैं कि दूसरे तरीकों की अपेक्षा में IVF ज्यादा भरोसेमंद तरीका है, क्योंकि इसकी सक्सेस रेट काफी ज्यादा होती है। लेकिन हर शरीर अलग होता है इसीलिए किसी को पहली बार में सफलता मिलती है, तो किसी को थोड़ा और समय लगता है। ज़रूरी यह है कि आप सही जानकारी के साथ चलें और एक अच्छे फर्टिलिटी सेंटर का चुनाव करें। धैर्य और बेस्ट IVF क्लीनिक की गाइडेंस में आपका माता-पिता बनने जरूर पूरा हो सकता है।
नहीं, आजकल बहुत पतली सुई वाले इंजेक्शन आते हैं जो सिर्फ़ त्वचा के नीचे लगते हैं। इनमें इंसुलिन के इंजेक्शन जितना ही मामूली दर्द होता है।
जी हाँ, आईवीएफ से होने वाले बच्चे पूरी तरह स्वस्थ और नैचुरल बच्चों जैसे ही होते हैं। उनमें जन्म दोष का खतरा नैचुरल प्रेगनेंसी से ज़्यादा नहीं होता।
सबसे बड़ा कारण एम्ब्रीओ में जेनेटिक गड़बड़ी या गर्भाशय की परत एंडोमेट्रियम (Endometrium) का कमज़ोर होना हो सकता है।
बिल्कुल नहीं। एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद 2-3 दिन के आराम के बाद आप अपना ऑफिस या घर का हल्का काम जारी रख सकती हैं।
आईवीएफ का खर्च दवाइयों, इंजेक्शन और लैब की टेक्नोलॉजी जैसे ICSI, Freezing पर निर्भर करता है। अपने डॉक्टर से बजट के बारे में पहले ही साफ़ बात कर लें।