IVF शुरू करने से 2 से 3 महीने पहले से आपको अपनी डाइट में सुधार कर लेना चाहिए। क्योंकि इस दौरान की डाइट का महिला में एग और पुरुष में स्पर्म (sperm) दोनों की क्वालिटी पर सबसे ज़्यादा असर पड़ता है।
जब IVF की दवाइयाँ शुरू हो जाएँ और ओवरीज़ (ovaries) को स्टिमुलेट किया जा रहा हो, तब डाइट हल्की लेकिन हेल्दी होनी चाहिए।
एम्ब्रीओ (embryo) ट्रांसफर के बाद के 14 दिन सबसे ज़रूरी होते हैं। इस दौरान बॉडी को ऐसा खाना चाहिए जो इम्प्लांटेशन में मदद करे।
प्रेगनेंसी टेस्ट पॉज़िटिव आने के बाद डाइट और ज़्यादा ज़रूरी हो जाती है। IVF प्रेगनेंसी में पहले तीन महीने यानी फ़र्स्ट ट्राइमेस्टर (First Trimester) के समय सबसे ज्यादा ध्यान रखने की जरुरत होती है।
IVF ट्रीटमेंट से लेकर प्रेगनेंसी तक कुछ चीज़ें पूरी तरह बंद रखनी चाहिए।
IVF के दौरान और प्रेगनेंसी में हाइड्रेशन बहुत ज़रूरी है। पानी ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रखता है, यूट्रस की लाइनिंग को हेल्दी बनाता है, और बॉडी से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है।
दिन में 8 से 10 गिलास पानी पिएँ। नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी (बिना ज़्यादा चीनी) और ताज़े फलों का जूस भी अच्छे ऑप्शन हैं। ओवेरियन स्टिमुलेशन के दौरान तो पानी और भी ज़्यादा पीना चाहिए क्योंकि यह OHSS का रिस्क कम करने में मदद करता है।
IVF pregnancy diet chart in hindi को फ़ॉलो करने से IVF की सक्सेस और प्रेगनेंसी दोनों को सपोर्ट मिलता है। हर स्टेज पर डाइट अलग होती है, IVF से पहले एग और स्पर्म क्वालिटी पर फ़ोकस करें, ट्रांसफर के बाद इम्प्लांटेशन सपोर्ट वाली चीज़ें खाएँ, और प्रेगनेंसी में बच्चे की ग्रोथ के लिए अपनी डाइट में फ़ोलेट, कैल्शियम और आयरन बढ़ाएँ। ऐसी चीज़ें जिनसे आपको और आपके पेट में पल रही संतान को कोई नुक्सान हो सकता हो उन्हें बिलकुल बंद करें और अपने डॉक्टर से डाइट प्लान पर ज़रूर बात करें।