लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट क्या है? इसके कारण, लक्षण और उपचार (Left Ovarian Cyst in Hindi)

Last updated: December 26, 2025

Overview

कई महिलाओं की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में "left ovarian cyst" लिखा होता है, इसका मतलब है कि महिला की बाईं ओवरी में सिस्ट यानी तरल पदार्थ से भरी थैली बन जाना। अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि क्या बाईं तरफ की सिस्ट दाईं तरफ की सिस्ट से अलग या ज़्यादा खतरनाक होती है। आगे Left ovarian cyst in Hindi में समझते हैं कि लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट क्या होती है, यह दाईं तरफ की सिस्ट से कैसे अलग है, इसके लक्षण क्या हैं, और इलाज के क्या विकल्प उपलब्ध हैं।

लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट क्या है? (Left ovarian cyst in Hindi)

सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि ओवरी कहां होती है। महिलाओं गर्भाशय के दोनों साइड में दो ओवरीज़ (अंडाशय) होती हैं, एक बाईं तरफ और एक दाईं तरफ। । हर महीने इन ओवरीज़ से एग निकलता है जो फैलोपियन ट्यूब के ज़रिये गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) में जाता है। जब लेफ़्ट ओवरी में किसी कारणवश तरल पदार्थ, खून, या टिशू से भरी एक थैली या गाँठ बन जाती है, तो उसे लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट कहते हैं।

ज़्यादातर मामलों में यह सिस्ट सौम्य यानी Benign होती हैं यानी कैंसर नहीं होतीं। कुछ सिस्ट बहुत छोटी होती हैं लगभग 1-2 सेंटीमीटर और अपने आप ठीक हो जाती हैं, जबकि कुछ बड़ी हो सकती हैं लगभग 5 से 10 सेंटीमीटर या उससे भी ज़्यादा और इनके इलाज की ज़रूरत होती है।

लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट क्यों ज़्यादा आम है?

एक दिलचस्प तथ्य यह है कि कई स्टडीज़ में पाया गया है कि महिलाओं में लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट राइट की तुलना में थोड़ी ज़्यादा पाई जाती है। इसके पीछे कुछ संभावित कारण हैं:

एनाटॉमिकल डिफरेंस:

बाईं ओवरी की ब्लड सप्लाई थोड़ी अलग होती है। लेफ्ट ओवेरियन वेन सीधे लेफ्ट रीनल वेन (किडनी की नस) में खुलती है, जबकि राइट ओवेरियन वेन सीधे इंफीरियर वीना कावा में। इस अंतर की वजह से बाईं ओवरी में वेनस प्रेशर थोड़ा अलग हो सकता है।

ओव्यूलेशन पैटर्न:

कुछ महिलाओं में बाईं ओवरी से ज़्यादा बार ओव्यूलेशन होता है, जिससे फंक्शनल सिस्ट बनने की संभावना बढ़ जाती है।

इंटेस्टाइनल प्रेशर:

बाईं ओवरी के पास सिग्मॉइड कोलन यानी बड़ी आंत का हिस्सा होता है। कब्ज़ या आंतों के दबाव से कभी-कभी बाईं ओवरी पर असर पड़ सकता है।

लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट के लक्षण (Symptoms)

कई बार छोटी सिस्ट के कोई लक्षण नहीं होते और यह अल्ट्रासाउंड में अचानक पता चलती है। हालांकि, बड़ी या जटिल सिस्ट के लक्षण हो सकते हैं।

  • बाईं तरफ पेट के निचले हिस्से में दर्द: यह सबसे आम लक्षण है। दर्द हल्का या तेज़ हो सकता है, लगातार या कभी-कभी। खासकर ओव्यूलेशन के समय या पीरियड्स से पहले दर्द बढ़ सकता है।
  • बाएं पेल्विक एरिया में भारीपन या दबाव: ऐसा लगना कि बाईं तरफ कुछ भारी है।
  • बाईं तरफ पीठ या पैर में दर्द: बड़ी सिस्ट नसों को दबा सकती है, जिससे बाएं पैर में दर्द या झनझनाहट हो सकती है।
  • सेक्स के दौरान दर्द (Dyspareunia): शारीरिक संबंध बनाते समय कुछ पोजीशन में दर्द हो सकता है, बाईं तरफ ।
  • अनियमित पीरियड्स: सिस्ट हॉर्मोन को प्रभावित कर सकती है जिससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं।
  • पेट फूलना या सूजन: बड़ी सिस्ट से पेट का बायां हिस्सा फूला हुआ दिख सकता है।
  • बार-बार पेशाब आना या कब्ज़: अगर सिस्ट ब्लैडर या आंतों को दबा रही हो।
  • मतली या उल्टी: खासकर अगर सिस्ट ट्विस्ट हो जाए (Ovarian Torsion) तो यह एक मेडिकल इमरजेंसी बन जाती है।

लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट और फर्टिलिटी (Left Ovarian Cyst and Fertility)

लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट का फर्टिलिटी पर असर इसके प्रकार, आकार और स्थिति पर निर्भर करता है:

ओव्यूलेशन में रुकावट:

अगर बाईं ओवरी में बड़ी सिस्ट है, तो यह उस महीने बाईं ओवरी से ओव्यूलेशन को रोक सकती है। हालांकि, दाईं ओवरी तब भी काम कर सकती है।

एंडोमेट्रियोमा का असर:

अगर बाईं ओवरी में एंडोमेट्रियोमा (चॉकलेट सिस्ट) है, तो यह ओवेरियन रिजर्व को कम कर सकती है। यह बाईं ओवरी के स्वस्थ टिशू को नुकसान पहुंचाती है और एग क्वालिटी को प्रभावित करती है।

लेफ्ट फैलोपियन ट्यूब में ब्लॉकेज:

बड़ी सिस्ट या एंडोमेट्रियोमा बाएं फैलोपियन ट्यूब को दबा सकती है या एडहीज़न्स (चिपकाव) बना सकती है, जिससे ट्यूब ब्लॉक हो जाती है।

हॉर्मोनल असंतुलन:

कुछ सिस्ट (जैसे PCOS में) हॉर्मोन को असंतुलित कर देती हैं जिससे ओव्यूलेशन नहीं होता।

पेल्विक एडहीज़न्स:

सिस्ट की वजह से बाईं ओवरी, ट्यूब और आस-पास के अंग चिपक सकते हैं, जिससे एग पिकअप मुश्किल हो जाता है।

अगर आप लंबे समय से कंसीव करने की कोशिश कर रही हैं और आपको लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट है, तो फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से परामर्श ज़रूरी है।

लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट का डायग्नोसिस

लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट का डायग्नोसिस निम्न तरीकों से होता है।

  • पेल्विक एग्ज़ामिनेशन: डॉक्टर पेल्विक एग्ज़ाम में बाईं तरफ गांठ या सूजन महसूस कर सकते हैं।
  • ट्रांसवजाइनल अल्ट्रासाउंड (TVS): यह सबसे अच्छा टेस्ट है जो सिस्ट का आकार, प्रकार और स्थान स्पष्ट दिखाता है। इसमें साफ दिखता है कि सिस्ट बाईं ओवरी में है।
  • एब्डॉमिनल अल्ट्रासाउंड: बड़ी सिस्ट को पेट के बाहर से भी देखा जा सकता है।
  • CA-125 ब्लड टेस्ट: यह टेस्ट खासकर एंडोमेट्रियोमा या संदिग्ध मामलों में किया जाता है।
  • MRI या CT स्कैन: अगर सिस्ट की प्रकृति स्पष्ट नहीं हो या जटिल केस हो।
  • लैप्रोस्कोपी: यह एक सर्जिकल प्रॉसिजर है जिसमें कैमरे से देखकर सिस्ट की पुष्टि और इलाज दोनों किया जा सकता है।

लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट का इलाज (Left Ovarian Cyst Treatment in Hindi)

लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट का इलाज सिस्ट के प्रकार, आकार, लक्षण, और आपकी उम्र व फर्टिलिटी प्लान पर निर्भर करता है।

वॉचफुल वेटिंग (Watchful Waiting)

अगर सिस्ट छोटी है (5 सेंटीमीटर से कम) और फंक्शनल है, तो डॉक्टर 2-3 महीने इंतज़ार करते हैं। कई बार ये सिस्ट अपने आप ठीक हो जाती हैं। नियमित अल्ट्रासाउंड से मॉनिटरिंग की जाती है।

हॉर्मोनल थेरेपी

कुछ केसेस में हॉर्मोनल दवाएं दी जाती हैं जो ओव्यूलेशन को रोककर नई सिस्ट बनने से रोकती हैं। हालांकि, ये मौजूदा सिस्ट को छोटा नहीं करतीं।

सर्जिकल ट्रीटमेंट

अगर सिस्ट बड़ी है, बढ़ रही है, लक्षण दे रही है, या फर्टिलिटी को प्रभावित कर रही है, तो सर्जरी की ज़रूरत होती है:

  • लैप्रोस्कोपिक सिस्टेक्टॉमी: इस मिनिमली इनवेसिव सर्जरी में छोटे चीरों से सिस्ट को निकाला जाता है और बाईं ओवरी को बचाकर रखा जाता है। यह उन महिलाओं के लिए बेहतरीन विकल्प है जो भविष्य में माँ बनना चाहती हैं।
  • ओवेरेक्टॉमी: बहुत बड़ी या जटिल सिस्ट में पूरी बाईं ओवरी निकालनी पड़ सकती है। हालांकि, अगर दाईं ओवरी स्वस्थ है, तो आप नेचुरली प्रेग्नेंट हो सकती हैं।
  • ड्रेनेज: कभी-कभी सिस्ट में सुई डालकर तरल निकाल दिया जाता है, लेकिन इसमें सिस्ट दोबारा बनने का खतरा रहता है।

लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट और IVF (Left Ovarian Cyst and IVF)

अगर लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट की वजह से नेचुरल कंसेप्शन मुश्किल हो रहा है, तो IVF एक सफल विकल्प हो सकता है। कुछ महत्वपूर्ण बातें:

IVF से पहले सिस्ट का इलाज:

अगर बाईं ओवरी में एंडोमेट्रियोमा या बड़ी सिस्ट है, तो IVF से पहले इसे निकालना बेहतर होता है। यह IVF की सक्सेस रेट को बेहतर बनाता है।

दोनों ओवरीज़ से एग रिट्रीवल:

IVF में दोनों ओवरीज़ को स्टिम्युलेट किया जाता है। अगर बाईं ओवरी में सिस्ट है और कम एग मिल रहे हैं, तो दाईं ओवरी से पर्याप्त एग मिल सकते हैं।

एक ओवरी से भी IVF संभव:

अगर बाईं ओवरी पूरी तरह डैमेज हो गई है या निकाल दी गई है, तो सिर्फ दाईं ओवरी से भी सफल IVF हो सकता है। आपको सिर्फ एक स्वस्थ ओवरी की ज़रूरत होती है।

ओवेरियन रिजर्व टेस्टिंग:

IVF से पहले AMH और AFC टेस्ट से दोनों ओवरीज़ के रिजर्व की जांच की जाती है। यह बताता है कि बाईं ओवरी की सिस्ट ने कितना नुकसान किया है।

लैप्रोस्कोपी के बाद IVF:

सिस्ट की सर्जरी के 3-6 महीने बाद IVF करना चाहिए ताकि ओवरी पूरी तरह रिकवर हो जाए।

कई महिलाएं जिनकी बाईं ओवरी में सिस्ट थी, सही इलाज और IVF की मदद से सफलतापूर्वक माँ बन चुकी हैं। फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट आपकी स्थिति देखकर बेस्ट ट्रीटमेंट प्लान बनाएंगे।

लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट को बनने से रोकने के टिप्स? (Left Ovarian Cyst Prevention in Hindi)

हालांकि सभी सिस्ट को बनने से रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ उपाय फायदेमंद हो सकते हैं, जैसे -

  • स्वस्थ वजन बनाए रखें: मोटापा हॉर्मोनल असंतुलन और सिस्ट का खतरा बढ़ाता है।
  • संतुलित आहार: एंटीऑक्सिडेंट, फाइबर, और ओमेगा-3 से भरपूर डाइट लें। प्रोसेस्ड फूड से बचें।
  • नियमित व्यायाम: रोज़ाना 30 से 40 मिनट की एक्सरसाइज़ करें।
  • स्ट्रेस मैनेजमेंट: तनाव हॉर्मोन को असंतुलित करता है। योगा और मेडिटेशन करें।
  • नियमित गायनेकोलॉजिकल चेकअप: साल में कम से कम एक बार पेल्विक एग्ज़ाम और अल्ट्रासाउंड करवाएं।
  • एंडोमेट्रियोसिस का इलाज: अगर आपको एंडोमेट्रियोसिस है, तो उसका सही इलाज लें ताकि एंडोमेट्रियोमा न बने।

निष्कर्ष (Conclusion)

ज़्यादातर सिस्ट सौम्य होती हैं और अपने आप ठीक हो जाती हैं। हालांकि, अगर सिस्ट बड़ी है, लक्षण दे रही है, या आपकी फर्टिलिटी को प्रभावित कर रही है, तो सही समय पर इलाज ज़रूरी है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से सिस्ट को निकालकर बाईं ओवरी को बचाया जा सकता है। अगर बाईं ओवरी गंभीर रूप से प्रभावित है, तो भी दाईं ओवरी से नेचुरल या IVF के ज़रिये प्रेगनेंसी संभव है। याद रखें, एक स्वस्थ ओवरी भी माँ बनने के लिए काफी है। नियमित चेकअप, स्वस्थ जीवनशैली, और समय पर इलाज से आप अपने माँ बनने के सपने को साकार कर सकती हैं।

ओवेरियन सिस्ट के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट राइट से अलग है?

 

मेडिकली दोनों में कोई खास फर्क नहीं है, लेकिन एनाटॉमिकल कारणों से बाईं ओवरी में सिस्ट थोड़ी ज़्यादा आम है।

लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट के लक्षण क्या हैं?

 

बाईं तरफ पेट के निचले हिस्से में दर्द, भारीपन, बाएं पैर में दर्द, अनियमित पीरियड्स, और संभोग के दौरान दर्द मुख्य लक्षण हैं।

क्या लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट से प्रेगनेंट हो सकते हैं?

 

छोटी फंक्शनल सिस्ट से प्रेगनेंसी पर कोई असर नहीं होता। बड़ी या एंडोमेट्रियोमा फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती है, लेकिन इलाज के बाद प्रेगनेंसी संभव है।

क्या बाईं ओवरी निकालने के बाद प्रेगनेंट हो सकते हैं?

 

हाँ, अगर दाईं ओवरी स्वस्थ है, तो आप नेचुरली या IVF से प्रेग्नेंट हो सकती हैं। एक ओवरी से भी प्रेगनेंसी संभव है।

सर्जरी के लिए लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट का साइज कितना होना चाहिए?

 

आमतौर पर 5 सेंटीमीटर से बड़ी सिस्ट, तेज़ी से बढ़ती सिस्ट, या एंडोमेट्रियोमा के लिए सर्जरी की सलाह दी जाती है।

क्या IVF में लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट समस्या बनती है?

 

बड़ी या एंडोमेट्रियोमा को IVF से पहले निकालना बेहतर होता है। इसलिए अगर बाईं प्रभावित है तो दाईं से एग लिए जा सकते हैं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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