कई महिलाओं की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में "left ovarian cyst" लिखा होता है, इसका मतलब है कि महिला की बाईं ओवरी में सिस्ट यानी तरल पदार्थ से भरी थैली बन जाना। अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि क्या बाईं तरफ की सिस्ट दाईं तरफ की सिस्ट से अलग या ज़्यादा खतरनाक होती है। आगे Left ovarian cyst in Hindi में समझते हैं कि लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट क्या होती है, यह दाईं तरफ की सिस्ट से कैसे अलग है, इसके लक्षण क्या हैं, और इलाज के क्या विकल्प उपलब्ध हैं।
सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि ओवरी कहां होती है। महिलाओं गर्भाशय के दोनों साइड में दो ओवरीज़ (अंडाशय) होती हैं, एक बाईं तरफ और एक दाईं तरफ। । हर महीने इन ओवरीज़ से एग निकलता है जो फैलोपियन ट्यूब के ज़रिये गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) में जाता है। जब लेफ़्ट ओवरी में किसी कारणवश तरल पदार्थ, खून, या टिशू से भरी एक थैली या गाँठ बन जाती है, तो उसे लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट कहते हैं।
ज़्यादातर मामलों में यह सिस्ट सौम्य यानी Benign होती हैं यानी कैंसर नहीं होतीं। कुछ सिस्ट बहुत छोटी होती हैं लगभग 1-2 सेंटीमीटर और अपने आप ठीक हो जाती हैं, जबकि कुछ बड़ी हो सकती हैं लगभग 5 से 10 सेंटीमीटर या उससे भी ज़्यादा और इनके इलाज की ज़रूरत होती है।
एक दिलचस्प तथ्य यह है कि कई स्टडीज़ में पाया गया है कि महिलाओं में लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट राइट की तुलना में थोड़ी ज़्यादा पाई जाती है। इसके पीछे कुछ संभावित कारण हैं:
बाईं ओवरी की ब्लड सप्लाई थोड़ी अलग होती है। लेफ्ट ओवेरियन वेन सीधे लेफ्ट रीनल वेन (किडनी की नस) में खुलती है, जबकि राइट ओवेरियन वेन सीधे इंफीरियर वीना कावा में। इस अंतर की वजह से बाईं ओवरी में वेनस प्रेशर थोड़ा अलग हो सकता है।
कुछ महिलाओं में बाईं ओवरी से ज़्यादा बार ओव्यूलेशन होता है, जिससे फंक्शनल सिस्ट बनने की संभावना बढ़ जाती है।
बाईं ओवरी के पास सिग्मॉइड कोलन यानी बड़ी आंत का हिस्सा होता है। कब्ज़ या आंतों के दबाव से कभी-कभी बाईं ओवरी पर असर पड़ सकता है।
कई बार छोटी सिस्ट के कोई लक्षण नहीं होते और यह अल्ट्रासाउंड में अचानक पता चलती है। हालांकि, बड़ी या जटिल सिस्ट के लक्षण हो सकते हैं।
लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट का फर्टिलिटी पर असर इसके प्रकार, आकार और स्थिति पर निर्भर करता है:
अगर बाईं ओवरी में बड़ी सिस्ट है, तो यह उस महीने बाईं ओवरी से ओव्यूलेशन को रोक सकती है। हालांकि, दाईं ओवरी तब भी काम कर सकती है।
अगर बाईं ओवरी में एंडोमेट्रियोमा (चॉकलेट सिस्ट) है, तो यह ओवेरियन रिजर्व को कम कर सकती है। यह बाईं ओवरी के स्वस्थ टिशू को नुकसान पहुंचाती है और एग क्वालिटी को प्रभावित करती है।
बड़ी सिस्ट या एंडोमेट्रियोमा बाएं फैलोपियन ट्यूब को दबा सकती है या एडहीज़न्स (चिपकाव) बना सकती है, जिससे ट्यूब ब्लॉक हो जाती है।
कुछ सिस्ट (जैसे PCOS में) हॉर्मोन को असंतुलित कर देती हैं जिससे ओव्यूलेशन नहीं होता।
सिस्ट की वजह से बाईं ओवरी, ट्यूब और आस-पास के अंग चिपक सकते हैं, जिससे एग पिकअप मुश्किल हो जाता है।
अगर आप लंबे समय से कंसीव करने की कोशिश कर रही हैं और आपको लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट है, तो फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट से परामर्श ज़रूरी है।
लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट का डायग्नोसिस निम्न तरीकों से होता है।
लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट का इलाज सिस्ट के प्रकार, आकार, लक्षण, और आपकी उम्र व फर्टिलिटी प्लान पर निर्भर करता है।
अगर सिस्ट छोटी है (5 सेंटीमीटर से कम) और फंक्शनल है, तो डॉक्टर 2-3 महीने इंतज़ार करते हैं। कई बार ये सिस्ट अपने आप ठीक हो जाती हैं। नियमित अल्ट्रासाउंड से मॉनिटरिंग की जाती है।
कुछ केसेस में हॉर्मोनल दवाएं दी जाती हैं जो ओव्यूलेशन को रोककर नई सिस्ट बनने से रोकती हैं। हालांकि, ये मौजूदा सिस्ट को छोटा नहीं करतीं।
अगर सिस्ट बड़ी है, बढ़ रही है, लक्षण दे रही है, या फर्टिलिटी को प्रभावित कर रही है, तो सर्जरी की ज़रूरत होती है:
अगर लेफ्ट ओवेरियन सिस्ट की वजह से नेचुरल कंसेप्शन मुश्किल हो रहा है, तो IVF एक सफल विकल्प हो सकता है। कुछ महत्वपूर्ण बातें:
अगर बाईं ओवरी में एंडोमेट्रियोमा या बड़ी सिस्ट है, तो IVF से पहले इसे निकालना बेहतर होता है। यह IVF की सक्सेस रेट को बेहतर बनाता है।
IVF में दोनों ओवरीज़ को स्टिम्युलेट किया जाता है। अगर बाईं ओवरी में सिस्ट है और कम एग मिल रहे हैं, तो दाईं ओवरी से पर्याप्त एग मिल सकते हैं।
अगर बाईं ओवरी पूरी तरह डैमेज हो गई है या निकाल दी गई है, तो सिर्फ दाईं ओवरी से भी सफल IVF हो सकता है। आपको सिर्फ एक स्वस्थ ओवरी की ज़रूरत होती है।
IVF से पहले AMH और AFC टेस्ट से दोनों ओवरीज़ के रिजर्व की जांच की जाती है। यह बताता है कि बाईं ओवरी की सिस्ट ने कितना नुकसान किया है।
सिस्ट की सर्जरी के 3-6 महीने बाद IVF करना चाहिए ताकि ओवरी पूरी तरह रिकवर हो जाए।
कई महिलाएं जिनकी बाईं ओवरी में सिस्ट थी, सही इलाज और IVF की मदद से सफलतापूर्वक माँ बन चुकी हैं। फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट आपकी स्थिति देखकर बेस्ट ट्रीटमेंट प्लान बनाएंगे।
हालांकि सभी सिस्ट को बनने से रोका नहीं जा सकता, लेकिन कुछ उपाय फायदेमंद हो सकते हैं, जैसे -
ज़्यादातर सिस्ट सौम्य होती हैं और अपने आप ठीक हो जाती हैं। हालांकि, अगर सिस्ट बड़ी है, लक्षण दे रही है, या आपकी फर्टिलिटी को प्रभावित कर रही है, तो सही समय पर इलाज ज़रूरी है। लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से सिस्ट को निकालकर बाईं ओवरी को बचाया जा सकता है। अगर बाईं ओवरी गंभीर रूप से प्रभावित है, तो भी दाईं ओवरी से नेचुरल या IVF के ज़रिये प्रेगनेंसी संभव है। याद रखें, एक स्वस्थ ओवरी भी माँ बनने के लिए काफी है। नियमित चेकअप, स्वस्थ जीवनशैली, और समय पर इलाज से आप अपने माँ बनने के सपने को साकार कर सकती हैं।
मेडिकली दोनों में कोई खास फर्क नहीं है, लेकिन एनाटॉमिकल कारणों से बाईं ओवरी में सिस्ट थोड़ी ज़्यादा आम है।
बाईं तरफ पेट के निचले हिस्से में दर्द, भारीपन, बाएं पैर में दर्द, अनियमित पीरियड्स, और संभोग के दौरान दर्द मुख्य लक्षण हैं।
छोटी फंक्शनल सिस्ट से प्रेगनेंसी पर कोई असर नहीं होता। बड़ी या एंडोमेट्रियोमा फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकती है, लेकिन इलाज के बाद प्रेगनेंसी संभव है।
हाँ, अगर दाईं ओवरी स्वस्थ है, तो आप नेचुरली या IVF से प्रेग्नेंट हो सकती हैं। एक ओवरी से भी प्रेगनेंसी संभव है।
आमतौर पर 5 सेंटीमीटर से बड़ी सिस्ट, तेज़ी से बढ़ती सिस्ट, या एंडोमेट्रियोमा के लिए सर्जरी की सलाह दी जाती है।
बड़ी या एंडोमेट्रियोमा को IVF से पहले निकालना बेहतर होता है। इसलिए अगर बाईं प्रभावित है तो दाईं से एग लिए जा सकते हैं।