लिबिडो क्या है? – यौन इच्छा और कारण (Libido meaning in hindi)

Last updated: December 22, 2025

Overview

कई लोग यह महसूस करते हैं कि उनकी यौन इच्छा पहले जैसी नहीं रही, लेकिन वे इसे ठीक से समझ या बता नहीं पाते। यौन इच्छा यानी लिबिडो को लेकर हम अक्सर दो तरीके से सोचते हैं कि या तो सब ठीक है, या फिर सब खत्म। जबकि असल ज़िंदगी में लिबिडो का कोई ऑन-ऑफ बटन नहीं होता। यह धीरे-धीरे बदलती है, हालात के हिसाब से ढलती है, और कई बार बिना किसी बीमारी के भी कम या ज़्यादा हो जाती है। आगे हम यही समझेंगे कि लिबिडो क्या है, इसमें बदलाव क्यों होता है, और कब इसे लेकर चिंता करना ज़रूरी होता है और कब नहीं।

लिबिडो का मतलब (Libido Meaning in Hindi)

लिबिडो (libido) का मतलब होता है यौन इच्छा, यानी सेक्स को लेकर किसी व्यक्ति की रुचि या चाह। लेकिन इसे सिर्फ “सेक्स की भूख” समझना अधूरा सच है। लिबिडो असल में इस बात का संकेत होती है कि आपका शरीर और दिमाग इस समय किस हालत में हैं।

जब आप मानसिक रूप से ठीक महसूस करते हैं, शरीर थका हुआ नहीं होता और भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस होता है, तब यौन इच्छा अपने आप आती है।

इसके उलट, जब दिमाग लगातार किसी चिंता में उलझा रहता है या शरीर लगातार थकान में जी रहा होता है, तो सबसे पहले जो चीज़ पीछे जाती है, वह यौन इच्छा ही होती है।

यह समझना बहुत ज़रूरी है कि नॉर्मल लिबिडो जैसी कोई एक चीज़ नहीं होती। किसी की सेक्स की इच्छा ज़्यादा हो सकती है, किसी की कम और दोनों ही तब तक नॉर्मल हैं, जब तक व्यक्ति खुद उससे परेशान न हो।

पुरुषों में लिबिडो कम होने के कारण

  • टेस्टोस्टेरोन का धीरे-धीरे कम होना - उम्र बढ़ने या लंबे समय तक तनाव में रहने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर गिर सकता है, जिससे पुरुषों में यौन इच्छा पहले जैसी महसूस नहीं होती।
  • थायरॉइड या डायबिटीज जैसी बीमारियाँ - इन बीमारियों की वजह से शरीर की ऊर्जा, नर्व फंक्शन और हार्मोन संतुलन प्रभावित होता है, जिससे लिबिडो धीरे-धीरे घट सकती है और सेक्स की चाहत पीछे चली जाती है।
  • कुछ दवाओं का असर- डिप्रेशन, ब्लड प्रेशर या हार्मोन से जुड़ी कुछ दवाइयों के साइड इफेक्ट भी होते हैं जिनकी वजह से सेक्स की इच्छा कम या ख़त्म हो जाती है।
  • लगातार मानसिक दबाव और ज़िम्मेदारियाँ - काम का तनाव, पैसों की चिंता और परिवार की ज़िम्मेदारियाँ पुरुषों के दिमाग को लगातार “प्रेशर मोड” में रखती हैं, जहाँ यौन इच्छा अपने आप पीछे चली जाती है।
  • नींद की कमी और शारीरिक थकान - जब शरीर को लगातार पूरी नींद और आराम नहीं मिलता, तो एनर्जी बचाने के लिए दिमाग सेक्स को प्राथमिकता देना बंद कर देता है।
  • परफॉर्मेंस को लेकर डर या आत्मविश्वास की कमी - बार-बार यह सोचते रहना कि “मैं ठीक कर पाऊँगा या नहीं” यौन इच्छा को दबा देता है, क्योंकि दिमाग आनंद की बजाय डर पर फोकस करने लगता है।
  • शराब, धूम्रपान और ख़राब लाइफस्टाइल - इन आदतों से न सिर्फ़ हार्मोन प्रभावित होते हैं, बल्कि ब्लड फ्लो और नर्व रिस्पॉन्स भी कमजोर पड़ सकता है, जिससे लिबिडो कम होती है।

महिलाओं में लिबिडो कम होने के कारण

  • भावनात्मक सुरक्षा की कमी - अगर महिला खुद को रिश्ते में इमोशनली सेफ महसूस नहीं कर रही है, तो शरीर भले तैयार हो, लेकिन यौन इच्छा स्वाभाविक रूप से कम हो जाती है।
  • हार्मोनल बदलाव के अलग-अलग चरण - पीरियड्स, प्रेग्नेंसी, डिलीवरी के बाद और मेनोपॉज़ के दौरान हार्मोन में बदलाव आते हैं, जिनके कारण लिबिडो का बदलना शरीर की नेचुरल प्रतिक्रिया होती है।
  • थायरॉइड, एनीमिया या डायबिटीज - इन कंडीशनों की वजह से शरीर की एनर्जी और ऑक्सीजन सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे सेक्स की इच्छा कम महसूस हो सकती है।
  • शरीर को लेकर असहजता या आत्म-संदेह - डिलीवरी के बाद या वजन में बदलाव के कारण जब महिला अपने शरीर को लेकर असहज महसूस करती है, तो उसका सीधा असर लिबिडो पर पड़ता है।
  • दर्द, योनि में सूखापन या असुविधा का डर- अगर पहले यौन संबंधों के दौरान दर्द या असहज अनुभव रहा हो, तो दिमाग अगली बार खुद को बचाने के लिए इच्छा को दबा देता है।

लिबिडो कम हो तो डॉक्टर से कब मिलना चाहिए?

  • अगर यौन इच्छा कई महीनों से लगातार कम होती जा रही है और अपने आप बेहतर नहीं हो रही, तो इसे नज़रअंदाज़ करने के बजाय डॉक्टर से बात करना सही रहता है।
  • अगर बिना किसी बड़े तनाव, बीमारी या लाइफस्टाइल में बदलाव के यौन इच्छा अचानक कम हो जाए, तो इसके पीछे मेडिकल कारण हो सकता है।
  • जब इच्छा कम होने के साथ शरीर में ऊर्जा की कमी, जल्दी थक जाना या सुस्ती बनी रहे, तो यह हार्मोनल या मेटाबॉलिक समस्या का संकेत हो सकता है।
  • अगर लिबिडो की कमी के साथ उदासी, चिड़चिड़ापन या मन भारी रहने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा कारण भी हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से मिलना चाहिये।
  • महिलाओं में अगर यौन संबंध के दौरान दर्द, वजाइना में सूखापन या जलन हो और उसी वजह से इच्छा कम हो रही हो, तो मेडिकल जाँच ज़रूरी हो जाती है।
  • थायरॉइड, डायबिटीज, पीसीओडी या लंबे समय से चल रही दवाओं की स्थिति में लिबिडो बदलने पर डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी होता है।
  • अगर लिबिडो की कमी से रिश्ते में दूरी, गलतफहमी या तनाव बढ़ने लगा हो, तो समय पर डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए।

क्या लिबिडो और निःसंतानता का आपस में कोई संबंध होता है?

जब किसी कपल को गर्भधारण में दिक्कत आने लगती है, तो ध्यान अक्सर सिर्फ रिपोर्ट्स, टेस्ट और इलाज पर चला जाता है, जबकि यौन इच्छा यानी लिबिडो को एक “छोटी समस्या” मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।

असल में लिबिडो और निःसंतानता का रिश्ता सीधा नहीं, लेकिन महत्वपूर्ण ज़रूर होता है, क्योंकि यह गर्भधारण की पूरी प्रक्रिया को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकता है।

  • कम लिबिडो सीधे निःसंतानता नहीं होती- लिबिडो कम होना अपने आप में निःसंतानता यानी इन्फर्टिलिटी (infertility) नहीं है, लेकिन इससे प्रेगनेंसी के लिए ज़रूरी परिस्थितियाँ प्रभावित हो सकती हैं।
  • संबंधों की फ्रीक्वेंसी कम हो जाना - जब यौन इच्छा कम होती है, तो शारीरिक संबंध अपने आप कम हो जाते हैं, जिससे ओव्यूलेशन के आसपास सही समय पर संबंध बनने की संभावना घट जाती है।
  • पुरुषों में हार्मोनल कारण और स्पर्म हेल्थ - अगर पुरुषों में लिबिडो कम होने की वजह हार्मोनल असंतुलन या लंबे समय से चला आ रहा तनाव है, तो वही कारण स्पर्म काउंट और क्वालिटी पर भी असर डाल सकता है।
  • महिलाओं में तनाव और ओव्यूलेशन का अप्रत्यक्ष असर - महिलाओं में लिबिडो कम होना अक्सर मानसिक तनाव या हार्मोनल बदलाव से जुड़ा होता है, और यही कारण ओव्यूलेशन को भी अनियमित बना सकता है।
  • दर्द या असहजता के कारण संबंध से बचना- अगर महिला को शारीरिक संबंध के दौरान दर्द, सूखापन या जलन होती है और उसी वजह से इच्छा कम होती है, तो गर्भधारण के लिए ज़रूरी नियमित संबंध प्रभावित हो सकते हैं।
  • निःसंतानता का तनाव और लिबिडो का दुष्चक्र - गर्भधारण न होने की चिंता कई बार लिबिडो को और कम कर देती है, जिससे तनाव और यौन इच्छा की कमी एक-दूसरे को बढ़ाने लगती हैं।
  • इलाज के दौरान लिबिडो को नज़रअंदाज़ करना- जब निःसंतानता का इलाज चल रहा हो और साथ में लिबिडो भी कम हो, तो दोनों को अलग-अलग नहीं बल्कि एक साथ समझना ज़्यादा सही रहता है।

लिबिडो बेहतर कैसे करें?

लिबिडो बेहतर करने का मतलब किसी एक दवा या उपाय से “तुरंत ठीक” करना नहीं होता, बल्कि यह समझना होता है कि इस समय शरीर और दिमाग को किस तरह के सहारे की ज़रूरत है। ज़्यादातर मामलों में छोटे लेकिन सही बदलाव, लगातार और धैर्य के साथ किए जाएँ, तो यौन इच्छा धीरे-धीरे स्वाभाविक रूप से बेहतर हो सकती है।

लिबिडो बेहतर करने के असरदार तरीके

नींद और आराम को प्राथमिकता देना

जब शरीर को रोज़ पर्याप्त नींद और रिकवरी मिलती है, तो हार्मोन संतुलन सुधरता है और यौन इच्छा को वापस आने का मौका मिलता है।

मानसिक तनाव को कम करना

लगातार तनाव में दिमाग यौन प्रतिक्रिया को दबा देता है, इसलिए तनाव कम करना लिबिडो सुधारने की सबसे ज़रूरी शर्त होती है।

हल्की लेकिन नियमित शारीरिक गतिविधि

बहुत ज़्यादा थकाने वाले व्यायाम की बजाय नियमित हल्की गतिविधि शरीर में रक्त प्रवाह और ऊर्जा को बेहतर करती है, जो लिबिडो के लिए फायदेमंद होती है।

भावनात्मक सुरक्षा और खुली बातचीत

जब पार्टनर के साथ खुलकर बात होती है और भावनात्मक सुरक्षा महसूस होती है, तो यौन इच्छा स्वाभाविक रूप से बेहतर होने लगती है।

दर्द, सूखापन या असहजता का इलाज कराना

अगर यौन संबंध के दौरान दर्द या असहजता है, तो उसका इलाज ज़रूरी है, क्योंकि दर्द का डर लिबिडो को अपने आप दबा देता है।

शराब और धूम्रपान से दूरी

ये आदतें हार्मोन, नसों और रक्त प्रवाह को प्रभावित करती हैं, जिससे यौन इच्छा कमजोर पड़ सकती है।

परफॉर्मेंस के दबाव से बाहर आना

जब सेक्स को आनंद की बजाय एग्जाम बना लिया जाता है, तो डर इच्छा पर हावी हो जाता है, इसलिए सहजता और भरोसा ज़्यादा ज़रूरी होता है।

ज़रूरत पड़ने पर मेडिकल जाँच करवाना

अगर लाइफस्टाइल में सुधार के बाद भी लिबिडो में सुधार न दिखे, तो हार्मोन या दूसरी मेडिकल जाँच से मदद मिल सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

लिबिडो सिर्फ सेक्स की इच्छा तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह शरीर, दिमाग और रिश्ते तीनों की स्थिति को दर्शाती है। इसीलिए जब लिबिडो में बदलाव आता है, तो उसका असर सिर्फ सेक्स लाइफ पर ही नहीं, बल्कि प्रेगनेंसी की कोशिश और आपसी जुड़ाव पर भी पड़ सकता है।

अगर लिबिडो में कमी के साथ प्रेगनेंसी में भी दिक्कत आ रही हो, तो दोनों को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ समझकर देखना ज़्यादा सही रहता है।

सबसे अहम बात यह है कि लिबिडो के बदलाव को शर्म या चुप्पी से नहीं, बल्कि समझ और सही समय पर सलाह से देखा जाए जिससे कि शरीर और मन, दोनों को ज़रूरी सहारा मिल सके।

Common Questions Asked

क्या लिबिडो कम होने से प्रेग्नेंसी में दिक्कत आ सकती है?

 

लिबिडो कम होना सीधे प्रेग्नेंसी को नहीं रोकता, लेकिन इससे शारीरिक संबंध कम हो सकते हैं, जिससे सही समय पर गर्भधारण की संभावना घट सकती है।

प्रेग्नेंसी की कोशिश के दौरान लिबिडो कम हो जाए तो क्या यह नॉर्मल है?

 

हाँ, प्रेगनेंसी को लेकर बढ़ा हुआ तनाव, टाइमिंग का दबाव और चिंता कई कपल्स में लिबिडो को अस्थायी रूप से कम कर सकता है।

क्या लिबिडो और ओव्यूलेशन का कोई संबंध होता है?

 

लिबिडो सीधे ओव्यूलेशन को कंट्रोल नहीं करती, लेकिन तनाव और हार्मोनल चेंज जो लिबिडो को प्रभावित करते हैं, इसका ओव्यूलेशन पर भी असर पड़ सकता है।

पुरुषों में लिबिडो कम होने का प्रेग्नेंसी पर क्या असर पड़ता है?

 

अगर पुरुषों में लिबिडो कम होने के पीछे हार्मोनल समस्या या लंबे समय का तनाव हो, तो वही कारण स्पर्म हेल्थ को भी प्रभावित कर सकता है।

प्रेगनेंसी के लिए इलाज चल रहा हो, तब लिबिडो पर ध्यान देना ज़रूरी है क्या?

 

हाँ, क्योंकि निःसंतानता के इलाज के दौरान बढ़ा हुआ मानसिक दबाव लिबिडो को और कम कर सकता है, जिससे एक दुष्चक्र बन सकता है।

 

 

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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