कम AMH स्तर : लक्षण, कारण और उपचार

Last updated: January 06, 2026

Overview

क्या आपने “एएमएच(AMH) लेवल” के बारे में सुना है, और यह जाना है कि कैसे इसका बढ़ना और घटना आपकी ओवरी में बचे अंडों की संख्या (ओवेरियन रिज़र्व) को प्रभावित कर सकता है? एंटी-मुल्लेरियन हार्मोन (AMH) एक ऐसा प्रोटीन है, जो यह समझने में मदद करता है कि महिला की ओवरी में अंडों की संख्या कितनी है। आसान शब्दों में, AMH जितना कम होगा, ओवरी में अंडों की संख्या उतनी कम मानी जाती है।

हालांकि, AMH कम होना हमेशा बांझपन नहीं होता, लेकिन इससे गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है। इसलिए खासकर प्रेग्नेंसी प्लान कर रही महिलाओं के लिए AMH को समझना जरूरी है। आइए, कम AMH के लक्षण, कारण, आदर्श स्तर और इलाज के विकल्पों को आसान भाषा में समझते हैं।

कम AMH का मतलब क्या होता है?

एंटी-मुल्लेरियन हार्मोन ओवरी के फॉलिकल्स द्वारा बनने वाला एक प्रोटीन है, जो ओवरी में बचे हुए अंडों की संख्या के बारे में संकेत देता है। इसलिए AMH लेवल का सीधा संबंध ओवेरियन रिज़र्व से होता है। कम AMH का मतलब होता है कि ओवरी में अंडों की सप्लाई कम हो रही है, हालांकि यह हर बार फर्टिलिटी को पूरी तरह खत्म नहीं करता।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि कम AMH का मतलब अंडों की संख्या कम होना है, लेकिन इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि अंडों की गुणवत्ता खराब है या प्रेग्नेंसी बिल्कुल संभव नहीं। कम AMH वाली महिलाएं नेचुरली भी गर्भधारण कर सकती हैं या जरूरत पड़ने पर उन्नत फर्टिलिटी उपचार की मदद ले सकती हैं। AMH को समझने से प्रेग्नेंसी प्लानिंग बेहतर तरीके से की जा सकती है।

एंटी-मुल्लेरियन हार्मोन के बारे में जरूरी बातें:

  • AMH उन अपरिपक्व ओवरी फॉलिकल्स से बनता है, जिनसे अंडा अभी रिलीज़ नहीं हुआ होता।
  • यह ओवरी में बचे हुए अंडों की सप्लाई का संकेत देता है।
  • AMH लेवल और अंडों की संख्या का संबंध आमतौर पर सीधा होता है: कम AMH = ओवरी में अंडों की संख्या कम।
  • कम AMH हमेशा बांझपन नहीं होता; गर्भधारण पर अंडे की गुणवत्ता, हार्मोनल संतुलन और गर्भाशय की सेहत जैसे दूसरे कारण भी असर डालते हैं।

कम AMH के लक्षण क्या होते हैं?

कम AMH लेवल के कोई बहुत स्पष्ट शारीरिक लक्षण तो नहीं दिखते, लेकिन शरीर में कुछ पैटर्न नज़र आ सकते हैं। कम AMH के ये आम लक्षण/संकेत ध्यान में रखें:

  • अनियमित मासिक चक्र: हार्मोनल असंतुलन के कारण पीरियड्स कभी जल्दी, कभी देर से, या हर बार अलग तरीके से आ सकते हैं।
  • गर्भधारण में कठिनाई: नियमित कोशिश के बावजूद नेचुरली गर्भ ठहरने में परेशानी हो सकती है।
  • फर्टिलिटी दवाओं का रिस्पॉन्स: IVF या IUI जैसे इलाज में अंडों की संख्या बढ़ाने के लिए दवाएं दी जाती हैं। कम AMH के कारण शरीर इन दवाओं पर सही प्रतिक्रिया नहीं देता और अंडों की संख्या कम रह जाती है।
  • जल्दी रजोनिवृत्ति: कुछ महिलाओं में कम AMH के साथ जल्दी मेनोपॉज के संकेत दिख सकते हैं, जैसे गर्मी के दौरे, मूड में बदलाव, या अनियमित ब्लीडिंग।
  • ओवरी स्टिमुलेशन कम होना: फर्टिलिटी के इलाज के दौरान अंडों का कम विकसित होना भी कम AMH की ओर इशारा करता है।

कम AMH के कारण

कम AMH के कारण जैविक, आनुवंशिक और जीवनशैली से जुड़े हो सकते हैं। जरूरी है कि इन कारणों के बारे में जानकारी रहे। कुछ आम कारण इस प्रकार हैं:

1. उम्र का कारण:

  • 35 साल के बाद ओवरी में अंडों की संख्या का कम होना काफी आम है। इस उम्र के आसपास या बाद में अंडों की गुणवत्ता भी घट सकती है।
  • उम्र का AMH से उलटा संबंध माना जाता है। यानी जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, AMH का स्तर आमतौर पर कम होता जाता है।

2. आनुवंशिक कारण:

  • कुछ महिलाओं में आनुवंशिक रूप से ओवरी रिज़र्व कम हो सकता है, जिससे AMH स्तर कम रहता है।
  • परिवार में कम AMH का इतिहास होने पर, करीबी संबंध वाली महिलाओं में जल्दी मेनोपॉज की संभावना बढ़ सकती है।

3. जीवनशैली से जुड़े कारण:

  • धूम्रपान ओवरी के फॉलिकल्स को नुकसान पहुंचा सकता है और अंडों की कमी की गति बढ़ा सकता है।
  • खराब डाइट या मोटापा भी हार्मोनल असंतुलन का बड़ा कारण बन सकता है, जिससे ओवरी रिज़र्व प्रभावित हो सकता है।
  • लंबे समय का तनाव रिप्रोडक्टिव हार्मोन्स पर नकारात्मक असर डाल सकता है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से AMH स्तर प्रभावित हो सकता है।

4. मेडिकल स्थितियाँ:

  • एंडोमेट्रियोसिस: यह ओवरी के टिशू को नुकसान पहुंचाकर अंडों की सप्लाई कम कर सकता है।
  • ओवरी की सर्जरी: कुछ मामलों में ओवरी की सर्जरी के दौरान स्वस्थ फॉलिकल्स प्रभावित हो सकते हैं।
  • कीमोथेरेपी और रेडिएशन: कैंसर उपचार ओवरी में अंडों की सप्लाई पर बड़ा असर डाल सकते हैं, जिससे AMH का स्तर कम हो सकता है।

AMH स्तर कैसे मापा जाता है?

AMH स्तर की पुष्टि करने का सबसे भरोसेमंद तरीका एंटी-मुल्लेरियन हार्मोन टेस्ट है। यह फर्टिलिटी से जुड़ा एक सुविधाजनक मार्कर भी माना जाता है, क्योंकि AMH का स्तर मासिक चक्र के दौरान काफी हद तक स्थिर रहता है, जबकि कुछ दूसरे हार्मोन, मासिक चक्र के उतार-चढ़ाव पर ज्यादा निर्भर करते हैं। अन्य टेस्ट्स की तुलना में यह ज्यादा सुविधाजनक है क्योंकि::

  • साधारण ब्लड टेस्ट: AMH स्तर जानने के लिए सिर्फ एक छोटा-सा ब्लड टेस्ट ही पर्याप्त होता है।
  • किसी भी समय कराया जा सकता है: इस टेस्ट को मासिक चक्र के किसी भी दिन किया जा सकता है। FSH या एस्ट्रोजन जैसे अन्य हार्मोन्स के विपरीत, AMH का स्तर चक्र के अलग-अलग चरणों में तेजी से नहीं बदलता है।

यह टेस्ट आमतौर पर तब कराया जाता है, जब डॉक्टर आपके लक्षणों को देखकर कम AMH की आशंका करते हैं। रिपोर्ट से पुष्टि होने पर डॉक्टर आपके लिए एक पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान बना पाते हैं।

कम AMH का इलाज

कम AMH रिपोर्ट आने के बाद सबसे आम सवाल यही होता है कि इलाज के क्या विकल्प हैं और क्या इसे “रिवर्स” किया जा सकता है। सच तो यह है कि ऐसा कोई एक इलाज नहीं है जो AMH स्तर को स्थायी रूप से बढ़ा दे। फिर भी कुछ मेडिकल विकल्प और जीवनशैली से जुड़े कदम सफल गर्भधारण की संभावना बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। कम AMH के लिए अक्सर ये विकल्प सुझाए जाते हैं:

  • ओवरी स्टिमुलेशन के साथ आईवीएफ: कम AMH के मामलों में ओवरी से एक साथ कई अंडे प्राप्त करने के लिए दवाओं की अतिरिक्त खुराक दी जाती है।
  • फर्टिलाइजेशन की संभावना बढ़ाने के लिए आईसीएसआई: कम AMH में आईसीएसआई (ICSI) उपयोगी हो सकता है, क्योंकि इसमें एक-एक अंडे में सीधे एक शुक्राणु इंजेक्ट किया जाता है, जिससे फर्टिलाइजेशन के चांस बढ़ सकते हैं।
  • अंडे फ्रीज करना: जिन कम उम्र की महिलाओं में AMH लगातार घट रहा हो, उनके लिए अंडे फ्रीज करना भविष्य में फर्टिलिटी सुरक्षित रखने का विकल्प हो सकता है।
  • डोनर एग्स: जब AMH बहुत कम हो, तब सफल गर्भधारण की संभावना बढ़ाने के लिए डोनर एग्स की सलाह दी जा सकती है।
  • लाइफस्टाइल बदलाव: अगर कम AMH का संबंध जीवनशैली से हो, तो इसे पूरी तरह रिवर्स करना संभव नहीं होता, लेकिन आगे गिरावट को धीमा किया जा सकता है, जैसे धूम्रपान छोड़ना, तनाव कम करना, हेल्दी डाइट लेना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार फर्टिलिटी सप्लीमेंट्स लेना।

क्या कम AMH में गर्भधारण संभव है?

जैसा कि पहले बताया गया है, कम AMH निराश कर सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गर्भधारण असंभव है। सही मार्गदर्शन और कुछ मामलों में मेडिकल मदद के साथ, कई महिलाओं में नेचुरली भी गर्भधारण हो सकता है। वास्तव में, कम AMH स्तर वाली कई महिलाओं ने सफलतापूर्वक गर्भधारण किया है और स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया है। हालांकि यह काफी हद तक उम्र, कुल प्रजनन स्वास्थ्य और अंडों की गुणवत्ता जैसे कारकों पर निर्भर करता है। IVF, IUI या ICSI जैसी उन्नत प्रजनन तकनीकों ने कई लोगों को कम AMH की चुनौती से उबरने में मदद की है।

अगर AMH लेवल बहुत ही कम हो, तो डोनर एग्स (Donor Eggs) का विकल्प भी चुना जा सकता है।। वहीं अगर कम AMH का संबंध जीवनशैली से जुड़ा हो, तो कुछ सरल बदलाव भी बड़ा फर्क ला सकते हैं। इलाज या प्रक्रिया कोई भी हो, कई सफल प्रेग्नेंसी अनुभव यह दिखाते हैं कि कम AMH के साथ भी मातृत्व संभव है, बस सही विकल्प चुनना और समय पर कदम उठाना जरूरी है।

निष्कर्ष

कम AMH की रिपोर्ट आना कई महिलाओं के लिए तनावपूर्ण हो सकता है, खासकर जब बात फर्टिलिटी की हो। लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि कम AMH का मतलब बांझपन नहीं है, यह सिर्फ ओवरी में अंडों की संख्या कम होने का संकेत देता है। इसे अंडों की गुणवत्ता, गर्भाशय की सेहत और जीवनशैली जैसे अन्य कारकों के साथ जोड़कर समझना चाहिए। सही फर्टिलिटी काउंसलिंग के साथ, कम AMH वाली कई महिलाएं नेचुरली या मेडिकल मदद से, जैसे IVF, ICSI या डोनर एग्स से गर्भधारण कर पाती हैं।

साथ ही, संतुलित आहार, धूम्रपान से दूरी और तनाव कम करने जैसे लाइफस्टाइल बदलाव भी प्रजनन स्वास्थ्य को सपोर्ट कर सकते हैं। सबसे जरूरी है समय पर जांच और सही उपचार, ताकि आपके लिए बेहतर विकल्प तय किए जा सकें। अगर आपको कम AMH बताया गया है, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लेकर अपने लिए एक पर्सनलाइज्ड प्लान बनवाना सबसे सही कदम है। मेडिकल साइंस में हुई आधुनिक तरक्की के साथ, माता-पिता बनने की उम्मीद और संभावना आज भी पूरी तरह बरकरार है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

कम AMH में नेचुरली गर्भधारण कैसे करें?

 

कम AMH होने पर भी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करना संभव है, खासकर यदि आपकी उम्र कम है और आपके अंडों की गुणवत्ता अच्छी है। एक अच्छी जीवनशैली, नियमित पीरियड्स और सही समय पर संबंध बनाने से काफी सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।

AMH लेवल कैसे बढ़ाएं?

 

AMH को स्थायी रूप से बढ़ाने का कोई पक्का तरीका नहीं है, लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल और सही उपचार से फर्टिलिटी सपोर्ट हो सकती है।

क्या कम AMH का मतलब बांझपन है?

 

नहीं। कम AMH का मतलब ओवरी में अंडों की संख्या कम होना है; गर्भधारण अंडे की गुणवत्ता, उम्र और गर्भाशय की सेहत पर भी निर्भर करता है।

क्या 0.02 AMH में गर्भधारण संभव है?

 

हाँ, AMH का स्तर बहुत कम होने पर भी गर्भधारण हो सकता है, हालाँकि यह थोड़ा मुश्किल हो सकता है। ऐसी स्थिति में, इनफर्टिलिटी स्पेशलिस्ट आपको IVF या डोनर एग जैसी सहायक प्रजनन तकनीकों (Assisted reproductive methods) की सलाह दे सकते हैं।

अंडे की गुणवत्ता कैसे बेहतर करें?

 

संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, धूम्रपान/अल्कोहल से दूरी, और डॉक्टर की सलाह अनुसार सप्लीमेंट मदद कर सकते हैं।

AMH कब “बहुत कम” माना जाता है?

 

आम तौर पर, 1.0 ng/mL से कम AMH स्तर को कम माना जाता है, हालांकि गर्भधारण की संभावना आपकी उम्र और अन्य मेडिकल स्थितियों पर भी निर्भर करती है। इसकी सही रिपोर्ट और जांच केवल एक डॉक्टर ही बेहतर तरीके से कर सकता है।

कम AMH में कितने अंडे होते हैं?

 

फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के दौरान, कम AMH वाली महिलाओं में हर चक्र में अंडों की संख्या कम हो सकती है। फिर भी, सिर्फ एक स्वस्थ और जीवित अंडा भी एक सफल गर्भावस्था के लिए काफी है।

कौन से खाद्य पदार्थ AMH बढ़ाते हैं?

 

हालाँकि ऐसी कोई चीज़ नहीं है जो सीधे तौर पर AMH लेवल को बढ़ा सके, लेकिन एंटीऑक्सीडेंट, हरी पत्तेदार सब्जियां, कम फैट वाला मांस और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर संतुलित आहार लेने से ओवरी की सेहत और अंडों की क्वालिटी बेहतर होती है।

क्या AMH लेवल बदलते हैं?

 

हाँ, टेस्टिंग की प्रक्रिया या शरीर में होने वाले थोड़े-बहुत बदलावों की वजह से AMH लेवल में मामूली उतार-चढ़ाव हो सकता है। लेकिन फिर भी, ओवेरियन रिजर्व को समझने के लिए यह एक बेहतरीन जरिया माना जाता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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