Menstrual Cycle in Hindi

Last updated: December 16, 2025

Overview

ज्यादातर लोग 'पीरियड्स' (Menstruation) को सिर्फ उन 4-5 दिनों की ब्लीडिंग के तौर पर देखते हैं, लेकिन सच यह है कि यह शरीर के अंदर चलने वाली एक महीने लंबी प्रक्रिया है, और पीरियड्स तो बस उसका 'अंत' है। पीरियड्स साइकिल (Menstrual Cycle) महिलाओं के शरीर का एक ऐसा बैरोमीटर है जो बताता है कि उनकी सेहत कैसी है। menstrual cycle in hindi हम समझेंगे कि पीरियड्स के अलावा बाकी दिनों में आपके शरीर में क्या 'केमिकल बदलाव' (Hormonal changes) चल रहा होता है, कब आप सबसे ज्यादा ऊर्जावान यानी एनर्जी से भरी (energetic) होती हैं और कब आपको आराम करने की जरुरत होती है।

पीरियड्स साइकिल क्या है? (Menstrual Cycle in Hindi)

पीरियड्स साइकिल यानी मासिक साइकिल (menstrual cycle) एक नेचुरल प्रोसेस है जिसमें महिला का शरीर हर महीने गर्भधारण यानी प्रेगनेंसी (pregnancy) की तैयारी करता है।

साइकिल की गिनती उस दिन से शुरू होती है जब पीरियड्स आते हैं, और अगले पीरियड्स आने से ठीक एक दिन पहले यह साइकिल पूरी मानी जाती है।

इस दौरान गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम (endometrium) जो कि यूट्रस के अंदर लाइनिंग के रूप में धीरे-धीरे मोटी होती है ताकि ओव्यूलेशन (ovulation) के बाद अगर एग और स्पर्म मिल जाएं और फर्टिलाइज़ेशन (fertilization) हो जाए, तो एम्ब्रियो सुरक्षित रूप से चिपक सके।

अगर फर्टिलाइज़ेशन नहीं होता, तो एंडोमेट्रियम की ज़रूरत नहीं रहती और शरीर इसे पीरियड्स के रूप में बाहर निकाल देता है। 21 से 35 दिनों के बीच आने वाला साइकिल नॉर्मल मानी जाती है, और रेगुलर पीरियड्स का मतलब यह होता है कि महिला की रिप्रोडक्टिव हेल्थ सही है।

  • साइकिल की लंबाई: यह आमतौर पर 21 से 35 दिनों की होती है।
  • साइकिल की गिनती: जिस दिन आपको ब्लीडिंग शुरू होती है, वह पहला दिन माना जाता है।

पीरियड साइकिल के 4 मुख्य हिस्से (Phases of Menstrual Cycle in Hindi)

डॉक्टर्स इस साइकिल को चार भागों में बांटते हैं। इसे समझने का सबसे आसान तरीका है कि आप इसे 'मौसम' की तरह देखें, जैसे कभी पतझड़ आता है, तो कभी बहार। आइए इसे समझते हैं:

फेज 1: पीरियड्स चरण (Menstrual Phase) – दिन 1 से 5

(इसे आप शरीर का 'विंटर' या 'पतझड़' मान सकती हैं) यह वो समय है जिसे हम सब अच्छे से जानते हैं (जब ब्लीडिंग होती है)। होता यह है कि जब पिछले महीने बच्चा नहीं ठहरता, तो शरीर के हॉर्मोन्स एकदम से नीचे गिर जाते हैं।

  • शरीर में क्या होता है: बच्चेदानी की वह मोटी परत (जो बच्चे के लिए बनी थी) टूटने लगती है और रक्त व ऊतकों (Tissues) के रूप में प्राइवेट पार्ट यानि योनि (Vagina) से बाहर निकलती है।
  • कैसा महसूस होता है: इस समय ताकत कम रहती है। पेट में ऐंठन (Cramps), कमर दर्द और थकान महसूस होती है। यह समय आराम करने का है।

फेज 2: फॉलिक्युलर चरण (Follicular Phase) – दिन 1 से 13

(यह है आपके शरीर का 'बसंत' या Spring Season) यह फेज वैसे तो पीरियड्स के पहले दिन से ही शुरू हो जाता है, लेकिन इसका असली असर ब्लीडिंग खत्म होने के बाद दिखता है।

  • शरीर में क्या होता है: सबसे पहले हमारा दिमाग (Brain) शरीर की एक खास ग्रंथि 'पिट्यूटरी' को एक मैसेज/सिग्नल भेजता है। यह हार्मोन एगशय (Ovaries) को कहता है- "जागो, एग्स तैयार करो!" एगशय में 5-20 छोटे-छोटे रोम (Follicles) बनने लगते हैं, जिनमें अपरिपक्व एग्स होते हैं।
  • हार्मोन का जादू: जैसे-जैसे ये एग्स बड़े होते हैं, एस्ट्रोजन (Estrogen) हार्मोन बढ़ता है। यह हार्मोन बच्चेदानी की दीवार को फिर से मोटा करना शुरू कर देता है।
  • कैसा महसूस होता है: जैसे ही एस्ट्रोजन बढ़ता है, आपका मूड अच्छा होने लगता है, चेहरे पर ग्लो आता है और आप खुद को बहुत ताकतवर महसूस करती हैं।

फेज 3: ओव्यूलेशन चरण (Ovulation Phase) – दिन 14 (28 दिन की साइकिल में)

(यह है 'समर' या गर्मियों का मौसम – सबसे हॉट और एक्टिव) यह पूरे साइकिल का 'हीरो' मोमेंट है। अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं, तो शारीरिक संबंध बनाने के लिए यह सबसे सही समय है।

  • शरीर में क्या होता है: एस्ट्रोजन का लेवल पीक पर होता है, जिससे LH (Luteinizing Hormone) अचानक बढ़ता है। यह हार्मोन एगशय को धक्का देता है और सबसे परिपक्व यानि मैच्योर एग बाहर निकलकर फैलोपियन ट्यूब में आ जाता है।
  • एग्स की उम्र (Life Span): एग सिर्फ 12 से 24 घंटे तक ही जिंदा रहता है। अगर इस बीच उसे स्पर्म मिल गया, तो प्रेगनेंसी हो सकती है।
  • लक्षण:
    • इस समय सफेद पानी (Discharge) बिल्कुल कच्चे एग्स की सफेदी जैसा चिकना और तार जैसा खिंचने वाला हो जाता है।
    • शरीर का तापमान थोड़ा बढ़ जाता है।
    • पेट के एक तरफ हल्का दर्द हो सकता है।

फेज 4: ल्यूटियल चरण (Luteal Phase) – दिन 15 से 28

(यह है 'पतझड़' की शुरुआत) ओव्यूलेशन के बाद से अगले पीरियड तक का समय। यह अक्सर सबसे लंबा और कई महिलाओं के लिए सबसे मुश्किल फेज होता है।

  • शरीर में क्या होता है: जिस फॉलिकल ने एग छोड़ा था, वह अब कॉर्पस ल्यूटियम (Corpus Luteum) बन जाता है और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) हार्मोन बनाता है। यह हार्मोन बच्चेदानी की परत को बनाए रखता है।
  • अगर प्रेगनेंसी नहीं हुई: तो कॉर्पस ल्यूटियम सिकुड़ जाता है, प्रोजेस्टेरोन गिर जाता है, और शरीर को पता चल जाता है कि अब सफाई (Period) का समय आ गया है।
  • PMS (Premenstrual Syndrome): प्रोजेस्टेरोन के चलते शरीर में पानी रुकना (Bloating), स्तनों यानी ब्रेस्ट (Breast) में भारीपन, मुँहासे और चिड़चिड़ापन शुरू हो जाता है। आपको जंक फूड खाने की क्रेविंग हो सकती है।

नॉर्मल मेंस्ट्रुअल साइकिल vs अबनॉर्मल मेंस्ट्रुअल साइकिल: कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

हर महिला की साइकिल अलग होती है, menstrual cycle in hindi के इस लेख में जानेंगे कि कब पीरियड्स नॉर्मल होते हैं और किन परिस्थितियों में डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

सामान्य (Normal):

  • 21 से 35 दिनों का साइकिल।
  • 2 से 7 दिनों तक ब्लीडिंग।
  • हल्का दर्द जिसे सामान्य दवा या सिकाई से ठीक किया जा सके।

अगर ये असामान्य लक्षण दिखें, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं:

  • अत्यधिक ब्लीडिंग: अगर आपको हर घंटे पैड बदलना पड़ रहा है या खून के बड़े थक्के (clots) आ रहे हैं।
  • मिस्ड पीरियड्स: अगर 90 दिनों तक पीरियड नहीं आया और आप प्रेग्नेंट नहीं हैं।
  • स्पॉटिंग: पीरियड्स के बीच में खून के धब्बे दिखना।
  • असहनीय दर्द: ऐसा दर्द जो आपको बिस्तर से उठने न दे (यह एंडोमेट्रियोसिस (Endometriosis) का दर्द हो सकता है)

पीरियड्स में हाइजीन और मैनेजमेंट

  • प्रोडक्ट बदलें सिर्फ पैड ही नहीं, अब मेन्स्ट्रुअल कप (Menstrual Cups) और टैम्पोन भी उपलब्ध हैं। कप इको-फ्रेंडली होते हैं और 8-10 घंटे तक चल सकते हैं।
  • सही नियम पैड को हर 4-6 घंटे में बदलें, चाहे फ्लो कम ही क्यों न हो। इससे इन्फेक्शन और दुर्गंध नहीं होती।
  • धोने का तरीका अपने प्राइवेट पार्ट को धोने के लिए किसी भी खुशबूदार साबुन या वैजाइनल वाश (Vaginal Wash) का इस्तेमाल न करें। केवल सादा पानी सबसे सुरक्षित है। हमेशा आगे से पीछे (Front to Back) की तरफ पोंछें।

पीरियड्स में आहार: क्या खाएं? (periods mein diet)

  • आयरन खून की कमी को पूरा करने के लिए पालक, गुड़, बीन्स, और खजूर खाएं।
  • विटामिन C आयरन शरीर में अच्छे से सोखा जाए, इसके लिए नींबू पानी या संतरा लें।
  • मैग्नीशियम अगर क्रैम्प्स (ऐंठन) ज्यादा हो, तो डार्क चॉकलेट या केला खाएं, इसमें मैग्नीशियम होता है जो मांसपेशियों को रिलैक्स करता है।
  • कैफीन से बचें चाय और कॉफी से पेट की ऐंठन और बढ़ सकती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल (Menstrual Cycle) कोई बीमारी या मुसीबत नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि आपका शरीर ठीक से काम कर रहा है।अगर आपको लगता है कि आपकी साइकिल बहुत अनियमित है या दर्द बर्दाश्त से बाहर है, तो इसे 'नॉर्मल' मानकर इग्नोर न करें बल्कि एक अच्छे गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लें।

मेंस्ट्रुअल साइकिल के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

पीरियड शुरू होने के कितने दिन बाद ओव्यूलेशन होता है?

 

ओव्यूलेशन आमतौर पर साइकिल के बीच के दिनों में होता है, यानी अगले पीरियड्स से लगभग 12–14 दिन पहले।

मुझे कैसे पता चलेगा कि मैं ओव्यूलेशन में हूं?

 

योनि से पानी जैसा पारदर्शी और चिपचिपा स्राव निकलना, सेक्स करने की इच्छा (Libido) बढ़ना, और बेसल बॉडी टेम्परेचर का हल्का बढ़ जाना।

क्या अनियमित पीरियड्स मासिक धर्म चक्र में समस्या का संकेत हैं?

 

हाँ, यदि पीरियड्स बार-बार बहुत देर से आएँ, बहुत जल्दी आएँ या तारीखें लगातार बदलती रहें, तो यह हार्मोनल असंतुलन या किसी अन्य समस्या का संकेत हो सकता है।

क्या मेंस्ट्रुअल साइकिल में बदलाव स्ट्रेस की वजह से भी हो सकता है?

 

हाँ, लगातार टेंशन से हार्मोन पर असर पड़ सकता है, जिससे पीरियड्स डिले या इर्रेगुलर हो सकते हैं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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