ज्यादातर लोग 'पीरियड्स' (Menstruation) को सिर्फ उन 4-5 दिनों की ब्लीडिंग के तौर पर देखते हैं, लेकिन सच यह है कि यह शरीर के अंदर चलने वाली एक महीने लंबी प्रक्रिया है, और पीरियड्स तो बस उसका 'अंत' है। पीरियड्स साइकिल (Menstrual Cycle) महिलाओं के शरीर का एक ऐसा बैरोमीटर है जो बताता है कि उनकी सेहत कैसी है। menstrual cycle in hindi हम समझेंगे कि पीरियड्स के अलावा बाकी दिनों में आपके शरीर में क्या 'केमिकल बदलाव' (Hormonal changes) चल रहा होता है, कब आप सबसे ज्यादा ऊर्जावान यानी एनर्जी से भरी (energetic) होती हैं और कब आपको आराम करने की जरुरत होती है।
पीरियड्स साइकिल यानी मासिक साइकिल (menstrual cycle) एक नेचुरल प्रोसेस है जिसमें महिला का शरीर हर महीने गर्भधारण यानी प्रेगनेंसी (pregnancy) की तैयारी करता है।
साइकिल की गिनती उस दिन से शुरू होती है जब पीरियड्स आते हैं, और अगले पीरियड्स आने से ठीक एक दिन पहले यह साइकिल पूरी मानी जाती है।
इस दौरान गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम (endometrium) जो कि यूट्रस के अंदर लाइनिंग के रूप में धीरे-धीरे मोटी होती है ताकि ओव्यूलेशन (ovulation) के बाद अगर एग और स्पर्म मिल जाएं और फर्टिलाइज़ेशन (fertilization) हो जाए, तो एम्ब्रियो सुरक्षित रूप से चिपक सके।
अगर फर्टिलाइज़ेशन नहीं होता, तो एंडोमेट्रियम की ज़रूरत नहीं रहती और शरीर इसे पीरियड्स के रूप में बाहर निकाल देता है। 21 से 35 दिनों के बीच आने वाला साइकिल नॉर्मल मानी जाती है, और रेगुलर पीरियड्स का मतलब यह होता है कि महिला की रिप्रोडक्टिव हेल्थ सही है।
डॉक्टर्स इस साइकिल को चार भागों में बांटते हैं। इसे समझने का सबसे आसान तरीका है कि आप इसे 'मौसम' की तरह देखें, जैसे कभी पतझड़ आता है, तो कभी बहार। आइए इसे समझते हैं:
(इसे आप शरीर का 'विंटर' या 'पतझड़' मान सकती हैं) यह वो समय है जिसे हम सब अच्छे से जानते हैं (जब ब्लीडिंग होती है)। होता यह है कि जब पिछले महीने बच्चा नहीं ठहरता, तो शरीर के हॉर्मोन्स एकदम से नीचे गिर जाते हैं।
(यह है आपके शरीर का 'बसंत' या Spring Season) यह फेज वैसे तो पीरियड्स के पहले दिन से ही शुरू हो जाता है, लेकिन इसका असली असर ब्लीडिंग खत्म होने के बाद दिखता है।
(यह है 'समर' या गर्मियों का मौसम – सबसे हॉट और एक्टिव) यह पूरे साइकिल का 'हीरो' मोमेंट है। अगर आप प्रेगनेंसी प्लान कर रही हैं, तो शारीरिक संबंध बनाने के लिए यह सबसे सही समय है।
(यह है 'पतझड़' की शुरुआत) ओव्यूलेशन के बाद से अगले पीरियड तक का समय। यह अक्सर सबसे लंबा और कई महिलाओं के लिए सबसे मुश्किल फेज होता है।
हर महिला की साइकिल अलग होती है, menstrual cycle in hindi के इस लेख में जानेंगे कि कब पीरियड्स नॉर्मल होते हैं और किन परिस्थितियों में डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
आपकी मेंस्ट्रुअल साइकिल (Menstrual Cycle) कोई बीमारी या मुसीबत नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि आपका शरीर ठीक से काम कर रहा है।अगर आपको लगता है कि आपकी साइकिल बहुत अनियमित है या दर्द बर्दाश्त से बाहर है, तो इसे 'नॉर्मल' मानकर इग्नोर न करें बल्कि एक अच्छे गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लें।
ओव्यूलेशन आमतौर पर साइकिल के बीच के दिनों में होता है, यानी अगले पीरियड्स से लगभग 12–14 दिन पहले।
योनि से पानी जैसा पारदर्शी और चिपचिपा स्राव निकलना, सेक्स करने की इच्छा (Libido) बढ़ना, और बेसल बॉडी टेम्परेचर का हल्का बढ़ जाना।
हाँ, यदि पीरियड्स बार-बार बहुत देर से आएँ, बहुत जल्दी आएँ या तारीखें लगातार बदलती रहें, तो यह हार्मोनल असंतुलन या किसी अन्य समस्या का संकेत हो सकता है।
हाँ, लगातार टेंशन से हार्मोन पर असर पड़ सकता है, जिससे पीरियड्स डिले या इर्रेगुलर हो सकते हैं।