Miscarriage in Hindi: मिसकैरेज से बचने के लिए क्या करें?

Last updated: February 23, 2026

Overview

प्रेगनेंसी कंफर्म होते ही खुशी के साथ एक डर भी आ जाता है कि कहीं कुछ गलत न हो जाए। खासकर अगर पहले मिसकैरेज हो चुका है, तो यह डर और भी गहरा होता है। ऐसे में हर ब्लीडिंग पर घबराहट और हर क्रैम्प पर टेंशन होने लगती है।

सबसे पहला सवाल जो मन में आता है कि मैं क्या करूं कि मिसकैरेज न हो? जैसे क्या खाऊं, क्या न खाऊं, कैसे सोऊं, कितना वजन उठा सकती हूँ, कितना चल सकती हूँ जैसी हर चीज़ में कंफ्यूज़न होने लगता है।

Miscarriage meaning in hindi में समझें तो गर्भपात प्रेगनेंसी के पहले 20 हफ्तों में भ्रूण का विकास रुकना है। लेकिन असली सवाल यह है कि इससे बचने के लिए आप क्या कर सकती हैं और क्या आपके कंट्रोल में नहीं है। क्योंकि जब तक यह फर्क साफ नहीं होगा, आप या तो ज़रूरत से ज़्यादा टेंशन लेंगी या फिर ज़रूरी चीज़ें मिस कर देंगी।

इस आर्टिकल में हम बात करेंगे कि मिसकैरेज से बचने के लिए असल में क्या करना चाहिए। प्रेगनेंसी से पहले, प्रेगनेंसी के दौरान कौन सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए, और अगर पहले मिसकैरेज हो चुका है तो क्या स्टेप्स लेने चाहिए।

मिसकैरेज किन कारणों से होता है? (Miscarriage Meaning in Hindi)

मिसकैरेज से बचने के लिए पहले यह समझना ज़रूरी है कि यह होता क्यों है। कारण जानेंगे तो पता चलेगा कि कहाँ एक्शन लेना है।

  • क्रोमोसोम की एब्नार्मेलिटीज होना: miscarriage होने का सबसे बड़ा कारण है क्रोमोसोम में कुछ असामान्यतायें यानी एब्नोर्मलिटीज़ (abnormalities) का होना। करीब 50-60% मिसकैरेज इसी वजह से होते हैं। जब एम्ब्रीओ में क्रोमोसोम की संख्या गलत होती है, तो वो आगे विकसित नहीं हो पाता। यह रैंडम होता है और इसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। लेकिन अगर बार-बार हो रहा है, तो IVF के साथ PGT यानी प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग (Preimplantation Genetic Testing) से इसे पता किया जा सकता है।
  • हॉर्मोन का असंतुलित होना: थायरॉइड की समस्या, प्रोजेस्टेरोन की कमी, या PCOD इत्यादि ये सब मिसकैरेज का रिस्क बढ़ाते हैं। अच्छी बात यह है कि इन्हें टेस्ट और ट्रीटमेंट से ठीक किया जा सकता है।
  • गर्भाशय यानी यूट्रस (Uterus) की समस्या: सेप्टेट यूटेरस, फाइब्रॉएड, या एडेनोमायोसिस इम्प्लांटेशन में दिक्कत कर सकते हैं। इनका इलाज संभव है।
  • ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर: APLA सिंड्रोम जैसी कंडीशन में ब्लड क्लॉट्स बनने से प्लेसेंटा को ब्लड सप्लाई रुक सकती है। ब्लड थिनर से इसे मैनेज किया जाता है।
  • इंफेक्शन और लाइफस्टाइल: कुछ इंफेक्शन, अनकंट्रोल्ड डायबिटीज़, स्मोकिंग, और शराब भी मिसकैरेज का रिस्क बढ़ाते हैं। ये आपके कंट्रोल में हैं और इन्हें आप मैनेज कर सकती हैं।

प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले क्या करें?

मिसकैरेज से बचाव प्रेगनेंसी से पहले शुरू होता है। यह सबसे ज़रूरी स्टेप है जो ज़्यादातर महिलाएं छोड़ देती हैं।

  • प्री-कॉन्सेप्शन चेकअप करवाएं: प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले एक बार डॉक्टर से मिलें। थायरॉइड टेस्ट करवाएं क्योंकि थायरॉइड की समस्या मिसकैरेज का एक बड़ा कारण है और यह आसानी से ठीक हो जाती है। ब्लड शुगर चेक करवाएं क्योंकि अनकंट्रोल्ड डायबिटीज़ रिस्क बढ़ाती है। हीमोग्लोबिन और विटामिन लेवल देखें। अगर कोई क्रॉनिक कंडीशन है जैसे BP या डायबिटीज़, तो उसे कंट्रोल में लाएं।
  • फोलिक एसिड शुरू करें: प्रेगनेंसी से कम से कम 1-3 महीने पहले से फोलिक एसिड 400-800 mcg रोज़ लेना शुरू करें। यह न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स से बचाता है और हेल्दी एम्ब्रीओ डेवलपमेंट में मदद करता है।
  • वज़न मैनेज करें: बहुत ज़्यादा वज़न या बहुत कम वज़न दोनों miscarriage का रिस्क बढ़ाते हैं। हेल्दी BMI (18.5-24.9) में आने की कोशिश करें।
  • स्मोकिंग और शराब बंद करें: ये दोनों एम्ब्रीओ के विकास को प्रभावित करते हैं। प्रेगनेंसी प्लान करते ही छोड़ दें।

Miscarriage से बचने के लिए प्रेगनेंसी के दौरान क्या ध्यान रखें?

प्रेगनेंसी कंफर्म होने के बाद कुछ ज़रूरी बातें हैं जो ध्यान में रखनी चाहिए।

  • समय पर डॉक्टर विज़िट करें: प्रेगनेंसी कंफर्म होते ही डॉक्टर से मिलें। 6-8 हफ्ते में पहला अल्ट्रासाउंड होता है जिसमें हार्टबीट कंफर्म होती है। इसके बाद डॉक्टर जो विज़िट शेड्यूल करें, उसे फॉलो करें।
  • दवाइयां समय पर लें: डॉक्टर ने जो भी दवाइयां दी हैं जैसे फोलिक एसिड, प्रोजेस्टेरोन, थायरॉइड मेडिसिन, उन्हें बिना मिस किए लें। प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट खासकर पहली तिमाही में बहुत ज़रूरी है।
  • बिना पूछे कोई दवाई न लें: सर्दी-खांसी, सिरदर्द, या कोई भी तकलीफ हो, बिना डॉक्टर से पूछे कोई दवाई न लें। कुछ दवाइयां प्रेगनेंसी में सेफ नहीं होतीं।
  • हेल्दी डाइट लें: प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, और विटामिन से भरपूर खाना खाएं। कच्चा मांस, कच्चे अंडे, अनपाश्चराइज़्ड दूध, और कुछ मछलियां अवॉइड करें।
  • हाइड्रेटेड रहें: दिन में 8-10 गिलास पानी पिएं। डिहाइड्रेशन से बचें।
  • स्ट्रेस मैनेज करें: बहुत ज़्यादा स्ट्रेस हॉर्मोन को प्रभावित करता है। योग, मेडिटेशन, या जो भी आपको रिलैक्स देता हो, वो करें। अच्छी नींद लें।
  • कैफीन लिमिट करें: दिन में 200mg से ज़्यादा कैफीन यानी 1-2 कप कॉफी से ज़्यादा न लें।

ये चीज़ें मिसकैरेज का कारण नहीं बनतीं

Miscarriage meaning in hindi में यह भी जानना ज़रूरी है कि किन चीज़ों से मिसकैरेज नहीं होता ताकि आप बेवजह टेंशन न लें।

  • नॉर्मल एक्टिविटी: घर का काम करना, ऑफिस जाना, सीढ़ियां चढ़ना, ये सब नॉर्मल है। अगर डॉक्टर ने मना नहीं किया है, तो आप अपनी रूटीन एक्टिविटी कर सकती हैं।
  • एक्सरसाइज़: हल्की एक्सरसाइज़ जैसे वॉकिंग, स्विमिंग, प्रेगनेंसी योगा आदि सेफ हैं और फायदेमंद भी। बस हैवी वेट लिफ्टिंग और हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज़ अवॉइड करें।
  • शारीरिक सम्बन्ध: नॉर्मल प्रेगनेंसी में सेक्स सेफ है। हालांकि अगर ब्लीडिंग हो रही है या डॉक्टर ने मना किया है, तो अवॉइड करें।
  • स्ट्रेस और इमोशन: रोना, गुस्सा आना, टेंशन होना, ये मिसकैरेज का कारण नहीं बनते। हालांकि लंबे समय का बहुत ज़्यादा स्ट्रेस हेल्थ के लिए अच्छा नहीं है।
  • एक बार भारी सामान उठाना: अगर एम्ब्रीओ हेल्दी है, तो एक बार भारी सामान उठाने से miscarriage नहीं होता। हालांकि रेगुलर हैवी लिफ्टिंग न करें।

बार-बार मिसकैरेज हो तो कौन से टेस्ट करवाएं?

अगर 2 या ज़्यादा बार मिसकैरेज हुआ है, तो इसे recurrent miscarriage कहते हैं। इसमें कारण पता करना ज़रूरी है क्योंकि कारण पता चलने पर टारगेटेड ट्रीटमेंट होता है और अगली प्रेगनेंसी के चांस बहुत बेहतर हो जाते हैं।

दोनों पार्टनर का क्रोमोसोम टेस्ट

  • कैरियोटाइपिंग (Karyotyping – क्रोमोसोम की संरचना की जाँच) से पता चलता है कि क्रोमोसोम की संख्या या बनावट में कोई बदलाव तो नहीं है।
  • इससे जेनेटिक ट्रांसलोकेशन (Genetic Translocation यानी क्रोमोसोम के हिस्सों का आपस में बदल जाना) जैसी समस्या का पता चल सकता है।
  • यह टेस्ट बार-बार गर्भपात या निःसंतानता के मामलों में महत्वपूर्ण होता है।

यूट्रस की जांच

  • हिस्टेरोस्कोपी (Hysteroscopy यानी कैमरे से गर्भाशय के अंदर की सीधी जाँच) द्वारा यूट्रस की आंतरिक परत देखी जाती है।
  • 3D अल्ट्रासाउंड यानी 3D सोनोग्राफी से गर्भाशय की बनावट देखी जाती है।
  • इससे सेप्टम (Septum) यानी यूट्रस के अंदर की अतिरिक्त दीवार, फाइब्रॉइड (Fibroid) यानी मांसपेशी की गांठ, या पॉलिप्स (Polyps) छोटी असामान्य वृद्धि का पता चलता है।

हॉर्मोन टेस्ट

  • थायरॉइड टेस्ट (Thyroid Test) से थायरॉइड ग्रंथि के हार्मोन लेवल की जाँच होती है।
  • प्रोलैक्टिन (Prolactin) यानी दूध बनाने वाले हार्मोन का लेवल देखा जाता है ।
  • एएमएच (AMH) एंटी-म्यूलरियन हार्मोन टेस्ट से ओवरी की एग रिज़र्व क्षमता का पता चलता है।
  • ल्यूटियल फेज़ प्रोजेस्टेरोन (Luteal Phase Progesterone) टेस्ट से ओव्यूलेशन के बाद बनने वाले हार्मोन, जो गर्भ ठहरने में मदद करता है के लेवल का पता लगाया जाता है।

ब्लड क्लॉटिंग टेस्ट

  • एपीएलए पैनल (APLA) यानी एंटी-फॉस्फोलिपिड एंटीबॉडी टेस्ट, जो खून में असामान्य थक्के बनने की प्रवृत्ति जाँचता है।
  • फैक्टर V लाइडन (Factor V Leiden) एक आनुवंशिक यानी जेनेटिक बदलाव जो क्लॉटिंग का जोखिम बढ़ा सकता है।
  • प्रोटीन C और S, ये खून को सामान्य रूप से बहने में मदद करने वाले प्राकृतिक प्रोटीन हैं। इनकी कमी से क्लॉटिंग डिसऑर्डर हो सकता है।

इंफेक्शन स्क्रीनिंग

  • टॉर्च पैनल (TORCH) यानी टॉक्सोप्लाज़्मा, रूबेला, साइटोमेगालो वायरस और हर्पीज जैसे संक्रमणों की जाँच करने वाला समूह टेस्ट होता है।
  • यह टेस्ट गर्भधारण से पहले या बार-बार गर्भपात के मामलों में छिपे संक्रमण की पहचान करने में मदद करता है。

IVF और PGT यानी बार बार होने वाले मिसकैरेज का इलाज

  • PGT क्या है: PGT यानी प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग। इसमें IVF प्रोसेस में बने एम्ब्रीओ की पहले जेनेटिक टेस्टिंग होती है फिर बाद में उसे यूट्रस में ट्रांसफर किया जाता है।
  • PGT क्यों करवाना चाहिए: क्योंकि टेस्टिंग में पता चल जाता है कि कौन से एम्ब्रीओ में क्रोमोसोम नॉर्मल हैं और कौन से में एब्नॉर्मल। सिर्फ नॉर्मल एम्ब्रीओ ट्रांसफर किए जाते हैं। इससे मिसकैरेज का रिस्क काफी कम हो जाता है।
  • PGT किसे करवानी चाहिए?: जिन महिलाओं के 2 या 2 से ज़्यादा miscarriage हो चुके हों, 35+ उम्र में माँ बन रही हों, या जब किसी पार्टनर में क्रोमोसोमल ट्रांसलोकेशन हो।

एक्सपर्ट की सलाह

मिसकैरेज से बचने के लिए जो आपके कंट्रोल में है, वो करें और जो कंट्रोल में नहीं है, उसके लिए खुद को दोष न दें। Miscarriage meaning in hindi पढ़ कर, प्रेगनेंसी प्लान करने से पहले प्री-कॉन्सेप्शन चेकअप करवाएं। थायरॉइड, ब्लड शुगर, और विटामिन लेवल चेक करें। फोलिक एसिड 1-3 महीने पहले से शुरू करें। प्रेगनेंसी में समय पर डॉक्टर विज़िट करें, दवाइयां न मिस करें, और हेल्दी लाइफस्टाइल रखें। अगर पहले Miscarriage हो चुका है, तो अगली बार जल्दी डॉक्टर से मिलें और प्रोजेस्टेरोन सपोर्ट लें।

अगर बार-बार मिसकैरेज हो रहा है, तो फर्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलें। जांच से कारण पता चलता है और IVF with PGT जैसे एडवांस्ड ऑप्शन उपलब्ध हैं। और सबसे ज़रूरी 50-60% miscarriage क्रोमोसोमल एब्नॉर्मलिटी से होते हैं जो रैंडम होती है, इसमें आपकी कोई गलती नहीं होती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Miscarriage का हिंदी में क्या मतलब है?

 

Miscarriage को हिंदी में गर्भपात कहते हैं। यह तब होता है जब प्रेगनेंसी के पहले 20 हफ्तों में भ्रूण का विकास रुक जाता है।

मिसकैरेज से बचने के लिए क्या खाएं?

 

फोलिक एसिड, आयरन, प्रोटीन, और विटामिन से भरपूर डाइट लें। हरी सब्ज़ियां, दालें, अंडे, दूध, और फल खाएं। कच्चा मांस और अनपाश्चराइज़्ड दूध अवॉइड करें।

प्रेगनेंसी में कौन से टेस्ट ज़रूरी हैं?

 

थायरॉइड, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन, और यूरिन टेस्ट ज़रूरी हैं। 6-8 हफ्ते में अल्ट्रासाउंड से हार्टबीट कंफर्म करें।

क्या एक्सरसाइज़ से मिसकैरेज होता है?

 

नहीं, हल्की एक्सरसाइज़ सेफ है। वॉकिंग, स्विमिंग, और प्रेगनेंसी योगा फायदेमंद हैं। बस हैवी वेट लिफ्टिंग अवॉइड करें।

पहले मिसकैरेज हो चुका है, क्या अगली बार होगा?

 

ज़रूरी नहीं। 85% महिलाएं जिन्हें एक मिसकैरेज हुआ है, अगली बार हेल्दी प्रेगनेंसी कैरी करती हैं।

बार-बार मिसकैरेज हो तो क्या करें?

 

2 या ज़्यादा मिसकैरेज के बाद फर्टिलिटी एक्सपर्ट से मिलें। क्रोमोसोमल टेस्ट, यूटेरस की जांच, और ब्लड क्लॉटिंग टेस्ट करवाएं।

IVF with PGT क्या है?

 

इसमें एम्ब्रीओ की जेनेटिक टेस्टिंग होती है। सिर्फ नॉर्मल क्रोमोसोम वाले एम्ब्रीओ ट्रांसफर होते हैं, जिससे मिसकैरेज रिस्क कम हो जाता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
© 2026 Indira IVF Hospital Limited. All Rights Reserved. T&C Apply | Privacy Policy| *Disclaimer