डिलीवरी या प्रेगनेंसी टर्मिनेशन के बाद ब्लीडिंग होना कई महिलाओं के लिए डर पैदा करने वाला अनुभव होता है। इन दोनों कंडीशन में कई दिनों तक ब्लीडिंग होती है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या यह नॉर्मल है या कोई खतरे की बात है? कई महिलाएँ पोस्टपार्टम ब्लीडिंग और MTP किट से होने वाली ब्लीडिंग को एक ही समझ लेती हैं। असल में पोस्टपार्टम ब्लीडिंग और MTP किट के बाद होने वाली ब्लीडिंग दोनों अलग कंडीशन हैं, उनके कारण भी अलग होते हैं और उनका मैनेजमेंट भी अलग तरीके से किया जाता है। चलिए समझते हैं कि पोस्टपार्टम ब्लीडिंग क्या होती है और mtp kit use in hindi जिससे कि दोनों को लेकर आपको कोई भ्रम न हो।
पोस्टपार्टम ब्लीडिंग, डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में स्वाभाविक रूप से होती है। डिलीवरी के बाद गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus) तुरंत अपनी पुरानी अवस्था में वापस नहीं लौटता, बल्कि धीरे-धीरे सिकुड़ता है। इस प्रोसेस के दौरान यूट्रस के अंदर जमा हुआ खून, टिश्यू और बाकी अवशेष बाहर निकलते हैं। इसी सामान्य और नैचुरली होने वाली ब्लीडिंग को लोकिया (lochia) कहा जाता है। लोकिया कई हफ्तों तक अलग-अलग मात्रा और रंग में आ सकती है। यह ब्लीडिंग कोई बीमारी नहीं होती, बल्कि शरीर की रिकवरी और सफाई की प्रक्रिया का हिस्सा होती है।
डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग होने के पीछे कई शारीरिक कारण होते हैं। इन्हें समझना ज़रूरी है, ताकि नॉर्मल और असामान्य स्थिति में फर्क किया जा सके।
डिलीवरी के बाद पहले कुछ दिनों में ब्लीडिंग अपेक्षाकृत ज़्यादा हो सकती है, क्योंकि गर्भाशय तेज़ी से सिकुड़ रहा होता है। इसके बाद यह धीरे-धीरे कम होती जाती है।
कुल मिलाकर, अगर 4 से 6 हफ्तों के भीतर बहाव धीरे-धीरे कम होता जा रहा है और उसके साथ तेज़ दर्द, बदबू या अचानक बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग नहीं हो रही, तो इसे शरीर की सामान्य रिकवरी प्रक्रिया माना जाता है।
अब यहाँ से हम दूसरी स्थिति को समझते हैं। MTP किट ऐसी दवाइयों का कॉम्बिनेशन होती है, जिसका उपयोग शुरुआती गर्भावस्था को मेडिकल तरीके से समाप्त करने के लिए किया जाता है। इस प्रोसेस को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (medical termination of pregnancy) कहते हैं। mtp kit use in hindi ऐसे समझिये कि यह सिर्फ़ तय समय सीमा और डॉक्टर की सलाह के साथ ही सुरक्षित मानी जाती है।
MTP किट लेने के बाद ब्लीडिंग का अनुभव हर महिला के लिए थोड़ा अलग हो सकता है, और यही वजह है कि इसे लेकर भ्रम ज़्यादा होता है। MTP kit use in hindi में जानकारी के अनुसार कई महिलाओं को लगता है कि MTP के बाद ब्लीडिंग बिल्कुल पीरियड जैसा होगी, जबकि असल में यह शरीर की एक अलग प्रक्रिया होती है।
MTP किट लेने के बाद यूट्रस दवाइयों के असर से सिकुड़ता है और गर्भ से जुड़े टिश्यू को बाहर निकालता है, इसी वजह से यह ब्लीडिंग होती है।
आमतौर पर यह ब्लीडिंग एक तय पैटर्न में बदलती हुई दिखती है:
यह समझना ज़रूरी है कि MTP किट के बाद होने वाली ब्लीडिंग कोई “पीरियड” नहीं होती, बल्कि दवा के ज़रिये (medically induced) होने वाली प्रक्रिया का हिस्सा होती है। इसलिए इसका रंग, मात्रा और समय पीरियड से अलग हो सकता है, और दोनों की आपस में तुलना करना सही नहीं होता।
MTP किट लेने के बाद शरीर को गर्भ से जुड़े टिश्यू बाहर निकालने और यूट्रस को साफ़ करने में कुछ समय लगता है। ऐसे में जब ब्लीडिंग के दौरान निम्न लक्षण दिखाई दें तो वह कंडीशन नॉर्मल होती है।
कुछ स्थितियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें “नॉर्मल” मानकर छोड़ देना सुरक्षित नहीं होता। अगर नीचे दिए गए संकेत दिखें, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना ज़रूरी है।
MTP kit use in hindi में समझने के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि MTP किट के बाद ब्लीडिंग होना अपने आप में खतरा नहीं है, लेकिन शरीर के संकेतों को ध्यान से सुनना ज़रूरी होता है। जहाँ ब्लीडिंग धीरे-धीरे कम हो रही हो और शरीर संभलता हुआ लगे घबराना नहीं चाहिये लेकिन जहाँ कंडीशन बिगड़ती दिखाई दे तब इंतज़ार नहीं करना चाहिए और तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
MTP किट के बाद शरीर को हार्मोनल संतुलन में वापस आने में कुछ समय लगता है, इसलिए अगला पीरियड तुरंत नहीं आता। आमतौर पर MTP किट के 4 से 6 हफ्तों के भीतर अगला पीरियड आ सकता है, लेकिन यह हर महिला में थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है। अगर 6–8 हफ्तों तक पीरियड न आए या साथ में पेट दर्द या असामान्य ब्लीडिंग हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी होता है।
पोस्टपार्टम ब्लीडिंग और MTP किट से होने वाली ब्लीडिंग दोनों शरीर की अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं। इंटरनेट पर पढ़ कर खुद से इलाज़ शुरू करने के बजाय समय पर डॉक्टर की सही सलाह से ज़्यादातर स्थितियाँ सुरक्षित रूप से संभाली जा सकती हैं।
आमतौर पर 4 से 6 हफ्तों तक हल्की से मध्यम ब्लीडिंग नॉर्मल मानी जाती है।
अक्सर 7 से 10 दिन, लेकिन कुछ महिलाओं में हल्की स्पॉटिंग थोड़ी ज़्यादा देर तक रह सकती है।
कुछ मामलों में हो सकती है, इसलिए डॉक्टर की निगरानी ज़रूरी होती है।
नहीं, पोस्टपार्टम ब्लीडिंग शरीर की सफाई की प्रक्रिया होती है, पीरियड नहीं।