पोस्टपार्टम ब्लीडिंग क्या है? – कारण और MTP Kit उपयोग

Last updated: December 22, 2025

Overview

डिलीवरी या प्रेगनेंसी टर्मिनेशन के बाद ब्लीडिंग होना कई महिलाओं के लिए डर पैदा करने वाला अनुभव होता है। इन दोनों कंडीशन में कई दिनों तक ब्लीडिंग होती है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या यह नॉर्मल है या कोई खतरे की बात है? कई महिलाएँ पोस्टपार्टम ब्लीडिंग और MTP किट से होने वाली ब्लीडिंग को एक ही समझ लेती हैं। असल में पोस्टपार्टम ब्लीडिंग और MTP किट के बाद होने वाली ब्लीडिंग दोनों अलग कंडीशन हैं, उनके कारण भी अलग होते हैं और उनका मैनेजमेंट भी अलग तरीके से किया जाता है। चलिए समझते हैं कि पोस्टपार्टम ब्लीडिंग क्या होती है और mtp kit use in hindi जिससे कि दोनों को लेकर आपको कोई भ्रम न हो।

पोस्टपार्टम ब्लीडिंग क्या होती है? (Postpartum Bleeding Meaning in Hindi)

पोस्टपार्टम ब्लीडिंग, डिलीवरी के बाद महिला के शरीर में स्वाभाविक रूप से होती है। डिलीवरी के बाद गर्भाशय यानी यूट्रस (uterus) तुरंत अपनी पुरानी अवस्था में वापस नहीं लौटता, बल्कि धीरे-धीरे सिकुड़ता है। इस प्रोसेस के दौरान यूट्रस के अंदर जमा हुआ खून, टिश्यू और बाकी अवशेष बाहर निकलते हैं। इसी सामान्य और नैचुरली होने वाली ब्लीडिंग को लोकिया (lochia) कहा जाता है। लोकिया कई हफ्तों तक अलग-अलग मात्रा और रंग में आ सकती है। यह ब्लीडिंग कोई बीमारी नहीं होती, बल्कि शरीर की रिकवरी और सफाई की प्रक्रिया का हिस्सा होती है।

पोस्टपार्टम ब्लीडिंग के मुख्य कारण

डिलीवरी के बाद ब्लीडिंग होने के पीछे कई शारीरिक कारण होते हैं। इन्हें समझना ज़रूरी है, ताकि नॉर्मल और असामान्य स्थिति में फर्क किया जा सके।

  • गर्भाशय का पूरी तरह सिकुड़ न पाना - अगर यूट्रस ठीक से सिकुड़ नहीं पाता, तो अंदर की नसें बंद नहीं होतीं और ब्लीडिंग ज़्यादा समय तक चल सकती है।
  • प्लेसेंटा का कोई हिस्सा रह जाना - डिलीवरी के दौरान अगर प्लेसेंटा पूरी तरह बाहर न निकले, तो शरीर उसे निकालने की कोशिश करता है, जिससे ब्लीडिंग बढ़ सकती है।
  • इन्फेक्शन का होना- पोस्टपार्टम इन्फेक्शन में ब्लीडिंग के साथ बुखार, पेट दर्द और बदबूदार डिस्चार्ज भी दिख सकता है।
  • डिलीवरी के बाद जल्दी ज़्यादा मेहनत - शरीर को पूरा आराम न मिलने पर ब्लीडिंग दोबारा तेज़ हो सकती है, जो रिकवरी को धीमा कर देती है।

पोस्टपार्टम ब्लीडिंग कितने समय तक नॉर्मल मानी जाती है?

डिलीवरी के बाद पहले कुछ दिनों में ब्लीडिंग अपेक्षाकृत ज़्यादा हो सकती है, क्योंकि गर्भाशय तेज़ी से सिकुड़ रहा होता है। इसके बाद यह धीरे-धीरे कम होती जाती है।

  • शुरुआत के कुछ दिनों में खून का रंग गहरा और बहाव अपेक्षाकृत ज़्यादा रहता है, जो इस समय की रिकवरी का सामान्य हिस्सा होता है।
  • अगले हफ्तों में वही बहाव धीरे-धीरे गुलाबी या हल्के भूरे रंग में बदलने लगता है, जो इस बात का संकेत होता है कि शरीर ठीक दिशा में रिकवर कर रहा है।
  • इसके बाद खून की जगह हल्का पीला या सफेद-सा डिस्चार्ज दिख सकता है, जो आमतौर पर ब्लीडिंग के खत्म होने की ओर इशारा करता है।

कुल मिलाकर, अगर 4 से 6 हफ्तों के भीतर बहाव धीरे-धीरे कम होता जा रहा है और उसके साथ तेज़ दर्द, बदबू या अचानक बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग नहीं हो रही, तो इसे शरीर की सामान्य रिकवरी प्रक्रिया माना जाता है।

MTP किट क्या होती है? (MTP kit use in hindi)

अब यहाँ से हम दूसरी स्थिति को समझते हैं। MTP किट ऐसी दवाइयों का कॉम्बिनेशन होती है, जिसका उपयोग शुरुआती गर्भावस्था को मेडिकल तरीके से समाप्त करने के लिए किया जाता है। इस प्रोसेस को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (medical termination of pregnancy) कहते हैं। mtp kit use in hindi ऐसे समझिये कि यह सिर्फ़ तय समय सीमा और डॉक्टर की सलाह के साथ ही सुरक्षित मानी जाती है।

MTP किट के बाद ब्लीडिंग क्यों होती है?

MTP किट लेने के बाद ब्लीडिंग का अनुभव हर महिला के लिए थोड़ा अलग हो सकता है, और यही वजह है कि इसे लेकर भ्रम ज़्यादा होता है। MTP kit use in hindi में जानकारी के अनुसार कई महिलाओं को लगता है कि MTP के बाद ब्लीडिंग बिल्कुल पीरियड जैसा होगी, जबकि असल में यह शरीर की एक अलग प्रक्रिया होती है।

MTP किट लेने के बाद यूट्रस दवाइयों के असर से सिकुड़ता है और गर्भ से जुड़े टिश्यू को बाहर निकालता है, इसी वजह से यह ब्लीडिंग होती है।

आमतौर पर यह ब्लीडिंग एक तय पैटर्न में बदलती हुई दिखती है:

  • शुरुआत के एक-दो दिनों में फ्लो ज़्यादा हो सकता है और कभी-कभी थक्के यानी क्लॉट भी दिख सकते हैं, क्योंकि शरीर एक साथ ज़्यादा टिश्यू बाहर निकाल रहा होता है।
  • इसके बाद ब्लीडिंग धीरे-धीरे हल्की होने लगती है और कुछ दिनों में यह पीरियड जैसे बहाव में बदल सकती है।
  • कई महिलाओं में आख़िर में सिर्फ़ हल्की स्पॉटिंग रह जाती है, जो यह संकेत देती है कि गर्भाशय की सफाई लगभग पूरी हो चुकी है।

यह समझना ज़रूरी है कि MTP किट के बाद होने वाली ब्लीडिंग कोई “पीरियड” नहीं होती, बल्कि दवा के ज़रिये (medically induced) होने वाली प्रक्रिया का हिस्सा होती है। इसलिए इसका रंग, मात्रा और समय पीरियड से अलग हो सकता है, और दोनों की आपस में तुलना करना सही नहीं होता।

कैसे जानें कि MTP किट के बाद हो रही ब्लीडिंग नॉर्मल है ?

MTP किट लेने के बाद शरीर को गर्भ से जुड़े टिश्यू बाहर निकालने और यूट्रस को साफ़ करने में कुछ समय लगता है। ऐसे में जब ब्लीडिंग के दौरान निम्न लक्षण दिखाई दें तो वह कंडीशन नॉर्मल होती है।

  • किट लेने के बाद कुछ दिनों तक ब्लीडिंग होना, जो शुरुआत में ज़्यादा और फिर धीरे-धीरे कम होती जाए।
  • ब्लीडिंग के साथ हल्की से मध्यम पेट दर्द या मरोड़, जो गर्भाशय के सिकुड़ने की वजह से होती है।
  • शुरुआती दिनों में छोटे-मोटे थक्के निकलना, खासकर जब शरीर ज़्यादा टिश्यू बाहर निकाल रहा हो।
  • कुछ दिनों बाद ब्लीडिंग का spotting में बदल जाना, जो यह संकेत देता है कि प्रक्रिया पूरी होने की ओर है।

MTP किट के कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी हो जाता है?

कुछ स्थितियाँ ऐसी होती हैं जिन्हें “नॉर्मल” मानकर छोड़ देना सुरक्षित नहीं होता। अगर नीचे दिए गए संकेत दिखें, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना ज़रूरी है।

  • ब्लीडिंग इतनी ज़्यादा हो कि हर एक-दो घंटे में पैड पूरी तरह भीग जाए और कई घंटों तक कम न हो।
  • पेट में तेज़ और लगातार दर्द रहे, जो सामान्य दर्द निवारक दवा से भी न संभले।
  • बुखार, ठंड लगना या बदबूदार डिस्चार्ज दिखाई दे, क्योंकि यह इन्फेक्शन का संकेत हो सकता है।
  • 10–14 दिनों के बाद भी ब्लीडिंग कम होने की बजाय वैसी ही बनी रहे या बढ़ती जाए।
  • चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस होना, जो ज़्यादा खून बहने की ओर इशारा कर सकता है।

MTP kit use in hindi में समझने के लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि MTP किट के बाद ब्लीडिंग होना अपने आप में खतरा नहीं है, लेकिन शरीर के संकेतों को ध्यान से सुनना ज़रूरी होता है। जहाँ ब्लीडिंग धीरे-धीरे कम हो रही हो और शरीर संभलता हुआ लगे घबराना नहीं चाहिये लेकिन जहाँ कंडीशन बिगड़ती दिखाई दे तब इंतज़ार नहीं करना चाहिए और तुरंत अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

MTP किट के बाद रिकवरी के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

  • शरीर को पूरा आराम दें, क्योंकि गर्भाशय को सिकुड़ने और अंदर से ठीक होने में समय लगता है, और इस दौरान ज़रूरत से ज़्यादा मेहनत ब्लीडिंग को बढ़ा सकती है।
  • ब्लीडिंग के पैटर्न पर नज़र रखें, खासकर यह देखें कि समय के साथ बहाव कम हो रहा है या नहीं, क्योंकि धीरे-धीरे कम होना सही रिकवरी का संकेत होता है।
  • पानी और पोषण का खास ख्याल रखें, क्योंकि ब्लीडिंग के बाद शरीर में कमजोरी महसूस हो सकती है और पर्याप्त तरल, आयरन और संतुलित भोजन रिकवरी को तेज़ करते हैं।
  • कुछ दिनों तक यौन संबंध और अंदरूनी सफ़ाई से बचें, ताकि यूट्रस को इन्फेक्शन से बचाया जा सके और अंदर की परत को ठीक होने का समय मिल सके।
  • डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयाँ समय पर लें, खासकर अगर दर्द या इन्फेक्शन से बचाव के लिए कुछ दवाइयाँ दी गई हों, क्योंकि इन्हें छोड़ना रिकवरी को प्रभावित कर सकता है।
  • फॉलो-अप को हल्के में न लें, क्योंकि MTP किट के बाद यह सुनिश्चित करना ज़रूरी होता है कि प्रोसेस पूरी तरह सफल हुआ है और गर्भाशय यानी यूट्रस पूरी तरह साफ़ हो चुका है।

MTP किट के बाद अगला पीरियड कब आता है?

MTP किट के बाद शरीर को हार्मोनल संतुलन में वापस आने में कुछ समय लगता है, इसलिए अगला पीरियड तुरंत नहीं आता। आमतौर पर MTP किट के 4 से 6 हफ्तों के भीतर अगला पीरियड आ सकता है, लेकिन यह हर महिला में थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है। अगर 6–8 हफ्तों तक पीरियड न आए या साथ में पेट दर्द या असामान्य ब्लीडिंग हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी होता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

पोस्टपार्टम ब्लीडिंग और MTP किट से होने वाली ब्लीडिंग दोनों शरीर की अलग-अलग प्रक्रियाएँ हैं। इंटरनेट पर पढ़ कर खुद से इलाज़ शुरू करने के बजाय समय पर डॉक्टर की सही सलाह से ज़्यादातर स्थितियाँ सुरक्षित रूप से संभाली जा सकती हैं।

पोस्टपार्टम ब्लीडिंग और MTP किट के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पोस्टपार्टम ब्लीडिंग कितने दिन तक नॉर्मल होती है?

 

आमतौर पर 4 से 6 हफ्तों तक हल्की से मध्यम ब्लीडिंग नॉर्मल मानी जाती है।

MTP किट लेने के बाद कितने दिन ब्लीडिंग होती है?

 

अक्सर 7 से 10 दिन, लेकिन कुछ महिलाओं में हल्की स्पॉटिंग थोड़ी ज़्यादा देर तक रह सकती है।

क्या MTP किट से बहुत ज़्यादा ब्लीडिंग हो सकती है?

 

कुछ मामलों में हो सकती है, इसलिए डॉक्टर की निगरानी ज़रूरी होती है।

क्या पोस्टपार्टम ब्लीडिंग और पीरियड एक जैसे होते हैं?

 

नहीं, पोस्टपार्टम ब्लीडिंग शरीर की सफाई की प्रक्रिया होती है, पीरियड नहीं।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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