एजूस्पर्मिया क्या है? निल स्पर्म काउंट के कारण, जांच और इलाज

Last updated: September 02, 2026

सारांश (Overview)

सीमेन एनालिसिस में स्पर्म काउंट शून्य आना देखकर सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि स्पर्म कहां बन रहे हैं और उन्हें बाहर आने में कोई दिक्कत तो नहीं है। कई मामलों में टेस्टिस में स्पर्म बनते हैं, लेकिन रास्ते में रुकावट होने की वजह से सीमेन में नहीं पहुंच पाते। वहीं कुछ मामलों में स्पर्म बनने की प्रक्रिया ही प्रभावित होती है। दोनों स्थितियों की जांच और इलाज अलग होता है। इसीलिए सिर्फ रिपोर्ट में शून्य देखकर नतीजा निकालना सही नहीं है। इस गाइड में जानेंगे कि एज़ूस्पर्मिया क्यों होता है, इसकी जांच कैसे की जाती है, इलाज के क्या विकल्प हैं और जरूरत पड़ने पर स्पर्म कैसे निकाले जाते हैं। 

Azoospermia (Nil Sperm Count) क्या होता है?

अगर सीमेन एनालिसिस में एक भी स्पर्म नहीं मिलता, तो इसे एज़ूस्पर्मिया कहते हैं। इसे ही कॉमन लैंग्वेज में निल स्पर्म काउंट कहा जाता है। लेकिन सिर्फ एक रिपोर्ट में स्पर्म न मिलने से यह तय नहीं किया जाता कि स्पर्म बन ही नहीं रहे हैं।

इसे कन्फर्म करने के लिए आमतौर पर कम से कम दो बार सीमेन एनालिसिस किया जाता है। सैंपल को सेंट्रीफ्यूज करके दोबारा भी देखा जाता है, क्योंकि कई बार स्पर्म की संख्या इतनी कम होती है कि नॉर्मल टेस्ट में दिखाई नहीं देते।

Azoospermia होने के क्या कारण हैं?

इसकी वजह आमतौर पर तीन तरह की हो सकती है। कुछ पुरुषों में स्पर्म बनते हैं, लेकिन बाहर आने के रास्ते में रुकावट होती है। कुछ में स्पर्म बनने की प्रक्रिया ही प्रभावित होती है। इसके अलावा हार्मोन या जेनेटिक वजह भी हो सकती है। 

रास्ते में रुकावट वाले कारण

इसे ऑब्सट्रक्टिव एजूस्पर्मिया कहते हैं, जिसमें स्पर्म बनते तो हैं पर बाहर आने का रास्ता बंद होता है। नसबंदी, पुराना इंफेक्शन, हर्निया या पेल्विक सर्जरी, और जन्म से वास डिफरेंस का न होना इसके आम कारण हैं।

स्पर्म बनने में कमी वाले कारण

इसे नॉन-ऑब्सट्रक्टिव एजूस्पर्मिया कहते हैं, जिसमें टेस्टिस में स्पर्म बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। बचपन में टेस्टिस का नीचे न उतरना, चोट या इंफेक्शन, वैरिकोसील और कीमोथेरेपी इसके कारण हो सकते हैं।

हार्मोनल और जेनेटिक कारण

कभी कभी पिट्यूटरी ग्रंथि से मिलने वाले हार्मोनल संकेत कम होने की वजह से टेस्टिस में स्पर्म बनना प्रभावित होता है। ऐसी कंडीशन में दवाओं से फायदा हो सकता है। इसके अलावा क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम और Y क्रोमोसोम माइक्रोडिलीशन जैसी जेनेटिक वजहें भी हो सकती हैं। 

 

प्रकार

इसमें होता क्या है

आगे का रास्ता

ऑब्सट्रक्टिव

स्पर्म बनते हैं, रास्ता बंद है

सर्जरी से रुकावट खोलना या स्पर्म निकालना

नॉन-ऑब्सट्रक्टिव

स्पर्म बनने में कमी है

टेस्टिस से स्पर्म खोजना, फिर ICSI से स्पर्म निकालना

हार्मोनल

संकेत देने वाले हार्मोन कम हैं

दवाओं से इलाज संभव

Azoospermia की जांच कैसे की जाती है?

सीमेन एनालिसिस और शारीरिक जांच

सबसे पहले सीमेन एनालिसिस दोबारा किया जाता है और साथ में शारीरिक जांच होती है। इसमें टेस्टिस का आकार और वास डिफरेंस देखा जाता है। अगर सीमेन की मात्रा भी बहुत कम है, तो यह रास्ते में रुकावट होने का सिग्नल हो सकता है। 

हार्मोन टेस्ट

शुरुआती हार्मोन जांच में FSH और टेस्टोस्टेरोन देखे जाते हैं। FSH का बढ़ा होना अक्सर स्पर्म बनने में कमी की तरफ इशारा करता है।

जेनेटिक जांच

नॉन-ऑब्सट्रक्टिव मामलों में कैरियोटाइप और Y क्रोमोसोम माइक्रोडिलीशन की जांच होती है, और जन्मजात रुकावट के केस में सिस्टिक फाइब्रोसिस से जुड़ी जांच की जाती है। सिर्फ रुकावट है या नहीं, यह पता करने के लिए टेस्टिकुलर बायोप्सी रूटीन जांच नहीं है।

Azoospermia का इलाज कैसे किया जाता है?

रुकावट को दूर करना

अगर स्पर्म के बाहर आने का रास्ता बंद है, तो माइक्रोसर्जरी से उसे दोबारा जोड़ा जा सकता है। नसबंदी के बाद संतान चाहने वालों में यह एक विकल्प है। दूसरा ऑप्शन सीधे स्पर्म निकालकर एआरटी (ART) करना है। 

हार्मोनल इलाज

अगर वजह हार्मोन की कमी है, तो दवाओं से स्पर्म बनना शुरू हो सकता है। लेकिन यह हर केस में काम नहीं करता। नॉन-ऑब्सट्रक्टिव मामलों में सर्जरी से पहले ऐसी दवाएं देने के फायदे का डाटा भी सीमित हैं

लाइफस्टाइल और अन्य कारणों का इलाज

धूम्रपान, शराब, ज्यादा गर्मी और कुछ दवाएं स्पर्म बनने पर असर डाल सकती हैं। इसलिए इन्हें कम करना या बंद करना भी इलाज का हिस्सा है। अगर कोई इंफेक्शन है, तो उसका इलाज भी किया जाता है। 

Azoospermia में स्पर्म निकालने के क्या विकल्प हैं?

जब स्पर्म सीमेन में नहीं आ रहे, तो उन्हें सीधे एपिडिडाइमिस या टेस्टिस से निकाला जाता है। कौन सी टेक्निक चुननी है, यह पेशेंट की कंडीशन पर निर्भर करता है।

PESA

इसमें एपिडिडाइमिस से सुई की मदद से स्पर्म निकाले जाते हैं। यह टेक्निक आमतौर पर रुकावट वाले एजूस्पर्मिया में इस्तेमाल की जाती है। 

TESA

इसमें टेस्टिस से सुई की मदद से छोटा सैंपल लिया जाता है और उसमें स्पर्म खोजे जाते हैं। यह भी ज्यादातर रुकावट वाले मामलों में उपयोगी है। 

TESE और Micro-TESE

TESE में टेस्टिस से टिश्यू का छोटा हिस्सा निकालकर लैब में स्पर्म खोजे जाते हैं। Micro-TESE में माइक्रोस्कोप की मदद से स्पर्म वाली नलियों को पहचानकर उन्हीं से टिश्यू लिया जाता है। गाइडलाइन के अनुसार नॉन-ऑब्सट्रक्टिव मामलों में Micro-TESE करनी चाहिए, क्योंकि एक मेटा एनालिसिस में यह सामान्य TESE के मुकाबले करीब 1.5 गुना ज्यादा बार सफल पाई गई है। 

 

टेक्निक

कहां से स्पर्म लिया जाता है

किन मामलों में

PESA

एपिडिडाइमिस से सुई द्वारा

रुकावट वाले मामले

TESA

टेस्टिस से सुई द्वारा

ज्यादातर रुकावट वाले मामले

TESE

टेस्टिस से ऊतक लेकर

दोनों कंडीशन में

Micro-TESE

माइक्रोस्कोप की मदद से टेस्टिस से

नॉन-ऑब्सट्रक्टिव मामलों में पसंदीदा

Azoospermia में IVF और ICSI की क्या भूमिका है?

जब सीमेन में स्पर्म ही नहीं मिल रहे, तो IVF कैसे होगा? यहां ICSI की जरूरत पड़ती है। टेस्टिस या एपिडिडाइमिस से निकाले गए स्पर्म की संख्या बहुत कम होती है, इसलिए सामान्य IVF की तरह लाखों स्पर्म एग के आसपास छोड़ना काम नहीं करता। ICSI में एक स्पर्म को सीधे एग के अंदर इंजेक्ट किया जाता है।

गाइडलाइन के अनुसार ICSI के लिए ताजे और फ्रीज किए गए, दोनों तरह के स्पर्म इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसलिए कई मामलों में स्पर्म पहले निकालकर फ्रीज कर लिए जाते हैं और बाद में ICSI किया जाता है।

Azoospermia में प्रेगनेंसी की संभावना कितनी होती है?

यहां सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि एज़ूस्पर्मिया किस तरह का है। अगर रुकावट की वजह से सीमेन में स्पर्म नहीं आ रहे हैं, तो स्पर्म मिलने की संभावना काफी अच्छी रहती है, क्योंकि टेस्टिस में स्पर्म बनने की प्रक्रिया चल रही होती है।

नॉन-ऑब्सट्रक्टिव मामलों में बात थोड़ी अलग होती है। यहां स्पर्म मिलने की संभावना कम होती है और हर पेशेंट में अलग हो सकती है। इसके अलावा प्रेगनेंसी की संभावना महिला पार्टनर की उम्र और एग की क्वालिटी पर भी निर्भर करती है। इसलिए सिर्फ एजूस्पर्मिया की रिपोर्ट देखकर प्रेगनेंसी की संभावना ठीक से सही नहीं बताई जा सकती।

Azoospermia के इलाज के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?

  • सारी रिपोर्ट एक फाइल में रखें, क्योंकि इलाज की दिशा पिछली जांचों से तय होती है।
  • धूम्रपान और शराब पूरी तरह छोड़ें।
  • टेस्टिस के आसपास गर्मी बढ़ाने वाली चीजों से बचें, जैसे टाइट कपड़े और गोद में लैपटॉप।
  • इंटरनेट पर मिलने वाली ताकत की दवाएं और तेल खुद से शुरू न करें।
  • महिला पार्टनर की जांच साथ-साथ करवाएं, क्योंकि इलाज की योजना दोनों की रिपोर्ट देखकर बनती है।
  • सर्जरी से पहले डॉक्टर से पूछें कि स्पर्म न मिलने पर आगे क्या विकल्प रहेंगे।

Azoospermia के लिए डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?

एक साल तक कोशिश करने के बाद भी प्रेग्नेंसी नहीं ठहर रही है, तो दोनों पार्टनर की जांच करवानी चाहिए। महिला पार्टनर की उम्र 35 साल से ज्यादा है, तो छह महीने की कोशिश के बाद ही डॉक्टर से मिलना बेहतर है।

अगर रिपोर्ट में स्पर्म काउंट ज़ीरो आया है, टेस्टिस का आकार छोटा है, बचपन में टेस्टिस नीचे नहीं उतरा था, या कीमोथेरेपी और पेल्विक सर्जरी की हिस्ट्री रही है, तो यूरोलॉजिस्ट या एंड्रोलॉजिस्ट से सलाह लें। जल्दी जांच होने से इलाज के विकल्प भी ज्यादा रहते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

एज़ूस्पर्मिया का मतलब है वीर्य में एक भी स्पर्म न मिलना, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि शरीर स्पर्म बना ही नहीं रहा। वजह रुकावट भी हो सकती है या स्पर्म बनने में कमी भी, और इसी के आधार पर इलाज तय होता है।

जांच में दोबारा सीमेन एनालिसिस, FSH, टेस्टोस्टेरोन और जरूरत पड़ने पर जेनेटिक टेस्ट किए जाते हैं। रुकावट में सर्जरी से रास्ता खोला जा सकता है, जबकि दूसरे मामलों में PESA, TESA, TESE या Micro-TESE से स्पर्म निकाले जाते हैं। मिले हुए स्पर्म से ICSI के जरिए प्रेगनेंसी संभव है, इसलिए रिपोर्ट देखकर घबराने के बजाय सही जांच और इलाज करवाना जरूरी है। 

Azoospermia के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या Azoospermia का इलाज संभव है?

क्या Nil Sperm Count के बाद भी प्रेगनेंसी संभव है?

क्या Azoospermia में टेस्टिकल से स्पर्म निकाला जा सकता है?

क्या Azoospermia में IVF की जरूरत पड़ती है?

क्या Azoospermia हमेशा स्थायी होती है?

क्या हार्मोनल इलाज से स्पर्म बनना शुरू हो सकता है?

क्या Azoospermia में ICSI से प्रेगनेंसी हो सकती है?

Azoospermia के इलाज के लिए किस डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
© 2026 Indira IVF Hospital Limited. All Rights Reserved. T&C Apply | Privacy Policy| *Disclaimer