आज के समय में जब सी-सेक्शन (C-section) बहुत आम हो गया है,लेकिन नॉर्मल डिलीवरी से सिर्फ़ बच्चे की डिलीवरी के लिए ही नहीं होती बल्कि यह माँ की रिकवरी और बच्चे की शुरुआती इम्यूनिटी के लिए एक नेचुरल वरदान की तरह होती है। यहाँ यह समझना बहुत ज़रूरी है कि नॉर्मल डिलीवरी केवल 'किस्मत' से नहीं होती, अगर आप अनुशासन, उचित एक्सरसाइज़ और सही जानकारी के अनुसार अपनी प्रेगनेंसी के नौ महीने निकालती हैं तो आपकी नॉर्मल डिलीवरी के चांस बढ़ सकते हैं। अक्सर अस्पतालों और क्लिनिक में देखा जाता है कि महिलाएं लेबर रूम में पहुँचते ही घबरा जाती हैं, जिससे शरीर में तनाव बढ़ता है और अंत में सिजेरियन की नौबत आ जाती है। normal delivery ke liye kya kare जिससे आप अपने पेल्विक फ्लोर को लचीला और अपने मन को शांत बना कर अपनी संतान को बिना ऑपरेशन के इस दुनिया में ला सकें, यह जानकारी इस आर्टिकल में मिलेगी।
नॉर्मल डिलीवरी केवल डिलीवरी नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदर होने वाला एक जटिल और खूबसूरत बायोलॉजिकल प्रोसेस है। जैसे-जैसे प्रेगनेंसी आखिरी हफ्तों में पहुँचती है, शरीर में रिलैक्सिन (Relaxin) नाम का हॉर्मोन बढ़ता है, जो आपके कूल्हों के जोड़ों को ढीला करता है ताकि बच्चा आसानी से बाहर निकल सके। बच्चेदानी का मुंह यानी सर्विक्स (Cervix) खुलने के लिए ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) हॉर्मोन का सही स्तर होना सबसे ज़रूरी है। इसे लव हॉर्मोन भी कहा जाता है क्योंकि यह प्यार और सुकून की स्थिति में बढ़ता है। इसके विपरीत, अगर माँ डरी हुई है, तो शरीर एड्रेनालिन (Adrenaline) बनाता है जो ऑक्सीटोसिन के असर को रोक देता है, जिससे लेबर पेन धीमा पड़ जाता है या रुक जाता है। इसीलिए, नॉर्मल डिलीवरी के लिए शारीरिक तैयारी के साथ-साथ मानसिक शांति भी उतनी ही जरुरी है।
जब मरीज हमसे पूछते हैं कि normal delivery ke liye kya kare, तो हमारा सबसे पहला सुझाव होता है कि एक्टिव रहें। प्रेगनेंसी का मतलब बिस्तर पर पड़े रहना नहीं है,अगर कोई कॉम्प्लिकेशन न हो।
नॉर्मल डिलीवरी में कई बार योनि मतलब वैजाइना (vagina) के पास छोटा सा चीरा लगाना पड़ता है जिसे एपिसियोटॉमी कहते हैं। इस चीरे से बचने के लिए 34वें हफ्ते के बाद पेरिनीअल मसाज की सलाह दी जाती है। यह वैजाइना के प्रवेश द्वार की मांसपेशियों को हल्का सा स्ट्रेच करने की प्रक्रिया है। इससे वहां के टिश्यू लचीले हो जाते हैं, जिससे बच्चे का सिर बाहर निकलते समय त्वचा फटने का डर कम हो जाता है। यह उन महिलाओं के लिए बहुत असरदार है जो अपनी पहली डिलीवरी को लेकर घबरा रही हैं।
प्रेगनेंसी के सातवें महीने के बाद आपका वजन और आपकी एनर्जी दोनों ही महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
लेबर पेन के दौरान महिलाएं सबसे बड़ी गलती सांस रोक लेना होती है। दर्द आने पर महिलाएं डर के मारे सांस खींच लेती हैं और उसे रोके रखती हैं। सांस रोकने से बच्चे तक ऑक्सीजन कम पहुँचती है और आपकी मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं, जिससे दर्द और बढ़ जाता है।
इस स्थिति से बचने के लैमेज़ तकनीक होती है जिसमें रिदमिक ब्रीदिंग (rhythmic breathing) सिखाई जाती है। इसमें नाक से गहरी सांस लेनी होती है और मुंह से धीरे-धीरे साँस छोड़नी होती है। यह ट्रेनिंग आपके दिमाग को शांत रखने में मदद करती है और नर्वस सिस्टम को बताती है कि सब कुछ ठीक है, जिससे नेचुरल पेनकिलर (Endorphins) शरीर में रिलीज होते हैं।
नॉर्मल डिलीवरी के लिए बच्चे का सिर नीचे होना बहुत जरुरी है। इसके लिए प्रेगनेंसी के आखिरी हफ्तों में सीधे लेटने (Reclining) के बजाय 'फॉरवर्ड लीनिंग' (Forward leaning) पोजीशन में बैठें। सोफे पर पीछे झुककर बैठने के बजाय 'बर्थिंग बॉल' या कुर्सी पर आगे झुककर बैठने से बच्चा अपना सिर नीचे की ओर एडजस्ट कर पाता है। इसके आलावा खूब एक्टिव रहें क्योंकि टहलने और हल्के झुकने वाले काम करने से ग्रेविटी बच्चे को सही पोजीशन में लाने में मदद करती है।
लेबर एक लंबी प्रक्रिया है जो 8 से 18 घंटे तक चल सकती है। इसे मैनेज करने के लिए ये तरीके अपनाएं।
कभी-कभी तमाम तैयारियों के बावजूद सर्जरी ही सबसे सुरक्षित रास्ता बचता है। एक जागरूक माँ को इन स्थितियों का पता होना चाहिए।
Normal delivery ke liye kya kare इस पूरे लेख का निचोड़ यही है कि आपको केवल डिलीवरी के दिन का इंतज़ार नहीं करना है, बल्कि उस दिन के लिए खुद को तैयार करना है। आपकी डाइट, आपकी एक्सरसाइज और आपकी ब्रीदिंग टेक्निक ही वे उपाय हैं जो आपकी डिलीवरी को आसान बनाएंगे।
आज के समय में जब सी-सेक्शन एक आसान विकल्प की तरह पेश किया जाता है, वहां अपनी नेचुरल एबिलिटी पर भरोसा रखना काबिले तारीफ है। लेकिन याद रखें, आपका अंतिम लक्ष्य डिलीवरी का तरीका नहीं, बल्कि एक स्वस्थ माँ और एक स्वस्थ बच्चा होना चाहिए। यदि किसी मेडिकल इमरजेंसी में सर्जरी की नौबत आए, तो उसे अपनी असफलता न मानें, बल्कि उसे मॉडर्न मेडिकल साइंस के वरदान की तरह स्वीकार करें। नौ महीनों की यह तैयारी आपके शरीर को माँ बनने के उस अद्भुत अहसास के लिए पूरी तरह तैयार कर देगी।
नहीं, अगर प्रेगनेंसी नॉर्मल है तो विशेषज्ञ की देखरेख में की गई एक्सरसाइज बच्चे तक ब्लड फ्लो बढ़ाती है और उसे हेल्दी रखती है।
हाँ, इसे VBAC (Vaginal Birth After Cesarean) कहते हैं। अगर पिछला टांका मजबूत है और पिछली प्रेगनेंसी जैसी कंडीशन नहीं है, तो नॉर्मल डिलीवरी संभव है।
हाँ, स्ट्रेस हॉर्मोन्स ऑक्सीटोसिन को दबा देते हैं, जिससे लेबर पेन समय पर शुरू नहीं हो पाता।
यह आपकी पेल्विक हड्डियों की चौड़ाई पर निर्भर करता है। कई महिलाएं 4 किलो के बच्चे को भी नॉर्मल डिलीवरी से जन्म देती हैं।
हाई बीपी (Preeclampsia) की स्थिति में डॉक्टर अक्सर रिस्क नहीं लेते, लेकिन अगर बीपी दवाओं से कंट्रोल में है और बच्चे की धड़कन सही है, तो कोशिश की जा सकती है।