NT/NB स्कैन क्या है? जानें इसकी प्रक्रिया और महत्व (NT NB Scan in Hindi)

Last updated: January 05, 2026

Overview

प्रेगनेंसी की खबर मिलना हर माता-पिता के लिए खुशी का पल होता है, लेकिन इसके साथ ही मां और बच्चे दोनों की सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी हो जाता है। प्रेगनेंसी के दौरान कुछ जरूरी जांचें होती हैं जो बच्चे के सही विकास और भविष्य में हो सकने वाले संभावित हेल्थ इशू का पता लगाने में मदद करती हैं। भारत में हर साल कई बच्चे डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) जैसी समस्याओं के साथ जन्म लेते हैं, जिन्हें सही समय पर प्रीनेटल स्क्रीनिंग (Prenatal Screening) से पहचाना जा सकता था और उनका जन्म से पहले ही गर्भ में इलाज किया जा सकता था। ऐसी ही एक जरूरी जांच NT NB Scan है। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि NT NB Scan in hindi, यह क्यों किया जाता है, इसकी प्रक्रिया क्या होती है और प्रेगनेंसी में इसका क्या महत्व है।

NT NB स्कैन क्या होता है? (What is NT NB Scan in Hindi)

NT NB Scan का पूरा नाम न्यूकल ट्रांसलूसेंसी नेजल बोन स्कैन (Nuchal Translucency Nasal Bone Scan) है। यह एक नॉन-इनवेसिव अल्ट्रासाउंड (Non-Invasive Ultrasound) टेस्ट है, जिसका इस्तेमाल भ्रूण (Fetus) में क्रोमोसोमल असामान्यताओं (Chromosomal Abnormalities) का खतरा पता लगाने के लिए किया जाता है। इस स्कैन में डॉक्टर बच्चे की गर्दन के पीछे जमे तरल पदार्थ (Fluid), जिसे न्यूकल ट्रांसलूसेंसी कहा जाता है, की मोटाई मापते हैं और नाक की हड्डी (Nasal Bone) की मौजूदगी देखते हैं।

NT NB स्कैन का उद्देश्य (Purpose of NT NB Scan)

इस स्कैन का मुख्य उद्देश्य बच्चे में डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome), एडवर्ड्स सिंड्रोम (Edwards Syndrome) और पटौ सिंड्रोम (Patau Syndrome) जैसी जेनेटिक समस्याओं के जोखिम का पता लगाना है। इसके साथ ही हड्डियों से जुड़ी समस्याओं (Skeletal Defects) और दिल की बनावट में होने वाली समस्याओं (Heart Defects) के बारे में भी जानकारी मिलती है।

क्यों किया जाता है NT NB स्कैन?

NT NB Scan प्रेगनेंसी के शुरुआती हफ्तों में किया जाने वाला एक खास अल्ट्रासाउंड टेस्ट है, जो आमतौर पर 11 से 14 हफ्ते के बीच किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चे के स्वास्थ्य और विकास के बारे में शुरुआती जानकारी हासिल करना होता है।

अगर इस जांच में तरल की मात्रा सामान्य से ज्यादा पाई जाती है या नाक की हड्डी साफ दिखाई नहीं देती, तो डाउन सिंड्रोम या अन्य जेनेटिक समस्याओं का जोखिम बढ़ा हुआ माना जा सकता है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि NT NB Scan किसी बीमारी की पक्की पुष्टि नहीं करता, बल्कि सिर्फ जोखिम के बारे में संकेत देता है। इससे माता-पिता और डॉक्टरों को समय रहते आगे की जांच और सही फैसले लेने में मदद मिलती है।

NT NB Scan पूरी तरह सुरक्षित और दर्द रहित जांच है। इससे न तो मां को कोई परेशानी होती है और न ही बच्चे को किसी तरह का नुकसान पहुंचता है।

NT NB कितना सटीक होता है और क्यों इतना इम्पोर्टेन्ट है?

NT NB Scan की सटीकता (Accuracy) करीब 70% होती है। अगर इसे प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में होने वाली दूसरी जांचों के साथ कराया जाए, जिसे फर्स्ट ट्राइमेस्टर प्रीनेटल स्क्रीनिंग (First Trimester Prenatal Screening) कहा जाता है, तब इसके नतीजे और ज्यादा भरोसेमंद हो जाते हैं। यह स्कैन 14 हफ्तों से पहले कराना जरूरी होता है क्योंकि इसके बाद बच्चे की गर्दन के पीछे की जगह यानी न्यूकल स्पेस (Nuchal Space) धीरे-धीरे कम होने लगती है।

प्रेगनेंसी में NT NB स्कैन का महत्व:

  • बच्चे में गुणसूत्र से जुड़ी समस्याओं (Chromosomal Abnormalities) के खतरे का शुरुआती अंदाजा
  • स्पाइना बिफिडा (Spina Bifida), हड्डियों की बनावट में गड़बड़ी और दिल की समस्याओं की पहचान
  • बच्चे के विकास को देखकर जन्म की संभावित तारीख का अनुमान
  • गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे होने की जानकारी
  • गर्भपात के खतरे का शुरुआती आकलन

NT NB स्कैन कैसे किया जाता है?

NT NB Scan प्रेगनेंसी के 11 से 14 हफ्ते के बीच एक सामान्य अल्ट्रासाउंड की तरह किया जाता है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर सबसे पहले आपके पेट पर अल्ट्रासाउंड जेल लगाते हैं और फिर एक छोटे उपकरण (Probe) से बच्चे की तस्वीरें लेते हैं। इस दौरान बच्चे की गर्दन के पीछे जमा तरल (NT) की मोटाई मापी जाती है और नाक की हड्डी (NB) की मौजूदगी देखी जाती है।

यह स्कैन आमतौर पर 20 से 30 मिनट में पूरा हो जाता है और यह पूरी तरह सुरक्षित और दर्द रहित होता है। अगर बच्चे की स्थिति का ठीक से पता नहीं चल पाता है, तो डॉक्टर आपको थोड़ी देर चलने या बाद में वापस आने के लिए कह सकते हैं।

ट्रांसवेजाइनल स्कैन यानी TVS अल्ट्रासाउंड (Transvaginal Scan)

कुछ मामलों में डॉक्टर योनि के माध्यम से ट्रांसवेजिनल अल्ट्रासाउंड भी करते हैं। इससे बच्चे और प्रेगनेंसी की तस्वीर और ज्यादा साफ दिखाई देती है। इस तरीके में भी NT की मोटाई और NB की उपस्थिति देखी जाती है। यह थोड़ी असुविधाजनक लग सकती है, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित और दर्द रहित होती है।

कैसे करें NT NB स्कैन के लिए तैयारी?

NT NB Scan के लिए कोई खास या मुश्किल तैयारी करने की जरूरत नहीं होती। फिर भी कुछ आसान बातों का ध्यान रखना जरूरी है, जैसे -

  • स्कैन वाले दिन ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें
  • पेट पर कोई क्रीम या लोशन न लगाएं
  • स्कैन से 1-2 घंटे पहले 2-3 गिलास पानी पी लें, इससे तस्वीरें साफ दिखती हैं
  • परिवार में किसी को जेनेटिक समस्या रही हो तो डॉक्टर को पहले बताएं
  • मानसिक रूप से शांत रहें, यह पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है

NT NB स्कैन के कौन से दूसरे ऑप्शन हैं?

NT NB Scan प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में जन्मजात समस्याओं (Congenital Abnormalities) का पता लगाने का सबसे आम और प्रभावी तरीका है। लेकिन कुछ मामलों में डॉक्टर अन्य टेस्ट भी करवा सकते हैं:

नॉन-इनवेसिव प्रीनेटल टेस्टिंग (NIPT):

इसे सेल-फ्री डीएनए टेस्ट (cfDNA) भी कहते हैं। इसमें मां के ब्लड का टेस्ट करके बच्चे में क्रोमोसोम से जुड़ी समस्याओं का पता लगाया जाता है। यह टेस्ट बहुत सटीक होता है और प्रेगनेंसी के 10वें हफ्ते से किया जा सकता है।

कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (CVS):

इस टेस्ट में प्लेसेंटा का छोटा सा नमूना लेकर जेनेटिक जांच की जाती है। यह आमतौर पर 10 से 13 हफ्ते के बीच किया जाता है और इससे क्रोमोसोमल समस्याओं की पक्की जानकारी मिल जाती है।

एमनियोसेंटेसिस (Amniocentesis):

इस टेस्ट में एमनियोटिक फ्लूड का छोटा सा नमूना लेकर जेनेटिक जांच की जाती है। यह आमतौर पर 15 से 20 हफ्ते के बीच किया जाता है और क्रोमोसोमल असामान्यताओं की निश्चित जानकारी देता है।

डॉक्टर आपकी प्रेगनेंसी और स्थिति को देखकर बताएंगे कि आपके लिए कौन सा टेस्ट सबसे सही है।

निष्कर्ष (Conclusion)

आजकल बदलती लाइफस्टाइल और अन्य कारणों से पैदा होने वाले बच्चों में जन्मजात समस्याओं (Congenital Abnormalities) में बढ़ोतरी हो रही है। इसलिए अगर आप अपनी गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में हैं, तो अपने बच्चे की सुरक्षा के लिए समय पर प्रीनेटल स्क्रीनिंग (Prenatal Screening) जरूर कराएं। NT NB Scan in Hindi में समझ कर, इस महत्वपूर्ण स्कैन को जरूर करवाएं। यह स्कैन माता-पिता को जन्म से पहले बच्चे के स्वास्थ्य और विकास के बारे में जानकारी देता है। इससे माता-पिता और डॉक्टर दोनों को प्रेगनेंसी की आगे की योजना बनाने में मदद मिलती है। अगर आप प्रेग्नेंट हैं और इस टेस्ट से जुड़ा कोई सवाल है, तो किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लें।

NT NB स्कैन के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

NT NB स्कैन में क्या देखा जाता है?

 

इस स्कैन में बच्चे की गर्दन के पीछे जमा तरल (Nuchal Translucency – NT) की मोटाई मापी जाती है और नाक की हड्डी (Nasal Bone – NB) की मौजूदगी की जांच की जाती है।

क्या NT स्कैन से बच्चे का लिंग पता चलता है?

 

नहीं, NT स्कैन बच्चे का लिंग नहीं बताता। बच्चे का लिंग आमतौर पर 18 से 20 हफ्ते (Anatomy Scan) के दौरान दिखाई देता है।

क्या NT स्कैन 100% सटीक है?

 

नहीं, NT स्कैन 100% सटीक नहीं होता। यह केवल जोखिम (Risk Assessment) बताता है और किसी भी समस्या की पुष्टि नहीं करता। आगे की जांच की जरूरत पड़ सकती है।

NT NB स्कैन कब किया जाता है?

 

यह स्कैन प्रेगनेंसी के 11वें से 14वें हफ्ते के बीच करना सबसे सही माना जाता है।

क्या NT NB स्कैन में दर्द होता है?

 

नहीं, यह स्कैन पूरी तरह दर्द रहित (Painless) है। यह अल्ट्रासाउंड के माध्यम से किया जाने वाला नॉन-इनवेसिव परीक्षण है।

NT NB स्कैन में कितना समय लगता है?

 

आमतौर पर यह स्कैन 20 से 30 मिनट में पूरा हो जाता है। लेकिन अगर बच्चा सही स्थिति में न हो, तो स्पष्ट तस्वीर लेने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।

क्या NT NB स्कैन से बच्चे को कोई नुकसान होता है?

 

नहीं, यह स्कैन पूरी तरह सुरक्षित है और न तो मां और न ही बच्चे के लिए किसी तरह का जोखिम पैदा करता है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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