ओवेरियन सिस्ट क्या है, इसके कारण, लक्षण, जोखिम और उपचार के बारे में जाने

Last updated: January 06, 2026

Overview

ओवेरियन सिस्ट तरल से भरी छोटी थैलियां होती हैं, जो अंडाशय में या उसकी सतह पर बनती हैं। ज्यादातर मामलों में ये ओव्यूलेशन से जुड़े फंक्शनल सिस्ट होते हैं, जो अक्सर अपने आप ठीक हो जाते हैं।

हालांकि कभी-कभी सिस्ट का आकार बढ़ने पर पेट या पेल्विक दर्द, भारीपन, सूजन या पीरियड्स में गड़बड़ी हो सकती है। इस लेख में हम ओवेरियन सिस्ट के आम कारणों को सरल भाषा में समझेंगे, ताकि समय पर पहचान और सही इलाज संभव हो सके।

अवलोकन

ओवेरियन सिस्ट तरल से भरी छोटी थैलियां होती हैं, जो अंडाशय में या उसकी सतह पर बनती हैं। ज्यादातर मामलों में ये ओव्यूलेशन से जुड़े फंक्शनल सिस्ट होते हैं, जो अक्सर अपने आप ठीक हो जाते हैं।

हालांकि कभी-कभी सिस्ट का आकार बढ़ने पर पेट या पेल्विक दर्द, भारीपन, सूजन या पीरियड्स में गड़बड़ी हो सकती है। इस लेख में हम ओवेरियन सिस्ट के आम कारणों को सरल भाषा में समझेंगे, ताकि समय पर पहचान और सही इलाज संभव हो सके।

ओवेरियन सिस्ट के सामान्य कारण

ओवेरियन सिस्ट महिलाओं में बहुत आम समस्या है। ज्यादातर सिस्ट नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन कभी-कभी ये बड़े होकर आसपास के अंगों में नुकसान पहुंचा सकते हैं या प्रजनन क्षमता (फर्टिलिटी) को भी प्रभावित कर सकते हैं। सिस्ट बनने के पीछे क्या कारण है, यह अक्सर तय करता है कि समस्या थोड़े समय की है या लंबे समय तक चलने वाली हो सकती है। इसलिए आइए, इन सिस्ट के बनने के आम कारणों को आसान भाषा में समझें:

1. फंक्शनल सिस्ट:

यह ओवेरियन सिस्ट बनने का सबसे आम कारण हैं। इन्हें दो प्रकार में बाँटा जाता है:

फॉलिक्युलर सिस्ट : जब ओवरी में बना थैला (जिसमें अंडा रहता है) सही समय पर नहीं फटता, तो उसके अंदर का द्रव बाहर नहीं आ पाता। धीरे-धीरे वही द्रव जमा होकर फॉलिक्युलर सिस्ट बना देता है।

कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट : कई बार यही थैला अंडा तो बाहर निकाल देता है, लेकिन उसके बाद दोबारा बंद हो जाता है और उसके अंदर खून या द्रव भर जाता है। इस बंद थैली में द्रव भरने से कॉर्पस ल्यूटियम सिस्ट बनता है।

2. हार्मोन असंतुलन:

जब शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे स्त्री हॉर्मोन सही मात्रा में नहीं बनते, तो ओवरी से अंडा निकलने की सामान्य प्रक्रिया बिगड़ जाती है। इस गड़बड़ी के कारण भी ओवरी में सिस्ट बन सकते हैं। ऐसा असंतुलन अक्सर गलत दिनचर्या, खान-पान की आदतों या किसी छुपी हुई बीमारी की वजह से हो सकता है।

3. गर्भावस्था से जुड़े सिस्ट:

गर्भावस्था की शुरुआत में कई बार कॉर्पस ल्यूटियम नाम की छोटी थैली सिस्ट के रूप में थोड़ी देर तक बनी रहती है। यह सिस्ट शुरुआती महीनों में बढ़ रहे शिशु को पोषण देने में मदद करता है और अपरा बनने तक प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन बनाता रहता है। ज्यादातर मामलों में यह सिस्ट बाद में अपने आप छोटा होकर खत्म हो जाता है।

4 . एंडोमेट्रियोसिस:

कुछ महिलाओं में गर्भाशय की अंदरूनी परत बाहर की तरफ, खासकर ओवरी पर बढ़ने लगती है। जब यह ऊतक ओवरी पर जमा हो जाता है, तो वहां दर्द देने वाले सिस्ट बनते हैं जिन्हें एंडोमेट्रिओमा या आम भाषा में “चॉकलेट सिस्ट” कहा जाता है, क्योंकि इनमें पुराना, गाढ़ा भूरा खून भरा होता है। ये सिस्ट सामान्य फंक्शनल सिस्ट से अलग होते हैं और प्रायः अपने आप नहीं जाते, इनके लिए इलाज की ज़रूरत पड़ती है।

5. श्रोणि (पेल्विक) संक्रमण:

अगर निचले पेट या प्रजनन अंगों में होने वाले संक्रमण का समय पर इलाज न हो, तो वहां पस से भरी थैली जैसी सूजन बन सकती है। यह सूजन आगे बढ़कर ओवरी तक पहुँच जाए, तो ओवरी के पास सिस्ट जैसी थैली बन जाती है, जो दर्द, बुखार और दूसरी तकलीफें पैदा कर सकती है।

आयु से जुड़े ओवेरियन सिस्ट के कारण

ओवेरियन सिस्ट के कारणों को समझते समय उम्र एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसी महिला की आयु से यह तय हो सकता है कि बना हुआ सिस्ट सामान्य मासिक धर्म चक्र का हिस्सा है या फिर उसे गंभीर चिकित्सीय देखभाल की जरूरत है। उदाहरण के लिए:

1. किशोरावस्था और युवा महिलाएं:

  • जब लड़कियों में पीरियड्स शुरू होते हैं और शरीर ओव्यूलेशन की नई प्रक्रिया के साथ तालमेल बैठा रहा होता है, उस समय फंक्शनल सिस्ट बहुत सामान्य होते हैं।
  • शुरू-शुरू के मासिक चक्रों में हॉर्मोन का उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है। इसी कारण अंडा हर बार नियमित रूप से नहीं निकल पाता और अस्थायी सिस्ट बन सकते हैं।
  • किशोरावस्था में दिमाग, पिट्यूटरी ग्रंथि और ओवरी के बीच समन्वय पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। इस वजह से कभी-कभी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) जैसी समस्या भी शुरू हो सकती है।
  • इस उम्र में अनियमित दिनचर्या, जंक फूड, नींद की कमी और तनाव भी हॉर्मोन पर असर डालते हैं, जिससे सिस्ट बनने की संभावना बढ़ सकती है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि इस उम्र में बनने वाले ज्यादातर सिस्ट कुछ समय बाद अपने आप ही खत्म हो जाते हैं और आमतौर पर किसी खास इलाज की ज़रूरत नहीं पड़ती।

2. प्रजनन आयु की महिलाएँ (जब नियमित रूप से पीरियड्स आते हैं):

  • इस उम्र की महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस की वजह से बनने वाले सिस्ट काफी आम हैं। ऐसे सिस्ट बहुत दर्द देते हैं और अक्सर इलाज की जरूरत पड़ती है।
  • जो महिलाएं बांझपन के इलाज के लिए IVF जैसी तकनीक ले रही होती हैं, उनमें भी ओवरी को उत्तेजित करने वाली मजबूत दवाओं की वजह से सिस्ट बन सकते हैं।
  • जिन महिलाओं के पीरियड्स शुरू से ही अनियमित रहते हैं, उनमें इस उम्र में भी बार–बार फंक्शनल सिस्ट बनने की समस्या देखी जा सकती है।

3.पेरिमेनोपॉज़ (मेनोंपॉज़ से पहले का समय):

  • जब महिला मेनोंपॉज़ के करीब पहुंचती है, तब हॉर्मोन में बड़ा बदलाव आता है और पीरियड्स अनियमित होने लगते हैं। इस उतार–चढ़ाव के कारण ओवरी में सिस्ट बनने की संभावना बढ़ जाती है।
  • युवा उम्र वाले हॉर्मोनल असंतुलन से अलग, इस दौर में बनने वाले सिस्ट को नज़दीकी निगरानी की ज़रूरत होती है, क्योंकि इनके साधारण (निर्दोष) न रहने की संभावना थोड़ी अधिक रहती है।

कौन-सी हेल्थ प्रॉब्लम्स से सिस्ट होने का खतरा बढ़ जाता है?

ओवेरियन सिस्ट हमेशा सामान्य कारणों से ही नहीं बनते। कई बार इनके पीछे कुछ गंभीर स्वास्थ्य स्थितियां भी हो सकती हैं, जो शरीर और प्रजनन क्षमता, दोनों के लिए ज्यादा जोखिम बढ़ा देती हैं। आइए, इन्हें आसान भाषा में समझते हैं:

एंडोमेट्रियोसिस:

यह सिस्ट बनने से जुड़ी सबसे आम मेडिकल समस्या है और इसके कारण बनने वाले सिस्ट अक्सर बहुत दर्दनाक होते हैं। एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा ऊतक ओवरी पर भी बढ़ने लगता है। मासिक धर्म के समय यह ऊतक भी हल्का-हल्का खून बहाता है, लेकिन बाहर नहीं निकल पाता। समय के साथ यह जमा होकर सिस्ट का रूप ले लेता है।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) :

इस स्थिति में ओवरी से अंडा नियमित रूप से विकसित होकर बाहर नहीं निकल पाता। अंडे न ठीक से विकसित हो पाते हैं और न ही समय पर बाहर आते हैं। इसके परिणामस्वरूप ओवरी के भीतर कई छोटी-छोटी तरल से भरी थैलियां बन जाती हैं, जिन्हें सिस्ट कहा जाता है।

थायरॉयड और चयापचय संबंधी विकार :

थायरॉयड ग्रंथि शरीर में कई हॉर्मोन नियंत्रित करती है, जिनमें स्त्री हॉर्मोन भी शामिल हैं। यदि थायरॉयड कमजोर हो (कम काम कर रहा हो) या चयापचय गड़बड़ हो, तो हॉर्मोन का संतुलन बिगड़ जाता है। यही असंतुलन ओवरी के सामान्य काम पर असर डालकर सिस्ट बनने की स्थिति पैदा कर सकता है।

पेल्विक इंफ्लेमेटरी रोग (PID) :

श्रोणि एरिया (पेल्विक एरिया) में होने वाला संक्रमण यदि लंबे समय तक अनदेखा रह जाए, तो यह गर्भाशय और ओवरी की बनावट व अंदरूनी संरचना को नुकसान पहुंचा सकता है। ओवरी कमजोर हो जाती है, उसका सामान्य कामकाज बदल जाता है और कभी-कभी पस या द्रव से भरी थैलियां बन जाती हैं, जो आगे चलकर सिस्ट के रूप में दिखाई देती हैं।

ओवेरियन सिस्ट का जोखिम बढ़ाने वाले कारण

ओवरी में सिस्ट पहली माहवारी से लेकर रजोनिवृत्ति से पहले तक किसी भी उम्र में बन सकते हैं। हालांकि, कुछ कारण ऐसे होते हैं जो इनके बनने का जोखिम बढ़ा देते हैं। इनमें से कुछ मुख्य कारण हैं:

जल्दी माहवारी शुरू होना और अनियमित मासिक चक्र : जिन लड़कियों को बहुत कम उम्र में ही माहवारी शुरू हो जाती है, उनमें आगे चलकर सिस्ट बनने की संभावना थोड़ी अधिक रहती है। इसी तरह, जिन महिलाओं के पीरियड्स हमेशा अनियमित रहते हैं, उनमें भी बार-बार अनियमित अंडोत्सर्ग होने के कारण सिस्ट बनने की आशंका बढ़ जाती है।

मोटापा और इंसुलिन से जुड़ी समस्या : अधिक वजन, पेट के आस-पास चर्बी जमा होना और शरीर में इंसुलिन का सही ढंग से काम न करना, हॉर्मोन का संतुलन बिगाड़ देते हैं। यह गड़बड़ी ओवरी पर सीधा असर डाल सकती है और सिस्ट बनने की स्थितियां पैदा कर सकती है।

बांझपन का इलाज (फर्टिलिटी उपचार) : जब किसी महिला को गर्भधारण में कठिनाई होती है और उसे अंडाशय को उत्तेजित करने वाली दवाएं दी जाती हैं, तो एक साथ कई फॉलिकल बनने लगते हैं। अगर इस प्रक्रिया की बारीकी से निगरानी न हो, तो कुछ फॉलिकल आगे चलकर सिस्ट का रूप ले सकते हैं।

परिवार में ओवेरियन सिस्ट या ऐसी बीमारी का इतिहास : अगर घर की दूसरी महिलाओं (जैसे माँ, बहन, मौसी आदि) को ओवरी से जुड़ी समस्याएं, जैसे PCOD या गर्भाशय की परत का ओवरी पर बढ़ना, रही हों, तो अगली पीढ़ी की महिलाओं में भी सिस्ट बनने की संभावना बढ़ जाती है।

ध्यान रखने वाली बात यह है कि ये कारण पूरी तरह टाले नहीं जा सकते, लेकिन इनके बारे में जागरूक रहकर, नियमित जांच कराकर और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टर से मिलकर, जटिलताओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।

ओवरी में बने सिस्ट की चिंता कब करें?

ज्यादातर सिस्ट सामान्य होते हैं और किसी उपचार की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अगर नीचे बताए गए लक्षणों में से कोई भी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है:

चेतावनी संकेत क्यों ध्यान देना जरूरी है
जांच के बाद भी सिस्ट का बना रहना या लगातार बड़ा होना ज्यादातर साधारण सिस्ट अपने आप गायब हो जाते हैं। अगर सिस्ट समय के साथ घटने की बजाय बढ़ता जाए, तो इसके पीछे कोई छुपी हुई स्त्री-रोग समस्या या दूसरी बीमारी हो सकती है, जिसके लिए तुरंत आगे की जांच जरूरी है।
अचानक तेज पेट / पेल्विक दर्द, बुखार, उल्टी, चक्कर आना ऐसे लक्षण सिस्ट फटने या डिंबाशय में मरोड़ आने का संकेत हो सकते हैं। इसमें ओवरी तक खून की आपूर्ति रुक सकती है। यह आपातकालीन स्थिति मानी जाती है, जिसमें तुरंत अस्पताल जाना जरूरी है, नहीं तो गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं।
अनियमित या बहुत अधिक मासिक रक्तस्राव बार-बार अनियमित पीरियड्स, बहुत ज्यादा या लंबे समय तक खून आना हॉर्मोनल गड़बड़ी या किसी और स्त्री-रोग (जैसे एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड आदि) का संकेत हो सकता है। समय पर इलाज से आगे होने वाली समस्याओं को रोका जा सकता है।
सिस्ट की वजह से रोजमर्रा के कामों में बाधा आना

अगर दर्द, भारीपन या असहजता इतनी बढ़ जाए कि चलना-फिरना, ऑफिस जाना, घर के काम या नींद प्रभावित होने लगे, तो यह सिर्फ साधारण सिस्ट नहीं बल्कि इलाज मांगने वाली स्थिति हो सकती है। ऐसे में लक्षणों को नजरअंदाज न करके डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

निष्कर्ष

ओवरी में सिस्ट कई कारणों से बन सकते हैं। कई बार ये सामान्य ओव्यूलेशन का हिस्सा होते हैं और अपने आप ठीक हो जाते हैं, खासकर कम उम्र की लड़कियों और युवा महिलाओं में। लेकिन अगर दर्द, भारीपन, अनियमित ब्लीडिंग या दूसरी परेशानी बनी रहे, तो डॉक्टर से सलाह ज़रूरी है। उम्र के साथ सिस्ट के कारण और लक्षणों को समझना अहम हो जाता है, ताकि सही समय पर जांच या इलाज किया जा सके और बेवजह चिंता से बचा जा सके।

Common Questions Asked

ओवरी में सिस्ट बनने के आम कारण क्या हैं?

 

सामान्य अंडोत्सर्ग से बनने वाले फंक्शनल सिस्ट, हार्मोन असंतुलन, एंडोमेट्रियोसिस, पीसीओएस, थायरॉयड गड़बड़ी और श्रोणि संक्रमण इसके आम कारण हैं।

कम उम्र की लड़कियों में ओवरी सिस्ट क्यों बनते हैं?

 

किशोरावस्था में हॉर्मोन का उतार–चढ़ाव, नए शुरू हुए मासिक चक्र, अनियमित पीरियड्स और कभी-कभी पीसीओएस की शुरुआत की वजह से सिस्ट बन सकते हैं।

क्या तनाव और जीवनशैली की आदतें भी सिस्ट का कारण बन सकती हैं?

 

सीधा कारण तो नहीं, लेकिन लगातार तनाव, बहुत कम नींद, जंक फूड और शारीरिक गतिविधि की कमी हार्मोन असंतुलन बढ़ाकर सिस्ट की संभावना बढ़ा सकते हैं।

क्या ओवरी के सिस्ट बिना ऑपरेशन के भी संभाले जा सकते हैं?

 

हाँ, छोटे और साधारण सिस्ट अक्सर सिर्फ निगरानी, दवाओं और जीवनशैली सुधार से ही ठीक हो जाते हैं। ऑपरेशन की ज़रूरत सिर्फ चुनिंदा मामलों में पड़ती है।

क्या ओवरी सिस्ट से पैर में दर्द हो सकता है?

 

अगर सिस्ट बड़ा हो और आसपास की नसों या अंगों पर दबाव डाले, तो कमर, जांघ या पैर की तरफ दर्द महसूस हो सकता है। ऐसे में जांच जरूरी है।

क्या हर ओवरी सिस्ट का इलाज करवाना ज़रूरी है?

 

नहीं, हर सिस्ट के लिए इलाज जरूरी नहीं होता। जिन सिस्ट से कोई लक्षण नहीं हैं और जो छोटे हैं, उन्हें केवल नियमित अल्ट्रासाउंड से देखा जा सकता है। तकलीफ़ देने वाले या संदिग्ध सिस्ट का इलाज किया जाता है।

क्या नींद का पैटर्न भी ओवरी सिस्ट पर असर डाल सकता है?

 

सीधे तौर पर नहीं, लेकिन बहुत खराब या बहुत कम नींद हॉर्मोन संतुलन बिगाड़ सकती है, जिससे मासिक चक्र और ओवरी के कार्य पर असर पड़ सकता है।

ओवरी सिस्ट कब कैंसर की चिंता का कारण बनते हैं?

 

रजोनिवृत्ति के आसपास या उसके बाद अगर कोई सिस्ट बने, लगातार बढ़ता जाए, ठोस लगे या अल्ट्रासाउंड में संदिग्ध दिखे, या परिवार में कैंसर का इतिहास हो, तो इसकी खास जांच कराना जरूरी हो जाता है। ऐसी स्थिति में देर किए बिना स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

**Disclaimer: The information provided here serves as a general guide and does not constitute medical advice. We strongly advise consulting a certified fertility expert for professional assessment and personalized treatment recommendations.
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